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झारखंड में जल संसाधन प्रबंधन: नीति, चुनौतियाँ और संस्थागत ढांचा

झारखंड के जल संसाधनों का परिचय

पूर्वी भारत में स्थित झारखंड की भौगोलिक संरचना मुख्य रूप से पहाड़ी है, जहाँ औसत वार्षिक वर्षा लगभग 1,300 मिमी है, जिसमें से 75% मानसून के दौरान गिरती है (India Meteorological Department, 2023)। राज्य में 40 प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाएँ हैं, जिनकी संयुक्त सिंचाई क्षमता लगभग 1.2 मिलियन हेक्टेयर है (Jharkhand Water Resources Department, 2023)। कृषि क्षेत्र में लगभग 70% जनसंख्या रोजगार करती है, लेकिन सिंचाई का विस्तार केवल 18% नेट बोई गई भूमि तक सीमित है (Census 2011, Jharkhand Statistical Handbook 2023)। पिछले दशक में भूजल स्तर औसतन 1.5 मीटर गिर चुका है, जो अत्यधिक दोहन और अपर्याप्त पुनर्भरण का संकेत है (CGWB Report, 2022)। ये सभी तथ्य झारखंड की विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी जल संसाधन प्रबंधन की अनिवार्यता को दर्शाते हैं।

JPSC परीक्षा से संबंधित

  • पेपर: सामान्य अध्ययन पेपर 1 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी), पेपर 2 (शासन और नीति)
  • उप-विषय: जल संसाधन प्रबंधन, आदिवासी आजीविका, झारखंड में पर्यावरणीय चुनौतियाँ
  • पिछले प्रश्न: नदी प्रदूषण नियंत्रण (JPSC 2019), जल संरक्षण योजनाएँ (JPSC 2021)

झारखंड में जल से संबंधित कानूनी और संवैधानिक ढांचा

झारखंड में जल प्रबंधन एक बहु-स्तरीय कानूनी ढांचे के तहत संचालित होता है। संविधान के Article 48A के तहत राज्य को पर्यावरण संरक्षण, जिसमें जल स्रोत भी शामिल हैं, की जिम्मेदारी दी गई है। Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974 (Sections 3-5) झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को जल प्रदूषण को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। Jharkhand Water Resources Regulatory Authority Act, 2017 के तहत झारखंड राज्य जल संसाधन नियामक प्राधिकरण (JSWRRA) की स्थापना हुई है, जो जल आवंटन और उपयोग की देखरेख करता है। Environment Protection Act, 1986 (Sections 3-6) राज्य को पर्यावरणीय सुरक्षा लागू करने का अधिकार देता है। राष्ट्रीय स्तर पर National Water Policy 2012 राज्य नीतियों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिसमें समेकित जल संसाधन प्रबंधन पर जोर है। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों जैसे M.C. Mehta v. Union of India (1987) ने झारखंड में जल प्रदूषण नियंत्रण के कड़े नियम स्थापित किए हैं।

  • Article 48A: पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्देशात्मक सिद्धांत
  • Water Act 1974: प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण और मानक
  • Jharkhand Water Resources Regulatory Authority Act 2017: राज्य स्तर पर जल नियमन
  • Environment Protection Act 1986: पर्यावरण सुरक्षा लागू करना
  • National Water Policy 2012: समेकित जल संसाधन प्रबंधन का ढांचा
  • Supreme Court rulings: जल प्रदूषण नियंत्रण में न्यायिक सक्रियता

झारखंड में जल प्रबंधन के आर्थिक पहलू

झारखंड ने 2023-24 के बजट में जल संसाधन विकास के लिए ₹1,200 करोड़ आवंटित किए हैं, जिनमें सिंचाई और पेयजल परियोजनाएँ शामिल हैं (Jharkhand Budget 2023-24)। कृषि, जो सबसे बड़ा जल उपभोक्ता है, मुख्यतः वर्षा-निर्भर है और सिंचाई कवरेज केवल 18% है, जिससे उत्पादन क्षमता सीमित होती है। राज्य का लक्ष्य जल जीवन मिशन के तहत 2030 तक सिंचाई कवरेज को 30% तक बढ़ाना है। जल-गहन उद्योग राज्य के औद्योगिक GDP का लगभग 15% योगदान देते हैं, जिससे जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता है (Jharkhand Economic Survey 2023)। 2015 से 2022 के बीच भूजल दोहन में 12% की वृद्धि हुई है, जो क्षरण के खतरे को बढ़ाता है (CGWB Report 2022)। ये आर्थिक तथ्य कृषि मांग, औद्योगिक विकास और सतत जल उपयोग के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

  • जल परियोजनाओं के लिए ₹1,200 करोड़ का बजट आवंटन (2023-24)
  • 70% जनसंख्या कृषि पर निर्भर
  • 18% सिंचाई कवरेज; 2030 तक 30% का लक्ष्य (जल जीवन मिशन)
  • जल-गहन क्षेत्रों से 15% औद्योगिक GDP
  • भूजल दोहन में 12% वृद्धि (2015-2022)

जल शासन के लिए संस्थागत व्यवस्था

झारखंड में जल शासन कई संस्थाओं के माध्यम से होता है, जिनके अलग-अलग कार्य क्षेत्र हैं। झारखंड राज्य जल संसाधन नियामक प्राधिकरण (JSWRRA) जल उपयोग और आवंटन को नियंत्रित करता है। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) जल गुणवत्ता की निगरानी करता है और प्रदूषण नियंत्रण लागू करता है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) भूजल संसाधनों का आकलन करता है और तकनीकी सहायता प्रदान करता है। झारखंड ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता विभाग (JRWSSD) ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं को लागू करता है। झारखंड राज्य जैव विविधता बोर्ड (JSBB) जलाशयों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक जलीय जैव विविधता के संरक्षण पर केंद्रित है। केंद्रीय स्तर पर, जल शक्ति मंत्रालय (MoJS) जल संसाधन प्रबंधन और नीति समन्वय का नोडल मंत्रालय है।

  • JSWRRA: जल आवंटन और नियामक प्राधिकरण
  • JSPCB: जल गुणवत्ता निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण
  • CGWB: भूजल आकलन और प्रबंधन
  • JRWSSD: ग्रामीण पेयजल आपूर्ति कार्यान्वयन
  • JSBB: जलीय जैव विविधता संरक्षण
  • MoJS: केंद्रीय जल संसाधन नोडल मंत्रालय

पारिस्थितिक और पर्यावरणीय चुनौतियाँ

झारखंड का 29.6% वन क्षेत्र (Forest Survey of India, 2021) जलाशय संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन वनों की कटाई और खनन गतिविधियों ने कई जलग्रहण क्षेत्रों को प्रभावित किया है। सुबर्णरेखा और दामोदर नदियाँ जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) और भारी धातुओं के संदूषण मानकों से ऊपर प्रदूषित हैं, जो जलीय जीवन और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं (JSPCB Annual Report, 2023)। भूजल का क्षरण और अनियमित मानसून वर्षा पैटर्न सूखे और जल संकट की संवेदनशीलता बढ़ाते हैं। सतही और भूजल डेटा विभिन्न एजेंसियों में बिखरे होने के कारण समेकित जल डेटा प्रबंधन प्रणाली का अभाव प्रभावी योजना में बाधक है।

  • वन क्षेत्र: 29.6% भूभाग, जलग्रहण संरक्षण में सहायक
  • सुबर्णरेखा और दामोदर नदियों में उच्च प्रदूषण (BOD, भारी धातु)
  • पिछले दशक में भूजल स्तर 1.5 मीटर गिरा
  • वन कटाई और खनन से जलग्रहण हाइड्रोलॉजी प्रभावित
  • समेकित जल डेटा प्रबंधन प्रणाली का अभाव

तुलनात्मक अध्ययन: झारखंड बनाम इज़राइल का जल प्रबंधन

पहलू झारखंड इज़राइल
भूगोल और जलवायु पहाड़ी क्षेत्र, 1300 मिमी वर्षा, मानसून पर निर्भर शुष्क, कम वर्षा, रेगिस्तानी स्थिति
सिंचाई कवरेज नेट बोई गई भूमि का 18% (2030 तक 30% लक्ष्य) विस्तृत ड्रिप सिंचाई, लगभग 100% कवरेज
जल पुन: उपयोग न्यूनतम अपशिष्ट जल पुन: उपयोग लगभग 80% अपशिष्ट जल कृषि में पुन: उपयोग
प्रौद्योगिकी सीमित उन्नत सिंचाई तकनीक अपनाना उन्नत ड्रिप सिंचाई, जल शोधन, पुनर्चक्रण
डेटा प्रबंधन टुकड़ों में, कोई समेकित प्रणाली नहीं केंद्रीकृत, वास्तविक समय जल डेटा निगरानी
संस्थागत व्यवस्था अनेक एजेंसियाँ, भूमिकाओं में ओवरलैप एकीकृत जल प्राधिकरण, स्पष्ट जिम्मेदारियाँ

झारखंड इज़राइल की विकेंद्रीकृत जल पुन: उपयोग और ड्रिप सिंचाई तकनीकों से सीख लेकर सीमित जल संसाधनों का बेहतर उपयोग और सिंचाई दक्षता बढ़ा सकता है।

नीतिगत खामियाँ और चुनौतियाँ

कई योजनाओं के बावजूद झारखंड में सतही और भूजल डेटा को समेकित करने वाली कोई एकीकृत जल डेटा प्रबंधन प्रणाली नहीं है, जिससे योजना बनाना और संसाधन आवंटन प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता। JSWRRA, JSPCB और CGWB के बीच समन्वय भी अपर्याप्त है। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) के तहत भूजल नियमन राज्य कानूनों से ओवरलैप करता है, जिससे भ्रम पैदा होता है। सिंचाई अवसंरचना सीमित और खराब रखरखाव के कारण कृषि के लिए जल उपलब्धता बाधित है। खनन और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण लागू करने में भी कमज़ोरी है, जिससे नदियों का प्रदूषण बढ़ रहा है।

  • कोई समेकित जल डेटा प्रबंधन प्रणाली नहीं
  • JSWRRA, JSPCB, CGWB के बीच समन्वय की कमी
  • CGWA और राज्य भूजल कानूनों के बीच ओवरलैप/भ्रम
  • कम सिंचाई अवसंरचना और रखरखाव की समस्याएँ
  • खनन/औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण की कमजोर कार्यवाही

झारखंड के जल संसाधन प्रबंधन के लिए सुझाव

  • सतही और भूजल डेटा को एकीकृत करने वाला वास्तविक समय पर आधारित जल डेटा प्रबंधन प्लेटफॉर्म विकसित करें, जिससे साक्ष्य-आधारित योजना संभव हो।
  • संस्थागत समन्वय को मजबूत करने के लिए औपचारिक अंतर-एजेंसी तंत्र बनाएं और CGWA व राज्य प्राधिकरणों के बीच भूमिगत जल नियमन की भूमिकाएँ स्पष्ट करें।
  • सिंचाई अवसंरचना का विस्तार करें, विशेषकर ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी जल-कुशल तकनीकों को अपनाकर, इज़राइल के मॉडल से प्रेरणा लें।
  • खनन और औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित नदियों में प्रदूषण नियंत्रण को सख्ती से लागू करें, JSPCB की निगरानी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करें।
  • जलग्रहण संरक्षण के लिए वन क्षेत्र का संरक्षण और विस्तार करें, जिससे भूजल पुनर्भरण बढ़े और मृदा अपरदन कम हो।
  • शहरी और उपशहरी क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार और पुन: उपयोग प्रणालियाँ स्थापित करें, जिससे जल उपलब्धता बढ़े।

झारखंड के जल संसाधन प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. झारखंड Water Resources Regulatory Authority Act, 2017 के तहत JSWRRA की स्थापना जल आवंटन को नियंत्रित करने के लिए हुई है।
  2. झारखंड में भूजल नियमन केवल केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) के अधिकार क्षेत्र में है।
  3. National Water Policy 2012 में समेकित जल संसाधन प्रबंधन पर जोर दिया गया है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि JSWRRA की स्थापना जल आवंटन नियमन के लिए हुई है। कथन 2 गलत है क्योंकि भूजल नियमन CGWA और राज्य प्राधिकरणों के बीच साझा है। कथन 3 सही है क्योंकि National Water Policy 2012 समेकित जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देती है।

झारखंड में जल प्रदूषण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. सुबर्णरेखा और दामोदर नदियों में BOD और भारी धातुओं के संदूषण स्तर अनुमत सीमा से अधिक हैं।
  2. झारखंड का वन क्षेत्र जलग्रहण प्रबंधन पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं डालता।
  3. झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) जल गुणवत्ता की निगरानी करता है और प्रदूषण नियंत्रण लागू करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि इन नदियों में प्रदूषण स्तर सीमा से ऊपर है। कथन 2 गलत है क्योंकि झारखंड का 29.6% वन क्षेत्र जलग्रहण प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। कथन 3 सही है क्योंकि JSPCB जल गुणवत्ता की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।

मुख्य प्रश्न

झारखंड में जल संसाधन प्रबंधन की प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करें और राज्य में जल सुरक्षा सुधार के लिए उपाय सुझाएं। अपने उत्तर में संस्थागत, पारिस्थितिक और आर्थिक कारकों का संदर्भ दें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से संबंधित

  • JPSC पेपर: सामान्य अध्ययन पेपर 1 (पर्यावरण), पेपर 2 (शासन और नीति)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: राज्य विशेष जल संसाधन डेटा, संस्थागत ढांचा और पारिस्थितिक चुनौतियाँ
  • मुख्य बिंदु: जल प्रबंधन को आदिवासी आजीविका, जलग्रहण पर वन क्षेत्र के प्रभाव, और संस्थागत समन्वय की खामियों से जोड़कर उत्तर तैयार करें
झारखंड राज्य जल संसाधन नियामक प्राधिकरण की भूमिका क्या है?

झारखंड Water Resources Regulatory Authority Act, 2017 के तहत स्थापित JSWRRA राज्य में जल उपयोग और आवंटन को नियंत्रित करता है ताकि न्यायसंगत और सतत जल प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।

झारखंड का वन क्षेत्र जल संसाधनों को कैसे प्रभावित करता है?

झारखंड का 29.6% वन क्षेत्र जलग्रहण संरक्षण में मदद करता है, भूजल पुनर्भरण बढ़ाता है, मृदा अपरदन कम करता है और नदियों के प्रवाह को बनाए रखता है।

झारखंड में जल प्रदूषण के मुख्य स्रोत क्या हैं?

औद्योगिक अपशिष्ट, खनन से निकलने वाला जल और बिना उपचारित सीवेज मुख्य रूप से सुबर्णरेखा और दामोदर जैसी नदियों में प्रदूषण का कारण हैं।

झारखंड के लिए National Water Policy 2012 का क्या महत्व है?

यह नीति समेकित जल संसाधन प्रबंधन का ढांचा प्रदान करती है, जिसे झारखंड अपनाकर जल आवंटन, संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के मुद्दे सुलझाता है।

झारखंड में भूजल प्रबंधन क्यों चुनौतीपूर्ण है?

CGWA और राज्य प्राधिकरणों के बीच अधिकार क्षेत्र के ओवरलैप, बढ़ता हुआ दोहन और व्यापक डेटा अभाव भूजल प्रबंधन को जटिल बनाते हैं।