Announcements
UPSC Foundation 2026 Prime Batch - Admissions Open JPSC 14th CCE Complete Course 2025 - Enroll Now Mains Practice Questions Programme - Limited Seats Daily Current Affairs - Free Access UPSC Prelims Test Series 2026 - 5000+ MCQs
+91 91025 57680
learnpro Civil Services
LearnPro Menu

JPSC Notes · Exam Notes

झारखंड के शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन: कानूनी ढांचा, संस्थागत चुनौतियां और आर्थिक पहलू

झारखंड के शहरी इलाकों में प्रतिदिन लगभग 1,200 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, लेकिन केवल 35% कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान हो पाता है। Solid Waste Management Rules 2016 जैसे कानूनी नियमों और JSPCB व ULBs की संस्थागत व्यवस्था के बावजूद, कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण और जनभागीदारी में कई बाधाएं हैं। दक्षिण कोरिया के अनुभव से पता चलता है कि झारखंड में वॉल्यूम आधारित शुल्क जैसे आर्थिक प्रोत्साहनों का अभाव है।
1 min read General Studies
JPSC Notes
Exam Notes
General Studies

Prelims facts, Mains analysis and current-affairs linkage

In brief

झारखंड के शहरी इलाकों में प्रतिदिन लगभग 1,200 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, लेकिन केवल 35% कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान हो पाता है। Solid Waste Management Rules 2016 जैसे कानूनी नियमों और JSPCB व ULBs की संस्थागत व्यवस्था के बावजूद, कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण और जनभागीदारी में कई बाधाएं हैं। दक्षिण कोरिया के अनुभव से पता चलता है कि झारखंड में वॉल्यूम आधारित शुल्क जैसे आर्थिक प्रोत्साहनों का अभाव है।

परिचय: झारखंड के शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन की स्थिति

झारखंड के शहरी क्षेत्र प्रतिदिन लगभग 1,200 मीट्रिक टन नगरपालिका ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं (झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, JSPCB, 2023)। 2011 में 22.3% से बढ़कर 2023 तक अनुमानित 27% तक पहुंच चुकी शहरी आबादी (Census 2011, झारखंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी के आंकड़े) कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर दबाव बढ़ा रही है। Solid Waste Management Rules, 2016 और Jharkhand Municipal Act, 2011 जैसे कानूनी नियम मौजूद होने के बावजूद, बुनियादी ढांचे की कमी, कमजोर प्रवर्तन और कम जनभागीदारी की वजह से कचरा प्रबंधन अभी भी अधूरा है। यह लेख झारखंड के शहरी कचरा प्रबंधन के कानूनी, संस्थागत और आर्थिक पहलुओं की समीक्षा करता है।

JPSC Exam से संबंधित

  • GS Paper III: पर्यावरण और पारिस्थितिकी – झारखंड में शहरी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की चुनौतियां।
  • Solid Waste Management Rules, 2016 और Jharkhand Municipal Act, 2011 जैसे कानूनी ढांचे।
  • राज्य-विशेष कार्यान्वयन समस्याएं और स्वच्छ भारत मिशन (अर्बन) जैसे कार्यक्रमों की भूमिका।

कचरा प्रबंधन के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

झारखंड के शहरी कचरा प्रबंधन का मुख्य आधार Solid Waste Management Rules, 2016 (MoEFCC) हैं, जो स्रोत पर कचरे के पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन और वैज्ञानिक निपटान को अनिवार्य करते हैं। Environment Protection Act, 1986 (धारा 3) के तहत झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (JSPCB) को पर्यावरण मानकों के प्रवर्तन का अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा, Municipal Solid Waste (Management and Handling) Rules, 2000 और Plastic Waste Management Rules, 2016 विशेष रूप से शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) पर लागू होते हैं।

  • संविधान का अनुच्छेद 243W नगरपालिकाओं को कचरा प्रबंधन लागू करने का अधिकार देता है।
  • अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का निर्देश देता है।
  • झारखंड म्युनिसिपल एक्ट, 2011 (धारा 115) ULBs को स्वच्छता और कचरा निपटान सुनिश्चित करने का दायित्व देता है।
  • सुप्रीम कोर्ट के Municipal Corporation of Delhi vs. Union of India (2000) के निर्देश में वैज्ञानिक कचरा निपटान को संवैधानिक जिम्मेदारी बताया गया है।

फिर भी, सीमित क्षमता और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण प्रवर्तन कमजोर है।

संस्थागत संरचना और जिम्मेदारियां

झारखंड में शहरी कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी कई संस्थाओं में बंटी है, जिससे कार्यों में दुपहिया और समन्वय की चुनौतियां सामने आती हैं।

  • झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (JSPCB): पर्यावरण मानकों का प्रवर्तन, प्रदूषण निगरानी और दिशा-निर्देश जारी करना।
  • शहरी स्थानीय निकाय (ULBs): कचरे का संग्रहण, पृथक्करण और निपटान की मुख्य जिम्मेदारी।
  • झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (JUIDCO): वित्तीय सहायता और परियोजना कार्यान्वयन, जैसे मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRFs) का संचालन।
  • सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB): राष्ट्रीय स्तर पर नीति मार्गदर्शन और डेटा संकलन।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC): राष्ट्रीय नीति और नियम बनाना।
  • स्वच्छ भारत मिशन (अर्बन): ULBs को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने वाला केंद्रीय कार्यक्रम।

इस ढांचे के बावजूद, ULBs की सीमित संस्थागत क्षमता और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा डालती है।

आर्थिक पहलू और वित्त पोषण

झारखंड ने 2023-24 के राज्य बजट में शहरी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के लिए लगभग ₹150 करोड़ आवंटित किए हैं। शहरी कचरा प्रबंधन का बाजार वार्षिक आधार पर ₹300 करोड़ से अधिक का आंका गया है, जो 3.6% की शहरी आबादी वृद्धि दर से 8% की वार्षिक वृद्धि दर पर है (Census 2011)। स्वच्छ भारत मिशन (अर्बन) ने 2023 तक झारखंड के ULBs को ₹75 करोड़ की मंजूरी दी है, जो बुनियादी ढांचे और जागरूकता अभियानों का समर्थन करता है।

  • अनौपचारिक क्षेत्र पुनर्चक्रण गतिविधियों के माध्यम से सालाना लगभग ₹50 करोड़ का योगदान देता है, लेकिन इसे औपचारिक रूप से मान्यता या समावेश नहीं मिला है।
  • वित्तीय अंतराल और धनराशि की देरी से नगरपालिका स्तर पर परियोजनाओं की प्रगति रुक जाती है।
  • उपयोगकर्ता शुल्क या वॉल्यूम आधारित शुल्क जैसे आर्थिक प्रोत्साहनों का अभाव कचरा कम करने और पृथक्करण के लिए प्रेरणा को कम करता है।

वर्तमान कचरा प्रबंधन की स्थिति और आंकड़े

झारखंड के शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न कचरे का केवल लगभग 35% वैज्ञानिक तरीके से निपटान होता है (झारखंड स्टेट अर्बन डेवलपमेंट रिपोर्ट 2022)। लगभग 45% कचरा खुले में फेंकने की प्रवृत्ति में जाता है, जो पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है (JSPCB 2023)। राज्य में 24 सक्रिय मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRFs) हैं, जो केवल 40% ULBs को कवर करती हैं (JUIDCO वार्षिक रिपोर्ट 2023)।

  • प्लास्टिक कचरा कुल शहरी कचरे का 12% है, जिसमें से केवल 20% ही पुनर्चक्रित होता है (Plastic Waste Management Report Jharkhand 2023)।
  • स्रोत पर कचरे का पृथक्करण नगण्य है क्योंकि इसे लागू करने के लिए कड़े नियम और जनजागरूकता का अभाव है।
  • कचरा संग्रह की दक्षता शहरों के बीच भिन्न है, बड़े शहरों का प्रदर्शन छोटे कस्बों से बेहतर है।

तुलनात्मक दृष्टिकोण: झारखंड बनाम दक्षिण कोरिया

मापदंडझारखंड (2023)दक्षिण कोरिया (2020)
प्रति व्यक्ति कचरा उत्पादनलगभग 0.4 किग्रा/दिन (अनुमानित)लगभग 1.3 किग्रा/दिन
पुनर्चक्रण दर35%60%
कचरा कम करने की रणनीतिवॉल्यूम आधारित शुल्क प्रणाली नहीं1995 से वॉल्यूम आधारित कचरा शुल्क (VBWF) प्रणाली
खुला कचरा फेंकना45% कचरा खुले मेंलगभग समाप्त
प्रवर्तन तंत्रकमज़ोर प्रवर्तन, कम जुर्मानासख्त प्रवर्तन और आर्थिक प्रोत्साहन

दक्षिण कोरिया की VBWF प्रणाली में घर और व्यवसायों से कचरे के वॉल्यूम के आधार पर शुल्क लिया जाता है, जिससे पृथक्करण और कचरा कम करने को बढ़ावा मिलता है। झारखंड में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होने से पुनर्चक्रण कम और खुले में फेंकने की प्रवृत्ति अधिक है।

झारखंड के शहरी कचरा प्रबंधन में प्रमुख कमियां

  • स्रोत पर कचरे के पृथक्करण का अभाव: नियम होने के बावजूद कोई सख्त निगरानी या बाध्यकारी व्यवस्था नहीं, जिससे कचरा मिश्रित रहता है और पुनर्चक्रण कम होता है।
  • क्षमता निर्माण की कमी: ULBs के पास प्रशिक्षित कर्मी और तकनीकी संसाधन नहीं हैं जो वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के लिए जरूरी हैं।
  • जनभागीदारी सीमित: जागरूकता अभियानों की कमी से नागरिकों के व्यवहार में बदलाव नहीं आ रहा।
  • अनौपचारिक क्षेत्र का बहिष्कार: अनौपचारिक पुनर्चक्रण कार्यकर्ता बिना पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा के कार्यरत हैं।
  • बुनियादी ढांचे की कमी: MRFs और कम्पोस्टिंग इकाइयां शहरी क्षेत्रों के आधे से कम हिस्से को कवर करती हैं।

आगे का रास्ता: झारखंड के लिए लक्षित उपाय

  • स्रोत पर कचरे के पृथक्करण के लिए कानूनी बाध्यकारी आदेश लागू करें, जिसमें जुर्माना और प्रोत्साहन दोनों हों।
  • ULB अधिकारियों के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम बढ़ाएं, जिसमें तकनीकी प्रशिक्षण और डिजिटल निगरानी उपकरण शामिल हों।
  • अनौपचारिक पुनर्चक्रणकर्ताओं को पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से औपचारिक प्रणाली में शामिल करें।
  • कचरा कम करने के लिए वॉल्यूम आधारित शुल्क जैसे आर्थिक उपकरण अपनाएं।
  • वैज्ञानिक निपटान के लिए कम्पोस्टिंग और पुनर्चक्रण सुविधाओं का विस्तार करें।
  • JSPCB, ULBs और JUIDCO के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करें ताकि एकीकृत कार्रवाई हो सके।

झारखंड के शहरी कचरा प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. झारखंड म्युनिसिपल एक्ट, 2011 शहरी स्थानीय निकायों को स्वच्छता और कचरा निपटान सुनिश्चित करने का दायित्व देता है।
  2. Plastic Waste Management Rules, 2016 झारखंड के शहरी स्थानीय निकायों पर लागू नहीं होते।
  3. झारखंड के शहरी क्षेत्रों में लगभग आधे कचरे का निपटान खुले में किया जाता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि झारखंड म्युनिसिपल एक्ट, 2011 की धारा 115 के अनुसार ULBs को स्वच्छता और कचरा निपटान सुनिश्चित करना होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि Plastic Waste Management Rules, 2016 झारखंड के शहरी निकायों पर लागू होते हैं। कथन 3 JSPCB 2023 के आंकड़ों के अनुसार सही है।

वॉल्यूम आधारित कचरा शुल्क (VBWF) प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह प्रणाली घरों से उत्पन्न कचरे के वॉल्यूम के आधार पर शुल्क लेती है।
  2. दक्षिण कोरिया ने 1995 से राष्ट्रीय स्तर पर VBWF लागू किया है।
  3. झारखंड वर्तमान में अपने सभी शहरी निकायों में VBWF प्रणाली चलाता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि झारखंड में VBWF प्रणाली लागू नहीं है।

मुख्य प्रश्न

झारखंड के शहरी कचरा प्रबंधन में मुख्य चुनौतियों पर चर्चा करें और वैज्ञानिक निपटान तथा जनभागीदारी बढ़ाने के लिए नीतिगत सुझाव प्रस्तुत करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से संबंधित

  • JPSC पेपर: GS Paper III – पर्यावरण और पारिस्थितिकी; शहरी विकास और स्वच्छता।
  • झारखंड का दृष्टिकोण: कचरा उत्पादन के राज्य-विशेष आंकड़े, JSPCB और ULBs की संस्थागत भूमिका, बजट आवंटन।
  • मेन प्वाइंट: उत्तर में कानूनी ढांचे (Solid Waste Management Rules 2016, Jharkhand Municipal Act 2011), संस्थागत कमियां, आर्थिक सीमाएं और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से तुलना शामिल करें।
झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (JSPCB) की शहरी कचरा प्रबंधन में क्या भूमिका है?

JSPCB पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण मानकों का प्रवर्तन करता है, प्रदूषण स्तरों की निगरानी करता है, कचरा निपटान के लिए दिशा-निर्देश जारी करता है और Solid Waste Management Rules के अनुपालन की देखरेख करता है।

झारखंड के शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन कितना कचरा उत्पन्न होता है?

JSPCB 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन लगभग 1,200 मीट्रिक टन नगरपालिका ठोस कचरा उत्पन्न होता है।

झारखंड में शहरी कचरे का कितना हिस्सा वैज्ञानिक तरीके से निपटान या पुनर्चक्रण होता है?

झारखंड में शहरी कचरे का केवल लगभग 35% हिस्सा वैज्ञानिक तरीके से निपटान या पुनर्चक्रण होता है, बाकी कचरे का अधिकतर खुला डंपिंग या लैंडफिलिंग होता है (झारखंड स्टेट अर्बन डेवलपमेंट रिपोर्ट 2022)।

झारखंड में कचरा प्रबंधन के लिए मुख्य कानूनी प्रावधान कौन-कौन से हैं?

मुख्य प्रावधानों में Solid Waste Management Rules, 2016, Environment Protection Act, 1986, Municipal Solid Waste Management Rules, 2000 और Jharkhand Municipal Act, 2011 की धारा 115 शामिल हैं, जो शहरी निकायों को कचरे के पृथक्करण, संग्रहण और वैज्ञानिक निपटान का दायित्व देते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के Municipal Corporation of Delhi vs. Union of India (2000) फैसले का क्या महत्व है?

इस फैसले ने शहरी निकायों के लिए वैज्ञानिक कचरा निपटान और स्वच्छता को संवैधानिक जिम्मेदारी बताया, और पर्यावरण कानूनों के कड़ाई से प्रवर्तन को मजबूती दी, जो झारखंड जैसे राज्यों के लिए भी लागू है।

Sources and further reading

Academic supportNeed guidance for this examination?

Speak to LearnPro about the relevant course, notes, test series or answer-writing programme.

Ask LearnPro
Related preparation

More on JPSC Notes

View all JPSC Notes →
Continue preparation

Read, revise and practise this subject

LearnPro Editorial Team

LearnPro prepares civil-services notes in simple language with syllabus relevance, factual review and links to primary references where available. Academic direction is provided by Rajan Kumar, Director, LearnPro Civil Services. For changing examination dates and vacancies, the official commission notification always prevails.