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Governance · Exam Notes

सिक्किम का ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती मॉडल: नीति, आर्थिक पहलू और विस्तार की संभावना

सिक्किम 2016 में भारत का पहला पूर्णत: ऑर्गेनिक राज्य बना, जहां 75,000 हेक्टेयर भूमि पर ऑर्गेनिक खेती की जा रही है। राष्ट्रीय ऑर्गेनिक उत्पादन कार्यक्रम के तहत नियंत्रित और Article 371F के समर्थन से सिक्किम का मॉडल भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों से मेल खाता है, लेकिन प्रमाणन और बाजार संरचना में चुनौतियों का सामना कर रहा है। न्यूजीलैंड से तुलना से एकीकृत प्रमाणन और मजबूत निर्यात प्रोत्साहनों की जरूरत उजागर होती है।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

सिक्किम 2016 में भारत का पहला पूर्णत: ऑर्गेनिक राज्य बना, जहां 75,000 हेक्टेयर भूमि पर ऑर्गेनिक खेती की जा रही है। राष्ट्रीय ऑर्गेनिक उत्पादन कार्यक्रम के तहत नियंत्रित और Article 371F के समर्थन से सिक्किम का मॉडल भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों से मेल खाता है, लेकिन प्रमाणन और बाजार संरचना में चुनौतियों का सामना कर रहा है। न्यूजीलैंड से तुलना से एकीकृत प्रमाणन और मजबूत निर्यात प्रोत्साहनों की जरूरत उजागर होती है।

परिचय: सिक्किम में ऑर्गेनिक खेती की दिशा में बदलाव

2016 में सिक्किम भारत का पहला ऐसा राज्य बना जिसने अपनी 75,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती के लिए समर्पित कर दिया (Government of Sikkim, 2023)। यह बदलाव राष्ट्रीय नीति ऑन ऑर्गेनिक फार्मिंग (NPOF) 2009 के तहत भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है और ग्रामीण आजीविका को भी मजबूत करता है। सिक्किम में ऑर्गेनिक खेती को संविधान के Article 371F के तहत विशेष प्रावधानों का समर्थन प्राप्त है, जिससे एक अनूठी शासन व्यवस्था संभव हुई है जो स्थायी कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देती है। राज्य का मॉडल प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को अपनाता है, जिससे रासायनिक इनपुट कम होते हैं और जैव विविधता की रक्षा होती है।

UPSC से संबंधित

  • GS पेपर 3: कृषि (ऑर्गेनिक एवं प्राकृतिक खेती, योजनाएं जैसे PKVY, ZBNF), पर्यावरण (स्थायी कृषि, जैव विविधता)
  • GS पेपर 1: भारतीय राजनीति (Article 371F, सिक्किम के लिए विशेष प्रावधान)
  • निबंध: स्थायी विकास, ग्रामीण आजीविका और पर्यावरण संरक्षण

परिभाषाएं और नियामक ढांचा

ऑर्गेनिक खेती में रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और GMO का उपयोग नहीं होता, बल्कि फसल चक्र, जैव उर्वरक, खाद और हरी खाद का सहारा लिया जाता है। इसे National Programme for Organic Production (NPOP) के तहत नियंत्रित किया जाता है, जो Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 के अंतर्गत प्रमाणन मानक तय करता है। प्राकृतिक खेती पूरी तरह से रासायनिक मुक्त और बाहरी इनपुट रहित होती है, जिसमें देशी गाय आधारित उत्पादों और खेत के संसाधनों का उपयोग होता है, जैसा कि Zero Budget Natural Farming (ZBNF) योजना में दिखाया गया है।

  • ऑर्गेनिक खेती में बाहरी जैविक इनपुट की अनुमति होती है, जबकि प्राकृतिक खेती में बाहरी इनपुट लगभग नहीं होते।
  • NPOP के तहत प्रमाणन बाजार पहुंच और निर्यात की संभावनाएं बढ़ाता है।
  • Essential Commodities Act, 1955 और Fertilizer Control Order, 1985 अप्रत्यक्ष रूप से रासायनिक इनपुट के उपयोग को नियंत्रित करते हैं।

भारत में ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती के आर्थिक पहलू

2023 में भारत का ऑर्गेनिक खेती बाजार 1.2 बिलियन डॉलर का था, जो 20% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है (IBEF 2024)। ऑर्गेनिक खेती की भूमि 2010 में 1.5 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 2023 में 3.5 मिलियन हेक्टेयर हो गई है (NPOP वार्षिक रिपोर्ट 2023)। सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) को 2023-24 में 1,400 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। ZBNF योजना का लक्ष्य 2025 तक 5 मिलियन किसानों को जोड़ना है, जिसके लिए 5,000 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है (संघीय बजट 2023-24)। ऑर्गेनिक निर्यात 2023 में 300 मिलियन डॉलर तक पहुंचा, जो 15% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है (APEDA 2023)।

  • सिक्किम में 75,000 हेक्टेयर ऑर्गेनिक कृषि है, जो ग्रामीण आजीविका और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देता है।
  • बाजार वृद्धि सीमित है क्योंकि प्रमाणन बिखरा हुआ है और ठंडी श्रृंखला की कमी है।
  • CACP न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सलाह देता है, जो ऑर्गेनिक फसलों के लाभप्रदता को प्रभावित करता है।

ऑर्गेनिक खेती को समर्थन देने वाले संस्थान

भारत में ऑर्गेनिक खेती के इकोसिस्टम को मुख्य संस्थान आकार देते हैं:

  • APEDA: NPOP के तहत ऑर्गेनिक प्रमाणन और निर्यात को बढ़ावा देता है।
  • MoA&FW: PKVY और ZBNF जैसी योजनाओं को लागू करता है।
  • ICAR: ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती की तकनीकों पर शोध करता है।
  • सिक्किम ऑर्गेनिक मिशन: राज्य स्तर पर ऑर्गेनिक प्रमाणन और किसानों का समर्थन करता है।
  • CACP: सरकार को मूल्य नीति पर सलाह देता है जो ऑर्गेनिक उत्पादों को प्रभावित करती है।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम न्यूजीलैंड ऑर्गेनिक खेती

मापदंडभारतन्यूजीलैंड
ऑर्गेनिक खेती की भूमि3.5 मिलियन हेक्टेयर (2023)कुल कृषि भूमि का 17% प्रमाणित ऑर्गेनिक
निर्यात राजस्व300 मिलियन डॉलर (2023)1 बिलियन डॉलर से अधिक वार्षिक
कानूनी ढांचाNational Programme for Organic Production (NPOP), बिखरा हुआ प्रमाणनOrganic Products Bill 2023, एकीकृत प्रमाणन
सरकारी समर्थनPKVY, ZBNF, कुल 6,400 करोड़ रुपए बजट (2023-25)मजबूत निर्यात प्रोत्साहन, संस्थागत समर्थन
बाजार चुनौतियांबिखरा हुआ प्रमाणन, कमजोर ठंडी श्रृंखला, सीमित बाजार संपर्कमजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं, प्रीमियम मूल्य प्राप्ति

भारत में ऑर्गेनिक खेती की नीतिगत और बाजार संबंधी खामियां

नीति समर्थन के बावजूद भारत की ऑर्गेनिक खेती कई चुनौतियों से जूझ रही है। एकीकृत राष्ट्रीय प्रमाणन प्रणाली का अभाव, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो, छोटे किसानों की बाजार पहुंच को सीमित करता है। बिखरे हुए प्रमाणन से लेनदेन की लागत बढ़ती है और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का भरोसा कम होता है। ठंडी श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स की कमी प्रीमियम मूल्य निर्धारण को रोकती है, जिससे किसानों की आमदनी प्रभावित होती है। बाजार संपर्क कमजोर होने से विस्तार और निर्यात की संभावनाएं सीमित हैं।

  • NPOP और राज्य स्तरीय निकायों के बीच प्रमाणन में बिखराव भ्रम पैदा करता है।
  • ठंडी श्रृंखला की कमी से उपज के बाद नुकसान होता है।
  • वैश्विक ऑर्गेनिक बाजारों तक सीमित पहुंच निर्यात वृद्धि को रोकती है।
  • MSP नीतियां ऑर्गेनिक फसलों को पर्याप्त समर्थन नहीं देतीं, जिससे किसानों की प्रेरणा कम होती है।

महत्व और आगे का रास्ता

सिक्किम का ऑर्गेनिक खेती मॉडल पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ कृषि का उदाहरण पेश करता है, जो जैव विविधता और ग्रामीण आजीविका दोनों का समर्थन करता है। इस मॉडल को देश भर में दोहराने और बढ़ाने के लिए भारत को एकीकृत, वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रमाणन प्रणाली विकसित करनी होगी। ठंडी श्रृंखला और बाजार संपर्क मजबूत करने से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और निर्यात बढ़ेगा। ऑर्गेनिक फसलों के लिए MSP का विस्तार और छोटे किसानों के लिए लक्षित क्षमता विकास से अपनाने और आर्थिक स्थिरता में सुधार होगा।

  • एक राष्ट्रीय एकीकृत ऑर्गेनिक प्रमाणन प्रणाली विकसित करें जो अंतरराष्ट्रीय मानकों से मेल खाती हो।
  • फसल कटाई के बाद नुकसान कम करने के लिए ठंडी भंडारण और लॉजिस्टिक्स में निवेश करें।
  • ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए MSP और मूल्य समर्थन तंत्र बढ़ाएं।
  • ICAR और राज्य मिशनों के माध्यम से शोध एवं विस्तार सेवाओं को प्रोत्साहित करें।
  • सिक्किम के इको-टूरिज्म लिंक का उपयोग करते हुए समग्र ग्रामीण विकास मॉडल बनाएं।

प्रश्न अभ्यास

ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. प्राकृतिक खेती में खाद और जैव उर्वरक जैसे बाहरी जैविक इनपुट की अनुमति होती है।
  2. ऑर्गेनिक खेती National Programme for Organic Production (NPOP) के तहत नियंत्रित होती है।
  3. Zero Budget Natural Farming (ZBNF) देशी गाय आधारित, रासायनिक मुक्त खेती को बढ़ावा देता है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि प्राकृतिक खेती में बाहरी इनपुट न्यूनतम या नहीं के बराबर होते हैं, और यह खेत के संसाधनों पर निर्भर करता है। कथन 2 सही है क्योंकि ऑर्गेनिक खेती NPOP के तहत नियंत्रित होती है। कथन 3 सही है क्योंकि ZBNF देशी गाय आधारित रासायनिक मुक्त खेती को बढ़ावा देता है।

सिक्किम की ऑर्गेनिक खेती के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. सिक्किम 2016 में भारत का पहला पूर्णत: ऑर्गेनिक राज्य बना।
  2. Article 371F ने सिक्किम की ऑर्गेनिक खेती पहलों का समर्थन किया।
  3. सिक्किम की ऑर्गेनिक खेती 100,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर फैली है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है; सिक्किम 2016 में पूरी तरह से ऑर्गेनिक बना। कथन 2 सही है; Article 371F ने विशेष शासन व्यवस्था के जरिए सहायता दी। कथन 3 गलत है; सिक्किम की ऑर्गेनिक खेती लगभग 75,000 हेक्टेयर भूमि पर है।

मुख्य प्रश्न

सिक्किम के पूर्णत: ऑर्गेनिक खेती में बदलाव से भारत में स्थायी कृषि के विस्तार के लिए क्या सबक मिलते हैं? इसके आर्थिक संभावनाओं को पूरा करने के लिए किन नीतिगत और बाजार संबंधी चुनौतियों का समाधान जरूरी है? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से संबंधित

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – कृषि और पर्यावरण (ऑर्गेनिक खेती, स्थायी कृषि प्रथाएं)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में जनजातीय और ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है; ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती से आजीविका बेहतर हो सकती है और वन जैव विविधता की रक्षा हो सकती है।
  • मुख्य बिंदु: PKVY और ZBNF जैसी योजनाओं, राज्य के कृषि-पर्यावरणीय हालात, और संस्थागत समर्थन को शामिल करते हुए उत्तर तैयार करें।
ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती में क्या अंतर है?

ऑर्गेनिक खेती में रासायनिक इनपुट प्रतिबंधित होते हैं और प्रमाणित जैविक इनपुट जैसे खाद और जैव उर्वरक का उपयोग होता है, जो NPOP के तहत नियंत्रित है। प्राकृतिक खेती में बाहरी इनपुट लगभग नहीं होते, और यह देशी गाय आधारित तैयारियों व खेत के संसाधनों पर निर्भर होती है, जैसा कि Zero Budget Natural Farming में दिखाया गया है।

सिक्किम के ऑर्गेनिक खेती मॉडल को कौन सा संवैधानिक प्रावधान समर्थन देता है?

Article 371F भारतीय संविधान का वह प्रावधान है जो सिक्किम को विशेष शासन व्यवस्था देता है, जिससे राज्य को पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती की ओर बढ़ने में मदद मिली।

भारत में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने वाली कौन-कौन सी सरकारी योजनाएं हैं?

मुख्य योजनाओं में परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) शामिल है जो ऑर्गेनिक क्लस्टर बनाती है, और Zero Budget Natural Farming (ZBNF) जो रासायनिक मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देती है।

भारत में ऑर्गेनिक खेती के विस्तार में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

प्रमाणन प्रणाली का बिखराव, ठंडी श्रृंखला की कमी, कमजोर बाजार संपर्क, और ऑर्गेनिक फसलों के लिए MSP का सीमित कवरेज मुख्य बाधाएं हैं, जो किसानों की आय और निर्यात क्षमता को प्रभावित करती हैं।

भारत की ऑर्गेनिक खेती की तुलना न्यूजीलैंड से कैसे होती है?

न्यूजीलैंड की कुल कृषि भूमि का 17% ऑर्गेनिक प्रमाणित है और उसका निर्यात राजस्व 1 बिलियन डॉलर से अधिक है, जो Organic Products Bill 2023 के तहत एकीकृत प्रमाणन और मजबूत निर्यात प्रोत्साहन के कारण संभव हुआ है। भारत में ऑर्गेनिक खेती की भूमि अधिक है लेकिन प्रमाणन बिखरा हुआ है और निर्यात राजस्व लगभग 300 मिलियन डॉलर है, जो संस्थागत और बाजार संबंधी कमियों को दर्शाता है।

Sources and further reading

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