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Governance · Exam Notes

सनंद सेमीकंडक्टर हब: सिलिकॉन वैली और वैश्विक सप्लाई चेन से भारत का रणनीतिक जुड़ाव

सनंद में 2024 में शुरू हुई Kaynes Semicon सुविधा ने भारत को India Semiconductor Mission के तहत सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम पर पहुंचाया है। यह भारत को घरेलू निर्माण और सिलिकॉन वैली की नवाचार शक्ति के बीच एक अहम कड़ी बनाता है, हालांकि वेफर फैब्रिकेशन क्षमता और सप्लाई चेन ढांचे में अभी भी चुनौतियां मौजूद हैं।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

सनंद में 2024 में शुरू हुई Kaynes Semicon सुविधा ने भारत को India Semiconductor Mission के तहत सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम पर पहुंचाया है। यह भारत को घरेलू निर्माण और सिलिकॉन वैली की नवाचार शक्ति के बीच एक अहम कड़ी बनाता है, हालांकि वेफर फैब्रिकेशन क्षमता और सप्लाई चेन ढांचे में अभी भी चुनौतियां मौजूद हैं।

सनंद सेमीकंडक्टर असेंबली सुविधा: परिचय और रणनीतिक महत्व

अप्रैल 2024 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सनंद में Kaynes Semicon सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा का उद्घाटन किया। ₹3,300 करोड़ की इस परियोजना को India Semiconductor Mission (ISM) के तहत विकसित किया गया है, जिसका लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्र बनाना है। सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक अहम कड़ी के रूप में, सनंद भारत के घरेलू उत्पादन को सिलिकॉन वैली की नवाचार क्षमता और अमेरिका जैसे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है।

यह सुविधा मुख्य रूप से इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल्स का उत्पादन करती है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, औद्योगिक ऑटोमेशन और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए जरूरी हैं। इससे भारत की भूमिका डिजाइन-केंद्रित सेमीकंडक्टर उद्योग से आगे बढ़कर असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग तक विस्तारित हो रही है, जो वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में देश की भागीदारी को मजबूत करता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (औद्योगिक विकास, तकनीक और नवाचार), विज्ञान और प्रौद्योगिकी (सेमीकंडक्टर नीति)
  • GS पेपर 2: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप (India Semiconductor Mission, PLI योजना)
  • निबंध: तकनीक और आर्थिक आत्मनिर्भरता, भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका

India Semiconductor Mission (ISM): नीति और संस्थागत ढांचा

2021 में Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) के तहत शुरू किया गया ISM, भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने की मुख्य पहल है। यह National Policy on Electronics 2019 के तहत काम करता है और Income Tax Act, 1961 की Section 35AD के तहत वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है। ISM के तहत $10 बिलियन (~₹76,000 करोड़) का बजट Production Linked Incentive (PLI) योजना के माध्यम से सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब, असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग (ATMP) और डिजाइन लिंक्ड प्रोत्साहनों के लिए रखा गया है।

ISM का संस्थागत ढांचा इस प्रकार है:

  • Department of Electronics and Information Technology (DeitY): MeitY के तहत प्रशासनिक नियंत्रण।
  • Kaynes Technology India Pvt Ltd: सनंद की असेंबली और टेस्टिंग सुविधा का निजी क्षेत्र संचालक।
  • Semiconductor Laboratory (SCL), Chandigarh: सरकारी अनुसंधान एवं विकास और निर्माण इकाई।
  • वैश्विक सहयोग: सिलिकॉन वैली की कंपनियों के साथ डिजाइन और नवाचार में साझेदारी।

भारत का सेमीकंडक्टर बाजार: आकार, संरचना और विकास

2024 में भारत के सेमीकंडक्टर बाजार का मूल्य लगभग ₹4.5 लाख करोड़ (~$50–55 बिलियन) था, जो उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, AI, IoT और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग से प्रेरित है। अनुमान है कि 2030 तक यह बाजार लगभग दोगुना होकर ₹9 लाख करोड़ (~$100+ बिलियन) तक पहुंच जाएगा, जो घरेलू खपत और निर्यात संभावनाओं को दर्शाता है (India Semiconductor Mission, MeitY)।

प्रमुख तथ्य:

  • भारत का वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में हिस्सा लगभग 3% है, जो मुख्यतः डिजाइन सेवाओं में है।
  • भारत में विश्व के लगभग 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर हैं (NASSCOM रिपोर्ट 2023)।
  • ISM के तहत गुजरात, असम और कर्नाटक में ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक निवेश पाइपलाइन में है।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम ताइवान सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

पहलूभारतताइवान
बाजार हिस्सेदारीलगभग 3%, डिजाइन-केंद्रितवैश्विक फाउंड्री बाजार में 50% से अधिक
निर्माण क्षमताअसेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग; सीमित वेफर फैबडिजाइन से लेकर निर्माण तक एकीकृत फैब्रिकेशन (TSMC)
सरकारी समर्थन₹76,000 करोड़ PLI, ISM प्रोत्साहनदीर्घकालीन औद्योगिक नीति, अवसंरचना, R&D समर्थन
वैश्विक एकीकरणसिलिकॉन वैली और वैश्विक बाजारों से उभरता जुड़ावस्थापित वैश्विक सप्लाई चेन प्रभुत्व

जहां ताइवान का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, खासकर TSMC, एकीकृत डिजाइन और निर्माण के साथ वैश्विक नेतृत्व करता है, वहीं भारत असेंबली, टेस्टिंग और डिजाइन में क्षमता बढ़ा रहा है। ISM और PLI योजनाएं बड़ी वेफर फैब्रिकेशन और इकोसिस्टम विकास को प्रोत्साहित कर इस अंतर को कम करने का प्रयास कर रही हैं।

भारत के सेमीकंडक्टर निर्माण इकोसिस्टम में अहम चुनौतियां

भारत में बड़े पैमाने पर वेफर फैब्रिकेशन प्लांट्स नहीं हैं, जो पूंजी-गहन होते हैं और उन्नत सप्लाई चेन अवसंरचना की जरूरत होती है। यह कमी भारत को सेमीकंडक्टर उत्पादन के पूरे चक्र में प्रतिस्पर्धा करने से रोकती है। अन्य चुनौतियां हैं:

  • विशेषीकृत कच्चे माल और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं की कमी।
  • उन्नत नोड तकनीकों के लिए सीमित R&D ढांचा।
  • डिजाइन इंजीनियरों के अलावा फैब संचालन के लिए कुशल कर्मियों की जरूरत।
  • महत्वपूर्ण घटकों के लिए आयात निर्भरता से सप्लाई चेन कमजोरियां।

संवैधानिक और कानूनी आधार सेमीकंडक्टर विकास के लिए

ISM MeitY और DeitY के अंतर्गत काम करता है और National Policy on Electronics 2019 के तहत संचालित है, जो संविधान के Article 39(b) और (c) के तहत सामाजिक और आर्थिक न्याय तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। Semiconductor Fab Policy 2021 के जरिए Income Tax Act, 1961 की Section 35AD के तहत टैक्स छुट और पूंजीगत व्यय लाभ प्रदान किए जाते हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

  • सनंद की Kaynes सुविधा भारत की डिजाइन-केवल भूमिका से असेंबली और टेस्टिंग तक के विस्तार का उदाहरण है, जो निर्यात क्षमता और वैश्विक एकीकरण को बढ़ाता है।
  • वेफर फैब्रिकेशन क्षमता बढ़ाना आयात निर्भरता कम करने और तकनीकी स्वराज्य हासिल करने के लिए जरूरी है।
  • R&D और सप्लाई चेन अवसंरचना मजबूत करने से ISM के प्रोत्साहन प्रभावी होंगे और वैश्विक निवेश आकर्षित होंगे।
  • डिजाइन इंजीनियरों के अलावा फैब ऑपरेटर और सामग्री वैज्ञानिकों जैसे कुशल मानव संसाधन का विकास आवश्यक है।
  • भारत की सॉफ्टवेयर और डिजाइन प्रतिभा का निर्माण के साथ संयोजन कर सिलिकॉन वैली की नवाचार शक्ति को घरेलू उत्पादन से जोड़कर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाई जा सकती है।

India Semiconductor Mission (ISM) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. ISM को 2021 में Ministry of Electronics and Information Technology के तहत शुरू किया गया था।
  2. यह Income Tax Act, 1961 की Section 35AD के तहत वित्तीय प्रोत्साहन देता है।
  3. ISM का मुख्य फोकस सेमीकंडक्टर डिजाइन सेवाओं पर है, निर्माण पर नहीं।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि ISM को MeitY के तहत 2021 में शुरू किया गया था। कथन 2 भी सही है क्योंकि Semiconductor Fab Policy के तहत Section 35AD के प्रोत्साहन दिए जाते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि ISM का फोकस डिजाइन के साथ-साथ पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और निर्माण पर भी है।

भारत के सेमीकंडक्टर बाजार के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. भारत विश्व के लगभग 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों का घर है।
  2. भारत के पास वैश्विक सेमीकंडक्टर फाउंड्री बाजार का 50% से अधिक हिस्सा है।
  3. 2030 तक भारत का सेमीकंडक्टर बाजार आकार में दोगुना होने का अनुमान है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है (NASSCOM 2023 के अनुसार)। कथन 2 गलत है क्योंकि भारत का वैश्विक बाजार हिस्सा लगभग 3% है, 50% नहीं। कथन 3 सही है, ISM के अनुमान के अनुसार।

मेन प्रश्न

गुजरात के सनंद में India Semiconductor Mission के तहत स्थापित सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करें। यह विकास भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में कैसे स्थापित करता है और भारत को एक वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्र बनने के लिए किन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना होगा?

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (आर्थिक विकास और औद्योगिक नीति), पेपर 3 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी)
  • झारखंड परिप्रेक्ष्य: झारखंड के उभरते इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्लस्टर ISM प्रोत्साहनों का लाभ उठाकर सेमीकंडक्टर निवेश आकर्षित कर सकते हैं।
  • मेन प्वाइंटर: झारखंड की क्षमता को राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर नीतियों के साथ जोड़ने पर जोर, कौशल विकास और अवसंरचना के माध्यम से असेंबली और टेस्टिंग इकाइयां आकर्षित करना।
India Semiconductor Mission (ISM) क्या है?

ISM MeitY के तहत 2021 में शुरू की गई एक सरकारी पहल है, जो भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग सहित संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करती है। यह $10 बिलियन के प्रोत्साहन पैकेज के साथ निवेश आकर्षित करता है और निर्माण क्षमता बढ़ाता है।

सनंद को सिलिकॉन वैली से क्यों ‘ब्रिज’ कहा जाता है?

सनंद की Kaynes Semicon सुविधा भारत के निर्माण कौशल को सिलिकॉन वैली के डिजाइन और नवाचार केंद्रों से जोड़ती है, जिससे चिप्स का वैश्विक बाजारों, खासकर अमेरिका, को सप्लाई संभव होता है और घरेलू उत्पादन को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व से जोड़ती है।

भारत के सेमीकंडक्टर निर्माण में प्रमुख चुनौतियां क्या हैं?

भारत में बड़े पैमाने पर वेफर फैब्रिकेशन प्लांट्स की कमी, उन्नत सप्लाई चेन अवसंरचना और पर्याप्त R&D क्षमता न होना मुख्य चुनौतियां हैं। इन्हें विकसित करना वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी है।

PLI योजना सेमीकंडक्टर निर्माण को कैसे समर्थन देती है?

Production Linked Incentive (PLI) योजना के तहत ₹76,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं जो सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब, असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग यूनिट्स को उत्पादन के आधार पर वित्तीय प्रोत्साहन देती है, जिससे निवेशकों का पूंजी जोखिम कम होता है।

भारत का वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में वर्तमान हिस्सा क्या है?

भारत का वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में हिस्सा लगभग 3% है, जो मुख्य रूप से डिजाइन सेवाओं में है, जबकि निर्माण क्षेत्र में हिस्सेदारी सीमित है लेकिन ISM पहलों के तहत बढ़ रही है।

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