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SCO सम्मेलन में राजनाथ सिंह का आतंकवाद विरोधी एकरूपता का आह्वान: क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

SCO सम्मेलन 2024 में राजनाथ सिंह का बयान

जून 2024 में, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए आतंकवाद विरोधी नीतियों में शून्य सहिष्णुता और द्वैध मानकों से मुक्ति की अनिवार्यता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि असंगत रवैया क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग को कमजोर करता है। SCO के आठ सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस और मध्य एशियाई देश शामिल हैं, जो 3 अरब से अधिक लोगों और विश्व GDP के 20% हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए इस संगठन की एकजुट नीति यूरेशिया में स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – SCO में भारत की भूमिका, आतंकवाद विरोधी सहयोग
  • GS पेपर 3: सुरक्षा – आतंकवाद विरोधी कानून और नीतियां, आतंकवाद का आर्थिक प्रभाव
  • निबंध: दक्षिण और मध्य एशिया में आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा

आतंकवाद विरोधी अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1373 (2001) सदस्य देशों को आतंकी वित्तपोषण को अपराध घोषित करने, सूचना साझा करने को बढ़ावा देने और आतंकवादी गतिविधियों को दबाने का निर्देश देता है। यह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी सहयोग की रीढ़ है। भारत के घरेलू कानून, विशेषकर अवैध गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) की धाराएं 15 और 16, आतंकवादी कृत्यों और संगठनों को परिभाषित करती हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को केंद्रीय जांच एजेंसी के रूप में स्थापित किया है, जो आतंकवाद से संबंधित मामलों की जांच करती है। साथ ही, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति को सशस्त्र विद्रोह या आतंकवाद की स्थिति में आंतरिक आपातकाल घोषित करने का अधिकार प्राप्त है।

  • UNSC प्रस्ताव 1373 (2001): सदस्य देशों को आतंकवादी वित्तपोषण रोकने और सहयोग बढ़ाने का निर्देश।
  • UAPA धाराएं 15 एवं 16: आतंकवादी कृत्यों और संगठनों की कानूनी परिभाषा।
  • NIA अधिनियम 2008: आतंकवाद संबंधी मामलों की केंद्रीय जांच।
  • अनुच्छेद 352: आतंकवाद से उत्पन्न सशस्त्र विद्रोह पर आंतरिक आपातकाल की घोषणा।

आतंकवाद और आतंकवाद विरोधी आर्थिक पहलू

भारत के केंद्रीय बजट 2023-24 में आंतरिक सुरक्षा के लिए लगभग ₹13,000 करोड़ (~USD 1.6 बिलियन) आवंटित किए गए, जिनमें से बड़ी राशि आतंकवाद विरोधी कदमों पर खर्च होती है। वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से आर्थिक गतिविधियां बाधित होती हैं, जिससे वार्षिक लगभग USD 90 बिलियन का नुकसान होता है (Global Terrorism Index 2023)। SCO के सदस्य देशों का संयुक्त GDP विश्व अर्थव्यवस्था का 20% से अधिक है और इनके बीच वार्षिक व्यापार USD 1 ट्रिलियन से ऊपर है। आतंकवाद से उत्पन्न अस्थिरता इन आर्थिक संबंधों को खतरे में डालती है और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को प्रभावित करती है। भारत में 2023 में FDI प्रवाह USD 83 बिलियन रहा, जो संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में जोखिम के कारण संवेदनशील है। यह मजबूत आतंकवाद विरोधी सहयोग की आर्थिक आवश्यकता को दर्शाता है।

  • भारत का आंतरिक सुरक्षा बजट: ₹13,000 करोड़ (2023-24 केंद्रीय बजट)।
  • वैश्विक आतंकवाद का आर्थिक नुकसान: USD 90 बिलियन प्रति वर्ष।
  • SCO का क्षेत्रीय GDP हिस्सा: 20% से अधिक, वार्षिक व्यापार USD 1 ट्रिलियन।
  • भारत का FDI प्रवाह: USD 83 बिलियन (2023), आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रीय अस्थिरता के प्रति संवेदनशील।

आतंकवाद विरोधी सहयोग में संस्थागत भूमिका

SCO राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग का मंच है, जिसमें आतंकवाद विरोधी प्रयास भी शामिल हैं। यह सदस्य देशों के बीच खुफिया साझा करने, संयुक्त अभ्यास और नीतिगत समन्वय को बढ़ावा देता है। भारत की NIA आतंकवाद मामलों की घरेलू जांच और अंतरराष्ट्रीय समन्वय की मुख्य एजेंसी है। गृह मंत्रालय (MHA) आंतरिक सुरक्षा नीतियों का निर्माण और कार्यान्वयन करता है। वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) आतंकवाद विरोधी प्रतिबंधों को लागू करती है। क्षेत्रीय संस्थाएं जैसे कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (CIS) और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां जैसे इंटरपोल सीमा पार पुलिस सहयोग और आतंकवादी वित्तपोषण की निगरानी में मदद करती हैं।

  • SCO: सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी क्षेत्रीय सहयोग।
  • NIA: भारत में आतंकवाद जांच की केंद्रीय एजेंसी।
  • MHA: आंतरिक सुरक्षा नीति निर्माण।
  • UNSC: आतंकवाद विरोधी अंतरराष्ट्रीय नियमों का प्रवर्तन।
  • CIS और इंटरपोल: क्षेत्रीय और वैश्विक पुलिस सहयोग में सहायक।

SCO और यूरोपीय संघ के आतंकवाद विरोधी रणनीतियों की तुलना

SCO की रणनीति सामूहिक निंदा और समन्वय पर जोर देती है, लेकिन इसके पास बाध्यकारी प्रवर्तन तंत्र नहीं है, जिससे कार्यान्वयन असंगत रहता है। इसके विपरीत, यूरोपीय संघ (EU) बहु-स्तरीय रणनीति अपनाता है, जिसमें Europol के माध्यम से खुफिया साझा करना, Eurojust के जरिए न्यायिक सहयोग और सामाजिक-आर्थिक समेकन नीतियां शामिल हैं। इस व्यापक ढांचे के कारण पिछले दशक में आतंकवादी घटनाओं में 30% की कमी आई है (EU Counter-Terrorism Report 2023)। EU का मॉडल बाध्यकारी संस्थागत तंत्र और सामाजिक-आर्थिक उपायों की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

पहलू SCO यूरोपीय संघ (EU)
सदस्यता 8 सदस्य देश, यूरोएशियाई केंद्रित 27 सदस्य देश, यूरोपीय केंद्रित
आतंकवाद विरोधी तंत्र राजनीतिक समन्वय, खुफिया साझा, बाध्यकारी प्रवर्तन नहीं Europol (खुफिया), Eurojust (न्यायिक), सामाजिक-आर्थिक समेकन
कार्यान्वयन राष्ट्रीय हितों के कारण असंगत संगठित, कानूनी रूप से बाध्यकारी सहयोग
प्रभाव सीमा पार आतंकवाद की चुनौतियां जारी आतंकवादी घटनाओं में 30% कमी (पिछला दशक)

द्वैध मानकों और प्रवर्तन की चुनौतियां

राजनाथ सिंह के समानता के आह्वान के बावजूद, SCO सदस्य देशों की आतंकवाद विरोधी नीतियां राष्ट्रीय हितों से प्रभावित होकर भिन्न हैं। इससे आतंकवादी समूहों के लिए सुरक्षित ठिकाने बनते हैं और सीमा पार हमले होते हैं, जो सामूहिक सुरक्षा को कमजोर करते हैं। बाध्यकारी प्रवर्तन तंत्र की कमी जवाबदेही को सीमित करती है। ये खामियां क्षेत्रीय सहयोग को कमजोर करती हैं और आतंकवाद को स्थिरता भंग करने वाला कारक बनाए रखती हैं। इन असंगतियों को दूर करना SCO के आतंकवाद विरोधी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जरूरी है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • आतंकवाद के खिलाफ एकरूप निंदा और कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
  • कानूनी बाध्यकारी प्रोटोकॉल के जरिए SCO के प्रवर्तन तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए।
  • भारत की पारदर्शिता और खुफिया साझा करने में नेतृत्व भूमिका सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ा सकती है।
  • सामाजिक-आर्थिक विकास योजनाओं को जोड़कर आतंकवाद के मूल कारणों को संबोधित किया जा सकता है।
  • UAPA जैसे घरेलू कानूनों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के साथ संरेखित करना कानूनी एकरूपता सुनिश्चित करता है।

UNSC प्रस्ताव 1373 (2001) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह सदस्य देशों को आतंकवादी वित्तपोषण को अपराध घोषित करने का निर्देश देता है।
  2. इसने भारत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की स्थापना की।
  3. यह सदस्य देशों को आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का निर्देश देता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि UNSC प्रस्ताव 1373 आतंकवादी वित्तपोषण को अपराध घोषित करने का निर्देश देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि NIA भारत के राष्ट्रीय कानून (NIA अधिनियम 2008) के तहत स्थापित हुई, UNSC द्वारा नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि यह प्रस्ताव आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने को कहता है।

SCO के आतंकवाद विरोधी ढांचे के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. SCO के पास आतंकवाद विरोधी उपायों के लिए बाध्यकारी प्रवर्तन तंत्र है।
  2. SCO सदस्य देश विश्व GDP के 20% से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  3. SCO में यूरोपीय संघ सदस्य है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि SCO के पास बाध्यकारी प्रवर्तन तंत्र नहीं है। कथन 2 सही है; SCO सदस्य विश्व GDP के 20% से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि यूरोपीय संघ SCO का सदस्य नहीं है।

मुख्य प्रश्न

SCO सम्मेलन में आतंकवाद विरोधी द्वैध मानकों को खत्म करने पर राजनाथ सिंह के बयान के महत्व का विश्लेषण करें। SCO सदस्य देशों के बीच समान आतंकवाद विरोधी सहयोग हासिल करने की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करें, भारत की भूमिका और घरेलू कानूनी ढांचे के संदर्भ में।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में माओवादी विद्रोह आंतरिक आतंकवाद के समान चुनौतियां हैं; SCO के क्षेत्रीय सहयोग से प्राप्त सबक राज्य स्तर की सुरक्षा रणनीतियों में मदद कर सकते हैं।
  • मुख्य बिंदु: आतंकवाद से लड़ने के लिए समान नीतियों, संस्थागत समन्वय और कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर उत्तर तैयार करें, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा को जोड़ते हुए।
भारत के आतंकवाद विरोधी प्रयासों में UNSC प्रस्ताव 1373 का क्या महत्व है?

UNSC प्रस्ताव 1373 (2001) सदस्य देशों को आतंकवादी वित्तपोषण को अपराध घोषित करने, सूचना साझा करने और कानूनी ढांचे को मजबूत करने का निर्देश देता है। भारत का UAPA और NIA अधिनियम इन प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी मानकों का पालन सुनिश्चित होता है।

SCO क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी सहयोग में कैसे योगदान देता है?

SCO यूरोएशियाई देशों के बीच खुफिया साझा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास और नीतिगत समन्वय का मंच है। हालांकि, इसके पास बाध्यकारी प्रवर्तन तंत्र न होने के कारण सुरक्षित ठिकानों और सीमा पार आतंकवाद को खत्म करने में सीमाएं हैं।

SCO सदस्यों के बीच आतंकवाद की एकरूप निंदा क्यों जरूरी है?

एकरूप निंदा आतंकवादी समूहों के प्रति चयनात्मक सहिष्णुता को रोकती है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर कर सकती है। इससे विश्वास बढ़ता है, समन्वित कार्रवाई संभव होती है और सुरक्षित ठिकानों की संख्या कम होती है, जो विविध राष्ट्रीय हितों वाले क्षेत्र में स्थिरता के लिए जरूरी है।

भारत और SCO क्षेत्र में आतंकवाद के आर्थिक प्रभाव क्या हैं?

आतंकवाद व्यापार को बाधित करता है, विदेशी निवेश को रोकता है और सुरक्षा खर्च बढ़ाता है। भारत का ₹13,000 करोड़ का आंतरिक सुरक्षा बजट और USD 83 बिलियन का FDI प्रवाह अस्थिरता के प्रति संवेदनशील है, जबकि SCO का USD 1 ट्रिलियन का व्यापार क्षेत्रीय शांति पर निर्भर करता है।