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Governance · Exam Notes

संसदीय समिति ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए आईपीओ मार्ग अपनाने की सिफारिश की, पूंजी और शासन सुधार के लिए

1 min read GS Paper II

परिचय: संसदीय समिति की RRBs के लिए आईपीओ सिफारिश

2024 में, संसदीय वित्त स्थायी समिति ने लाभकारी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) को आईपीओ (Initial Public Offering) के जरिए पूंजी जुटाने और कॉरपोरेट शासन सुधारने की सलाह दी है। यह प्रस्ताव संशोधित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के अनुरूप है, जो केंद्र सरकार की कम से कम 51% हिस्सेदारी सुनिश्चित करता है, जिससे सरकार का नियंत्रण बना रहता है। इस सिफारिश का मकसद RRBs की संरचनात्मक कमियों को सुधारना, ग्रामीण ऋण को बढ़ावा देना और पूंजी बाजार तथा तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करना है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – बैंकिंग सुधार, ग्रामीण ऋण, वित्तीय समावेशन
  • GS पेपर 2: शासन – संसदीय समितियों की भूमिका, वित्तीय विनियमन
  • निबंध: ग्रामीण विकास और आर्थिक वृद्धि में वित्तीय संस्थानों की भूमिका

RRBs का कानूनी ढांचा

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 (संशोधित) RRBs के स्वामित्व और शासन की कानूनी आधारशिला है। धारा 3 केंद्र, राज्य सरकार और प्रायोजक बैंकों के संयुक्त प्रायोजन से RRBs की स्थापना की अनुमति देती है। धारा 4 के तहत केंद्र सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 51% होनी चाहिए, जबकि राज्य सरकार और प्रायोजक बैंक के हिस्से क्रमशः 15% और 34% हैं। यह स्वामित्व संरचना सरकारी नियंत्रण के साथ परिचालन लचीलापन भी देती है।

  • RRBs पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत नियामकीय नियंत्रण रखता है।
  • NABARD ग्रामीण वित्त में RRBs की विकासात्मक भूमिका की देखरेख करता है।
  • क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फॉर एजुकेशन लोन (CGFSEL), जिसे नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) संचालित करती है, 75% सरकारी गारंटी प्रदान करती है जिससे ₹7.5 लाख तक के शिक्षा ऋण बिना जमानत के मिलते हैं।

RRBs की आर्थिक स्थिति और चुनौतियां

RRBs ग्रामीण ऋण बाजार का लगभग 12% हिस्सा रखते हैं (RBI रिपोर्ट 2023)। हालांकि उनकी पहुंच व्यापक है, पर वे स्वामित्व में विभाजन, क्षेत्राधिकार में ओवरलैप और परिचालन में अक्षमताओं जैसी संरचनात्मक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। सरकार की चरणबद्ध विलय नीति से RRBs की संख्या 2006 के 196 से घटकर 2023 में 43 रह गई है, जिससे परिचालन दक्षता बढ़ी और लागत में लगभग 15% की बचत हुई (NABARD वार्षिक रिपोर्ट 2023)।

  • लाभप्रदता में भिन्नता है, लेकिन कुछ RRBs वर्तमान वित्तीय स्थिति के आधार पर प्रत्येक 2,000-3,000 करोड़ रुपये आईपीओ के जरिए जुटा सकते हैं (संसदीय समिति रिपोर्ट 2024)।
  • एनपीए अभी भी चिंता का विषय हैं; एआई आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली से तीन वर्षों में एनपीए में 10-15% तक कमी संभव है (इंडस्ट्री व्हाइटपेपर 2023)।
  • CGFSEL की सरकारी गारंटी से बिना जमानत के ऋण देने में मदद मिलती है, जिससे ग्रामीण शिक्षा ऋण की पहुंच बढ़ती है।

संसदीय समिति की मुख्य सिफारिशें

  • आईपीओ शुरू करना: लाभकारी RRBs को आईपीओ के जरिए पूंजी बाजार से नया पूंजी जुटाने और बाजार अनुशासन के माध्यम से शासन सुधारने की सलाह दी गई है।
  • सरकारी नियंत्रण: आईपीओ के बाद भी केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 51% से अधिक बनी रहे, जिससे संप्रभु नियंत्रण और नीतिगत तालमेल बना रहे।
  • जोखिम प्रबंधन: CGFSEL का अधिकतम उपयोग कर शिक्षा ऋण में बिना जमानत के ऋण देने से क्रेडिट जोखिम कम किया जाए।
  • तकनीकी समावेशन: वास्तविक समय में संपत्ति गुणवत्ता की निगरानी के लिए एआई आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली लागू की जाए ताकि ऋण डिफॉल्ट से पहले ही कदम उठाए जा सकें।

तुलनात्मक अध्ययन: ब्राजील के Banco do Brasil का आईपीओ अनुभव

पहलूब्राजील – Banco do Brasilभारत – प्रस्तावित RRB आईपीओ
आईपीओ समय2000 के दशक की शुरुआत में आंशिक निजीकरणविलय के बाद, 2024 से शुरू
आईपीओ के बाद स्वामित्वसरकार बहुमत हिस्सेदारी बनाए रखती हैकेंद्र की 51% से अधिक हिस्सेदारी अनिवार्य
ग्रामीण ऋण पर प्रभाव5 वर्षों में ग्रामीण ऋण वितरण में 20% वृद्धि (विश्व बैंक 2010)प्रत्येक RRB को 2,000-3,000 करोड़ रुपये पूंजी जुटाकर ऋण विस्तार का अनुमान
शासन सुधारपारदर्शिता और बोर्ड की पेशेवरता में सुधारबाजार निगरानी से शासन में मजबूती की उम्मीद

महत्वपूर्ण खामियां और जोखिम

  • कुछ RRBs में स्वामित्व का विभाजन और क्षेत्राधिकार का ओवरलैप अभी भी मौजूद है, जो दक्षता बढ़ाने में बाधक है।
  • आईपीओ से सरकार के नियंत्रण में कमी का खतरा तब होता है जब शेयरधारिता नियमों का कड़ाई से पालन न हो।
  • RRB आईपीओ के लिए बाजार की तैयारी का आकलन सीमित है, जिससे निवेशकों का भरोसा और मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है।
  • तकनीक को अपनाने में क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचे में निवेश की जरूरत है।

महत्ता और आगे का रास्ता

  • आईपीओ से नई पूंजी जुटाकर RRBs ग्रामीण ऋण विस्तार और संचालन के आधुनिकीकरण में सक्षम होंगे।
  • केंद्र की बहुमत हिस्सेदारी बनाए रखना नीतिगत स्थिरता और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • CGFSEL की गारंटी का प्रभावी उपयोग क्रेडिट जोखिम कम कर समावेशी ऋण वितरण को बढ़ावा देगा, खासकर शिक्षा क्षेत्र में।
  • एनपीए कम करने और जोखिम प्रबंधन बेहतर बनाने के लिए एआई आधारित संपत्ति निगरानी को व्यापक रूप से लागू करना होगा।
  • सफल आईपीओ के लिए बाजार की तैयारी और निवेशक शिक्षा अभियान जरूरी हैं।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के स्वामित्व संरचना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. संशोधित RRB अधिनियम, 1976 के अनुसार केंद्र सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 51% होनी चाहिए।
  2. राज्य सरकार की हिस्सेदारी 35% है।
  3. प्रायोजक बैंक की हिस्सेदारी 15% है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) 1 और 2
  • (c) 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

धारा 4 के अनुसार केवल कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है, राज्य सरकार की हिस्सेदारी 15% है। कथन 3 भी गलत है, प्रायोजक बैंक की हिस्सेदारी 34% है।

क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फॉर एजुकेशन लोन (CGFSEL) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. CGFSEL ₹7.5 लाख तक के शिक्षा ऋण के लिए 75% सरकारी गारंटी प्रदान करता है।
  2. यह योजना नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) द्वारा संचालित है।
  3. CGFSEL गारंटी के लिए उधारकर्ता से जमानत की आवश्यकता होती है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) 1 और 2
  • (b) 2 और 3
  • (c) 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि CGFSEL बिना जमानत के ऋण देने में मदद करता है।

मेन प्रश्न

लाभकारी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के लिए संसदीय वित्त स्थायी समिति की आईपीओ शुरू करने की सिफारिश के प्रभावों पर चर्चा करें। विश्लेषण करें कि यह कदम संरचनात्मक कमियों को कैसे दूर कर सकता है और ग्रामीण ऋण वृद्धि को बढ़ावा देते हुए सरकारी नियंत्रण को कैसे बनाए रख सकता है।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (शासन), पेपर 3 (अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास)
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड की ग्रामीण आबादी RRBs पर कृषि और सम्बद्ध ऋण के लिए निर्भर है; आईपीओ से स्थानीय RRBs की पूंजी उपलब्धता बढ़ सकती है।
  • मेन पॉइंटर: उत्तर में RRBs की झारखंड के ग्रामीण वित्तीय तंत्र में भूमिका, चुनौतियां और आईपीओ आधारित सुधारों से ऋण प्रवाह और शासन में सुधार पर जोर दें।
संशोधित RRB अधिनियम, 1976 के अनुसार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का स्वामित्व कैसा होता है?

RRBs का स्वामित्व केंद्र सरकार (कम से कम 51%), राज्य सरकार (15%) और प्रायोजक बैंक (34%) के संयुक्त प्रायोजन में होता है, जैसा कि संशोधित अधिनियम की धारा 4 में निर्धारित है।

क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फॉर एजुकेशन लोन (CGFSEL) RRB ऋण देने में कैसे मदद करता है?

CGFSEL ₹7.5 लाख तक के शिक्षा ऋण पर 75% सरकारी गारंटी देता है, जिसे NCGTC संचालित करता है, जिससे RRBs बिना जमानत के शिक्षा ऋण दे पाते हैं।

RRBs के लिए आईपीओ शुरू करने के क्या फायदे हैं?

आईपीओ से ताजी पूंजी जुटाने, बाजार अनुशासन के जरिए शासन सुधारने और सरकारी नियंत्रण बनाए रखते हुए ग्रामीण ऋण विस्तार में मदद मिलती है।

RRBs के विलय से उनकी दक्षता कैसे बढ़ी है?

विलय के कारण RRBs की संख्या 196 से घटकर 43 हो गई है, जिससे संचालन में सरलता आई, क्षेत्राधिकार की ओवरलैप कम हुई और परिचालन लागत में लगभग 15% की बचत हुई है (NABARD रिपोर्ट 2023)।

RRBs की संपत्ति गुणवत्ता सुधारने में एआई की क्या भूमिका है?

एआई आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली से ऋण पोर्टफोलियो की वास्तविक समय निगरानी होती है, जिससे तनाव के संकेत जल्दी मिलते हैं और तीन वर्षों में एनपीए में 10-15% तक कमी संभव है।

Sources and further reading

Tags:Governance