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मणिपुर में कूकी-नागा संघर्ष: संवैधानिक, आर्थिक और सुरक्षा पहलू

2024 की शुरुआत में मणिपुर में कूकी और नागा समुदायों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई और 10,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए (The Hindu, 2024; UNHCR, 2024)। यह विवाद जातीय तनाव और क्षेत्रीय दावों पर आधारित है, जो Article 371C और Armed Forces (Special Powers) Act, 1958 (AFSPA) जैसे संवैधानिक सुरक्षा उपायों के बावजूद बढ़ता जा रहा है। मणिपुर की नाजुक शांति पर शासन संबंधी चुनौतियां और आर्थिक व्यवधान भी गहरा असर डाल रहे हैं, जो जातीय संघर्षों को संभालने के लिए संस्थागत तंत्रों की कमजोरियों को उजागर करते हैं।

UPSC Relevance

  • GS Paper 2: शासन, आंतरिक सुरक्षा और संवैधानिक प्रावधान (Article 371C, AFSPA)
  • GS Paper 3: आर्थिक विकास और जनजातीय अधिकार (FRA, स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव)
  • Essay: पूर्वोत्तर भारत में जातीय संघर्ष और शासन चुनौतियां

मणिपुर के संवैधानिक और कानूनी ढांचे

Article 371C मणिपुर को विशेष प्रावधान देता है, जिसमें जनजातीय हितों की सुरक्षा के लिए एक समिति का गठन और भूमि स्वामित्व का नियंत्रण शामिल है। हालांकि, ये प्रावधान जातीय संघर्षों को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हुए, जिससे इनके दायरे और क्रियान्वयन की सीमाएं सामने आई हैं। AFSPA 1980 से लागू है, जो सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देता है, लेकिन मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों के कारण यह विवादित भी रहा है (गृह मंत्रालय, 2024)।

  • मणिपुर भूमि राजस्व एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1960 भूमि विवादों को नियंत्रित करता है, लेकिन कूकी और नागा जनजातियों के ओवरलैपिंग दावों को सुलझाने में असमर्थ है।
  • अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासियों (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (FRA) जनजातीय भूमि अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कमियां तनाव बढ़ाती हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्णय जैसे Naga People’s Movement of Human Rights v. Union of India (1997) संघर्ष क्षेत्रों में मानवाधिकार संरक्षण पर जोर देते हैं, पर प्रभावी लागू करना कमजोर है।

संघर्ष का मणिपुर की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

मणिपुर की अर्थव्यवस्था, जिसका 2022-23 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि दर 7.1% रही (Economic Survey of Manipur, 2023), जातीय हिंसा के कारण भारी नुकसान झेल रही है। इस संघर्ष से व्यापार और कृषि क्षेत्रों में अनुमानित ₹200 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है, जो स्थानीय आजीविका के लिए अहम हैं (मणिपुर राज्य सरकार, 2023)। म्यांमार के साथ असंगठित सीमा पार व्यापार, जिसकी वार्षिक कीमत लगभग ₹500 करोड़ है, भी प्रभावित हुआ है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक समेकन बाधित हुआ है।

  • आंतरिक सुरक्षा के लिए बजट 2023-24 में 15% बढ़ाकर ₹1,200 करोड़ किया गया है ताकि बढ़ती हिंसा से निपटा जा सके (संघ बजट, 2023-24)।
  • पर्यटन क्षेत्र में 2023 में 30% की गिरावट आई, जो सेवा क्षेत्रों पर संघर्ष के नकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है (मणिपुर पर्यटन विभाग)।
  • 10,000 से अधिक लोगों के विस्थापन ने स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ाया और आर्थिक गतिविधियों को बाधित किया है।

संघर्ष प्रबंधन में प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिकाएं

मणिपुर पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालती है, लेकिन हिंसा की जातीय प्रकृति और पैमाने के कारण चुनौतियों का सामना कर रही है। भारतीय सेना, जो AFSPA के तहत कार्यरत है, सशस्त्र संघर्ष नियंत्रण में मदद करती है, लेकिन इसकी मौजूदगी पर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगते रहे हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) उल्लंघनों की निगरानी करता है, पर इसके पास लागू करने की शक्ति नहीं है।

  • गृह मंत्रालय (MHA) आंतरिक सुरक्षा और जनजातीय मामलों की नीतियां बनाता है, लेकिन राज्य सरकार के साथ समन्वय कमजोर है।
  • मणिपुर राज्य सरकार स्थानीय शासन और संघर्ष समाधान की अगुवाई करती है, पर समावेशी राजनीतिक ढांचे लागू करने में कठिनाई होती है।
  • नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) क्षेत्रीय विकास और शांति पहलों को बढ़ावा देती है, लेकिन जातीय मेल-मिलाप पर प्रभाव सीमित है।

तुलनात्मक अध्ययन: मणिपुर और नॉर्दर्न आयरलैंड के शांति प्रयास

मणिपुर के जातीय संघर्ष की तुलना नॉर्दर्न आयरलैंड के शांति प्रक्रिया से की जाए, तो वहां गुड फ्राइडे एग्रीमेंट (1998) ने सत्ता साझा करने और समावेशी शासन स्थापित किया, जिससे दो दशकों में सांप्रदायिक हिंसा में 70% कमी आई (UK Home Office आंकड़े)। मणिपुर में ऐसा व्यापक राजनीतिक ढांचा नहीं है, जो बार-बार हिंसा और विस्थापन का कारण बनता है।

पहलू मणिपुर (कूकी-नागा संघर्ष) नॉर्दर्न आयरलैंड (गुड फ्राइडे एग्रीमेंट)
संघर्ष का स्वरूप भूमि और पहचान को लेकर जातीय तनाव धार्मिक और राजनीतिक सांप्रदायिकता
शासन मॉडल विशेष संवैधानिक प्रावधान (Article 371C), समावेशी सत्ता साझेदारी नहीं सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए सत्ता साझेदारी
सुरक्षा उपाय AFSPA के तहत सैन्य उपस्थिति पारामिलिट्रीज का निरस्त्रीकरण और सैन्यकरण में कमी
हिंसा में कमी बार-बार झड़पें, 2020-23 में 50 से अधिक घटनाएं 20 वर्षों में हिंसा से मौतों में 70% गिरावट
मानवाधिकार बार-बार आरोप, कमजोर कार्यान्वयन मजबूत मानवाधिकार संरक्षण समझौतों में निहित

नीतिगत कमियां और चुनौतियां

मणिपुर के संघर्ष में सबसे बड़ी कमी समावेशी राजनीतिक ढांचे का अभाव है, जो सभी जातीय हितधारकों को जोड़े। मौजूदा संवैधानिक सुरक्षा उपाय और सुरक्षा तंत्र भूमि विवाद, पहचान की मान्यता और आर्थिक उपेक्षा जैसे मूल कारणों को दूर करने में असफल रहे हैं। केंद्र और राज्य संस्थानों के बीच समन्वय भी टुकड़ों में है, जिससे प्रभावी समाधान मुश्किल हो रहा है।

  • FRA और भूमि कानूनों का कमजोर क्रियान्वयन असंतोष बढ़ाता है।
  • सैन्यकृत सुरक्षा (AFSPA) पर अधिक निर्भरता समुदायों के बीच भरोसे को कमजोर करती है।
  • शांति निर्माण में नागरिक समाज और जनजातीय संगठनों की सीमित भागीदारी।

आगे का रास्ता: स्थायी शांति के लिए ठोस कदम

  • कूकी, नागा और अन्य समुदायों को शामिल करते हुए समावेशी राजनीतिक संवाद मंच बनाएँ, जिसमें सत्ता साझेदारी और संसाधन आवंटन पर बातचीत हो।
  • FRA और मणिपुर भूमि कानूनों के तहत जनजातीय भूमि अधिकारों के क्रियान्वयन को मजबूत करें ताकि क्षेत्रीय विवाद सुलझ सकें।
  • AFSPA के लागू होने की समीक्षा करें, मानवाधिकारों के अनुपालन और समुदाय आधारित पुलिसिंग मॉडल पर ध्यान दें।
  • गृह मंत्रालय, राज्य सरकार और NEC के बीच समन्वय बढ़ाएं ताकि विकास और सुरक्षा योजनाएं एकीकृत हों।
  • संघर्ष से प्रभावित कृषि, व्यापार और पर्यटन क्षेत्रों को आर्थिक पुनर्वास के लिए समर्थन दें।

मणिपुर में लागू Armed Forces (Special Powers) Act, 1958 (AFSPA) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. AFSPA सुरक्षा बलों को केंद्रीय सरकार की मंजूरी के बिना अभियोजन से सुरक्षा प्रदान करता है।
  2. AFSPA 1980 से मणिपुर में निरंतर लागू है।
  3. AFSPA भारतीय सेना को अशांत क्षेत्रों में सिविल प्रशासन संभालने की अनुमति देता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि AFSPA में सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ अभियोजन के लिए केंद्रीय सरकार की मंजूरी आवश्यक है। कथन 2 भी सही है; AFSPA 1980 से मणिपुर में लागू है। कथन 3 गलत है; AFSPA सुरक्षा बलों को कानून व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार देता है, लेकिन सिविल प्रशासन सेना को सौंपता नहीं है।

भारतीय संविधान के Article 371C के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Article 371C मणिपुर विधानसभा में जनजातीय हितों की सुरक्षा के लिए एक समिति का प्रावधान करता है।
  2. यह जम्मू और कश्मीर के Article 370 के समान मणिपुर को विशेष स्वायत्तता प्रदान करता है।
  3. यह राज्य सरकार को मणिपुर में गैर-जनजातीयों के भूमि स्वामित्व को नियंत्रित करने की अनुमति देता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 1 और 3
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 सही है; Article 371C जनजातीय हितों के लिए समिति बनाता है। कथन 2 गलत है; Article 371C जम्मू-कश्मीर के समान स्वायत्तता नहीं देता। कथन 3 सही है क्योंकि यह गैर-जनजातीयों के भूमि स्वामित्व को नियंत्रित करने की अनुमति देता है।

मुख्य प्रश्न

मणिपुर में कूकी-नागा जातीय संघर्ष को संबोधित करने में संवैधानिक सुरक्षा उपायों और सुरक्षा प्रबंधों की प्रभावशीलता का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संस्थागत सुधारों का सुझाव दें। (250 शब्द)

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – शासन और आंतरिक सुरक्षा
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड में समान जनजातीय संघर्ष और भूमि विवाद FRA के प्रभावी क्रियान्वयन और संघर्ष-संवेदनशील शासन की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड और मणिपुर के जनजातीय अधिकार, भूमि कानून और सुरक्षा चुनौतियों की तुलना करते हुए उत्तर तैयार करें ताकि संदर्भ-विशिष्ट समाधान सुझाए जा सकें।
मणिपुर के लिए Article 371C का महत्व क्या है?

Article 371C मणिपुर के लिए विशेष प्रावधान देता है, जिसमें विधानसभा में जनजातीय हितों की सुरक्षा के लिए समिति का गठन और गैर-जनजातीय भूमि स्वामित्व का नियंत्रण शामिल है। इसका उद्देश्य जनजातीय पहचान और भूमि अधिकारों की रक्षा करना है।

मणिपुर में AFSPA विवादित क्यों है?

AFSPA सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार और अभियोजन से immunity देता है, जिससे मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगते हैं। 1980 से इसकी लंबी अवधि की लागू होने के कारण क्षेत्र की सैन्यकृत स्थिति और नागरिक स्वतंत्रताओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

कूकी-नागा संघर्ष ने मणिपुर की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित किया है?

संघर्ष के कारण व्यापार और कृषि में ₹200 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है, म्यांमार के साथ ₹500 करोड़ वार्षिक मूल्य के असंगठित सीमा पार व्यापार में बाधा आई है, और पर्यटन में 30% की गिरावट आई है, जिससे आजीविका और आर्थिक विकास प्रभावित हुआ है।

मणिपुर नॉर्दर्न आयरलैंड के शांति प्रक्रिया से क्या सीख सकता है?

नॉर्दर्न आयरलैंड में गुड फ्राइडे एग्रीमेंट ने समावेशी सत्ता साझेदारी और सैन्यकरण में कमी से हिंसा को कम किया। मणिपुर भी जातीय तनावों को दूर करने के लिए ऐसे समावेशी राजनीतिक ढांचे और मानवाधिकार संरक्षण अपना सकता है।

मणिपुर में जातीय संघर्ष प्रबंधन में मुख्य संस्थागत चुनौतियां क्या हैं?

केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय का अभाव, जनजातीय भूमि अधिकारों का कमजोर क्रियान्वयन, सैन्यकृत सुरक्षा पर अधिक निर्भरता और जातीय समूहों के बीच समावेशी राजनीतिक संवाद की कमी मुख्य चुनौतियां हैं।