सुप्रीम कोर्ट का फसल विविधीकरण पर निर्देश
साल 2023 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह कृषि नीतियों की समीक्षा कर गेहूं और धान की जगह दालों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सुधार करे, खासकर उत्तर भारत में। यह कदम MSP और खरीद नीतियों में मौजूद गहरी असंतुलन को देखते हुए उठाया गया, जो अनाजों को अधिक फायदा पहुंचाती हैं और टिकाऊ कृषि व किसान आय की सुरक्षा को कमजोर करती हैं। कोर्ट ने कृषि प्रथाओं को संवैधानिक जिम्मेदारियों और आधुनिक आर्थिक जरूरतों के अनुरूप बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: कृषि - MSP, खरीद नीतियां, फसल विविधीकरण
- GS पेपर 2: शासन - नीति सुधारों में न्यायपालिका की भूमिका
- निबंध: भारत में टिकाऊ कृषि और किसान कल्याण
कानूनी और संवैधानिक आधार
भारतीय संविधानअत्यावश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 कृषि उत्पादों की खरीद और भंडारण सीमाओं को नियंत्रित करता है, जो MSP के संचालन की नींव है। प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS), जिसे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DAC&FW) लागू करता है, मुख्य रूप से गेहूं और धान की खरीद के लिए MSP को लागू करता है। सुप्रीम कोर्ट के स्वराज अभियान बनाम भारत संघ (2023) के फैसले ने कृषि विविधीकरण और MSP सुधारों को संवैधानिक दायित्व बताया है।
- अनुच्छेद 48 कृषि को वैज्ञानिक तरीके से संगठित करने का निर्देश देता है।
- अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम खरीद और भंडारण सीमाओं को नियंत्रित करता है।
- PSS MSP खरीद को लागू करता है, खासकर अनाजों के लिए।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले MSP सुधार और विविधीकरण की मांग करते हैं।
MSP और खरीद में आर्थिक पक्ष
भारत का MSP खरीद बजट सालाना ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक गेहूं और धान पर खर्च होता है (इकोनॉमिक सर्वे 2023-24)। इसके मुकाबले दालों को इस बजट का 10% से भी कम हिस्सा मिलता है, और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में दालों की खरीद उत्पादन का 30% से कम है (DAC&FW 2023)। घरेलू दाल उत्पादन की वृद्धि लगभग 1.5% प्रति वर्ष है, जबकि अनाज की 3.5% (Agricultural Statistics at a Glance 2023)। दालों के दामों में उतार-चढ़ाव गेहूं और चावल की तुलना में 25% ज्यादा है (NABARD 2023), जिससे किसान की आमदनी अस्थिर होती है। भारत प्रति वर्ष लगभग 20 लाख टन येलो पीज का आयात करता है (DGCI&S 2023), जो घरेलू कीमतों को दबाता है और दालों की खेती को कम प्रोत्साहित करता है।
- गेहूं और धान के लिए MSP खरीद बजट ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक।
- दालों के लिए MSP खरीद बजट 10% से कम।
- महाराष्ट्र में दालों की खरीद उत्पादन का 30% से कम।
- दालों की उत्पादन वृद्धि लगभग 1.5% जबकि अनाज 3.5%।
- दालों की कीमतों में उतार-चढ़ाव अनाजों से 25% ज्यादा।
- सालाना येलो पीज का आयात लगभग 20 लाख टन।
MSP और खरीद में संस्थागत भूमिका
फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) गेहूं और धान की MSP पर खरीद की मुख्य एजेंसी है, जो किसानों को बाजार की गारंटी देती है। DAC&FW PSS लागू करता है, लेकिन दालों की खरीद सीमित और असंगठित है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स (DGCI&S) आयात-निर्यात आंकड़ों पर नजर रखता है, जो दालों के आयात की मात्रा दर्शाता है। नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) ग्रामीण क्रेडिट और बाजार विश्लेषण में मदद करता है, दालों की कीमतों की अस्थिरता और सुधारों की जरूरत को उजागर करता है।
- FCI: गेहूं और धान की खरीद की मुख्य एजेंसी।
- DAC&FW: MSP और PSS लागू करता है।
- DGCI&S: दालों के आयात एवं व्यापार आंकड़े ट्रैक करता है।
- NABARD: ग्रामीण क्रेडिट और बाजार उतार-चढ़ाव का विश्लेषण करता है।
फसल विविधीकरण: परिभाषा और आवश्यकता
फसल विविधीकरण का मतलब है गेहूं और धान जैसी एकल फसलों की जगह कई तरह की फसलें उगाना। मौजूदा धान-गेहूं प्रणाली से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है, जैसे भूजल का कम होना और मिट्टी की उर्वरता घटना। दाल, तिलहन, बाजरा, फल-फूल और चारा फसलें उगाने से मिट्टी की सेहत सुधरती है, लागत कम होती है और किसानों की आय में स्थिरता आती है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश टिकाऊ कृषि और संवैधानिक जिम्मेदारियों के अनुरूप है।
- धान-गेहूं की एकल फसल प्रणाली से पर्यावरणीय दबाव कम होता है।
- दालों से मिट्टी की नाइट्रोजन पूर्ति होती है, जिससे उर्वरता बढ़ती है।
- पंजाब और हरियाणा में भूजल स्तर की गिरावट को कम करता है।
- विविध फसलों से किसानों की आय में स्थिरता आती है।
भारत बनाम कनाडा: दालों के समर्थन में तुलना
| पहलू | भारत | कनाडा |
|---|---|---|
| MSP और मूल्य समर्थन | MSP में अनाजों पर अधिक ध्यान, दालों की खरीद सीमित। | दालों के लिए मजबूत न्यूनतम मूल्य गारंटी और पारदर्शी खरीद प्रणाली। |
| खरीद कवरेज | दालों की खरीद प्रमुख राज्यों में 30% से कम, अनाज लगभग 100%। | दालों की खरीद व्यापक, बाजार स्थिरता सुनिश्चित। |
| उत्पादन वृद्धि | दालों की वृद्धि लगभग 1.5% प्रति वर्ष। | पिछले दशक में दालों की खेती 5% प्रति वर्ष बढ़ी। |
| आयात निर्भरता | येलो पीज सहित दालों का आयात लगभग 20 लाख टन। | मजबूत घरेलू उत्पादन के कारण आयात न्यूनतम। |
| किसान आय स्थिरता | दालों के दामों में अधिक उतार-चढ़ाव, किसान असुरक्षित। | सरकारी मूल्य गारंटी और निर्यात प्रोत्साहन से आय स्थिर। |
नीति में अहम कमियां
दालों के लिए गेहूं-धान जैसी सुनिश्चित और पारदर्शी खरीद व्यवस्था न होना किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव और निजी व्यापारियों के शोषण के प्रति कमजोर बनाता है। MSP सुधारों में दालों की उपेक्षा ने फसल पैटर्न को असंतुलित किया है और आय असुरक्षा बढ़ाई है। आयात नीतियां घरेलू उत्पादकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं हैं, जिससे दालों की खेती को प्रोत्साहन नहीं मिलता।
- दालों के लिए अनाजों जैसी सुनिश्चित खरीद व्यवस्था का अभाव।
- MSP और PSS नीतियां गेहूं-धान को प्राथमिकता देती हैं।
- दालों के आयात मूल्य नियंत्रण कमजोर या अनुपस्थित।
- दाल किसानों के लिए बाजार पहुंच असंगठित और असुरक्षित।
महत्व और आगे का रास्ता
- दालों के लिए MSP और PSS के तहत पारदर्शी और सुनिश्चित खरीद लागू करें ताकि किसान प्रोत्साहित हों।
- येलो पीज जैसे दालों के आयात मूल्य तय करें ताकि घरेलू उत्पादकों की रक्षा हो और बाजार स्थिर रहे।
- लक्षित सब्सिडी, विस्तार सेवाएं और क्रेडिट सहायता से फसल विविधीकरण को बढ़ावा दें।
- FCI, DAC&FW, NABARD और DGCI&S के बीच समन्वय मजबूत करें ताकि नीतियां प्रभावी ढंग से लागू हों।
- MSP के प्रभावों पर नियमित निगरानी और मूल्यांकन करें ताकि फसल पैटर्न और किसान आय पर असर समझा जा सके।
- प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत MSP खरीद महाराष्ट्र में लगभग 100% दाल उत्पादन को कवर करती है।
- फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया मुख्य रूप से गेहूं और धान की MSP पर खरीद करता है।
- भारत घरेलू कीमतों को स्थिर करने के लिए येलो पीज जैसी दालों का आयात करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- फसल विविधीकरण धान-गेहूं प्रणाली से होने वाले भूजल क्षरण को कम करता है।
- दालों की कीमतों में उतार-चढ़ाव गेहूं और चावल से कम होता है।
- अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 कृषि उत्पादों की खरीद और भंडारण सीमाओं को नियंत्रित करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का विश्लेषण करें जिसमें गेहूं और धान से दालों की खेती की ओर फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने को कहा गया है। भारत की MSP और खरीद नीतियों में मौजूद असंतुलित पक्षपात पर चर्चा करें और टिकाऊ कृषि व किसान आय सुरक्षा के लिए सुधार सुझाएं।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 3 - कृषि और ग्रामीण विकास
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में दालों का उत्पादन महत्वपूर्ण है, लेकिन MSP खरीद सीमित है, जो राष्ट्रीय रुझान दर्शाता है; विविधीकरण से राज्य में धान-गेहूं की निर्भरता कम होगी और मिट्टी की सेहत सुधरेगी।
- मुख्य बिंदु: MSP असमानता, स्थानीय दाल उत्पादन आंकड़े और विविधीकरण के पर्यावरणीय लाभों को झारखंड की कृषि अर्थव्यवस्था से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
भारत में कृषि को वैज्ञानिक तरीके से संगठित करने का संवैधानिक प्रावधान कौन सा है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48 राज्य को निर्देश देता है कि वह कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से संगठित करे।
सुप्रीम कोर्ट फसल विविधीकरण पर जोर क्यों देता है?
क्योंकि धान-गेहूं की प्रणाली से पर्यावरण को नुकसान होता है और MSP नीतियां अनाजों को प्राथमिकता देती हैं, इसलिए कोर्ट दालों की खेती को बढ़ावा देकर टिकाऊ कृषि और किसान आय सुधार चाहता है।
MSP खरीद में फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की भूमिका क्या है?
FCI गेहूं और धान की MSP पर खरीद की मुख्य एजेंसी है, जो इन फसलों के लिए बाजार की गारंटी देती है।
भारत में दालों की खरीद गेहूं और धान से कैसे तुलना करती है?
प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत दालों की खरीद प्रमुख राज्यों में 30% से कम है, जबकि गेहूं और धान की खरीद लगभग पूर्ण है।
दालों के आयात का घरेलू किसानों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
येलो पीज जैसी दालों के आयात से घरेलू कीमतें गिरती हैं, जिससे किसान दालों की खेती से हतोत्साहित होते हैं और बाजार की अनिश्चितता से प्रभावित होते हैं।
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 16 March 2026 | अंतिम अपडेट: 8 April 2026
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