भारत में सामाजिक सुरक्षा विस्तार और आर्थिक संकट का अवलोकन
1995 में ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) के तहत शुरू हुए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) से भारत में सामाजिक सुरक्षा का दायरा काफी बढ़ा है। NSAP का मकसद बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांगों जैसे कमजोर समूहों को सार्वजनिक सहायता प्रदान करना है, जो Article 41 के तहत राज्य नीति के निर्देशात्मक सिद्धांतों के अनुरूप है। वित्तीय वर्ष 2023 में ₹12,000 करोड़ के बजट आवंटन और लगभग 4 करोड़ लाभार्थियों के बावजूद, आर्थिक संकट विशेषकर असंगठित क्षेत्र में बढ़ा है, जहां 81% कार्यबल कार्यरत है (Periodic Labour Force Survey 2019-20)। यह विरोधाभास लक्षित सहायता, लाभ की पर्याप्तता और योजना क्रियान्वयन में प्रणालीगत कमियों को दर्शाता है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: सामाजिक न्याय – कमजोर वर्गों के लिए कल्याण योजनाएं, संवैधानिक प्रावधान (निर्देशात्मक सिद्धांत)
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – सामाजिक सुरक्षा, श्रम बाजार की स्थितियां, असंगठित क्षेत्र की चुनौतियां
- निबंध: आर्थिक संकट कम करने में सामाजिक सुरक्षा की भूमिका और गरीबी
सामाजिक सुरक्षा के संवैधानिक और कानूनी ढांचे
Article 41 के निर्देशात्मक सिद्धांत के तहत राज्य को बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और विकलांगता के मामलों में सार्वजनिक सहायता प्रदान करनी होती है। 1995 से लागू राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम इस दायित्व को संस्थागत रूप देता है, जैसे कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS)। Employees’ State Insurance Act, 1948 औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है, जिसे Employees’ State Insurance Corporation (ESIC) संचालित करता है। 2020 में लागू Code on Social Security ने कई श्रम कानूनों को एकीकृत कर सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुव्यवस्थित किया है। सुप्रीम कोर्ट के People’s Union for Democratic Rights v. Union of India (1982) मामले में जीवन के अधिकार के तहत आजीविका के अधिकार को भी मान्यता दी गई, जो सामाजिक सुरक्षा के संवैधानिक आधार को मजबूत करता है।
- NSAP को 1995 में MoRD के तहत शुरू किया गया, जो सामाजिक पेंशन और सहायता प्रदान करता है।
- ESI Act (1948) औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों को स्वास्थ्य और नकद लाभ देता है।
- Code on Social Security (2020) विभिन्न सामाजिक सुरक्षा कानूनों को एकीकृत करता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने Article 21 के तहत सामाजिक सुरक्षा को मौलिक अधिकार माना है।
आर्थिक हकीकत: कवरेज, लाभ की पर्याप्तता और श्रम बाजार की चुनौतियां
नीतिगत ढांचे के बावजूद, भारत के केवल लगभग 20% कार्यबल को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलता है (Economic Survey 2023)। असंगठित क्षेत्र, जहां 81% श्रमिक काम करते हैं, अधिकांशतः सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं, केवल 10% असंगठित श्रमिकों को किसी न किसी लाभ का लाभ मिलता है (ILO Report 2022)। 2023 में बेरोजगारी दर 7.8% तक पहुंच गई (CMIE), जो आर्थिक संकट की गंभीरता को दर्शाता है। NSAP की IGNOAPS योजना के तहत औसत पेंशन ₹200 प्रति माह है, जो अनुशंसित ₹1000 से काफी कम है और सामाजिक सुरक्षा की प्रभावशीलता को कमजोर करता है।
- वित्तीय वर्ष 2023 में NSAP के लिए ₹12,000 करोड़ आवंटित, लेकिन केवल 4 करोड़ लाभार्थी शामिल (MoRD 2023)।
- असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की पहचान और योजनाओं के बीच समन्वय की कमी के कारण बहिष्कार।
- IGNOAPS के तहत औसत पेंशन ₹200 प्रति माह, जबकि अनुशंसित ₹1000 (MoRD 2023)।
- PM गरीब कल्याण योजना के तहत COVID-19 राहत में ₹1.7 लाख करोड़ 80 करोड़ लाभार्थियों को वितरित, जो अस्थायी राहत थी।
सामाजिक सुरक्षा कार्यान्वयन में संस्थागत भूमिकाएं और डेटा स्रोत
ग्रामीण विकास मंत्रालय NSAP का प्रबंधन करता है, जबकि Employees’ State Insurance Corporation (ESIC) ESI लाभों का संचालन करता है। Labour Bureau और National Statistical Office (NSO) श्रम बाजार के आंकड़े जुटाते हैं, जिसमें Periodic Labour Force Survey शामिल है। Centre for Monitoring Indian Economy (CMIE) रोजगार से जुड़ी वास्तविक समय की जानकारी देता है, जिससे बेरोजगारी के बढ़ते रुझान सामने आते हैं। NITI Aayog सामाजिक सुरक्षा कवरेज और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए नीति सुधारों की सलाह देता है।
- MoRD NSAP और सामाजिक पेंशन योजनाओं को लागू करता है।
- ESIC ESI Act के तहत स्वास्थ्य और नकद लाभ देता है।
- Labour Bureau और NSO असंगठित क्षेत्र सहित श्रम बाजार डेटा इकट्ठा करते हैं।
- CMIE बेरोजगारी के वास्तविक समय आंकड़े प्रदान करता है; COVID लॉकडाउन (2020) में बेरोजगारी 8.1% तक पहुंची।
- NITI Aayog सामाजिक सुरक्षा के समेकन और विस्तार के लिए सुधार सुझाता है।
तुलनात्मक अध्ययन: भारत का NSAP और ब्राजील का Bolsa Família
| पहलू | भारत (NSAP) | ब्राजील (Bolsa Família) |
|---|---|---|
| शुरुआत का वर्ष | 1995 | 2003 |
| कवरेज | लगभग 4 करोड़ लाभार्थी | 14 मिलियन से अधिक परिवार |
| मासिक औसत लाभ | ₹200 (~$2.5) | $50 |
| लक्षित तंत्र | मुख्यतः उम्र/विकलांगता आधारित पेंशन, कुछ विधवा पेंशन; सीमित शर्तें | स्वास्थ्य और शिक्षा की शर्तों से जुड़ी नकद सहायता |
| गरीबी पर प्रभाव | कम लाभ और बहिष्कार की वजह से सीमित | 2003-2014 के बीच 27% गरीबी में कमी (World Bank 2015) |
| एकीकरण | विभाजित योजनाएं, लाभार्थी डेटा का खराब समन्वय | एकीकृत रजिस्ट्रेशन और निगरानी प्रणाली |
भारत के सामाजिक सुरक्षा ढांचे की प्रणालीगत कमियां
भारत की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को तीन मुख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है: लाभ की अपर्याप्तता जो मूलभूत जरूरतें पूरी नहीं करती, लाभार्थी पहचान और लक्षित सहायता में बहिष्कार की गलतियां, और योजनाओं के बीच समन्वय की कमी। असंगठित क्षेत्र की प्रधानता इन समस्याओं को और बढ़ाती है क्योंकि ज्यादातर योजनाएं औपचारिक क्षेत्र के आधार पर बनाई गई हैं। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की संख्या 54% है, लेकिन उन्हें सामाजिक सुरक्षा लाभ कम मिलते हैं (PLFS 2019-20), जो लैंगिक असमानता को दर्शाता है।
- NSAP के तहत कम पेंशन राशि गरीबी उन्मूलन क्षमता को कमजोर करती है।
- पुराने या अधूरे लाभार्थी डेटाबेस के कारण बहिष्कार की गलतियां।
- विभाजित सामाजिक सुरक्षा संरचना से लाभों की पोर्टेबिलिटी और संचयी लाभ सीमित।
- असंगठित क्षेत्र की महिलाओं में कवरेज और लाभ प्राप्ति में लैंगिक असमानता।
महत्व और आगे का रास्ता
केवल कवरेज बढ़ाने से लाभ की पर्याप्तता और क्रियान्वयन की दक्षता पर ध्यान न देने से सामाजिक सुरक्षा का आर्थिक संकट पर प्रभाव सीमित रहता है। नीति को निम्नलिखित दिशा में केंद्रित करना होगा:
- लाभ स्तर बढ़ाना ताकि न्यूनतम जीवन निर्वाह मानकों को पूरा किया जा सके, जैसे IGNOAPS पेंशन को कम से कम ₹1000/माह तक बढ़ाना।
- डिजिटाइज्ड और एकीकृत डेटाबेस के जरिए लाभार्थी पहचान सुधार कर बहिष्कार कम करना।
- Code on Social Security, 2020 का उपयोग करते हुए योजनाओं का समेकन और एक सामान्य सामाजिक सुरक्षा ढांचा बनाना।
- असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए उनके विशिष्ट जोखिमों को ध्यान में रखते हुए विशेष योजनाएं बनाना।
- असंगठित क्षेत्र में महिलाओं के लिए लक्षित हस्तक्षेप के जरिए लैंगिक असमानता दूर करना।
अभ्यास प्रश्न
भारत के राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- NSAP की शुरुआत 1995 में श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत हुई थी।
- यह बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांगों को सामाजिक पेंशन प्रदान करता है।
- IGNOAPS के तहत औसत पेंशन वर्तमान में लगभग ₹200 प्रति माह है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि NSAP की शुरुआत ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत हुई थी, न कि श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि NSAP बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांगों को सामाजिक पेंशन देता है, और IGNOAPS के तहत औसत पेंशन लगभग ₹200 प्रति माह है।
भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- भारत के केवल लगभग 20% कार्यबल को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलता है।
- असंगठित क्षेत्र में महिलाओं की संख्या 30% से कम है, लेकिन वे अधिकांश सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त करती हैं।
- Code on Social Security, 2020 विभिन्न सामाजिक सुरक्षा से जुड़े श्रम कानूनों को समेकित करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर: (c)
कथन 2 गलत है क्योंकि असंगठित क्षेत्र में महिलाओं की संख्या 54% है, लेकिन उन्हें सामाजिक सुरक्षा लाभ कम मिलते हैं। कथन 1 और 3 सही हैं।
मुख्य प्रश्न
“NSAP और ESI जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार के बावजूद भारत में कमजोर वर्गों में आर्थिक संकट बढ़ रहा है।” इस विरोधाभास के कारणों की आलोचनात्मक समीक्षा करें और भारत में सामाजिक सुरक्षा की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए सुधार सुझाएं। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – सामाजिक कल्याण और श्रम नीतियां
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में खनन और कृषि क्षेत्र में बड़ी असंगठित कार्यबल है, जहां सामाजिक सुरक्षा कवरेज सीमित है; NSAP और ESI के क्रियान्वयन में प्रशासनिक चुनौतियां हैं।
- मुख्य बिंदु: असंगठित रोजगार, सामाजिक सुरक्षा की कमियां, और झारखंड के सामाजिक-आर्थिक संदर्भ में विकेंद्रीकृत क्रियान्वयन सुधारों पर जोर।
भारत में सामाजिक सुरक्षा का संवैधानिक आधार क्या है?
Article 41 के निर्देशात्मक सिद्धांत के तहत राज्य को बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और विकलांगता के मामलों में सार्वजनिक सहायता प्रदान करनी होती है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने Article 21 के तहत जीवन के अधिकार में आजीविका के अधिकार को शामिल करते हुए सामाजिक सुरक्षा को संवैधानिक दायित्व माना है।
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के मुख्य घटक क्या हैं?
NSAP में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS), राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, और राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना शामिल हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे के बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांगों को सामाजिक पेंशन प्रदान करती हैं।
भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज कम क्यों है जबकि कई योजनाएं हैं?
कवरेज कम होने के कारण हैं असंगठित रोजगार का वर्चस्व (81% कार्यबल), लाभार्थी पहचान में त्रुटियां, लाभ का अपर्याप्त स्तर, और योजनाओं का अलगाव तथा समन्वय की कमी।
भारत की सामाजिक सुरक्षा की तुलना ब्राजील के Bolsa Família से कैसे होती है?
ब्राजील की Bolsa Família 14 मिलियन से अधिक परिवारों को $50 प्रति माह की शर्तीय नकद सहायता देती है, जिससे 2003-2014 के बीच गरीबी में 27% की कमी आई। भारत का NSAP सीमित लाभ (~₹200/माह) और कम शर्तीयता के कारण गरीबी उन्मूलन में सीमित प्रभाव डालता है।
Code on Social Security, 2020 की भूमिका क्या है?
Code on Social Security, 2020 ने कई श्रम कानूनों को समेकित करते हुए सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुव्यवस्थित करने, लाभ सुधारने और असंगठित तथा गिग श्रमिकों को संरक्षण देने का प्रयास किया है।