UPSC Foundation 2026 and JPSC Mentorship admissions open Daily Current Affairs
learnpro Civil Services
LearnPro Menu
Home Current Affairs All Articles
UPSC
UPSC NOTES
STATE PSC
OPTIONAL SUBJECTS
CURRENT AFFAIRS
DAILY EDITORIAL
COURSES
DOWNLOAD NOTES
PYQ Papers Mains Answer Writing Online Courses

Post

ड्रोन युद्ध के युग में भारत की सैन्य रणनीति का नया स्वरूप

ड्रोन युद्ध और भारत के रणनीतिक संदर्भ की भूमिका

2010 के दशक की शुरुआत से ही अनमंडेड एरियल व्हीकल्स (UAV) और ड्रोन स्वार्म ने आधुनिक युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। भारत के सामने इस बढ़ती चुनौती का सामना करने के लिए अपनी सैन्य रणनीति को पुनः परिभाषित करना जरूरी हो गया है। सिर्फ 2022 में ही भारत-पाक सीमा पर 300 से अधिक ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं दर्ज हुईं (Indian Army, 2023), जो इस खतरे की गंभीरता को दर्शाती हैं। विश्व स्तर पर रूस-यूक्रेन और नागोर्नो-काराबाख जैसे संघर्षों में ड्रोन और लूटरिंग म्यूनिशन ने पारंपरिक सेनाओं पर रणनीतिक और टैक्टिकल प्रभाव डाला है (SIPRI 2023; International Crisis Group 2021)। भारत की वर्तमान काउंटर-ड्रोन क्षमताएं, खासकर स्वार्म हमलों के खिलाफ, 60% से कम इंटरसेप्शन दर दिखाती हैं (DRDO 2023 आंतरिक मूल्यांकन), जिससे सिद्धांत, तकनीक और संस्थागत सुधार की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा, सुरक्षा चुनौतियां, आधुनिक युद्ध तकनीक
  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – UAV और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध
  • निबंध: उभरती सैन्य तकनीकें और भारत की रक्षा तैयारी

भारत में ड्रोन युद्ध के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

भारत में ड्रोन युद्ध नीति एक जटिल कानूनी व्यवस्था के तहत संचालित होती है। Defence of India Act, 1962 युद्धकालीन सुरक्षा उपायों को सक्षम बनाता है, जबकि Arms Act, 1959 UAV को हथियारबंद प्लेटफॉर्म के रूप में नियंत्रित करता है। ड्रोन से जुड़े साइबर ऑपरेशन Information Technology Act, 2000 के तहत आते हैं, विशेषकर सेक्शन 66A और संबंधित प्रावधान जो साइबर घुसपैठ से निपटते हैं। Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 स्वदेशी और विदेशी UAV तथा काउंटर-UAV सिस्टम की खरीद के लिए प्रक्रिया निर्धारित करता है। इसके अलावा, National Security Act, 1980 रोकथामात्मक हिरासत के लिए अधिकार देता है, जो ड्रोन से जुड़ी असममित खतरों से निपटने में मददगार है।

  • DRDO: स्वदेशी UAV और काउंटर-ड्रोन तकनीकों के लिए अनुसंधान और विकास का नेतृत्व करता है।
  • भारतीय वायु सेना (IAF): ड्रोन को वायु रक्षा और संचालन में शामिल करती है।
  • भारतीय नौसेना (IN): समुद्री ड्रोन निगरानी और काउंटरमेजर का उपयोग करती है।
  • इंडो-तिब्बती बॉर्डर पुलिस (ITBP): उच्च ऊंचाई सीमा निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करती है।
  • रक्षा मंत्रालय (MoD): नीति निर्धारण और खरीद की देखरेख करता है।
  • राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO): इलेक्ट्रॉनिक खुफिया और ड्रोन खतरे का विश्लेषण करता है।

ड्रोन और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं के आर्थिक पहलू

भारत का रक्षा बजट 2023-24 के लिए लगभग ₹5.94 लाख करोड़ (~$80 बिलियन) है, जिसमें करीब 15% राशि UAV और काउंटर-UAV सिस्टम सहित आधुनिकीकरण के लिए आवंटित है (MoD वार्षिक रिपोर्ट 2023)। वैश्विक स्तर पर सैन्य ड्रोन बाजार 2027 तक $41.4 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 14.3% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है (MarketsandMarkets 2023)। भारत की Defence Production Policy 2020 के तहत 2025 तक घरेलू UAV उत्पादन में 30% वृद्धि का लक्ष्य है, जो ‘Make in India’ पहल का हिस्सा है। इस आर्थिक विस्तार के कारण लागत-कुशल स्वदेशी समाधानों को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और काउंटर-ड्रोन क्षमताएं समय पर तैनात हो सकें।

वैश्विक संघर्षों से सीख और परिचालन चुनौतियां

हाल के युद्धों ने ड्रोन युद्ध की जटिलताओं को समझने में महत्वपूर्ण सबक दिए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में 1,200 से अधिक UAV तैनात किए गए, जहां ड्रोन ने 40% से अधिक बख्तरबंद वाहनों को नुकसान पहुंचाया (SIPRI 2023)। नागोर्नो-काराबाख में लूटरिंग म्यूनिशन ने 70% हताहतों का कारण बने, जिससे स्वायत्त ड्रोन हमलों की घातकता सामने आई (International Crisis Group 2021)। 2021 के गाजा संघर्ष में गैर-राज्यीय समूहों ने 200 से अधिक लक्षित हमलों के लिए वाणिज्यिक ड्रोन का इस्तेमाल किया, जो कम लागत वाले UAV की असममित खतरे को दर्शाता है (UN OCHA 2021)। भारत की स्वार्म हमलों के खिलाफ इंटरसेप्शन दर अभी भी 60% से कम है (DRDO 2023), जो एक गंभीर क्षमता अंतर को दर्शाता है।

  • स्वार्म संतृप्ति: 100 से अधिक ड्रोन के समन्वित हमले पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों को भारी दबाव में डाल देते हैं (Jane’s Defence Weekly 2023)।
  • कम लागत, उच्च प्रभाव: छोटे ड्रोन महंगे प्लेटफॉर्म पर असंगत नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • विखंडित सिद्धांत: भारत के पास वायु, भूमि, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध को जोड़ने वाला समेकित काउंटर-ड्रोन सिद्धांत नहीं है।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम इज़राइल की ड्रोन रक्षा प्रणाली

पहलू भारत इज़राइल
काउंटर-ड्रोन सिद्धांत विखंडित, बहु-डोमेन एकीकरण की ओर बढ़ रहा एकीकृत, बहु-स्तरीय AI, EW, मिसाइल ढाल के साथ
इंटरसेप्शन सफलता दर स्वार्म हमलों के खिलाफ 60% से कम (DRDO 2023) 2021 गाजा संघर्ष में 85% से अधिक (Iron Dome + EW)
तकनीकी आधार स्वदेशी R&D बढ़ रही है, उन्नत प्रणालियों के लिए आयात पर निर्भर उन्नत स्वदेशी तकनीक के साथ निरंतर उन्नयन
परिचालन समन्वय IAF, IN, ITBP के अलग-अलग कार्य, सीमित संयुक्त सिद्धांत वायु, भूमि, समुद्र और साइबर रक्षा का समेकित समन्वय
खरीद और बजट ₹5.94 लाख करोड़ बजट, 15% आधुनिकीकरण के लिए ड्रोन रक्षा के लिए उच्च बजट प्राथमिकता, तेज खरीद प्रक्रिया

रणनीतिक अंतराल और संस्थागत चुनौतियां

भारत की सबसे बड़ी कमी एक समेकित काउंटर-ड्रोन सिद्धांत का अभाव है जो विभिन्न डोमेनों की क्षमताओं को जोड़ सके। वर्तमान परिचालन प्रतिक्रियाएं सेवाओं और एजेंसियों में बिखरी हुई हैं, जिससे खतरे को जल्दी समाप्त करने में देरी होती है। AI-सक्षम उन्नत पहचान और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के समेकन की कमी स्वार्म हमलों के खिलाफ इंटरसेप्शन क्षमता को सीमित करती है। स्वदेशी R&D प्रगति पर है, लेकिन वैश्विक तकनीकी प्रवृत्तियों के अनुरूप इसे तेज करना होगा और आयात निर्भरता कम करनी होगी। DRDO, NTRO, IAF और ITBP जैसे अर्धसैनिक बलों के बीच समन्वय अभी भी अपर्याप्त है, जो वास्तविक समय में खतरे के मूल्यांकन और प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है।

आगे का रास्ता: ड्रोन युद्ध के लिए भारत की सैन्य रणनीति का पुनर्निर्माण

  • सिद्धांत विकास: वायु, भूमि, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं को जोड़ने वाला व्यापक बहु-डोमेन काउंटर-ड्रोन सिद्धांत तैयार करें।
  • तकनीकी समेकन: AI आधारित पहचान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और स्वचालित इंटरसेप्शन के साथ पुरानी वायु रक्षा प्रणालियों को अपग्रेड करें।
  • स्वदेशी नवाचार: DRDO नेतृत्व में R&D तेज करें और ‘Make in India’ के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करें ताकि किफायती UAV और काउंटर-UAV सिस्टम विकसित हो सकें।
  • एजेंसी समन्वय: ड्रोन खतरे के विश्लेषण और त्वरित परिचालन समन्वय के लिए IAF, IN, NTRO और अर्धसैनिक बलों के बीच एक केंद्रीकृत कमांड संरचना स्थापित करें।
  • खरीद सुधार: DPP 2020 के तहत खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाकर उन्नत काउंटर-ड्रोन तकनीकों की त्वरित तैनाती सुनिश्चित करें।
  • प्रशिक्षण और सिमुलेशन: स्वार्म हमलों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की स्थितियों का सिमुलेशन करते हुए संयुक्त अभ्यास बढ़ाएं ताकि परिचालन तत्परता मजबूत हो।

ड्रोन युद्ध और काउंटर-ड्रोन सिस्टम के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. लूटरिंग म्यूनिशन UAV का एक प्रकार है जो लक्ष्य क्षेत्र पर हमला करने से पहले मंडराता है।
  2. Defence Procurement Procedure 2020 काउंटर-ड्रोन सिस्टम की खरीद को कवर नहीं करता।
  3. भारत की ड्रोन स्वार्म हमलों के खिलाफ इंटरसेप्शन दर वर्तमान में 60% से कम है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि लूटरिंग म्यूनिशन ऐसे UAV होते हैं जो मंडराने के बाद हमला करते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि Defence Procurement Procedure 2020 UAV और काउंटर-UAV खरीद को स्पष्ट रूप से कवर करता है। कथन 3 DRDO के 2023 मूल्यांकन के अनुसार सही है।

भारत के ड्रोन युद्ध के कानूनी ढांचे के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. Arms Act, 1959 UAV सहित हथियारों को नियंत्रित करता है।
  2. Information Technology Act, 2000 ड्रोन साइबर ऑपरेशंस पर लागू प्रावधान शामिल करता है।
  3. National Security Act, 1980 ड्रोन के आयात को प्रतिबंधित करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि Arms Act UAV सहित हथियारों को नियंत्रित करता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि IT Act ड्रोन ऑपरेशन से जुड़ी साइबर अपराधों को कवर करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि National Security Act रोकथामात्मक हिरासत के लिए है, ड्रोन आयात को नियंत्रित नहीं करता।

मुख्य प्रश्न

ड्रोन और स्वार्म युद्ध से भारत की पारंपरिक सैन्य रणनीति को क्या चुनौतियां मिलती हैं? इस उभरती हुई चुनौती का सामना करने के लिए भारत को अपनी सिद्धांत, तकनीक और संस्थागत तंत्र में कैसे सुधार करना चाहिए? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – सुरक्षा और रक्षा
  • झारखंड का संदर्भ: झारखंड की संवेदनशील सीमा राज्यों के नजदीकता और अर्धसैनिक बलों की उपस्थिति ड्रोन निगरानी और काउंटर-ड्रोन तैयारियों को जरूरी बनाती है।
  • मुख्य बिंदु: CRPF और ITBP जैसे अर्धसैनिक बलों की भूमिका पर प्रकाश डालें जो झारखंड में ड्रोन निगरानी और सीमा सुरक्षा में लगे हैं; स्वदेशी तकनीक विकास का स्थानीय रक्षा निर्माण इकाइयों पर प्रभाव बताएं।
लूटरिंग म्यूनिशन क्या हैं और ये पारंपरिक UAV से कैसे अलग हैं?

लूटरिंग म्यूनिशन UAV ऐसे ड्रोन होते हैं जो लक्ष्य क्षेत्र पर लंबे समय तक मंडराते रहते हैं और फिर हमला करते हैं, जिससे निगरानी और हमले की क्षमता दोनों होती है। पारंपरिक UAV मुख्यतः टोही के लिए होते हैं, जबकि लूटरिंग म्यूनिशन सटीक हथियार के रूप में काम करते हैं।

भारत की ड्रोन स्वार्म हमलों के खिलाफ इंटरसेप्शन दर क्यों कम है?

भारत की इंटरसेप्शन क्षमता सीमित है क्योंकि सिद्धांत विखंडित हैं, AI और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का समेकन नहीं है, और पुरानी वायु रक्षा प्रणालियां स्वार्म हमलों के लिए अनुकूलित नहीं हैं (DRDO 2023)।

Defence Procurement Procedure 2020 ड्रोन सिस्टम की खरीद में कैसे मदद करता है?

DPP 2020 खरीद प्रक्रिया को सरल बनाता है, ‘Make in India’ को बढ़ावा देता है, स्वदेशी R&D को प्रोत्साहित करता है और UAV तथा काउंटर-UAV तकनीकों की त्वरित खरीद सुनिश्चित करता है।

इज़राइल की ड्रोन रक्षा प्रणाली से भारत क्या सीख सकता है?

इज़राइल की एकीकृत बहु-स्तरीय प्रणाली, जिसमें मिसाइल ढाल (Iron Dome), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और AI आधारित पहचान शामिल है, ने 2021 गाजा संघर्ष के दौरान 85% से अधिक इंटरसेप्शन हासिल किया, जो एक तकनीकी रूप से उन्नत और समेकित रणनीति की सफलता को दर्शाता है।

ड्रोन युद्ध की तैयारी में भारत के कौन-कौन से संस्थान महत्वपूर्ण हैं?

DRDO स्वदेशी R&D का नेतृत्व करता है; IAF और IN परिचालन तैनाती संभालते हैं; ITBP सीमा निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग करता है; NTRO इलेक्ट्रॉनिक खुफिया प्रदान करता है; MoD नीति और खरीद की देखरेख करता है।