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पंचायत प्रगति सूचकांक 2.0: विकेंद्रीकृत शासन और ग्रामीण विकास का मूल्यांकन

पंचायत प्रगति सूचकांक (PAI) 2.0 का परिचय

पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने 2024 में पंचायत प्रगति सूचकांक (PAI) 2.0 जारी किया है, जिसमें 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 707 जिलों की लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। यह सूचकांक पंचायत राज संस्थाओं (PRI) का मूल्यांकन 50 संकेतकों के आधार पर करता है, जो पांच मुख्य क्षेत्रों में बंटे हैं: सेवा वितरण, योजना और क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक समावेशन एवं लिंग समानता, और डिजिटल शासन। इस डेटा-आधारित ढांचे के माध्यम से पंचायतों के प्रदर्शन की तुलना की जाती है, शासन में कमियों की पहचान होती है और सुधार को प्रोत्साहित किया जाता है ताकि ग्रामीण विकास को मजबूत किया जा सके।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन – पंचायत राज संस्थाएं, विकेंद्रीकरण, ग्रामीण विकास
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पंचायतों का वित्तीय प्रबंधन
  • निबंध: भारत में विकेंद्रीकरण और जमीनी लोकतंत्र

पंचायतों के संवैधानिक और कानूनी ढांचे

पंचायती राज संस्थाओं का संवैधानिक आधार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243G में निहित है, जिसे 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत लागू किया गया था। यह अनुच्छेद पंचायतों को स्वशासन का अधिकार देता है और उनके कर्तव्य व शक्तियों का वितरण करता है। अनुच्छेद 243D अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करता है, जबकि अनुच्छेद 243E पंचायतों की कार्यकाल अवधि पांच वर्ष निर्धारित करता है। पंचायत (विशेष क्षेत्रों का विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान करता है, जो उनकी भूमि अधिकारों की रक्षा करता है, जैसा कि समथा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1997) सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी माना गया है। मॉडल पंचायत अधिनियम, 2019 पंचायत सुधारों के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और क्षमता निर्माण पर जोर दिया गया है।

  • अनुच्छेद 243G: पंचायतों के अधिकार और शक्तियां
  • अनुच्छेद 243D: पंचायतों में सीटों का आरक्षण
  • अनुच्छेद 243E: पंचायतों की अवधि
  • PESA 1996: अनुसूचित क्षेत्रों में शासन और आदिवासी अधिकार
  • मॉडल पंचायत अधिनियम 2019: पंचायत सुधारों के लिए दिशानिर्देश

पंचायतों में आर्थिक पहलू और वित्तीय प्रबंधन

15वीं वित्त आयोग ने वित्त वर्ष 2021-26 के लिए पंचायतों को 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो पंचायत राज संस्थाओं की वित्तीय भूमिका को दर्शाता है। मंत्रालय के अनुसार, 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट संचालित करती हैं। PAI 2.0 के वित्तीय प्रबंधन क्षेत्र का राष्ट्रीय औसत स्कोर 55 रहा, जो निधियों के कम उपयोग और प्रबंधन में कमियों को दर्शाता है। पंचायत स्तर पर बेहतर वित्तीय शासन ग्रामीण अवसंरचना विकास को तेज कर सकता है, जिसका प्रभाव ग्रामीण GDP पर पड़ता है, जो आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार देश के कुल GDP का लगभग 15-18% है।

  • 15वीं वित्त आयोग: पंचायतों के लिए 60,000 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2021-26)
  • सालाना पंचायत बजट: 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक (MoPR)
  • PAI 2.0 वित्तीय प्रबंधन औसत स्कोर: 55/100
  • ग्रामीण GDP हिस्सा: 15-18% राष्ट्रीय GDP (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)

संस्थागत संरचना और हितधारकों की भूमिका

पंचायती राज मंत्रालय पंचायत शासन का मुख्य नियंत्रण केंद्र है और PAI के क्रियान्वयन की निगरानी करता है। नीति आयोग डेटा विश्लेषण और नीतिगत सुझावों के माध्यम से पंचायत सुधारों में सहयोग करता है। राज्य स्तर पर पंचायत राज विभाग पंचायतों के संचालन और क्षमता विकास का काम संभालते हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) पंचायतों के वित्तीय लेखा-जोखा की जांच करता है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होती है। जमीनी स्तर पर ग्राम पंचायतें स्थानीय शासन और सेवा वितरण की प्राथमिक इकाइयां हैं, जिनका मूल्यांकन PAI 2.0 के तहत किया जाता है।

  • MoPR: नीति निर्माण और PAI क्रियान्वयन
  • नीति आयोग: डेटा विश्लेषण और सुधार सुझाव
  • राज्य पंचायत राज विभाग: राज्य स्तर पर प्रशासन और प्रशिक्षण
  • CAG: पंचायतों का वित्तीय लेखा-जोखा
  • ग्राम पंचायतें: स्थानीय शासन और सेवा वितरण

PAI 2.0 के प्रदर्शन के आंकड़े और विश्लेषण

PAI 2.0 पांच क्षेत्रों में 50 संकेतकों के आधार पर पंचायतों का मूल्यांकन करता है। केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य 75/100 से ऊपर अंक लेकर शीर्ष पर हैं, जो मजबूत शासन और सेवा वितरण को दर्शाते हैं। इसके विपरीत, बिहार और झारखंड ने 40 से नीचे अंक प्राप्त किए, जो प्रणालीगत चुनौतियों की ओर इशारा करता है। डिजिटल शासन क्षेत्र में e-पंचायत के अपनाने में PAI 1.0 (2019) की तुलना में 30% की वृद्धि हुई है, जो तकनीक के समावेशन में प्रगति दिखाता है। हालांकि, सामाजिक समावेशन के संकेतक बताते हैं कि केवल 45% पंचायतों में महिलाएं सरपंच हैं, जबकि अनुच्छेद 243D के तहत महिलाओं के लिए आरक्षण है, जो लिंग असमानता को दर्शाता है।

क्षेत्र राष्ट्रीय औसत अंक (100 में से) शीर्ष राज्य कम प्रदर्शन करने वाले राज्य
सेवा वितरण 68 केरल, तमिलनाडु बिहार, झारखंड
योजना और क्रियान्वयन 60 कर्नाटक, केरल बिहार, झारखंड
वित्तीय प्रबंधन 55 कर्नाटक, तमिलनाडु बिहार, झारखंड
सामाजिक समावेशन एवं लिंग 50 केरल, कर्नाटक बिहार, झारखंड
डिजिटल शासन 65 (PAI 1.0 से 30% वृद्धि) तमिलनाडु, केरल बिहार, झारखंड

तुलनात्मक दृष्टिकोण: भारत बनाम ब्राजील का सहभागी बजट मॉडल

भारत के पंचायत प्रणाली की तुलना ब्राजील के सहभागी बजटिंग मॉडल से की जा सकती है, जिसका विकास पोर्टो अलेग्रे में हुआ। 1990-2000 के दशक में इस मॉडल ने पारदर्शिता और नागरिक भागीदारी बढ़ाई, जिससे सार्वजनिक अवसंरचना खर्च की दक्षता में 20% की वृद्धि हुई (विश्व बैंक, 2018)। जबकि भारत का PAI 2.0 डेटा-आधारित शासन को बढ़ावा देता है, सहभागी बजटिंग को अपनाने से स्थानीय जवाबदेही और संसाधन आवंटन में सुधार संभव है।

विशेषता भारत (PAI 2.0) ब्राजील (पोर्टो अलेग्रे)
शासन मॉडल विकेंद्रीकृत पंचायत संस्थाएं और प्रदर्शन सूचकांक प्रत्यक्ष नागरिक भागीदारी के साथ सहभागी बजटिंग
नागरिक भागीदारी सीमित प्रत्यक्ष बजट भूमिका बजट निर्णयों में सक्रिय नागरिक सहभागिता
पारदर्शिता डिजिटल शासन (e-पंचायत) के जरिए सुधार सहभागी मंचों के माध्यम से उच्च पारदर्शिता
अवसंरचना खर्च पर प्रभाव मध्यम, क्षमता सीमाओं के कारण सीमित 1990-2000 में दक्षता में 20% वृद्धि

पहचानी गई कमियां और चुनौतियां

PAI 2.0 ने कई चुनौतियां उजागर की हैं: कई पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता कम है, फंड ट्रांसफर में देरी होती है, और योजना व क्रियान्वयन के लिए तकनीकी विशेषज्ञता सीमित है। संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद, कई पंचायतें क्षमता की कमी और निधियों के कम उपयोग से जूझ रही हैं। लिंग प्रतिनिधित्व भी कम है, जहां केवल 45% पंचायतों में महिलाएं सरपंच हैं। मौजूदा नीतिगत ढांचे में इन संरचनात्मक समस्याओं को पूरी तरह से हल करने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।

  • वित्तीय स्वायत्तता: कई पंचायतों में सीमित
  • फंड प्रवाह में देरी: परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन में बाधा
  • तकनीकी क्षमता: प्रभावी योजना के लिए अपर्याप्त
  • लिंग अंतर: आरक्षण के बावजूद केवल 45% महिला सरपंच

महत्त्व और आगे का रास्ता

PAI 2.0 पंचायतों के प्रदर्शन को मापने और सुधारों को प्रोत्साहित करने के लिए एक सटीक, तथ्य-आधारित उपकरण प्रदान करता है। वित्तीय प्रबंधन और क्षमता निर्माण को मजबूत करना जरूरी है ताकि निधियों का बेहतर उपयोग हो और सेवा वितरण सुधरे। सहभागी बजटिंग को अपनाने से पारदर्शिता और नागरिक सहभागिता बढ़ सकती है। डिजिटल शासन को बढ़ावा देना और लिंग असमानताओं को दूर करना ग्रामीण शासन को और लोकतांत्रिक बनाएगा। नीति का फोकस केवल फंड आवंटन से हटकर पंचायतों को स्वायत्तता, कौशल और जवाबदेही के तंत्र से लैस करने पर होना चाहिए।

  • वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाएं और फंड ट्रांसफर को सुगम बनाएं
  • तकनीकी क्षमता विकास और प्रशिक्षण में निवेश करें
  • नागरिक भागीदारी बढ़ाने के लिए सहभागी बजटिंग को बढ़ावा दें
  • डिजिटल शासन प्लेटफॉर्म और e-पंचायत को व्यापक बनाएं
  • लिंग आरक्षण प्रावधानों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करें

पंचायत प्रगति सूचकांक (PAI) 2.0 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. PAI 2.0 पांच क्षेत्रों में पंचायतों का मूल्यांकन करता है, जिनमें वित्तीय प्रबंधन और डिजिटल शासन शामिल हैं।
  2. अनुच्छेद 243D के तहत पंचायतों में केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण है, महिलाओं को शामिल नहीं किया गया है।
  3. PAI 2.0 ने अपनी पिछली संस्करण की तुलना में e-पंचायत के उपयोग में 30% वृद्धि दर्ज की है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि PAI 2.0 में वित्तीय प्रबंधन और डिजिटल शासन शामिल हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 243D अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करता है। कथन 3 सही है, जो e-पंचायत के उपयोग में 30% वृद्धि को दर्शाता है।

पंचायत (विशेष क्षेत्रों का विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. PESA भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों पर लागू होता है।
  2. सुप्रीम कोर्ट ने समथा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में PESA के तहत आदिवासी भूमि अधिकारों को मान्यता दी।
  3. PESA अनुसूचित क्षेत्रों को 73वें संशोधन के प्रावधानों से मुक्त करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि PESA केवल अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू होता है, सभी ग्रामीण क्षेत्रों पर नहीं। कथन 2 सही है; सुप्रीम कोर्ट ने समथा मामले में PESA के तहत आदिवासी भूमि अधिकारों को मान्यता दी। कथन 3 गलत है; PESA अनुसूचित क्षेत्रों को 73वें संशोधन से मुक्त नहीं करता बल्कि उसे पूरा करता है।

मेन प्रश्न

भारत में विकेंद्रीकृत शासन और ग्रामीण विकास को मजबूत करने में पंचायत प्रगति सूचकांक (PAI) 2.0 के महत्व का मूल्यांकन करें। इसके द्वारा पहचानी गई मुख्य चुनौतियों पर चर्चा करें और उन्हें दूर करने के लिए नीतिगत उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – शासन और ग्रामीण विकास
  • झारखंड कोण: झारखंड ने PAI 2.0 में 40 से कम अंक प्राप्त किए हैं, जो आदिवासी और ग्रामीण पंचायतों में शासन और वित्तीय प्रबंधन की चुनौतियों को दर्शाता है।
  • मेन प्वाइंटर: JPSC उत्तरों में PESA के तहत झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों, निधि उपयोग की समस्याओं और क्षमता विकास की आवश्यकता को उजागर करें।
पंचायत प्रगति सूचकांक (PAI) 2.0 क्या है?

PAI 2.0 पंचायत राज मंत्रालय द्वारा 2024 में जारी एक व्यापक प्रदर्शन सूचकांक है, जो 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों का 50 संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन करता है।

भारत में पंचायतों को कौन से संवैधानिक प्रावधान सशक्त बनाते हैं?

पंचायतों को संवैधानिक अधिकार अनुच्छेद 243G (स्वशासन), अनुच्छेद 243D (सीटों का आरक्षण), और अनुच्छेद 243E (कार्यकाल) के तहत प्राप्त हुए हैं, जो 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के द्वारा लागू हुए।

PAI 2.0 किन मुख्य क्षेत्रों में पंचायतों का मूल्यांकन करता है?

PAI 2.0 पंचायतों का मूल्यांकन सेवा वितरण, योजना और क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक समावेशन एवं लिंग, और डिजिटल शासन के क्षेत्रों में करता है।

PESA आदिवासी क्षेत्रों की किस तरह रक्षा करता है?

पंचायत (विशेष क्षेत्रों का विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विशेष शासन प्रावधान करता है, जिसमें आदिवासी भूमि अधिकार और स्वशासन शामिल हैं, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने समथा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1997) मामले में मान्यता दी है।

15वीं वित्त आयोग के अनुसार पंचायतों को कितनी वित्तीय सहायता मिली है?

15वीं वित्त आयोग ने वित्त वर्ष 2021-26 के लिए विकेंद्रीकृत ग्रामीण विकास के समर्थन में पंचायतों को 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।