UPSC Foundation 2026 and JPSC Mentorship admissions open Daily Current Affairs
learnpro Civil Services
LearnPro Menu
Home Current Affairs All Articles
UPSC
UPSC NOTES
STATE PSC
OPTIONAL SUBJECTS
CURRENT AFFAIRS
DAILY EDITORIAL
COURSES
DOWNLOAD NOTES
PYQ Papers Mains Answer Writing Online Courses

Post

जे. क्रेग वेंटर और मानव जीनोम का अनावरण: जीनोमिक्स व बायोटेक्नोलॉजी पर प्रभाव

जे. क्रेग वेंटर: मानव जीनोम की गुत्थी सुलझाने वाले

जे. क्रेग वेंटर, एक अग्रणी अमेरिकी आनुवंशिकीविद्, का 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने Celera Genomics के माध्यम से मानव जीनोम के निजी अनुक्रमण का नेतृत्व किया, जिसका पहला मसौदा 2001 में प्रकाशित हुआ और 2007 तक पूरा हुआ। उनके काम ने पब्लिक ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट की तुलना में अनुक्रमण की अवधि को दशक से घटाकर कुछ वर्षों तक सीमित कर दिया (Nature, 2001; Science, 2007)। वेंटर के तरीके में शॉटगन अनुक्रमण और कम्प्यूटेशनल तकनीकों का इस्तेमाल हुआ, जिससे लागत लगभग 3 बिलियन डॉलर से घटकर 300 मिलियन डॉलर हुई।

वेंटर के योगदान ने जीनोमिक्स की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव लाया। तेज जीनोम अनुक्रमण के कारण व्यक्तिगत चिकित्सा, सिंथेटिक बायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी नवाचारों का मार्ग प्रशस्त हुआ।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – जीनोमिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य नवाचार
  • GS पेपर 2: शासन – बायोटेक्नोलॉजी नीति, भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार
  • निबंध: वैज्ञानिक नवाचार का स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

वैज्ञानिक नवाचार और जीनोमिक तकनीकें

वेंटर की Celera Genomics ने पूरे जीनोम का शॉटगन अनुक्रमण पेश किया, जो सार्वजनिक प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो रहे धीमे पदानुक्रमित तरीकों से तेज था। इस नवाचार ने अनुक्रमण की अवधि और लागत दोनों को कम किया, जिससे बड़े पैमाने पर जीनोमिक डेटा तैयार करना संभव हुआ। 2001 में उनके दल द्वारा प्रकाशित मानव जीनोम मसौदा जीनोमिक्स में मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने जीन कार्य, रोग संबंध और दवा विकास के शोध को बढ़ावा दिया।

  • शॉटगन अनुक्रमण में डीएनए को यादृच्छिक भागों में तोड़ा जाता है और कम्प्यूटेशनल रूप से जोड़ा जाता है, जिससे गति बढ़ती है।
  • वेंटर का निजी वित्तपोषण मॉडल बड़े वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स में लागत-कुशलता और प्रतिस्पर्धा के फायदे दिखाता है।
  • 2010 में उनके द्वारा बनाया गया सिंथेटिक जीनोम सिंथेटिक बायोलॉजी का मार्गदर्शक बना, जो वैश्विक बाजार को 2028 तक 34 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की प्रेरणा देता है (MarketsandMarkets 2024)।

भारत में कानूनी और नियामक ढांचा

भारत का बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र जीनोमिक अनुसंधान और उत्पादों के लिए कई कानूनी नियमों के तहत काम करता है। Indian Patent Act, 1970 (2005 संशोधन) की धारा 3(d) और 3(j) प्राकृतिक जीनोमिक अनुक्रमों पर पेटेंट नहीं देती, लेकिन बायोटेक्नोलॉजी आविष्कारों को अनुमति देती है। Biological Diversity Act, 2002 आनुवंशिक संसाधनों की पहुंच, लाभ साझा करने और संरक्षण को नियंत्रित करता है। Drugs and Cosmetics Act, 1940 जीनोमिक अनुसंधान से बने बायोफार्मास्यूटिकल्स की सुरक्षा, प्रभावकारिता और गुणवत्ता की गारंटी देता है।

  • धारा 3(d) केवल खोजों पर पेटेंट रोकती है, जिससे प्राकृतिक जीन पर एकाधिकार नहीं बनता।
  • धारा 3(j) प्राकृतिक रूप में पौधों और जानवरों को पेटेंट से बाहर रखती है।
  • Biological Diversity Act आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग के लिए पूर्व जानकारी और न्यायसंगत लाभ वितरण सुनिश्चित करता है।

जीनोमिक्स और बायोटेक्नोलॉजी का आर्थिक प्रभाव

वैश्विक जीनोमिक्स बाजार 2023 में 23.5 बिलियन डॉलर का था, और 2030 तक 15.5% की वार्षिक वृद्धि दर की उम्मीद है (Grand View Research 2024)। भारत के बायोटेक सेक्टर ने 2023 में 3.6 बिलियन डॉलर के निवेश आकर्षित किए (DBT वार्षिक रिपोर्ट 2023-24)। भारत में व्यक्तिगत चिकित्सा बाजार 2027 तक 1.5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है (Frost & Sullivan 2023), जो जीनोमिक डेटा के डायग्नोस्टिक्स और उपचार में उपयोग से बढ़ रहा है।

  • 2018-2023 के बीच भारत की जीनोम अनुक्रमण क्षमता में 250% की वृद्धि हुई है, जो सरकारी समर्थन को दर्शाता है।
  • जीनोमिक डेटा ने भारत में दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों के निदान की सटीकता में 20% सुधार किया है (ICMR, 2023)।
  • राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन ने 2017-2024 के लिए जीनोमिक्स-आधारित दवा खोज के लिए 1,500 करोड़ रुपये (~200 मिलियन डॉलर) आवंटित किए हैं।

भारत के प्रमुख जीनोमिक संस्थान

भारत का जीनोमिक अनुसंधान तंत्र कई प्रमुख संस्थानों से सुसज्जित है जो नवाचार और नीति निर्धारण में अग्रणी हैं। J Craig Venter Institute (JCVI) विश्व स्तर पर सिंथेटिक बायोलॉजी और जीनोमिक्स में अग्रणी है। देश में Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) जीनोमिक अनुसंधान करता है। Department of Biotechnology (DBT) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत बायोटेक नीति बनाता है और अनुसंधान को वित्तपोषित करता है। Indian Council of Medical Research (ICMR) चिकित्सीय जीनोमिक्स पर केंद्रित है। National Institute of Biomedical Genomics (NIBMG) मानव जीनोम अनुसंधान और क्षमता निर्माण में विशेषज्ञ है।

  • DBT की पहल ने भारत की अनुक्रमण संरचना और बायोइन्फॉर्मेटिक्स क्षमता को बढ़ाया है।
  • ICMR का जीनोमिक डेटा एकीकरण नैदानिक और महामारी विज्ञान अध्ययनों को सुदृढ़ करता है।
  • NIBMG जीनोमिक चिकित्सा और नीति क्रियान्वयन के लिए विशेषज्ञ तैयार करता है।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम अमेरिका में जीनोमिक्स का समावेश

पहलू अमेरिका भारत
मुख्य पहल Precision Medicine Initiative (2015), 215 मिलियन डॉलर बजट राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन, जीनोमिक्स-आधारित दवा खोज के लिए 1,500 करोड़ रुपये आवंटन
जनसंख्या जीनोमिक्स 1 मिलियन से अधिक प्रतिभागी, विविध डेटा-आधारित स्वास्थ्य सेवा व्यापक राष्ट्रीय जीनोमिक डेटा नीति का अभाव; बड़े पैमाने पर जनसंख्या जीनोमिक्स सीमित
स्वास्थ्य सेवा समावेश दवा विकास तेज, व्यक्तिगत उपचार प्रोटोकॉल व्यापक रूप से अपनाए गए व्यक्तिगत चिकित्सा बाजार उभर रहा है (~1.5 बिलियन डॉलर 2027 तक), नैदानिक समावेश धीमा
डेटा नीति गोपनीयता, पहुंच और नैतिकता का संतुलन बनाने वाले मजबूत ढांचे एकीकृत जीनोमिक डेटा शासन का अभाव, अंतरराष्ट्रीय सहयोग सीमित

भारत के जीनोमिक इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण कमियां

भारत की सबसे बड़ी कमी एक व्यापक राष्ट्रीय जीनोमिक डेटा नीति का अभाव है जो गोपनीयता, नैतिक उपयोग और समतावादी पहुंच को संतुलित करे। यह कमी बड़े पैमाने पर जनसंख्या जीनोमिक्स प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय शोध साझेदारियों को रोकती है। साथ ही, बुनियादी ढांचे और कुशल मानव संसाधन की कमी जीनोमिक डेटा के चिकित्सीय उपयोग में बाधा डालती है। बिखरे हुए नियामक ढांचे नवाचार और वाणिज्यिकरण में भी चुनौतियां पैदा करते हैं।

  • वैश्विक मानकों के अनुरूप जीनोमिक डेटा सुरक्षा कानूनों की आवश्यकता।
  • बायोइन्फॉर्मेटिक्स और चिकित्सीय जीनोमिक्स कार्यबल का विस्तार।
  • जीनोमिक-आधारित उपचार के लिए नियामक मंजूरी प्रक्रिया का सरलीकरण।

महत्व और आगे का रास्ता

जे. क्रेग वेंटर का काम दर्शाता है कि कैसे वैज्ञानिक नवाचार स्वास्थ्य सेवा और बायोटेक्नोलॉजी को बदल सकता है। भारत को इस विरासत का लाभ उठाकर अपने जीनोमिक अनुसंधान ढांचे को मजबूत करना चाहिए, व्यापक डेटा नीतियां बनानी चाहिए और जीनोमिक्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य में शामिल करना चाहिए। सार्वजनिक-निजी साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग इस प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। शिक्षा और नियामक स्पष्टता में निवेश से भारत की वैश्विक बायोटेक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

  • राष्ट्रीय जीनोमिक डेटा नीति बनाएं जो गोपनीयता, नैतिकता और समतावादी पहुंच सुनिश्चित करे।
  • देशभर में अनुक्रमण संरचना और बायोइन्फॉर्मेटिक्स क्षमता बढ़ाएं।
  • जीनोमिक्स को नैदानिक उपयोग से जोड़ने वाले अनुवादात्मक शोध को प्रोत्साहित करें।
  • वेंटर के नवाचार-प्रेरित मॉडल पर आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी को बढ़ावा दें।

जे. क्रेग वेंटर के जीनोमिक्स में योगदान के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. उन्होंने मानव जीनोम का पहला अनुक्रमण सार्वजनिक प्रोजेक्ट के तहत किया।
  2. उनके निजी प्रयास ने जीनोम अनुक्रमण की लागत और समय को काफी कम किया।
  3. उन्होंने 2010 में पहला सिंथेटिक जीनोम बनाकर सिंथेटिक बायोलॉजी की शुरुआत की।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि वेंटर सार्वजनिक प्रोजेक्ट नहीं, निजी Celera Genomics का नेतृत्व करते थे। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि उन्होंने लागत और समय घटाया और सिंथेटिक बायोलॉजी की शुरुआत की।

भारत के जीनोमिक्स पर कानूनी ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Indian Patent Act, 1970 प्राकृतिक जीनोमिक अनुक्रमों के पेटेंट की अनुमति देता है।
  2. Biological Diversity Act, 2002 आनुवंशिक संसाधनों की पहुंच और लाभ साझा करने को नियंत्रित करता है।
  3. Drugs and Cosmetics Act, 1940 जीनोमिक अनुसंधान से बने बायोफार्मास्यूटिकल उत्पादों को नियंत्रित करता है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि Indian Patent Act प्राकृतिक जीनोमिक अनुक्रमों को पेटेंट योग्य नहीं मानता। कथन 2 और 3 सही हैं।

मेन प्रश्न

जे. क्रेग वेंटर के कार्यों ने वैश्विक स्तर पर जीनोमिक्स और बायोटेक्नोलॉजी के विकास को कैसे प्रभावित किया? भारत इन प्रगति का लाभ उठाकर अपने स्वास्थ्य और बायोटेक क्षेत्र को कैसे मजबूत कर सकता है?

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, बायोटेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य नवाचार
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के उभरते बायोटेक हब और अनुसंधान संस्थान स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए जीनोमिक तकनीकों से लाभान्वित हो सकते हैं।
  • मेन पॉइंटर: राज्य स्तर पर बायोटेक अवसंरचना, जनजातीय स्वास्थ्य में जीनोमिक चिकित्सा की संभावनाएं और नीति समर्थन पर उत्तर तैयार करें।
जे. क्रेग वेंटर कौन थे और उनका मुख्य योगदान क्या था?

जे. क्रेग वेंटर एक अमेरिकी आनुवंशिकीविद् थे जिन्होंने Celera Genomics के निजी प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया, जिसने 2001 में मानव जीनोम का मसौदा पहली बार प्रकाशित किया और अनुक्रमण की गति और लागत को काफी कम किया।

Indian Patent Act की धारा 3(d) और 3(j) जीनोमिक्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

धारा 3(d) और 3(j) प्राकृतिक जीनोमिक अनुक्रमों और जैविक सामग्री को उनके प्राकृतिक रूप में पेटेंट से रोकती हैं, जिससे केवल उपयोगिता में सुधार वाले आविष्कारों को पेटेंट दिया जाता है।

हाल ही में भारत की जीनोम अनुक्रमण क्षमता में क्या बदलाव आया है?

2018 से 2023 के बीच भारत की जीनोम अनुक्रमण क्षमता में 250% की वृद्धि हुई है, जो Department of Biotechnology की सरकारी पहलों की वजह से संभव हुआ।

भारत के जीनोमिक इकोसिस्टम के मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

भारत में व्यापक राष्ट्रीय जीनोमिक डेटा नीति का अभाव, बुनियादी ढांचे और कुशल मानव संसाधन की कमी, तथा बिखरे हुए नियामक ढांचे बड़े पैमाने पर जीनोमिक समावेशन में बाधा हैं।

अमेरिका के Precision Medicine Initiative की तुलना भारत की जीनोमिक पहलों से कैसे की जा सकती है?

अमेरिका की पहल 2015 में शुरू हुई, 215 मिलियन डॉलर के बजट के साथ 1 मिलियन से अधिक प्रतिभागियों को शामिल किया, जिससे व्यापक स्वास्थ्य सेवा समावेशन हुआ, जबकि भारत की पहल अभी प्रारंभिक स्तर पर है और नीति व जनसंख्या जीनोमिक्स सीमित है।

आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई