परिचय: रुपया गिरावट और ‘फ्रेगाइल फाइव’ का संदर्भ
2013 में भारत को ‘फ्रेगाइल फाइव’ उभरते बाजारों में से एक माना गया था, जो अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि के बीच पूंजी निकासी के लिए संवेदनशील था। हाल ही में 2022-23 में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 7% गिर चुका है, जिससे 2013 के मुद्रा संकट के दोहराव की चिंता बढ़ी है। यह गिरावट कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक तरलता में तंगी जैसे बाहरी दबावों के साथ मेल खाती है। हालांकि, 2013 के बाद भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक नींव और नीतिगत ढांचे में सुधार हुआ है, जिसने रुपया अस्थिरता की वर्तमान स्थिति को प्रभावित किया है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था — मुद्रा बाजार, विदेशी मुद्रा प्रबंधन, मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता
- GS पेपर 3: बाहरी क्षेत्र — भुगतान संतुलन, पूंजी प्रवाह और विदेशी मुद्रा भंडार
- निबंध: वैश्विक आर्थिक झटकों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
रुपये पर कानूनी और संस्थागत ढांचा
Foreign Exchange Management Act, 1999 (FEMA) विदेशी मुद्रा लेनदेन को नियंत्रित करता है और Reserve Bank of India (RBI) को सेक्शन 10(4) के तहत विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप का अधिकार देता है। RBI Act, 1934 मौद्रिक नीति संचालन के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है, जिसमें मुद्रा स्थिरता के उपाय शामिल हैं। जबकि संविधान मुद्रा प्रबंधन को सीधे नहीं संबोधित करता, आर्टिकल 292 और 266 सरकारी उधारी और समेकित निधियों को नियंत्रित करते हैं, जो वित्तीय और मौद्रिक समन्वय तथा मुद्रा स्थिरता को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।
- FEMA सेक्शन 10(4): RBI को विनिमय दर स्थिरता बनाए रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार के संचालन को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
- RBI Act, 1934: मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण और मौद्रिक नियंत्रण के लिए मौद्रिक नीति समिति (MPC) का ढांचा स्थापित करता है।
- आर्टिकल 292 और 266: सरकारी उधारी और निधि प्रबंधन के संवैधानिक प्रावधान, जो वित्तीय घाटा और मौद्रिक नीति को प्रभावित करते हैं।
आर्थिक संकेतक जो वर्तमान रुपया संवेदनशीलता दर्शाते हैं
2022-23 में रुपया लगभग 7% गिरा है, जो Q3 FY23 में GDP के 2.9% के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) के बढ़ने से जुड़ा है। यह CAD कच्चे तेल के आयात बिल में वृद्धि से प्रेरित है, जो FY22 में $210 बिलियन तक पहुंच गया। विदेशी मुद्रा भंडार मई 2023 तक $572 बिलियन मजबूत बने हुए हैं, जो बाहरी झटकों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं। हालांकि, 2022 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में $10 बिलियन की निकासी वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के प्रति संवेदनशीलता दर्शाती है। मुद्रास्फीति 2022-23 में औसतन 6.5% रही, जो RBI के लक्ष्य से ऊपर है, जबकि FY24 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 6.1% है, जिससे मौद्रिक नीति के निर्णय जटिल हो गए हैं।
- रुपया गिरावट: 2022-23 में USD के मुकाबले लगभग 7% (RBI वार्षिक रिपोर्ट 2023)
- करंट अकाउंट डेफिसिट: Q3 FY23 में GDP का 2.9% (RBI बुलेटिन, मार्च 2023)
- कच्चे तेल आयात बिल: FY22 में $210 बिलियन (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय)
- विदेशी मुद्रा भंडार: मई 2023 तक $572 बिलियन (RBI साप्ताहिक सांख्यिकी)
- FPI निकासी: 2022 में $10 बिलियन (SEBI रिपोर्ट 2023)
- मुद्रास्फीति: 2022-23 में औसतन 6.5% (CPI, MOSPI)
- GDP वृद्धि अनुमान: FY24 के लिए 6.1% (IMF वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक, अप्रैल 2023)
रुपया अस्थिरता प्रबंधन में प्रमुख संस्थानों की भूमिका
Reserve Bank of India मौद्रिक नीति और विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप के माध्यम से रुपया स्थिरता बनाए रखने का काम करता है। Securities and Exchange Board of India (SEBI) विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को नियंत्रित करता है, जो पूंजी खाते की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। वित्त मंत्रालय वित्तीय नीति और बाहरी ऋण प्रबंधन की देखरेख करता है, जो निवेशकों के विश्वास को प्रभावित करता है। International Monetary Fund (IMF) मैक्रोइकॉनॉमिक आकलन और नीति सलाह देता है, जो भारत की बाहरी क्षेत्र रणनीतियों को आकार देता है।
- RBI: FEMA और RBI Act के तहत मौद्रिक नीति उपकरण और विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप का उपयोग करता है।
- SEBI: पूंजी प्रवाह में अचानक उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की निगरानी और नियंत्रण करता है।
- वित्त मंत्रालय: वित्तीय नीति का समन्वय करता है और बाहरी ऋण प्रबंधन के माध्यम से मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता को समर्थन देता है।
- IMF: वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण और नीति सलाह प्रदान करता है जो भारत के बाहरी क्षेत्र प्रबंधन को प्रभावित करता है।
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत 2013 बनाम वर्तमान स्थिति और तुर्की 2022
| पहलू | भारत 2013 | भारत 2022-23 | तुर्की 2022 |
|---|---|---|---|
| रुपया/मुद्रा depreciation | पूंजी निकासी के बीच लगभग 20% गिरावट | लगभग 7% गिरावट, अधिक नियंत्रित | लीरा 40% से अधिक गिरा |
| करंट अकाउंट डेफिसिट | GDP का लगभग 4.8%, उच्च बाहरी संवेदनशीलता | GDP का 2.9%, सुधार हुआ लेकिन अभी भी महत्वपूर्ण | GDP का लगभग 5%, उच्च बाहरी असंतुलन |
| मुद्रास्फीति | लगभग 10%, कम औपचारिक लक्ष्य निर्धारण | 6.5%, MPC के तहत मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण | लगभग 50%, नियंत्रण से बाहर मुद्रास्फीति |
| विदेशी मुद्रा भंडार | लगभग $280 बिलियन, सीमित सुरक्षा | लगभग $572 बिलियन, मजबूत सुरक्षा | लगभग $100 बिलियन, अपर्याप्त |
| मौद्रिक नीति विश्वसनीयता | उभरती हुई, औपचारिक मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण नहीं | 2016 से औपचारिक MPC के साथ मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण | कमजोर, राजनीतिक प्रभाव वाला |
भारत की वर्तमान बाहरी संवेदनशीलता में महत्वपूर्ण कमियां
मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार के बावजूद, भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता इसे मूल्य झटकों के लिए खुला रखती है, जो CAD और रुपया स्थिरता को प्रभावित करता है। पूंजी प्रवाह अस्थिर हैं और वैश्विक जोखिम भावना में बदलाव के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं। ऊर्जा विविधीकरण और निर्यात प्रतिस्पर्धा में संरचनात्मक सुधार धीमे हैं, जिससे बाहरी झटकों के खिलाफ संरक्षण के उपाय सीमित हैं। ये कमियां बेहतर मैक्रोइकॉनॉमिक सुरक्षा के बावजूद रुपया अस्थिरता का जोखिम बनाए रखती हैं।
- कच्चे तेल आयात पर उच्च निर्भरता (~80% मांग आयात से पूरी) CAD संवेदनशीलता बढ़ाती है।
- पूंजी प्रवाह वैश्विक तंगी के बीच अचानक पलटाव के प्रति संवेदनशील हैं।
- निर्यातकों और आयातकों के लिए सीमित हेजिंग उपकरण विदेशी मुद्रा जोखिम बढ़ाते हैं।
- ऊर्जा और निर्यात क्षेत्रों में देरी से हो रहे संरचनात्मक सुधार बाहरी मजबूती को सीमित करते हैं।
आगे का रास्ता: रुपया स्थिरता मजबूत करने के लिए नीतिगत उपाय
- ऊर्जा संक्रमण और विविधीकरण को तेज करें ताकि कच्चे तेल आयात निर्भरता कम हो सके।
- विदेशी मुद्रा बाजार की तरलता बढ़ाएं और कॉर्पोरेट्स के लिए हेजिंग उपकरण विकसित करें।
- मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण और मौद्रिक नीति की पारदर्शिता MPC के माध्यम से बनाए रखें।
- अचानक FPI अस्थिरता को कम करने के लिए पूंजी प्रवाह प्रबंधन ढांचे को मजबूत करें।
- करंट अकाउंट संतुलन सुधारने के लिए निर्यात विविधीकरण को प्रोत्साहित करें।
Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- FEMA RBI को सेक्शन 10(4) के तहत विदेशी मुद्रा बाजार नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
- FEMA ने विदेशी मुद्रा नियंत्रणों को उदार बनाने के लिए Foreign Exchange Regulation Act (FERA) को प्रतिस्थापित किया।
- FEMA एक संवैधानिक अधिनियम है जो भारतीय संविधान के आर्टिकल 292 के तहत बनाया गया है।
इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि FEMA सेक्शन 10(4) RBI को विदेशी मुद्रा बाजार नियंत्रित करने का अधिकार देता है। कथन 2 भी सही है; FEMA ने FERA को प्रतिस्थापित कर विदेशी मुद्रा नियंत्रणों को उदार बनाया। कथन 3 गलत है; FEMA एक संसदीय अधिनियम है, संवैधानिक अधिनियम नहीं।
भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- CAD में सरकार का वित्तीय घाटा शामिल होता है।
- CAD व्यापार संतुलन और विदेश से आय से प्रभावित होता है।
- यदि CAD अस्थिर पूंजी प्रवाह से वित्तपोषित हो, तो यह मुद्रा depreciation का कारण बन सकता है।
इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है; वित्तीय घाटा CAD से अलग होता है। कथन 2 सही है क्योंकि CAD में व्यापार संतुलन और नेट आय शामिल होती है। कथन 3 भी सही है; अस्थिर पूंजी प्रवाह से वित्तपोषित उच्च CAD मुद्रा depreciation का कारण बन सकता है।
मेन प्रश्न
वर्तमान में भारतीय रुपया की depreciation किस हद तक 2013 के ‘फ्रेगाइल फाइव’ संवेदनशीलता को दर्शाती है, इस पर चर्चा करें। अपने उत्तर में मुद्रा जोखिम कम करने में मैक्रोइकॉनॉमिक आधार और संस्थागत ढांचे की भूमिका का विश्लेषण करें।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – भारतीय अर्थव्यवस्था और आर्थिक विकास
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज आधारित निर्यात और ऊर्जा खपत पैटर्न विदेशी मुद्रा अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों के झटकों के प्रति राज्य स्तर की संवेदनशीलता को प्रभावित करते हैं।
- मेन पॉइंटर: उत्तरों में यह बताएं कि रुपया अस्थिरता झारखंड के औद्योगिक क्षेत्रों और राज्य की वित्तीय स्थिति को आयात लागत और पूंजी प्रवाह के माध्यम से कैसे प्रभावित करती है।
2013 में भारत में ‘फ्रेगाइल फाइव’ संकट की शुरुआत क्या कारण बनी?
2013 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के टेपरिंग की घोषणा से उभरते बाजारों से पूंजी निकासी शुरू हुई, जिसमें भारत भी शामिल था। इससे भारत के उच्च करंट अकाउंट डेफिसिट और अस्थिर पोर्टफोलियो प्रवाह की कमजोरी उजागर हुई, जिससे रुपया तेजी से गिरा।
FEMA के तहत RBI विदेशी मुद्रा बाजार में कैसे हस्तक्षेप करता है?
FEMA के सेक्शन 10(4) के तहत RBI विदेशी मुद्रा खरीद या बिक्री कर विनिमय दर की अस्थिरता को नियंत्रित करता है और विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग बाजार को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए करता है।
करंट अकाउंट डेफिसिट और वित्तीय घाटा में क्या अंतर है?
करंट अकाउंट डेफिसिट देश की विदेशी मुद्रा आय और भुगतान के बीच अंतर को मापता है, जिसमें व्यापार, सेवा और आय शामिल हैं। वित्तीय घाटा सरकार के कुल खर्च और राजस्व के बीच अंतर होता है। ये दोनों अलग-अलग आर्थिक संकेतक हैं।
भारत की कच्चे तेल आयात निर्भरता रुपया स्थिरता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 80% मांग आयात करता है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में उछाल से CAD प्रभावित होता है। बढ़ता आयात बिल CAD को बढ़ाता है और रुपया पर दबाव डालता है।
मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण मुद्रा अस्थिरता प्रबंधन में कैसे मदद करता है?
RBI की मौद्रिक नीति समिति द्वारा मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण से मुद्रास्फीति की अपेक्षाएं स्थिर होती हैं, जिससे मौद्रिक नीति की विश्वसनीयता बढ़ती है। स्थिर मुद्रास्फीति निवेशकों के लिए अनिश्चितता कम करती है और विनिमय दर स्थिरता में मदद करती है।