परिचय: भारत की अर्थव्यवस्था में भ्रमित करने वाला गोल्डीलॉक्स दौर
2021 से लेकर 2023 की शुरुआत तक, भारत को एक ऐसे ‘गोल्डीलॉक्स दौर’ में माना गया जहाँ मजबूत GDP वृद्धि के साथ मुद्रास्फीति भी नियंत्रण में थी। Economic Survey 2023 के अनुसार, FY22 में 8.7% रही GDP वृद्धि FY23 में घटकर 6.1% रह गई, जबकि 2023 में औसत मुद्रास्फीति 6.5% रही, जो RBI के 4% लक्ष्य से अधिक थी। शुरुआती उम्मीदों के बावजूद, यह दौर संरचनात्मक कमजोरियों और बाहरी झटकों की वजह से कमजोर आर्थिक सुधार में बदल गया, न कि स्थिरता में।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था — मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता, मुद्रास्फीति नियंत्रण, राजकोषीय नीति
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था — RBI की भूमिका और मौद्रिक नीति
- निबंध: भारत में आर्थिक विकास और चुनौतियाँ
गोल्डीलॉक्स कथानक को कमजोर करने वाले मुख्य मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतक
FY22 से FY23 तक भारत के मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़े गोल्डीलॉक्स की आदर्श स्थिति से हटकर दिखाते हैं। राजकोषीय घाटा FY23 में GDP का 6.4% तक बढ़ गया, जो Fiscal Responsibility and Budget Management Act, 2003 (FRBM Act) के 4.5% लक्ष्य से अधिक है, यह राजकोषीय अस्थिरता का संकेत है। साथ ही, Q4 FY23 में निर्यात 1.5% घट गया (DGCI&S), जो पहले के विकास रुझान के उलट है। बेरोजगारी दर 2023 की शुरुआत में 7.8% तक बढ़ गई (CMIE), और निजी निवेश की वृद्धि भी 3.2% पर सीमित रही (RBI Annual Report 2023), जो मांग और निवेश विश्वास की कमजोरी दर्शाता है।
- GDP वृद्धि: FY22 में 8.7% से घटकर FY23 में 6.1% (Economic Survey 2023)
- मुद्रास्फीति: 2023 में औसत CPI मुद्रास्फीति 6.5%, RBI के 4% लक्ष्य से अधिक (MoSPI)
- राजकोषीय घाटा: FY23 में GDP का 6.4%, FRBM Act के 4.5% लक्ष्य से अधिक (Union Budget 2023-24)
- निर्यात: Q4 FY23 में 1.5% की गिरावट (DGCI&S)
- बेरोजगारी: 2023 की शुरुआत में 7.8% (CMIE)
- निजी निवेश: FY23 में 3.2% की धीमी वृद्धि (RBI Annual Report 2023)
आर्थिक स्थिरता के लिए संस्थागत ढांचा
भारतीय रिजर्व बैंक को Reserve Bank of India Act, 1934 की Sections 17 और 18 के तहत मौद्रिक स्थिरता बनाए रखने और मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए नीतिगत दरों व तरलता प्रबंधन के माध्यम से काम करना होता है। वित्त मंत्रालय, संविधान के Article 112 (वार्षिक वित्तीय विवरण) के तहत राजकोषीय नीति बनाता है, जिसका लक्ष्य FRBM Act के लक्ष्यों का पालन करना होता है। Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (Sections 7 और 10) कॉरपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया को सुनिश्चित करता है, जो वित्तीय क्षेत्र की सेहत के लिए जरूरी है। हालांकि, इन संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी ने बाहरी झटकों के बीच प्रभावी नीति क्रियान्वयन को बाधित किया है।
- RBI: मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति नियंत्रण (RBI Act 1934, Sections 17,18)
- वित्त मंत्रालय: राजकोषीय नीति निर्माण (Article 112, Constitution)
- FRBM Act 2003: राजकोषीय घाटा और कर्ज के लक्ष्य (Sections 3 और 4)
- SEBI: पूंजी बाजार विनियमन
- IBC 2016: कॉरपोरेट दिवालियापन समाधान (Sections 7 और 10)
- नीति आयोग: संरचनात्मक सुधारों पर नीति सलाह
- CSO: आधिकारिक आर्थिक आंकड़े प्रदान करता है
आर्थिक मजबूती को सीमित करने वाली संरचनात्मक कमजोरियां
भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग 80% रोजगार अनौपचारिक क्षेत्र में होने के कारण मौद्रिक नीति का प्रभाव सीमित होता है और निवेश की वृद्धि धीमी रहती है। श्रम कानूनों और भूमि अधिग्रहण में अपर्याप्त सुधार औपचारिक क्षेत्र के विस्तार और पूंजी निर्माण को रोकते हैं। ये संरचनात्मक बाधाएं वस्तु मूल्य अस्थिरता और वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव जैसे बाहरी झटकों के प्रभाव को बढ़ा देती हैं, जिससे GDP और मुद्रास्फीति के अच्छे आंकड़ों के बावजूद स्थिरता कमजोर पड़ती है।
- अनौपचारिक क्षेत्र: रोजगार में प्रमुख, औपचारिक क्रेडिट और निवेश तक पहुंच सीमित
- श्रम बाजार: कठोर नियम श्रम गतिशीलता और उत्पादकता में बाधा
- भूमि बाजार: जटिल अधिग्रहण प्रक्रियाएं आधारभूत संरचना और औद्योगिक परियोजनाओं में देरी
- नीति ध्यान: केवल GDP और मुद्रास्फीति पर जोर, गहराई में कमजोरियां छिपी रहती हैं
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम दक्षिण कोरिया का गोल्डीलॉक्स अनुभव
| संकेतक | भारत (FY22-23) | दक्षिण कोरिया (2022-23) |
|---|---|---|
| GDP वृद्धि दर | 8.7% (FY22) से 6.1% (FY23) | लगभग 2.5% (2022-23) |
| मुद्रास्फीति दर | 6.5% (2023 CPI) | लगभग 3% (2022-23 CPI) |
| मौद्रिक नीति | धीमी सख्ती; मुद्रास्फीति लक्ष्य से ऊपर | बैंक ऑफ कोरिया द्वारा आक्रामक सख्ती |
| निर्यात प्रदर्शन | Q4 FY23 में 1.5% की गिरावट | विविध और लचीला निर्यात क्षेत्र |
| संरचनात्मक सुधार | आंशिक और धीमी प्रगति | सक्रिय श्रम और औद्योगिक सुधार |
दक्षिण कोरिया ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मुद्रास्फीति को लगभग 3% पर और GDP वृद्धि को स्थिर बनाए रखा, जबकि भारत में मुद्रास्फीति बढ़ी और वृद्धि धीमी हुई। बैंक ऑफ कोरिया की आक्रामक मौद्रिक नीति सख्ती और निर्यात विविधीकरण ने बाहरी झटकों को बेहतर ढंग से संभाला, जिससे भारत की संरचनात्मक और नीति संबंधी कमजोरियां उजागर हुईं।
महत्व और आगे का रास्ता
- राजकोषीय अनुशासन: FRBM Act के लक्ष्य के अनुरूप राजकोषीय घाटा पुनः समायोजित करें ताकि मैक्रोइकॉनॉमिक विश्वसनीयता बनी रहे।
- संरचनात्मक सुधार: श्रम और भूमि बाजार सुधारों को तेज करें ताकि निवेश का माहौल सुधरे और नीति प्रभावी हो।
- मौद्रिक-राजकोषीय समन्वय: RBI और वित्त मंत्रालय के बीच बेहतर समन्वय से नीतिगत प्रतिक्रियाओं का तालमेल सुनिश्चित करें।
- अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण: औपचारिक क्षेत्र के विकास को बढ़ावा दें ताकि क्रेडिट और निवेश की दक्षता बढ़े।
- निर्यात विविधीकरण: वैश्विक मांग के झटकों से बचाव के लिए मजबूत और विविध निर्यात क्षेत्र विकसित करें।
FY23 में भारत के आर्थिक प्रदर्शन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- FY23 में भारत का राजकोषीय घाटा FRBM Act के 4.5% लक्ष्य के भीतर था।
- निजी निवेश की वृद्धि लगभग 3.2% पर धीमी रही।
- Q4 FY23 में निर्यात 1.5% घटा।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि FY23 में राजकोषीय घाटा 6.4% तक बढ़ गया, जो FRBM Act के 4.5% लक्ष्य से अधिक है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि निजी निवेश की वृद्धि 3.2% पर धीमी रही और निर्यात Q4 FY23 में 1.5% घटा।
भारतीय रिजर्व बैंक की आर्थिक स्थिरता में भूमिका के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- RBI Act, 1934 के तहत RBI को मूल्य स्थिरता और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना अनिवार्य है।
- RBI सीधे संविधान के Article 112 के तहत राजकोषीय नीति बनाता है।
- RBI मौद्रिक नीति उपकरणों का उपयोग RBI Act की Sections 17 और 18 के तहत करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि RBI Act की Sections 17 और 18 RBI को मूल्य और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने का अधिकार देती हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि RBI मौद्रिक नीति उपकरणों का उपयोग इन धाराओं के तहत करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि राजकोषीय नीति वित्त मंत्रालय द्वारा Article 112 के तहत बनाई जाती है, न कि RBI द्वारा।
मेन प्रश्न
2021-23 के दौरान भारत की कथित ‘गोल्डीलॉक्स अवधि’ क्यों स्थायी मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता प्रदान करने में विफल रही, इसका आलोचनात्मक विश्लेषण करें। इस संदर्भ में संरचनात्मक कमजोरियों और बाहरी झटकों की भूमिका पर चर्चा करें। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास)
- झारखंड का नजरिया: झारखंड में अनौपचारिक क्षेत्र की प्रधानता और खनन क्षेत्र की अस्थिरता राज्य स्तर की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करने वाली संरचनात्मक चुनौतियाँ हैं।
- मेन पॉइंटर: जवाबों में राष्ट्रीय संरचनात्मक मुद्दों को झारखंड के आर्थिक संकेतकों से जोड़ें और राज्य स्तर पर राजकोषीय व मौद्रिक नीतियों के प्रभाव को उजागर करें।
Fiscal Responsibility and Budget Management Act, 2003 क्या है?
FRBM Act, 2003 केंद्र सरकार को राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने का निर्देश देता है, जिसमें राजकोषीय घाटा और कर्ज के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। Sections 3 और 4 के तहत सरकार को राजकोषीय घाटा GDP के 3% तक कम करने और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दायित्व है।
RBI Act, 1934 के तहत RBI मुद्रास्फीति को कैसे नियंत्रित करता है?
RBI Act, 1934 की Sections 17 और 18 के तहत RBI मौद्रिक नीति बनाता और लागू करता है, जिसमें रेपो दर समायोजन और खुले बाजार संचालन जैसे उपकरणों का उपयोग कर मूल्य स्थिरता और मुद्रास्फीति नियंत्रण सुनिश्चित किया जाता है।
भारत में अनौपचारिक क्षेत्र मौद्रिक नीति के प्रभाव को क्यों सीमित करता है?
अनौपचारिक क्षेत्र, जो लगभग 80% रोजगार प्रदान करता है, औपचारिक क्रेडिट और बैंकिंग चैनलों तक सीमित पहुंच के कारण RBI की मौद्रिक नीति के निवेश और उपभोग पर प्रभाव को कम करता है।
Q4 FY23 में भारत के निर्यात में गिरावट का कारण क्या था?
DGCI&S के अनुसार, Q4 FY23 में निर्यात में 1.5% की गिरावट वैश्विक मांग में कमी, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, और निर्यात विविधीकरण की कमी के कारण हुई।
Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 आर्थिक स्थिरता में कैसे मदद करता है?
IBC, 2016, खासकर Sections 7 और 10, कॉरपोरेट दिवालियापन समाधान के लिए समयबद्ध प्रक्रिया प्रदान करता है, जिससे क्रेडिट अनुशासन बेहतर होता है और वित्तीय क्षेत्र की मजबूती आती है, जो आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है।