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भारत का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ NH-27 पर: FASTag और RFID से यातायात में सुधार

2024 की शुरुआत में भारत ने उत्तर प्रदेश के NH-27 पर अपना पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ शुरू किया, जो इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह में एक अहम कदम है। इस टोल प्लाजा में कोई भौतिक बैरियर नहीं है और यह पूरी तरह से FASTag और RFID तकनीक पर आधारित है, जो National Electronic Toll Collection (NETC) प्रोग्राम के तहत काम करता है। इस पहल को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मिलकर लागू किया है, ताकि टोल प्लाजा पर वाहनों की प्रतीक्षा कम हो और ट्रैफिक जाम से होने वाली आर्थिक हानि घटे।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन – परिवहन में डिजिटल पहल, टोल संग्रह के लिए कानूनी ढांचा
  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – अवसंरचना की दक्षता, तकनीक का आर्थिक उत्पादकता पर प्रभाव
  • निबंध: सार्वजनिक अवसंरचना और शासन में तकनीक की भूमिका

बिना बैरियर टोलिंग के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

बिना बैरियर टोलिंग प्रणाली मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (संशोधित 2019) के धारा 138A के अनुरूप है, जो टोल भुगतान के लिए FASTag के उपयोग को अनिवार्य करता है। टोल संग्रह की अधिकारिता राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 से मिलती है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा को नियंत्रित करता है। MoRTH NETC प्रोग्राम के तहत संचालन संबंधी दिशा-निर्देश जारी करता है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक टोल इन्फ्रास्ट्रक्चर की एकरूपता और मानकीकरण सुनिश्चित होता है।

  • MoRTH: नीति निर्धारण, नियामक निगरानी और NETC प्रोग्राम प्रबंधन।
  • NHAI: टोल प्लाजा और राजमार्ग अवसंरचना का कार्यान्वयन और रखरखाव।
  • NPCI: NETC के तहत FASTag भुगतान क्लियरिंग और निपटान का संचालन।
  • NITI आयोग: नीति सलाह और आर्थिक प्रभाव मूल्यांकन।

बिना बैरियर टोलिंग का आर्थिक प्रभाव

बिना बैरियर टोलिंग से टोल प्लाजा पर वाहनों का औसत प्रतीक्षा समय 3-5 मिनट से घटकर 30 सेकंड से भी कम हो गया है, जिससे जाम के कारण होने वाली देरी में 50% तक कमी आई है (MoRTH रिपोर्ट, 2024)। NITI आयोग के अनुसार, इस दक्षता से सालाना 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का ईंधन और समय की बचत होती है। मार्च 2024 तक राष्ट्रीय राजमार्गों पर FASTag की पहुंच 95% तक पहुंच चुकी है, जिससे लगभग सभी टोल भुगतान इलेक्ट्रॉनिक हो गए हैं। सरकार ने 2023-24 के बजट में डिजिटल टोल इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, ताकि इस प्रणाली का विस्तार पूरे देश में किया जा सके।

  • टोल पर वाहन रुकने में कमी के कारण सालाना लगभग 200 मिलियन लीटर ईंधन की बचत (NITI आयोग, 2023)।
  • ट्रैफिक के बेहतर प्रवाह से वाहन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी।
  • माल और यात्रियों के आवागमन में सुधार, जिससे सप्लाई चेन पर सकारात्मक असर।

बिना बैरियर टोल बूथ की तकनीक और संचालन

यह टोल बूथ FASTag में लगे RFID टैग का उपयोग करता है, जो वाहनों पर लगे होते हैं और राजमार्ग की गति से गुजरते समय ऊपर लगे रीडर द्वारा स्कैन किए जाते हैं। इससे भौतिक टोल बैरियर की जरूरत खत्म हो जाती है और वाहन बिना रुके टोल भुगतान कर पाते हैं। NETC प्लेटफॉर्म, जिसे NPCI संचालित करता है, रियल-टाइम में लेनदेन को प्रोसेस करता है और संबंधित बैंक खातों या वॉलेट से ऑटोमैटिक कटौती करता है। हालांकि, विभिन्न FASTag जारीकर्ताओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की चुनौतियां और सीमित रियल-टाइम डेटा एकीकरण अभी भी मौजूद हैं।

  • RFID आधारित पहचान से बिना रुके टोल संग्रह संभव।
  • स्वचालित लेनदेन क्लियरिंग से नकद लेनदेन की देरी खत्म।
  • बैकएंड सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन से निगरानी और धोखाधड़ी रोकथाम।

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण: सिंगापुर का इलेक्ट्रॉनिक रोड प्राइसिंग (ERP) सिस्टम

1998 से संचालित सिंगापुर का ERP सिस्टम बिना बैरियर RFID टोलिंग और गतिशील ट्रैफिक आधारित मूल्य निर्धारण का परिपक्व मॉडल है। इसने शहरी ट्रैफिक जाम में 15-20% तक कमी लाई है और वैश्विक स्तर पर एक मानक स्थापित किया है। भारत के स्थिर दर वाले FASTag सिस्टम के विपरीत, ERP ट्रैफिक की वास्तविक स्थिति के आधार पर टोल दरों को बदलता है, जिससे ऑफ-पीक यात्रा और बेहतर मार्ग चयन को प्रोत्साहन मिलता है।

विशेषता भारत का बिना बैरियर टोल सिंगापुर ERP
तकनीक RFID आधारित FASTag RFID के साथ गतिशील मूल्य निर्धारण
मूल्य निर्धारण मॉडल स्थिर टोल दरें परिवर्तनीय, ट्रैफिक आधारित मूल्य
कार्यान्वयन क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग शहरी एक्सप्रेसवे और मुख्य सड़कें
जाम में कमी प्रतीक्षा समय में 50% तक कमी ट्रैफिक वॉल्यूम में 15-20% कमी
रियल-टाइम डेटा इंटीग्रेशन सीमित, इंटरऑपरेबिलिटी चुनौतियां उन्नत, एकीकृत ट्रैफिक प्रबंधन

बिना बैरियर टोलिंग विस्तार में चुनौतियां और कमियां

95% FASTag पहुंच के बावजूद, विभिन्न बैंकों के FASTag के बीच इंटरऑपरेबिलिटी अभी भी असंगत है, जिससे लेनदेन में विफलता और उपयोगकर्ता असुविधा होती है। टोल ऑपरेटरों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सीमित रियल-टाइम डेटा साझा करने से गतिशील टोलिंग और ट्रैफिक प्रबंधन बाधित होता है। ग्रामीण या दूरदराज के राजमार्गों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी NETC कवरेज में देरी कर रही है। साथ ही, धारा 138A के तहत FASTag के अनिवार्य उपयोग की जागरूकता और प्रवर्तन को मजबूत करने की जरूरत है।

  • विभिन्न FASTag जारीकर्ताओं के बीच मानकीकरण आवश्यक।
  • जाम आधारित मूल्य निर्धारण के लिए रियल-टाइम डेटा विश्लेषण अधूरा।
  • 100% बिना बैरियर टोल कवरेज के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड जरूरी।
  • गैर-FASTag वाहनों के लिए प्रवर्तन तंत्र को सशक्त बनाना।

महत्व और आगे का रास्ता

NH-27 पर बिना बैरियर टोल बूथ भारत की डिजिटल भुगतान और RFID तकनीक का उपयोग कर राजमार्ग दक्षता बढ़ाने और आर्थिक नुकसान कम करने की क्षमता दिखाता है। इस मॉडल का देशभर में विस्तार माल परिवहन और यात्री आवागमन को बेहतर बना सकता है। इंटरऑपरेबिलिटी और डेटा इंटीग्रेशन की कमियों को दूर करने से गतिशील मूल्य निर्धारण और बेहतर जाम प्रबंधन संभव होगा। नीति निर्माण में सार्वभौमिक FASTag अपनाने को प्रोत्साहित करना, टोल प्लाजा अवसंरचना अपग्रेड करना और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं से प्रेरित जाम आधारित टोलिंग मॉडल पर विचार करना शामिल होना चाहिए।

  • सभी FASTag के मानक तय करें और नियम उल्लंघन पर दंड लगाएं।
  • गतिशील टोल मूल्य निर्धारण के लिए रियल-टाइम डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश करें।
  • 2025 तक सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर बिना बैरियर टोल प्लाजा बढ़ाएं।
  • शहरी जाम प्रबंधन प्रणालियों के साथ इंटीग्रेशन पर विचार करें।

भारत की बिना बैरियर टोलिंग प्रणाली के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. मोटर वाहन अधिनियम की धारा 138A टोल भुगतान के लिए FASTag के उपयोग को अनिवार्य करती है।
  2. राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह तंत्र को नियंत्रित करता है।
  3. FASTag टोल प्लाजा पर वाहनों की पहचान के लिए GPS तकनीक का उपयोग करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

धारा 138A के तहत FASTag का उपयोग अनिवार्य है। राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम टोल संग्रह को नियंत्रित करता है। FASTag में GPS नहीं, बल्कि RFID तकनीक होती है।

सिंगापुर के इलेक्ट्रॉनिक रोड प्राइसिंग (ERP) सिस्टम के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. ERP बिना बैरियर RFID टोल संग्रह के लिए तकनीक का उपयोग करता है।
  2. ERP गतिशील ट्रैफिक आधारित टोल मूल्य निर्धारण लागू करता है।
  3. ERP मुख्य रूप से सिंगापुर और मलेशिया को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर उपयोग होता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

ERP RFID तकनीक और गतिशील मूल्य निर्धारण का उपयोग करता है। यह सिंगापुर के शहरी क्षेत्रों में लागू है, न कि मलेशिया से जुड़ी राष्ट्रीय राजमार्गों पर।

मुख्य प्रश्न

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रोग्राम के तहत FASTag और RFID तकनीक का उपयोग करते हुए बिना बैरियर टोल बूथ के परिचय से भारत के राजमार्ग परिवहन क्षेत्र में आर्थिक दक्षता और शासन में कैसे सुधार होगा? इसके व्यापक कार्यान्वयन में कौन-कौन सी चुनौतियां हैं?

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – शासन और पेपर 3 – अर्थव्यवस्था और अवसंरचना
  • झारखंड का दृष्टिकोण: NH-33 और NH-23 झारखंड से होकर गुजरते हैं, जहां FASTag और बिना बैरियर टोलिंग से जाम कम कर माल परिवहन बेहतर हो सकता है।
  • मुख्य बिंदु: डिजिटल टोलिंग के राज्य स्तर पर लॉजिस्टिक्स, प्रदूषण में कमी और झारखंड के खनिज तथा औद्योगिक परिवहन मार्गों पर आर्थिक लाभ पर जोर।
राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (NETC) प्रोग्राम क्या है?

NETC NPCI द्वारा संचालित एक सरकारी पहल है, जो FASTag RFID तकनीक के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर इलेक्ट्रॉनिक टोल भुगतान को सक्षम बनाती है, जिससे नकद रहित और बिना बैरियर टोल संग्रह संभव होता है।

टोल प्लाजा पर FASTag तकनीक कैसे काम करती है?

FASTag में लगे RFID टैग को टोल प्लाजा पर लगे रीडर स्कैन करते हैं, जिससे वाहन बिना रुके जुड़ी बैंक या प्रीपेड खाते से टोल शुल्क अपने आप कट जाता है।

भारत में FASTag उपयोग के लिए कौन-कौन से कानूनी प्रावधान हैं?

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 138A (संशोधन 2019) राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल भुगतान के लिए FASTag के उपयोग को अनिवार्य करती है।

बिना बैरियर टोलिंग से क्या आर्थिक लाभ होते हैं?

यह टोल प्लाजा पर वाहनों की प्रतीक्षा समय को 50% तक कम करता है, सालाना 10,000 करोड़ रुपये से अधिक ईंधन और समय की बचत करता है, और वाहन रुकने से होने वाले प्रदूषण को घटाता है।

बिना बैरियर टोलिंग के देशव्यापी विस्तार में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में विभिन्न FASTag जारीकर्ताओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की कमी, सीमित रियल-टाइम डेटा साझा करना, अधूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर कवरेज और FASTag के अनिवार्य उपयोग के प्रवर्तन की कमी शामिल हैं।