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भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी: व्यापार, तकनीक और रणनीतिक आयाम

भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी का परिचय

भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी 2010 में Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) के हस्ताक्षर के साथ औपचारिक हुई, जिसने द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव स्थापित किया। तब से यह साझेदारी सेमीकंडक्टर्स, जहाज निर्माण, डिजिटल नवाचार और सांस्कृतिक सहयोग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तृत हो गई है। 2025 तक, द्विपक्षीय व्यापार लगभग $26.8 बिलियन पहुंच चुका है, जिसमें वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार दक्षिण कोरिया के पक्ष में व्यापार घाटा है (आयात: $21 बिलियन; निर्यात: $5.8 बिलियन)। इस साझेदारी का उद्देश्य आर्थिक एकीकरण को गहरा करना और ‘चिप्स टू शिप्स’ कार्यक्रम तथा ‘इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज’ MoU जैसी लक्षित पहलों के माध्यम से व्यापार असंतुलन को सुधारना है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत के व्यापार समझौते, द्विपक्षीय साझेदारियां और रणनीतिक गठबंधन
  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – व्यापार असंतुलन, तकनीक हस्तांतरण और क्षेत्रीय सहयोग
  • निबंध: भारत के बदलते वैश्विक आर्थिक साझेदारी और तकनीकी कूटनीति

साझेदारी के कानूनी और संवैधानिक ढांचे

केंद्र सरकार के पास Article 246 और संघ सूची के Entry 14 (विदेशी देशों के साथ व्यापार और वाणिज्य) के तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का विशेष अधिकार है। 2010 का CEPA इसी अधिकार क्षेत्र में आता है, जिसे वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा बातचीत और लागू किया जाता है। डिजिटल सहयोग और तकनीक हस्तांतरण के लिए विशेष कानूनी ढांचे Information Technology Act, 2000 और हाल ही में लागू Semiconductor Policy 2023 के तहत आते हैं, जो घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन और नियम निर्धारित करता है। फिलहाल भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय व्यापार विवादों पर कोई विशेष न्यायिक मिसाल नहीं है, जो इस क्षेत्र में कानूनी विवादों की शुरुआत को दर्शाता है।

आर्थिक आयाम: व्यापार, तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग

द्विपक्षीय व्यापार 2010 में $14.2 बिलियन से बढ़कर 2025 तक $26.8 बिलियन हो चुका है, जो मुख्य रूप से दक्षिण कोरिया से आयात पर निर्भर है, जिससे लगभग $15.2 बिलियन का लगातार व्यापार घाटा बना हुआ है। CEPA ने टैरिफ कटौती और बाजार पहुंच को आसान बनाया, लेकिन संरचनात्मक असंतुलन बरकरार हैं। सेमीकंडक्टर क्षेत्र विशेष ध्यान का केंद्र है, जिसका वैश्विक बाजार 2024 में $600 बिलियन का है (IC Insights)। भारत की Production Linked Incentive (PLI) योजना ₹76,000 करोड़ (2022-27) का आवंटन करती है ताकि सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता बढ़ाई जा सके, जिससे आयात निर्भरता कम हो और दक्षिण कोरिया की उन्नत तकनीक के साथ एकीकरण हो सके।

  • व्यापार घाटा: $21 बिलियन आयात बनाम $5.8 बिलियन निर्यात (वाणिज्य मंत्रालय, 2025)
  • CEPA प्रभाव: 10 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में 70% वृद्धि (वाणिज्य मंत्रालय वार्षिक रिपोर्ट 2024)
  • सेमीकंडक्टर बाजार: वैश्विक स्तर पर $600 बिलियन (IC Insights, 2024)
  • PLI योजना: सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए ₹76,000 करोड़ का प्रावधान (MeitY, 2022-27)
  • डिजिटल सहयोग: इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज MoU में AI और IT क्षेत्रों के लिए 20% CAGR विकास लक्ष्य (NASSCOM 2024)

द्विपक्षीय सहभागिता के लिए संस्थागत संरचना

इस बहुआयामी साझेदारी के समन्वय के लिए कई संस्थाएं जिम्मेदार हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय CEPA वार्ता और व्यापार नीति का नेतृत्व करता है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) डिजिटल और सेमीकंडक्टर सहयोग को आगे बढ़ाता है। Korea Trade-Investment Promotion Agency (KOTRA) निवेश और व्यापार को बढ़ावा देता है। Confederation of Indian Industry (CII) जैसे उद्योग संगठन क्षेत्रीय सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) कूटनीतिक समन्वय करता है और भारत-कोरिया वित्तीय मंच तथा आर्थिक सुरक्षा संवाद जैसे संस्थागत तंत्रों का संचालन करता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत-दक्षिण कोरिया CEPA बनाम अमेरिका-दक्षिण कोरिया KORUS FTA

पहलू भारत-दक्षिण कोरिया CEPA (2010) अमेरिका-दक्षिण कोरिया KORUS FTA (2012)
व्यापार विकास 10 वर्षों में लगभग 70% वृद्धि 5 वर्षों में लगभग 25% वृद्धि
व्यापार संतुलन दक्षिण कोरिया के पक्ष में बड़ा घाटा अधिक संतुलित व्यापार संरचना
क्षेत्रीय फोकस सेमीकंडक्टर्स, जहाज निर्माण, डिजिटल नवाचार ऑटोमोबाइल, कृषि, सेवा क्षेत्र
संस्थागत तंत्र भारत-कोरिया वित्तीय मंच, आर्थिक सुरक्षा संवाद व्यापार और निवेश संयुक्त समिति
तकनीकी सहयोग उभरता हुआ, डिजिटल MoU के साथ उन्नत तकनीक विनिमय और R&D सहयोग

यह तुलना दिखाती है कि भारत को व्यापार असंतुलन को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए एकीकरण को गहरा करना और क्षेत्रों में विविधता लानी होगी, जैसा कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया FTA में तकनीक आधारित संतुलन देखा जाता है।

संरचनात्मक चुनौतियां और महत्वपूर्ण अंतर

भारत की घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता सीमित और तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र अपर्याप्त होने के कारण दक्षिण कोरिया की उन्नत सेमीकंडक्टर उद्योग का पूरा लाभ उठाना मुश्किल है। जहां दक्षिण कोरिया के पास मजबूत R&D और निर्यात केंद्रित नीतियां हैं, वहीं भारत उत्पादन और नवाचार को बढ़ाने में चुनौतियों का सामना करता है। यह अंतर तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों से मिलने वाले लाभों को सीमित करता है। व्यापार असंतुलन सुधारने और स्थायी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए इन कमजोरियों को दूर करना जरूरी है।

रणनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व

यह साझेदारी केवल आर्थिक नहीं बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग तक फैली है, जहां दक्षिण कोरिया भारत के क्षेत्रीय स्थिरता और कनेक्टिविटी के दृष्टिकोण में शामिल हो रहा है। पर्यावरण, ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना में सहयोग भारत की व्यापक विदेश नीति के तकनीक आधारित विकास और विविध रणनीतिक साझेदारी के लक्ष्यों से मेल खाता है। CEPA के उन्नयन का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $50 बिलियन तक बढ़ाना है, जो आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दर्शाता है।

आगे का रास्ता

  • Semiconductor Policy 2023 के तहत R&D सहयोग बढ़ाकर और नियमों को सरल बनाकर सेमीकंडक्टर निर्माण को तेज करें।
  • इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज के माध्यम से क्वांटम कंप्यूटिंग और 5G जैसी उभरती तकनीकों में डिजिटल सहयोग बढ़ाएं।
  • भारतीय निर्यात को बढ़ावा देकर व्यापार असंतुलन को कम करें, विशेषकर स्टील, जहाज निर्माण और SMEs के लिए बाजार पहुंच और निवेश सुविधा के जरिए।
  • आर्थिक सुरक्षा और औद्योगिक सहयोग पर निरंतर संवाद के लिए संस्थागत तंत्र मजबूत करें।
  • रणनीतिक साझेदारी का उपयोग इंडो-पैसिफिक कनेक्टिविटी और स्थिरता परियोजनाओं में संयुक्त पहलों के लिए करें।

भारत-दक्षिण कोरिया CEPA के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह 2010 में हस्ताक्षरित हुआ था और पहले दशक में द्विपक्षीय व्यापार में 70% वृद्धि हुई।
  2. यह एक मुक्त व्यापार समझौता है जो दोनों देशों के बीच सभी टैरिफ समाप्त करता है।
  3. इस समझौते में डिजिटल सहयोग और तकनीक हस्तांतरण के प्रावधान शामिल हैं।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि CEPA 2010 में हुआ था और व्यापार में लगभग 70% वृद्धि हुई। कथन 2 गलत है क्योंकि CEPA एक मुक्त व्यापार समझौता नहीं है जो सभी टैरिफ समाप्त करता हो, बल्कि चुनिंदा टैरिफ कटौती करता है। कथन 3 सही है क्योंकि हाल के MoU में डिजिटल सहयोग शामिल है।

भारत की Semiconductor Policy 2023 के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आती है।
  2. यह नीति 2022-2027 के बीच सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹76,000 करोड़ आवंटित करती है।
  3. यह नीति दक्षिण कोरियाई कंपनियों से भारतीय निर्माताओं को पूर्ण तकनीक हस्तांतरण अनिवार्य करती है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि MeitY इस नीति का संचालन करता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि आधिकारिक आवंटन यही दर्शाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि नीति तकनीक हस्तांतरण को प्रोत्साहित करती है लेकिन पूर्ण हस्तांतरण अनिवार्य नहीं करती।

मुख्य प्रश्न

विवरण करें कि कैसे भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी, 2010 CEPA और हाल की संयुक्त पहलों के माध्यम से व्यापार असंतुलन को संबोधित करती है और तकनीक आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है। कौन-कौन सी संरचनात्मक चुनौतियां बनी हुई हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध और आर्थिक विकास)
  • झारखंड कोण: CEPA और संबंधित MoU के तहत झारखंड के स्टील और विनिर्माण क्षेत्रों में दक्षिण कोरियाई निवेश की संभावना
  • मुख्य बिंदु: द्विपक्षीय व्यापार और तकनीकी सहयोग से झारखंड के औद्योगिक आधार को लाभान्वित करने पर जोर, रोजगार सृजन और अवसंरचना विकास के साथ
भारत-दक्षिण कोरिया CEPA क्या है और कब हस्ताक्षरित हुआ?

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) 2010 में हस्ताक्षरित हुआ था, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है, जिसमें टैरिफ कटौती और निवेश को सुगम बनाना शामिल है।

भारत के साथ दक्षिण कोरिया का व्यापार घाटा क्यों है?

भारत दक्षिण कोरिया से उच्च मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर्स और औद्योगिक वस्तुएं आयात करता है, जबकि दक्षिण कोरिया को निर्यात कम मात्रा और मूल्य में होता है, जिससे 2025 तक लगभग $15.2 बिलियन का व्यापार घाटा बनता है।

भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?

मुख्य क्षेत्र हैं सेमीकंडक्टर्स, जहाज निर्माण, डिजिटल नवाचार (AI और IT), स्टील, बंदरगाह, SMEs और सांस्कृतिक सहयोग।

Semiconductor Policy 2023 साझेदारी का समर्थन कैसे करती है?

Semiconductor Policy 2023 घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और नियामक समर्थन प्रदान करती है, जिससे भारत दक्षिण कोरिया की उन्नत सेमीकंडक्टर उद्योग के साथ सहयोग कर सके और आयात निर्भरता कम कर सके।

भारत-दक्षिण कोरिया सहयोग में कौन से संस्थागत तंत्र शामिल हैं?

संस्थाओं में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, MeitY, KOTRA, CII, MEA और भारत-कोरिया वित्तीय मंच तथा आर्थिक सुरक्षा संवाद जैसे फोरम शामिल हैं।