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मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ED की संपत्ति जब्ती में भारी वृद्धि: 2005-14 बनाम 2014-24 की समीक्षा

प्रवर्तन निदेशालय की संपत्ति जब्ती में वृद्धि का अवलोकन

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जब्त की गई संपत्ति में 23 गुना वृद्धि दर्ज की है। 2005-14 के दौरान यह राशि लगभग ₹500 करोड़ थी जो 2014-24 में ₹11,500 करोड़ से ऊपर पहुंच गई है (Indian Express, 2024)। यह बढ़ोतरी 2002 के मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कड़े प्रवर्तन और भारत में वित्तीय अपराधों के बढ़ते स्वरूप को दर्शाती है। इस अवधि में ED के बजट आवंटन में वृद्धि, दर्ज मामलों की संख्या में इजाफा और संस्थागत तंत्रों के विकास का भी योगदान रहा है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (वित्तीय क्षेत्र), सुरक्षा चुनौतियां (वित्तीय अपराध)
  • GS पेपर 2: राजनीति (संवैधानिक प्रावधान, समवर्ती सूची), शासन (कानून प्रवर्तन)
  • निबंध: भारत में भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराध

मनी लॉन्ड्रिंग और संपत्ति जब्ती के लिए कानूनी ढांचा

मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 की धारा 3 में मनी लॉन्ड्रिंग की परिभाषा दी गई है और धारा 5 के तहत ED को संबंधित संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार प्राप्त है। जब्ती की प्रक्रिया धारा 8 में विस्तार से बताई गई है, जबकि धारा 17 में विवादों के निपटारे के लिए निर्णयकर्ता प्राधिकरण का गठन किया गया है। इसके अलावा, फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट, 2018 भगोड़े आर्थिक अपराधियों को निशाना बनाने के लिए PMLA की पूरक भूमिका निभाता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत आपराधिक कानून, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग शामिल है, समवर्ती सूची में है, जिससे संसद और राज्य विधानसभाओं दोनों को कानून बनाने का अधिकार मिलता है। सुप्रीम कोर्ट ने डायरेक्टरेट ऑफ़ एनफोर्समेंट बनाम मोहम्मद जहीर (2019) मामले में प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को स्पष्ट करते हुए प्रवर्तन शक्तियों और संपत्ति अधिकारों के बीच संतुलन पर जोर दिया है।

मनी लॉन्ड्रिंग और प्रवर्तन के आर्थिक पहलू

भारत में अनुमानित वार्षिक मनी लॉन्ड्रिंग की मात्रा GDP का 2-5% है, जो ₹3-7 लाख करोड़ के बीच है (UNODC, 2020)। ED की संपत्ति जब्ती में वृद्धि उसके बजट आवंटन में 2014 से 2023 तक 35% की वृद्धि के अनुरूप है, जो सरकार की प्राथमिकता को दर्शाती है। बावजूद इसके, भारत 2019 के Financial Action Task Force (FATF) के वैश्विक मूल्यांकन में 87वें स्थान पर रहा, जो मध्यम जोखिम और सुधार की गुंजाइश को दर्शाता है।

  • जब्त संपत्ति: ₹500 करोड़ (2005-14) बनाम ₹11,500 करोड़ (2014-24) (Indian Express, 2024)
  • ED बजट वृद्धि: 35% (2014-2023) (संघ बजट दस्तावेज)
  • मनी लॉन्ड्रिंग मात्रा: GDP का 2-5% (UNODC, 2020)
  • FATF रैंकिंग: वैश्विक स्तर पर 87वां (2019)
  • PMLA के तहत दर्ज मामले: 2023 में 1,200 से अधिक (ED वार्षिक रिपोर्ट, 2023)

वित्तीय अपराधों से निपटने में संस्थागत भूमिकाएं

प्रवर्तन निदेशालय PMLA के तहत जांच और संपत्ति जब्ती का नेतृत्व करता है। Financial Intelligence Unit-India (FIU-IND) बैंकों और वित्तीय संस्थानों से संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (STR) एकत्र करता है, जिससे खुफिया आधारित कार्रवाई संभव होती है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) नियंत्रित संस्थाओं से संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्टिंग अनिवार्य करता है। Central Bureau of Investigation (CBI) मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मुख्य अपराधों की जांच करता है। Financial Action Task Force (FATF) अंतरराष्ट्रीय मानक तय करता है और अनुपालन की निगरानी करता है।

संपत्ति जब्ती में भारत और अमेरिका की तुलना

पहलू भारत संयुक्त राज्य अमेरिका
कानूनी ढांचा PMLA, 2002; Fugitive Economic Offenders Act, 2018 Bank Secrecy Act, 1970; Money Laundering Control Act, 1986
संपत्ति जब्ती में वृद्धि 23 गुना वृद्धि (2005-14 बनाम 2014-24) लगातार 10-15% वार्षिक वृद्धि दो दशकों में
प्रवर्तन तंत्र ED द्वारा जांच, FIU-IND और RBI के साथ समन्वय Department of Justice, FBI, FinCEN के साथ उन्नत वित्तीय खुफिया
वित्तीय खुफिया विकसित होती STR प्रणाली, मध्यम FATF रैंकिंग (87वां) उच्च विकसित STR और वित्तीय खुफिया नेटवर्क
चुनौतियां प्रक्रियात्मक देरी, एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी मजबूत निर्णय और संपत्ति वसूली तंत्र

प्रवर्तन और निपटान में चुनौतियां

संपत्ति जब्ती में वृद्धि के बावजूद, PMLA की धाराओं 8 और 17 के तहत प्रक्रियात्मक देरी समय पर निपटान और जब्ती को प्रभावित करती हैं। जांच एजेंसियों और वित्तीय नियामकों के बीच सीमित समन्वय से मुकदमेबाजी लंबी होती है, जिससे वसूली की क्षमता कम हो जाती है। ये कमियां निवारक प्रभाव को कमजोर करती हैं और संपत्तियां वर्षों तक अदालतों में अटकी रहती हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

  • ED की क्षमता और बजट में वृद्धि से संपत्ति जब्ती बेहतर हुई है, लेकिन निपटान में तेजी लाने के लिए न्यायिक सुधार भी जरूरी हैं।
  • ED, FIU-IND, RBI और CBI के बीच समन्वय मजबूत करना जांच और अभियोजन को प्रभावी बनाएगा।
  • वित्तीय खुफिया प्रणालियों का आधुनिकीकरण और तकनीक आधारित डेटा विश्लेषण अवैध धन की पहचान और ट्रैकिंग में सुधार करेगा।
  • प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर प्रवर्तन और संपत्ति अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करना मुकदमेबाजी कम करेगा और सजा दर बढ़ाएगा।
  • भारत को FATF अनुपालन सुधारना होगा ताकि कमजोरियां कम हों और विदेशी निवेश आकर्षित हो सके।

मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 (PMLA) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. PMLA के तहत संपत्ति की जब्ती केवल आरोपी के दोषी ठहराए जाने के बाद ही की जा सकती है।
  2. PMLA की धारा 3 में मनी लॉन्ड्रिंग अपराध की परिभाषा दी गई है।
  3. PMLA के तहत निर्णयकर्ता प्राधिकरण जब्ती और जब्ती से संबंधित विवादों का निपटारा करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि धारा 5 के तहत संपत्ति की जब्ती दोषसिद्धि से पहले भी अस्थायी रूप से की जा सकती है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि धारा 3 में मनी लॉन्ड्रिंग की परिभाषा है और धारा 17 निर्णयकर्ता प्राधिकरण को स्थापित करती है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. ED मुख्य एजेंसी है जो Fugitive Economic Offenders Act, 2018 को लागू करती है।
  2. ED मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मूल अपराधों की जांच करता है।
  3. ED संदिग्ध लेनदेन रिपोर्टों के लिए Financial Intelligence Unit-India (FIU-IND) के साथ समन्वय करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 3 गलत है क्योंकि FIU-IND STR एकत्र और विश्लेषण करता है, लेकिन ED सीधे समन्वय नहीं करता; ED FIU-IND से खुफिया जानकारी का उपयोग करता है। कथन 1 और 2 सही हैं।

मेन प्रश्न

2005-14 और 2014-24 के बीच प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जब्त की गई संपत्ति में 23 गुना वृद्धि के कारणों पर चर्चा करें। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 के तहत संपत्ति वसूली में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करें और प्रवर्तन की प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (राजनीति और शासन), पेपर 3 (अर्थव्यवस्था और वित्तीय अपराध)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की खनिज संपदा और औद्योगिक गतिविधियों में वित्तीय अनियमितताओं की जांच हुई है; ED ने राज्य में खनन और अवसंरचना क्षेत्रों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच की है।
  • मेन पॉइंटर: झारखंड में ED की भूमिका, संपत्ति जब्ती की चुनौतियां और केंद्र-राज्य समन्वय की जरूरत को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में प्रवर्तन निदेशालय की भूमिका क्या है?

प्रवर्तन निदेशालय मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 के तहत अपराधों की जांच करता है, संबंधित संपत्तियों को जब्त और जब्ती करता है तथा अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चलाता है। यह वित्तीय नियामकों और खुफिया इकाइयों के साथ समन्वय भी करता है ताकि अवैध धन का पता लगाया जा सके।

मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 मनी लॉन्ड्रिंग को कैसे परिभाषित करता है?

PMLA की धारा 3 में मनी लॉन्ड्रिंग को अपराध से प्राप्त धन को वैध दिखाने या छुपाने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें ऐसी संपत्ति का अधिग्रहण, कब्जा या उपयोग शामिल है।

PMLA में संपत्ति जब्ती के लिए कौन-कौन से प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय हैं?

धारा 5 के तहत जब्ती अस्थायी होती है और इसे धारा 17 के निर्णयकर्ता प्राधिकरण की मंजूरी की आवश्यकता होती है, जो सुनवाई के बाद धारा 8 के तहत जब्ती की पुष्टि करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले, जैसे Directorate of Enforcement vs Mohd. Zahoor (2019), उचित प्रक्रिया पर जोर देते हैं।

ED और वित्तीय नियामकों के बीच समन्वय क्यों महत्वपूर्ण है?

समन्वय से संदिग्ध लेनदेन रिपोर्टों और खुफिया जानकारी का समय पर आदान-प्रदान होता है, जिससे प्रभावी जांच और मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम संभव होती है। समन्वय की कमी से देरी होती है और संपत्ति वसूली अधूरी रह जाती है।

भारत की FATF रैंकिंग उसके एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग प्रयासों को कैसे दर्शाती है?

2019 में भारत की 87वीं रैंकिंग यह बताती है कि वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रति मध्यम अनुपालन कर रहा है, जिससे मजबूत नियामक ढांचे और प्रवर्तन की आवश्यकता स्पष्ट होती है ताकि कमजोरियां कम हों।