BRICS 2023 शिखर सम्मेलन: पृष्ठभूमि और मुख्य निष्कर्ष
2023 में आयोजित 15वें BRICS शिखर सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने आर्थिक सहयोग और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की। अध्यक्षता करते हुए भारत ने जारी युद्ध को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की (Indian Express, 2024)। हालांकि, जारी संकल्प पत्र में युद्ध पर कोई एकमत रुख नहीं दिखा, जो इस समूह के भीतर विभिन्न भौगोलिक-राजनीतिक हितों की व्याख्या करता है। यह असहमति BRICS को संघर्ष समाधान के लिए एक समेकित मंच के रूप में सीमित करती है और भारत की जटिल कूटनीतिक भूमिका को उजागर करती है, जो आपस में टकराते आर्थिक और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखती है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – बहुपक्षवाद, बहुपक्षीय मंचों में भारत की विदेश नीति, BRICS की गतिशीलता
- GS पेपर 3: आर्थिक विकास – BRICS आर्थिक सहयोग, भू-राजनीतिक तनावों का व्यापार पर प्रभाव
- निबंध: वैश्विक शासन और बहुपक्षीय कूटनीति में भारत की भूमिका
BRICS: संस्थागत ढांचा और भारत का कानूनी अधिकार
BRICS एक अंतर-सरकारी मंच है, जिसके पास कोई बाध्यकारी कानूनी ढांचा या प्रवर्तन तंत्र नहीं है। भारत की भागीदारी विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा Ministry of External Affairs (Allocation of Business) Rules, 1961 के तहत संचालित होती है। साथ ही, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों को लागू करने वाले कानून बनाने का अधिकार देता है, जो BRICS के भीतर भारत की विदेश नीति को संवैधानिक समर्थन प्रदान करता है।
- BRICS के पास कोई औपचारिक सचिवालय या संधि आधारित निर्णय लेने वाली संस्था नहीं है।
- निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं, जिससे विवादास्पद मुद्दों पर प्रवर्तन सीमित होता है।
- भारत का MEA BRICS के भीतर कूटनीतिक संवाद और नीति निर्धारण का समन्वय करता है।
आर्थिक दांव: BRICS व्यापार और विकास के निहितार्थ
BRICS देश विश्व की लगभग 42% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और विश्व GDP का 24% योगदान देते हैं (World Bank, 2023)। भारत का BRICS देशों के साथ FY 2022-23 में व्यापार लगभग $95 बिलियन था, जिसमें अकेले चीन का द्विपक्षीय व्यापार $125 बिलियन था (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत)। जारी भू-राजनीतिक तनाव और BRICS में एकजुट रुख न होने से व्यापार प्रवाह और विदेशी निवेश अस्थिर हो सकते हैं, जो भारत की 2024-25 के लिए अनुमानित 6.5% GDP वृद्धि दर को प्रभावित कर सकते हैं (Economic Survey 2023-24)।
- व्यापार में व्यवधान कच्चे माल और तकनीकी आयात पर निर्भर क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।
- निवेश माहौल की अनिश्चितता अवसंरचना और विनिर्माण विकास को धीमा कर सकती है।
- राजनीतिक मतभेदों के बीच BRICS आर्थिक सहयोग पहलों को चुनौतियां मिल रही हैं।
BRICS के भीतर भू-राजनीतिक मतभेद
BRICS सदस्य देशों की भू-राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, खासकर रूस के युद्ध में शामिल होने को लेकर। रूस, जो BRICS GDP का लगभग 3.5% योगदान देता है (IMF, 2023), पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जबकि चीन और भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए सतर्क कूटनीति अपनाए हुए हैं। ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देते हैं और संघर्ष पर कोई पक्ष नहीं लेते। यह मतभेद BRICS को एकजुट रुख अपनाने से रोकते हैं और इसे एक संगठित भू-राजनीतिक खिलाड़ी बनने में बाधित करते हैं।
- रूस की सैन्य भागीदारी चीन की आर्थिक व्यावहारिकता और भारत की गैर-संरेखित नीति से अलग है।
- दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील बहुपक्षीय संवाद पर जोर देते हैं बिना किसी पक्ष को समर्थन दिए।
- भारत रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखता है।
तुलना: BRICS बनाम यूरोपीय संघ का संघर्ष प्रतिक्रिया तंत्र
| पहलू | BRICS | यूरोपीय संघ (EU) |
|---|---|---|
| कानूनी ढांचा | बाध्यकारी संधियों के बिना अंतर-सरकारी मंच | ट्रीटी ऑफ़ लिस्बन (2009) के तहत बाध्यकारी सामान्य विदेश और सुरक्षा नीति (CFSP) |
| निर्णय प्रक्रिया | सर्वसम्मति आधारित, प्रवर्तन तंत्र नहीं | विदेश नीति मामलों में योग्य बहुमत से मतदान |
| संघर्ष प्रतिक्रिया | विभाजित रुख; कोई एकीकृत प्रतिबंध या कूटनीतिक कार्रवाई नहीं | संयोजित प्रतिबंध और कूटनीतिक उपाय (जैसे यूक्रेन युद्ध) |
| संस्थागत संरचना | कोई स्थायी सचिवालय नहीं; अध्यक्षता घुमावदार | स्थायी कूटनीतिक कॉर्पस के साथ यूरोपीय बाहरी कार्रवाई सेवा |
महत्वपूर्ण कमी: संस्थागत संघर्ष समाधान तंत्र का अभाव
BRICS के पास सामूहिक राजनीतिक या सुरक्षा कार्यों के लिए कोई संस्थागत निर्णय लेने वाला ढांचा या प्रवर्तन तंत्र नहीं है। यह संरचनात्मक कमी भू-राजनीतिक संकटों पर असंगत नीतिगत प्रतिक्रियाओं का कारण बनती है, जैसा कि यूक्रेन युद्ध पर अलग-अलग प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है। स्थायी सचिवालय या कानूनी अधिकार के अभाव में BRICS संघर्ष प्रबंधन में प्रभावहीन रहता है और वैश्विक शासन में अपनी विश्वसनीयता खोता है।
- सर्वसम्मति की आवश्यकता विवादास्पद मुद्दों पर निर्णायक कार्रवाई में देरी या बाधा डालती है।
- आर्थिक सहयोग तो बना रहता है, लेकिन भू-राजनीतिक तनावों के प्रति संवेदनशील रहता है।
- BRICS की भविष्य की प्रासंगिकता संस्थागत कमजोरियों को दूर करने पर निर्भर है।
BRICS में भारत की कूटनीतिक संतुलन कला
2023 में भारत की अध्यक्षता इस बात की कोशिश थी कि BRICS के टकराते हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। भारत ने युद्ध को लेकर “गहरी चिंता” जताई, लेकिन किसी पक्ष का समर्थन करने से बचा, जिससे अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनी रही। यह संतुलन भारत की गैर-संरेखित और बहुध्रुवीय विदेश नीति के सिद्धांतों के अनुरूप है, जो पश्चिमी और पूर्वी दोनों समूहों के साथ संवाद बनाए रखने में मदद करता है बिना किसी मुख्य साझेदार को दूर किए।
- भारत BRICS का उपयोग आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए करता है, भले ही भू-राजनीतिक मतभेद हों।
- रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस के साथ द्विपक्षीय संबंध बनाए रखता है।
- सीमाई विवादों के बावजूद चीन के साथ संबंधों को सतर्कता से मजबूत करता है।
आगे का रास्ता: BRICS की एकजुटता और भारत की भूमिका को मजबूत करना
- BRICS के भीतर भू-राजनीतिक विवादों को संभालने के लिए संघर्ष समाधान तंत्र को संस्थागत बनाना।
- राजनीतिक मतभेदों के प्रभाव को कम करने के लिए आर्थिक एकीकरण को मजबूत करना।
- संवाद और व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत अपनी अध्यक्षता का लाभ उठाता रहे।
- G20 और UN जैसे अन्य बहुपक्षीय मंचों के साथ साझेदारी की संभावनाओं का पता लगाना।
BRICS के भू-राजनीतिक संघर्षों पर रुख के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- BRICS के पास सदस्य देशों पर सामूहिक प्रतिबंध लगाने का कानूनी बाध्यकारी तंत्र है।
- BRICS के निर्णय सभी सदस्य देशों की सहमति से होते हैं।
- 2023 में BRICS अध्यक्षता करते हुए भारत ने युद्ध की निंदा करते हुए एकजुट रुख अपनाया।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि BRICS के पास कानूनी बाध्यकारी प्रवर्तन तंत्र नहीं है। कथन 2 सही है क्योंकि BRICS के निर्णय सर्वसम्मति पर आधारित होते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत ने चिंता जताई लेकिन एकजुट रुख का समर्थन नहीं किया।
BRICS में भारत की विदेश नीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- BRICS में भारत की विदेश नीति संविधान के अनुच्छेद 253 द्वारा संचालित होती है।
- भारत रूस और पश्चिमी देशों दोनों के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए रखता है।
- भारत BRICS में कानूनी बाध्यकारी संघर्ष समाधान तंत्र का समर्थन करता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 253 भारत को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने का अधिकार देता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि भारत रूस और पश्चिम के बीच संतुलन बनाए रखता है। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत ने BRICS में बाध्यकारी तंत्र का औपचारिक समर्थन नहीं किया है।
मुख्य प्रश्न
BRICS के भीतर जारी युद्ध पर सहमति न बनने के भारत की विदेश नीति और आर्थिक हितों पर प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और भारतीय विदेश नीति
- झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज निर्यात और औद्योगिक क्षेत्र भू-राजनीतिक तनावों से अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होते हैं, जो BRICS देशों के साथ व्यापार को प्रभावित करते हैं।
- मुख्य बिंदु: भारत की कूटनीतिक संतुलन कला, BRICS व्यापार में आर्थिक दांव और झारखंड की संसाधन-आधारित अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
BRICS का अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में कानूनी दर्जा क्या है?
BRICS एक अंतर-सरकारी मंच है जिसमें कोई बाध्यकारी कानूनी ढांचा या संधि दायित्व नहीं है। इसके निर्णय सर्वसम्मति पर आधारित और गैर-बाध्यकारी होते हैं।
भारत के विदेश नीति में अनुच्छेद 253 का क्या महत्व है?
अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों को लागू करने वाले कानून बनाने का अधिकार देता है, जो विदेश नीति की संवैधानिक नींव है।
BRICS देश विश्व GDP का कितना प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं?
BRICS देश विश्व GDP का लगभग 24% हिस्सा रखते हैं (World Bank, 2023)।
BRICS में जारी युद्ध पर एकजुट रुख क्यों नहीं बन पाया?
रूस की भागीदारी और चीन की सतर्क कूटनीति जैसे विभिन्न भू-राजनीतिक हितों के कारण सदस्य देशों में सहमति नहीं बन पाई।
यूरोपीय संघ का संघर्ष प्रतिक्रिया तंत्र BRICS से कैसे अलग है?
EU के पास कानूनी बाध्यकारी सामान्य विदेश और सुरक्षा नीति है जो समन्वित कार्रवाई की अनुमति देती है, जबकि BRICS के पास ऐसा कोई संस्थागत तंत्र नहीं है।