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भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रशासन में AI का समावेश: कानूनी, संस्थागत और आर्थिक पहलू

AI और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रशासन: संदर्भ और महत्व

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) विश्वभर में राष्ट्रीय सुरक्षा के कार्यों को तेजी से बदल रही है। 2018 से भारत ने साइबर और पारंपरिक खतरों के जवाब में रक्षा और खुफिया एजेंसियों में AI को तेजी से अपनाया है। यह बदलाव पारंपरिक प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया को चुनौती देता है और कानूनी, संस्थागत समन्वय तथा तकनीकी क्षमताओं में तत्काल सुधार की मांग करता है। AI से जुड़े खतरों की बढ़ती जटिलता और गति भारत को संप्रभुता की रक्षा करते हुए संचालन की दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता दिखाती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – रक्षा में AI, साइबर सुरक्षा कानून, और संस्थागत भूमिका
  • GS पेपर 2: राजनीति – रक्षा और साइबर सुरक्षा कानूनों पर संवैधानिक प्रावधान
  • निबंध: उभरती तकनीकें और राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां

राष्ट्रीय सुरक्षा में AI को नियंत्रित करने वाला संवैधानिक और कानूनी ढांचा

संविधान का Article 246 रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को संघ सूची में रखता है, जिससे संसद को इस क्षेत्र में व्यापक कानून बनाने का अधिकार मिलता है। Information Technology Act, 2000 साइबर सुरक्षा का मुख्य कानूनी आधार है, जिसमें सेक्शन 66A साइबर अपराधों को दंडनीय बनाता है और सेक्शन 69 सुरक्षा कारणों से सूचना अवरोधन की अनुमति देता है। Official Secrets Act, 1923 संवेदनशील जानकारी के संरक्षण के लिए है, जबकि Defence of India Act, 1962 राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे पर आपातकालीन शक्तियां प्रदान करता है।

National Cyber Security Policy, 2013 महत्वपूर्ण सूचना संरचना की सुरक्षा के लिए रूपरेखा प्रस्तुत करता है, जिसमें क्षमता निर्माण और घटना प्रतिक्रिया पर जोर है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले, खासकर PUCL vs. Union of India (1997), सुरक्षा और निजता के अधिकारों के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं, जो AI आधारित निगरानी और डेटा विश्लेषण से और जटिल हो गया है।

  • Article 246: रक्षा और सुरक्षा कानूनों में संघ सूची का अधिकार
  • IT Act के सेक्शन 66A और 69: साइबर अपराध और अधिकृत अवरोधन
  • Official Secrets Act: संवेदनशील जानकारी का संरक्षण
  • Defence of India Act: राष्ट्रीय खतरे पर आपातकालीन शक्तियां
  • National Cyber Security Policy 2013: साइबर रक्षा का ढांचा
  • PUCL vs. Union of India (1997): सुरक्षा और निजता का न्यायिक संतुलन

आर्थिक पहलू: रक्षा के लिए AI बजट और बाजार की प्रवृत्तियां

भारत का रक्षा बजट 2023-24 में लगभग ₹5.94 लाख करोड़ (~$80 बिलियन) है, जिसमें तकनीकी आधुनिकीकरण, खासकर AI क्षमताओं के लिए बढ़ती हिस्सेदारी है (Defence Ministry Budget 2023)। वैश्विक AI रक्षा बाजार 2027 तक $18.82 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है (MarketsandMarkets, 2023), और भारत 2030 तक 10% बाजार हिस्सेदारी का लक्ष्य रखता है।

घरेलू साइबर सुरक्षा बाजार तेजी से बढ़ रहा है, 2025 तक $35 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, 15.6% की CAGR के साथ (NASSCOM 2023)। रक्षा और सुरक्षा पर केंद्रित AI स्टार्टअप में 2023 में $300 मिलियन से अधिक का निवेश हुआ, जो निजी क्षेत्र की भागीदारी को दर्शाता है (Invest India)। ये आर्थिक रुझान राष्ट्रीय सुरक्षा में AI को रणनीतिक प्राथमिकता देने को दर्शाते हैं।

  • ₹5.94 लाख करोड़ रक्षा बजट (2023-24) में तकनीकी पर जोर
  • वैश्विक AI रक्षा बाजार: 2027 तक $18.82 बिलियन; भारत का 10% लक्ष्य
  • भारत का साइबर सुरक्षा बाजार: 2025 तक $35 बिलियन (15.6% CAGR)
  • 2023 में AI रक्षा स्टार्टअप में $300 मिलियन निवेश

राष्ट्रीय सुरक्षा में AI अपनाने वाली प्रमुख संस्थाएं

Defence Research and Development Organisation (DRDO) AI आधारित रक्षा तकनीक के विकास में अग्रणी है, जिसने अपने Technology Development Fund के तहत 2023 में 15 AI-केंद्रित परियोजनाएं संचालित की हैं। CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team) AI से जुड़े साइबर खतरों का प्रबंधन करता है, जिसमें 2023 में सरकारी एजेंसियों पर हुए 60% से अधिक साइबर हमले AI-संचालित मैलवेयर से जुड़े थे।

National Critical Information Infrastructure Protection Centre (NCIIPC) AI आधारित साइबर खतरों से महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा करता है। RAW और NTRO जैसी खुफिया एजेंसियां AI विश्लेषण का उपयोग खुफिया जानकारी और निगरानी के लिए कर रही हैं। Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) AI और साइबर सुरक्षा नीतियों का निर्माण करती है और एजेंसियों के बीच समन्वय करती है।

  • DRDO: AI रक्षा तकनीक विकास, 2023 में 15 परियोजनाएं
  • CERT-In: साइबर खतरे का जवाब; 60% हमले AI-संचालित (2023)
  • NCIIPC: AI खतरों से महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा
  • RAW और NTRO: AI विश्लेषण के साथ खुफिया और निगरानी
  • MeitY: AI और साइबर सुरक्षा नीतियों का समन्वय

AI-सक्षम सुरक्षा में डेटा और प्रदर्शन संकेतक

ग्लोबल AI रीडिनेस इंडेक्स 2023 (Oxford Insights) में भारत 47वें स्थान पर है, जो मध्यम तैयारी दर्शाता है। AI आधारित निगरानी प्रणालियों ने 2023 में सीमा पार घुसपैठ के प्रयासों में 25% की कमी लाई है (गृह मंत्रालय)। National Cyber Security Policy 2013 का लक्ष्य 2025 तक साइबर घटनाओं को 70% तक कम करना है, लेकिन AI संचालित हमलों की बढ़ती जटिलता इसे चुनौती देती है।

AI रक्षा स्टार्टअप इकोसिस्टम ने 2023 में 40% की वृद्धि देखी (Invest India), जो नवाचार की बढ़ती गति को दर्शाता है। हालांकि, एजेंसियों में AI के असंगठित उपयोग से समग्र प्रभावकारिता सीमित होती है और शत्रुता से सुरक्षा कमजोर होती है।

  • ग्लोबल AI रीडिनेस इंडेक्स 2023 में 47वां स्थान
  • AI निगरानी से सीमा घुसपैठ में 25% कमी (2023)
  • 2025 तक साइबर घटनाओं में 70% कमी का लक्ष्य
  • 2023 में AI रक्षा स्टार्टअप में 40% वृद्धि

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम अमेरिका में AI का रक्षा क्षेत्र में समावेश

पहलू भारत संयुक्त राज्य अमेरिका
संस्थागत संरचना विभिन्न विकेंद्रीकृत एजेंसियां (DRDO, RAW, NTRO, CERT-In, NCIIPC) सभी सैन्य शाखाओं का समन्वय करने वाला केंद्रीकृत Joint Artificial Intelligence Center (JAIC)
AI केंद्र की स्थापना कोई समर्पित केंद्रीय AI रक्षा एजेंसी नहीं 2018 में JAIC की स्थापना
संचालनात्मक प्रभाव AI का असंगठित उपयोग; मध्यम दक्षता लाभ 2022 तक खतरे की पहचान में 30% वृद्धि (DoD रिपोर्ट)
कानूनी ढांचा कई कानून; व्यापक AI गवर्नेंस ढांचे का अभाव अधिक समेकित AI नैतिकता और गवर्नेंस नीतियां

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में AI गवर्नेंस की महत्वपूर्ण कमियां

भारत के पास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए समर्पित एकीकृत AI गवर्नेंस ढांचा नहीं है, जिससे नैतिक दिशा-निर्देश और डेटा गोपनीयता सुरक्षा असंगत हैं। लंबित Personal Data Protection Bill AI अनुप्रयोगों में डेटा प्रबंधन को जटिल बनाता है। एजेंसियों के बीच समन्वय कमजोर है, जो AI के व्यापक उपयोग में बाधा डालता है और शत्रुता के लिए कमजोरियां पैदा करता है। यह विखंडन संप्रभुता और संचालन तत्परता को कमजोर करता है।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कोई व्यापक AI गवर्नेंस ढांचा नहीं
  • एकीकृत नैतिक दिशा-निर्देश और गोपनीयता सुरक्षा का अभाव
  • लंबित Personal Data Protection Bill से डेटा गवर्नेंस अस्पष्ट
  • कमजोर एजेंसी समन्वय AI की पैमाने पर सुरक्षा में बाधा

आगे का रास्ता: कानूनी, संस्थागत और तकनीकी सुधार

  • नैतिक मानकों, गोपनीयता सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं को समाहित करते हुए समर्पित AI गवर्नेंस ढांचा बनाना
  • अमेरिका के JAIC की तरह एक केंद्रीकृत AI समन्वय संस्था स्थापित कर एजेंसियों के प्रयासों को संगठित करना
  • Personal Data Protection Bill को शीघ्र पारित कर AI डेटा उपयोग को नियंत्रित करना
  • AI अनुसंधान एवं विकास और साइबर सुरक्षा बुनियादी ढांचे के लिए बजट बढ़ाना
  • सुरक्षा एजेंसियों में AI साक्षरता और संचालन समन्वय की क्षमता बढ़ाना
  • AI खतरे की पहचान और मुकाबला प्रणाली विकसित कर शत्रुता जोखिम कम करना

भारत में AI और साइबर सुरक्षा कानूनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. IT Act की Section 66A संचार सेवा के माध्यम से आपत्तिजनक संदेश भेजने को दंडनीय बनाती है।
  2. IT Act की Section 69 संप्रभुता और सुरक्षा के हित में सूचना के अवरोधन को अधिकृत करती है।
  3. Official Secrets Act, 1923 मुख्य रूप से साइबर अपराध और हैकिंग से संबंधित है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है; सेक्शन 66A आपत्तिजनक संदेश भेजने को दंडनीय बनाता है। कथन 2 सही है; सेक्शन 69 संप्रभुता और सुरक्षा के लिए सूचना अवरोधन को अधिकृत करता है। कथन 3 गलत है; Official Secrets Act संवेदनशील जानकारी के संरक्षण से संबंधित है, न कि साइबर अपराधों से।

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में AI अपनाने के संबंध में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. DRDO अपने Technology Development Fund के तहत AI परियोजनाओं का प्रबंधन करता है।
  2. National Cyber Security Policy 2013 का लक्ष्य 2025 तक सभी साइबर हमलों को समाप्त करना है।
  3. CERT-In ने 2023 में सरकारी एजेंसियों पर हुए 60% से अधिक साइबर हमलों में AI-संचालित मैलवेयर होने की सूचना दी है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है; DRDO के पास 15 AI परियोजनाएं हैं। कथन 2 गलत है; नीति का लक्ष्य साइबर घटनाओं को 70% कम करना है, समाप्त करना नहीं। कथन 3 CERT-In 2023 रिपोर्ट के अनुसार सही है।

मुख्य प्रश्न

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समावेश से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रशासन में किस प्रकार बदलाव आ रहा है? राष्ट्रीय सुरक्षा में AI को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनी और संस्थागत ढांचे का विश्लेषण करें और उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए सुधार सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – सार्वजनिक प्रशासन में शासन और प्रौद्योगिकी
  • झारखंड का पहलू: झारखंड में DRDO प्रयोगशालाएं और रांची, जमशेदपुर के IT हब सहित कई रक्षा और IT संस्थान हैं जो AI अनुसंधान और साइबर सुरक्षा में योगदान देते हैं।
  • मुख्य बिंदु: राज्य की AI रक्षा इकोसिस्टम में भूमिका, स्थानीय क्षमता निर्माण की चुनौतियां और राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के साथ समन्वय पर प्रकाश डालें।
संवैधानिक प्रावधान कौन सा संसद को राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा पर कानून बनाने का अधिकार देता है?

भारतीय संविधान का Article 246 रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को संघ सूची में रखता है, जिससे संसद को इन विषयों पर विधायी अधिकार मिलता है।

भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सूचना अवरोधन का अधिकार किस अधिनियम के तहत है?

Information Technology Act, 2000 के सेक्शन 69 के तहत सरकार को भारत की संप्रभुता, अखंडता, रक्षा या सुरक्षा के हित में सूचना अवरोधन, निगरानी या डिक्रिप्शन करने का अधिकार प्राप्त है।

CERT-In की AI और साइबर सुरक्षा में क्या भूमिका है?

CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team) साइबर सुरक्षा घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने, AI-संचालित मैलवेयर सहित खतरों की पहचान करने, और सरकारी एजेंसियों तथा महत्वपूर्ण अवसंरचना को अलर्ट और दिशा-निर्देश जारी करने के लिए जिम्मेदार है।

भारत का AI रक्षा इकोसिस्टम अमेरिका से कैसे अलग है?

अमेरिका के विपरीत, जहां एक केंद्रीकृत AI रक्षा एजेंसी (JAIC) है, भारत में AI अपनाना कई एजेंसियों में विकेंद्रीकृत है, जिससे समन्वय में चुनौतियां और खतरे की पहचान तथा प्रतिक्रिया में धीमापन होता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा में भारत के AI गवर्नेंस की मुख्य कमियां क्या हैं?

भारत के पास नैतिक दिशा-निर्देश, डेटा गोपनीयता सुरक्षा और एजेंसी समन्वय को समाहित करने वाला व्यापक AI गवर्नेंस ढांचा नहीं है, जिससे AI का विखंडित उपयोग और शत्रुता के लिए कमजोरियां उत्पन्न होती हैं।

आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ें