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Governance · Exam Notes

WTO संकट के बीच व्यापार बहुपक्षीयता की चुनौतियाँ: भारत और वैश्विक व्यापार शासन पर प्रभाव

2 min read GS Paper II

WTO संकट और प्रमुख व्यापार मोराटोरियम का अंत

विश्व व्यापार संगठन (WTO) को 2024 में याउंडे में आयोजित चौदहवें मंत्रीस्तरीय सम्मेलन (MC14) में एक गंभीर मोड़ का सामना करना पड़ा, जब पुरानी सहमितियाँ टूट गईं। 1998 से लागू ई-कॉमर्स मोराटोरियम 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया, जिससे सदस्यों की वह प्रतिबद्धता खत्म हुई कि वे इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम शुल्क नहीं लगाएंगे (WTO MC14 आधिकारिक संवाद)। साथ ही, TRIPS गैर-उल्लंघन सुरक्षा भी समाप्त हो गई, जो विकासशील देशों को बौद्धिक संपदा उपायों पर WTO विवादों से बचाती थी। ये घटनाएं WTO की बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के स्तंभ के रूप में भूमिका को कमजोर करती हैं और गहरे संस्थागत गतिरोध का संकेत देती हैं।

  • ई-कॉमर्स मोराटोरियम का अंत: WTO सदस्यों को डिजिटल व्यापार पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है, जो 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक बाजार को प्रभावित कर सकता है (WTO सचिवालय रिपोर्ट)।
  • TRIPS गैर-उल्लंघन सुरक्षा समाप्ति: 1995 से यह मोराटोरियम अनिवार्य लाइसेंसिंग जैसे उपायों पर विवादों को रोकता था; अब इसकी समाप्ति से भारत जैसे देशों के पेटेंट कानूनों पर चुनौतियाँ बढ़ेंगी।
  • विकास के लिए निवेश सुविधा (IFD) गतिरोध: प्रस्तावित बहुपक्षीय समझौते WTO में शामिल नहीं हो सके, जो संस्थागत सुस्ती और सदस्यों के अलग-अलग हितों को दर्शाता है।

विकासशील देशों और भारत के नीति क्षेत्र पर प्रभाव

WTO संकट विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रभावित करता है क्योंकि यह उनके विकास लक्ष्यों से मेल खाने वाली व्यापार नीतियों को लागू करने की क्षमता को सीमित करता है। TRIPS गैर-उल्लंघन सुरक्षा की समाप्ति विशेष रूप से भारत के फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के लिए गंभीर है, जिसने 2023 में लगभग 24 बिलियन डॉलर के दवाओं का निर्यात किया (फार्मा एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया)। भारत के भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 3(d), जो नए पेटेंट के लिए बेहतर प्रभावकारिता की आवश्यकता रखती है और पेटेंट एवर्ग्रीनिंग को रोकती है, अब WTO सुरक्षा के बिना कानूनी जोखिम में है।

  • नीति क्षेत्र में कमी: विकासशील देशों को सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों पर WTO विवादों से बचाव कम मिल रहा है।
  • फार्मास्यूटिकल निर्यात जोखिम: भारत की जेनेरिक दवा उद्योग, जो किफायती दवाओं का वैश्विक सप्लायर है, को व्यापार बाधाओं और बौद्धिक संपदा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • डिजिटल व्यापार पर शुल्क: उभरती अर्थव्यवस्थाओं को इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम शुल्क के कारण लागत बढ़ने और बाजार पहुंच घटने का खतरा है।

संस्थागत गतिरोध और वैश्विक व्यापार विभाजन

WTO का सर्वसम्मति आधारित निर्णय मॉडल डिजिटल वाणिज्य और बौद्धिक संपदा में लचीलेपन जैसी नई व्यापार वास्तविकताओं के अनुकूल शीघ्र बदलाव में बाधक है। इस संस्थागत जमेपन ने वैश्विक व्यापार के विभाजन को बढ़ावा दिया है, जिससे देश क्षेत्रीय और बहुपक्षीय समझौतों की ओर बढ़ रहे हैं, जो WTO के दायरे से बाहर हैं।

  • विवाद निपटान निकाय की ठहराव: सदस्य देशों के मतभेदों के कारण 2020 से अपीलीय निकाय काम नहीं कर रहा, जिससे प्रवर्तन तंत्र कमजोर हुआ है।
  • चयनात्मक पालन: अमेरिका जैसे बड़े देश एकतरफा व्यापार कदम उठा रहे हैं, जो WTO की प्राधिकरण को कमजोर करता है।
  • क्षेत्रीयता की ओर रुख: Comprehensive and Progressive Agreement for Trans-Pacific Partnership (CPTPP) जैसे समझौते डिजिटल व्यापार नियमों को सफलतापूर्वक शामिल कर रहे हैं, जिनमें ई-कॉमर्स शुल्क प्रतिबंध भी शामिल है; ये सदस्य देशों के संयुक्त GDP 13.5 ट्रिलियन डॉलर और 12% वार्षिक डिजिटल व्यापार वृद्धि का लाभ उठाते हैं (CPTPP सचिवालय 2023)।

डिजिटल व्यापार और बौद्धिक संपदा पर WTO बनाम CPTPP तुलना

पहलूWTOCPTPP
ई-कॉमर्स शुल्क2026 में मोराटोरियम समाप्त; सदस्य शुल्क लगा सकते हैंइलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम शुल्क निषेध
डिजिटल व्यापार नियमव्यापक डिजिटल व्यापार ढांचा नहींडेटा प्रवाह, गोपनीयता, सीमा पार सेवाओं पर विस्तृत प्रावधान
बौद्धिक संपदा लचीलेपनTRIPS गैर-उल्लंघन सुरक्षा खत्म; नीति क्षेत्र घटासार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए लचीलेपन के साथ संतुलित IP संरक्षण
सदस्यता और आर्थिक पैमाना164 सदस्य; वैश्विक कवरेज लेकिन संस्थागत गतिरोध11 सदस्य; संयुक्त GDP 13.5 ट्रिलियन; गतिशील व्यापार वृद्धि

WTO संकट के आर्थिक परिणाम

WTO की संस्थागत चुनौतियों का वैश्विक और भारत दोनों पर स्पष्ट आर्थिक प्रभाव पड़ा है। वैश्विक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्रवाह 2023 में 1.58 ट्रिलियन डॉलर तक धीमा हो गया (UNCTAD विश्व निवेश रिपोर्ट 2024), जिसका एक कारण व्यापार नियमों में अनिश्चितता और निवेश सुविधा समझौते का ठहराव है। ई-कॉमर्स मोराटोरियम के खत्म होने से डिजिटल निर्यातकों और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ने की संभावना है।

  • वैश्विक FDI में गिरावट: संस्थागत गतिरोध निवेशकों का भरोसा कम करते हैं और सीमा पार निवेश को कठिन बनाते हैं।
  • डिजिटल व्यापार में व्यवधान: इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर शुल्क से वैश्विक डिजिटल बाजार विभाजित हो सकते हैं और कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • फार्मास्यूटिकल निर्यात जोखिम: भारत के 24 बिलियन डॉलर के फार्मा निर्यात को बौद्धिक संपदा विवाद और व्यापार बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत में कानूनी और संवैधानिक पहलू

भारत का संविधान सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून को नियंत्रित नहीं करता, लेकिन WTO समझौतों और घरेलू कानूनों के बीच तालमेल महत्वपूर्ण है। 1994 के TRIPS समझौते के तहत भारत अंतरराष्ट्रीय रूप से बंधा हुआ है, जबकि घरेलू कानून जैसे भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 (धारा 3(d)) पेटेंट एवर्ग्रीनिंग को रोकने के लिए सुरक्षा प्रदान करते हैं। WTO मोराटोरियम की समाप्ति से ये घरेलू प्रावधान अधिक जांच और संभावित व्यापार विवादों के अधीन हो गए हैं।

  • TRIPS समझौता: IP संरक्षण के न्यूनतम मानक तय करता है लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए लचीलेपन देता है।
  • भारतीय पेटेंट अधिनियम धारा 3(d): बिना बेहतर प्रभावकारिता के ज्ञात पदार्थों के पेटेंट को रोकता है, जो सस्ती दवाओं के लिए जरूरी है।
  • नीति क्षेत्र का तनाव: WTO की कमजोर होती सुरक्षा भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रित IP नीतियों के लिए चुनौती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (व्यापार, FDI), अंतरराष्ट्रीय संबंध (WTO, व्यापार समझौते)
  • निबंध: वैश्विक व्यापार शासन की चुनौतियाँ और भारत की आर्थिक संप्रभुता पर प्रभाव
  • प्रिलिम्स: WTO समझौते (TRIPS, ई-कॉमर्स मोराटोरियम), विवाद निपटान तंत्र, डिजिटल व्यापार अवधारणाएं

आगे का रास्ता: बहुपक्षीयता बहाल करना और विकास की रक्षा

  • WTO मोराटोरियम पुनर्जीवित करें: ई-कॉमर्स मोराटोरियम को फिर से लागू करना डिजिटल व्यापार को स्थिर करेगा और शुल्क वृद्धि को रोकेगा।
  • विवाद निपटान मजबूत करें: अपीलीय निकाय का सुधार कर विश्वसनीय प्रवर्तन तंत्र बहाल करें।
  • विकासशील देशों के नीति क्षेत्र की रक्षा: TRIPS गैर-उल्लंघन सुरक्षा को पुनर्स्थापित या प्रतिस्थापित करें ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य और विकास उपाय सुरक्षित रहें।
  • WTO के डिजिटल व्यापार ढांचे को बढ़ाएं: उभरती तकनीकों और डेटा शासन को प्रतिबिंबित करने वाले व्यापक नियमों पर बातचीत करें।
  • समावेशी बहुपक्षीय समझौतों को बढ़ावा दें: IFD जैसे बहुपक्षीय समझौतों के कानूनी समेकन को स्पष्ट करें ताकि लचीलापन और एकता संतुलित हो।

अभ्यास प्रश्न

WTO ई-कॉमर्स मोराटोरियम के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. मोराटोरियम इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम शुल्क को रोकता है।
  2. मोराटोरियम 28 वर्षों के बाद 2026 में समाप्त हो गया।
  3. मोराटोरियम एक बाध्यकारी WTO संधि प्रावधान था।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

व्याख्या: कथन 1 सही है क्योंकि मोराटोरियम इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम शुल्क रोकता था। कथन 2 भी सही है क्योंकि मोराटोरियम 28 वर्षों के बाद 2026 में समाप्त हुआ। कथन 3 गलत है; मोराटोरियम सदस्य देशों की सहमति था लेकिन बाध्यकारी संधि प्रावधान नहीं था।

TRIPS गैर-उल्लंघन सुरक्षा के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. यह विकासशील देशों को WTO-अनुरूप उपायों पर विवादों से बचाता था।
  2. यह 1995 में समाप्त हो गया।
  3. इसकी समाप्ति से भारत के पेटेंट कानूनों पर धारा 3(d) के तहत जोखिम बढ़ गया है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

व्याख्या: कथन 1 सही है; सुरक्षा विकासशील देशों की रक्षा करती थी। कथन 2 गलत है; यह हाल ही में 2024/26 में समाप्त हुई, 1995 में नहीं। कथन 3 सही है; समाप्ति से भारत के पेटेंट कानूनों पर जोखिम बढ़ गया है।

मुख्य प्रश्न

विश्व व्यापार संगठन में हालिया संकट कैसे व्यापार बहुपक्षीयता के सिद्धांतों को चुनौती देता है और विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल तथा डिजिटल व्यापार क्षेत्रों में भारत के नीति क्षेत्र को कैसे प्रभावित करता है, इसका आलोचनात्मक विश्लेषण करें। वैश्विक व्यापार प्रणाली को मजबूत करने के लिए सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंध)
  • झारखंड परिप्रेक्ष्य: झारखंड के उभरते फार्मास्यूटिकल और IT क्षेत्र वैश्विक व्यापार नियमों से संवेदनशील हैं, जो निर्यात और बौद्धिक संपदा को प्रभावित करते हैं।
  • मुख्य बिंदु: WTO संकट का स्थानीय उद्योगों पर प्रभाव और बदलते व्यापार मानदंडों के अनुकूल राज्य स्तर पर समर्थन की आवश्यकता।
WTO ई-कॉमर्स मोराटोरियम क्या है और यह क्यों समाप्त हुआ?

WTO ई-कॉमर्स मोराटोरियम 1998 से सदस्यों के बीच एक समझौता था, जिसके तहत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम शुल्क नहीं लगाया जाता था। यह 31 मार्च 2026 को MC14 में विस्तार पर सहमति न बनने के कारण समाप्त हो गया, जिससे देशों को डिजिटल व्यापार पर शुल्क लगाने की अनुमति मिल गई।

TRIPS गैर-उल्लंघन सुरक्षा की समाप्ति विकासशील देशों को कैसे प्रभावित करती है?

यह सुरक्षा WTO विवादों से बचाती थी जो TRIPS के अनुरूप उपायों पर हो सकते थे लेकिन व्यापार हितों को प्रभावित करते थे, जिससे विकासशील देशों के सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के लिए नीति क्षेत्र सीमित हो गया है।

भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा 3(d) क्या है?

धारा 3(d) ज्ञात दवाओं के पेटेंट को तभी मंजूरी देती है जब नई दवा बेहतर प्रभावकारिता दिखाए, जिससे पेटेंट एवर्ग्रीनिंग रोकी जाती है और भारत में किफायती दवाओं की उपलब्धता बनी रहती है।

WTO संकट वैश्विक FDI प्रवाह को कैसे प्रभावित करता है?

संस्थागत गतिरोध और व्यापार नियमों में अनिश्चितता के कारण वैश्विक FDI प्रवाह धीमा हो गया है, जो 2023 में 1.58 ट्रिलियन डॉलर रहा (UNCTAD रिपोर्ट)।

CPTPP डिजिटल व्यापार में WTO की तुलना में क्या फायदे देता है?

CPTPP व्यापक डिजिटल व्यापार नियम शामिल करता है, ई-कॉमर्स शुल्क निषेध करता है, और 11 सदस्यों के बीच तेज डिजिटल व्यापार वृद्धि को प्रोत्साहित करता है, जबकि WTO में मोराटोरियम समाप्ति के बाद बाध्यकारी डिजिटल व्यापार प्रावधान नहीं हैं।

Sources and further reading

Tags:Governance