Constitution, governance, social justice and institutional analysis
MoSPI की ‘Women and Men in India 2025’ रिपोर्ट में स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के साथ-साथ आर्थिक भागीदारी और नेतृत्व में बनी खामियों का खुलासा हुआ है। कानूनी सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के बावजूद महिलाओं की श्रम भागीदारी केवल 19.7% है, जबकि निर्णय प्रक्रिया में उनकी हिस्सेदारी सीमित है, जो लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों की जरूरत को दर्शाता है।
‘Women and Men in India 2025’ रिपोर्ट का परिचय
मंत्रालय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन (MoSPI) ने अपनी प्रमुख रिपोर्ट “Women and Men in India 2025: Selected Indicators and Data” का 27वां संस्करण जारी किया है, जिसमें 2023 तक के सरकारी स्रोतों से प्राप्त लिंग-आधारित आंकड़ों को समेकित किया गया है। यह रिपोर्ट जनसांख्यिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक भागीदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़े 50 महत्वपूर्ण संकेतकों को शामिल करती है। साथ ही, परिभाषाओं और आंकड़ा संग्रह के तरीकों की स्पष्टता के लिए विस्तृत मेटाडेटा भी उपलब्ध है। यह रिपोर्ट ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और समय के साथ हुए बदलावों को भी दर्शाती है, जिससे भारत में लिंग असमानताओं की गहराई से समझ संभव होती है।
UPSC से प्रासंगिकता
- GS पेपर 1: जनसांख्यिकी रुझान, समाज में लिंग संबंधी मुद्दे
- GS पेपर 2: महिलाओं के लिए संवैधानिक सुरक्षा, कानूनी ढांचे
- GS पेपर 3: महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, सरकारी योजनाएं
- निबंध: भारत में लिंग समानता और महिला सशक्तिकरण
लिंग संकेतकों में प्रगति और बनी चुनौतियां
रिपोर्ट में कई संकेतकों में धीरे-धीरे सुधार दिखे हैं। जन्म के समय लिंग अनुपात 2017-19 के 904 लड़कियों प्रति 1000 लड़कों से बढ़कर 2021-23 में 917 हो गया है, जो महिला शिशुओं के बेहतर बचाव को दर्शाता है। शिशु मृत्यु दर (IMR) 2008 में 36 से घटकर 2023 में 26 हो गई है (SRS के अनुसार)। महिला साक्षरता दर 2011 की जनगणना के 65.8% से बढ़कर 2021-23 में 70.3% हो गई है, जो शिक्षा तक बेहतर पहुंच का संकेत है। प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक लिंग समानता हासिल हो चुकी है।
- 2024 में लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़कर 14.4% हुआ, फिर भी यह वैश्विक औसत से कम है।
- शहरी स्थानीय निकायों में केवल 25% महिलाएं औपचारिक निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में शामिल हैं (पंचायती राज मंत्रालय, 2023)।
- 2022 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की शिकायतों में 2021 की तुलना में 7% की वृद्धि हुई (NCRB), जो सामाजिक चुनौतियों को दर्शाता है।
आर्थिक भागीदारी और वेतन असमानता
स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के बावजूद महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बेहद कम है। महिला श्रम भागीदारी दर 2021-22 में केवल 19.7% थी (PLFS), जो पुरुषों की तुलना में काफी कम है। भारत की GDP में महिलाओं का योगदान लगभग 18-20% है, जो महिला मानव संसाधन के अधूरा उपयोग को दर्शाता है। लिंग वेतन अंतर अभी भी मौजूद है, जहां महिलाएं औसतन पुरुषों से 19% कम कमाती हैं (ILO 2023)। महिला उद्यमी MSMEs में मात्र 14% हैं (MSME मंत्रालय, 2023), जो व्यापार में बाधाओं और ऋण तक पहुंच की कमी को दर्शाता है।
- सरकारी योजनाओं जैसे महिला शक्ति केन्द्र को बजट 2023-24 में 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास और जागरूकता के जरिए सशक्त बनाती हैं।
- कार्यस्थल भेदभाव और सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताएं महिलाओं की औपचारिक रोजगार और नेतृत्व भूमिकाओं में भागीदारी को सीमित करती हैं।
महिलाओं के अधिकारों के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा
भारतीय संविधान का Article 15(3) राज्य को महिलाओं के विकास के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है। महत्वपूर्ण कानूनों में Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005, Maternity Benefit Act, 1961, Equal Remuneration Act, 1976, और Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों जैसे Vishaka बनाम राजस्थान राज्य (1997) ने कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए दिशानिर्देश बनाए, जो कानूनी सुरक्षा को मजबूत करते हैं। हालांकि, इन कानूनों का क्रियान्वयन और जागरूकता अभी भी असमान है।
लिंग डेटा और नीतिगत भूमिका निभाने वाली संस्थाएं
MoSPI और इसकी National Statistical Office (NSO) लिंग-आधारित आंकड़े संकलित करने और प्रकाशित करने में महत्वपूर्ण हैं, जैसे कि Periodic Labour Force Survey (PLFS) और जनगणना। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) महिलाओं के लिए कल्याण योजनाओं और नीतिगत पहल को लागू करता है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाली एक संवैधानिक संस्था है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) स्वास्थ्य और जनसांख्यिकी के व्यापक आंकड़े प्रदान करता है, जो लिंग विश्लेषण के लिए जरूरी हैं।
भारत और चीन में जन्म के समय लिंग अनुपात की तुलना
| संकेतक | भारत (2021-23) | चीन (2022) |
|---|---|---|
| जन्म के समय लिंग अनुपात (1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या) | 917 | लगभग 900 (111 लड़कों पर 100 लड़कियां) |
| नीतिगत हस्तक्षेप | लिंग चयनात्मक प्रथाओं के खिलाफ कानून, जागरूकता अभियान | एक बच्चा नीति में ढील, लिंग चयनात्मक गर्भपात पर सख्त कानून |
| रुझान | हाल के वर्षों में धीरे-धीरे सुधार | नीति सुधारों के बाद स्पष्ट सुधार |
| प्रवर्तन चुनौतियां | राज्यों में भिन्न, सामाजिक-सांस्कृतिक प्रतिरोध जारी | कड़ी सरकारी निगरानी और दंड |
रिपोर्ट द्वारा उजागर महत्वपूर्ण खामियां
रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के बावजूद महिलाओं की आर्थिक और नेतृत्व भूमिकाओं में असमानता बनी हुई है। शिक्षा और स्वास्थ्य के आंकड़ों पर अधिक ध्यान देने से सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं जैसे पितृसत्तात्मक सोच, कार्यस्थल भेदभाव, पूंजी और नेटवर्क तक सीमित पहुंच छिप जाती है। महिलाओं की कम श्रम भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में कम प्रतिनिधित्व के लिए केवल कल्याण योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि लक्षित नीतिगत उपायों की जरूरत है।
आगे का रास्ता: नीतिगत और संस्थागत प्राथमिकताएं
- कार्यस्थल पर उत्पीड़न, समान वेतन और घरेलू हिंसा से जुड़े मौजूदा कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, साथ ही निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र मजबूत करें।
- महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए MSMEs में आसान ऋण, मेंटरशिप और बाजार से जोड़ने की सुविधा बढ़ाएं।
- राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व आरक्षण और क्षमता विकास के जरिए बढ़ाएं।
- महिला शक्ति केन्द्र जैसी योजनाओं के तहत कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण को ग्रामीण और वंचित महिलाओं तक पहुंचाएं।
- जाति, वर्ग और विकलांगता जैसे अंतःविभाजित कारकों पर डेटा संग्रह बढ़ाकर नीतियों को प्रभावी बनाएं।
- महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को रोकने वाली सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताओं के खिलाफ निरंतर जागरूकता अभियान चलाएं।
‘Women and Men in India 2025’ रिपोर्ट के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- रिपोर्ट के अनुसार भारत में महिला श्रम भागीदारी दर PLFS 2021-22 में 30% से अधिक है।
- जन्म के समय लिंग अनुपात 2017-19 से 2021-23 के बीच 904 से बढ़कर 917 हो गया है।
- 2024 में लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग 20% हो गया है।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि महिला श्रम भागीदारी दर लगभग 19.7% है, 30% से अधिक नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि जन्म के समय लिंग अनुपात 904 से बढ़कर 917 हो गया है। कथन 3 गलत है क्योंकि लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 14.4% है, लगभग 20% नहीं।
भारत में महिलाओं के लिए संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- संविधान का Article 15(3) महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है।
- Equal Remuneration Act, 1976 लिंग की परवाह किए बिना समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करता है।
- Protection of Women from Domestic Violence Act का enactment 2010 में हुआ था।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि Article 15(3) महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति देता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि Equal Remuneration Act, 1976 समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि Protection of Women from Domestic Violence Act 2005 में लागू हुआ था, 2010 में नहीं।
मुख्य प्रश्न
‘Women and Men in India 2025’ रिपोर्ट के आर्थिक भागीदारी और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में लिंग असमानताओं के प्रमुख निष्कर्षों की समीक्षा करें। इन खामियों को दूर करने के लिए प्रभावी नीतिगत उपाय सुझाएं। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 1 (समाज और सामाजिक मुद्दे), पेपर 3 (आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण)
- झारखंड का नजरिया: झारखंड में महिला श्रम भागीदारी दर राष्ट्रीय औसत से कम है, ग्रामीण-शहरी अंतर स्पष्ट है; महिला शक्ति केन्द्र जैसी योजनाओं का स्थानीय कार्यान्वयन आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं पर असर डालता है।
- मुख्य बिंदु: झारखंड में महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां, लिंग अनुपात और साक्षरता के आंकड़े, तथा राज्य विशेष नीतियों की भूमिका पर प्रकाश डालें।
भारतीय संविधान के Article 15(3) का महिलाओं के लिए क्या महत्व है?
Article 15(3) राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है, जिससे आरक्षण और कल्याण योजनाओं के जरिए लिंग समानता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
‘Women and Men in India 2025’ रिपोर्ट के अनुसार जन्म के समय लिंग अनुपात में क्या बदलाव आया है?
जन्म के समय लिंग अनुपात 2017-19 के 904 लड़कियों प्रति 1000 लड़कों से बढ़कर 2021-23 में 917 हो गया है, जो बेहतर बचाव और लिंग चयनात्मक प्रथाओं में कमी को दर्शाता है।
भारत में वर्तमान महिला श्रम भागीदारी दर क्या है?
Periodic Labour Force Survey 2021-22 के अनुसार महिला श्रम भागीदारी दर लगभग 19.7% है, जो पुरुषों की तुलना में काफी कम है।
कौन सी सरकारी योजना ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास के जरिए सशक्त बनाती है?
महिला शक्ति केन्द्र योजना, जिसे बजट 2023-24 में 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, जागरूकता और क्षमता निर्माण के माध्यम से सशक्त बनाती है।
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की भूमिका क्या है?
NCW महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाली संवैधानिक संस्था है, जो शिकायतों का निवारण करती है और सरकार को महिला संबंधी नीतिगत मामलों में सलाह देती है।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
Sources and further reading
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