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इटली को पाकिस्तान के साथ रक्षा तकनीक साझा करने से बचने की सलाह: रणनीतिक और नियामक पहलू

इटली की रक्षा तकनीक हस्तांतरण योजना: संदर्भ और प्रभाव

साल 2024 में, इटली को पाकिस्तान के साथ उन्नत रक्षा तकनीक साझा करने से बचने की अंतरराष्ट्रीय सलाह मिली है। इसका कारण क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा और निर्यात नियंत्रण नियमों का पालन न होना है। यूरोपीय संघ का सदस्य होने के नाते, इटली EU Council Common Position 2008/944/CFSP के तहत बंधा है, जो उन देशों को हथियार निर्यात पर रोक लगाता है जो संघर्षों या मानवाधिकार उल्लंघनों में शामिल हों। पाकिस्तान को कश्मीर में उसकी भूमिका और आतंकवाद से जुड़े आरोपों की वजह से अक्सर इस नियम के तहत जांचा जाता है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इटली का रक्षा निर्यात उद्योग 2023 में लगभग €13 अरब का है (SIPRI Arms Transfers Database 2024), जबकि पाकिस्तान के रक्षा आयात पिछले पांच वर्षों में 12% वार्षिक वृद्धि के साथ $2.5 अरब तक पहुंच गए हैं (SIPRI)।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – निर्यात नियंत्रण व्यवस्था, द्विपक्षीय रक्षा समझौते, यूरोपीय संघ की विदेश नीति
  • GS पेपर 3: सुरक्षा – रक्षा तकनीक हस्तांतरण, दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा
  • निबंध: तकनीक हस्तांतरण और भू-राजनीतिक स्थिरता पर प्रभाव

रक्षा तकनीक हस्तांतरण के लिए कानूनी और नियामक ढांचा

इटली के रक्षा निर्यात पर EU Council Common Position 2008/944/CFSP लागू होता है, जो सदस्य देशों को हथियार निर्यात से पहले मानवाधिकार, संघर्ष में शामिल होने, और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखने का निर्देश देता है। पाकिस्तान को कई देशों ने आतंकवाद समर्थक राज्य घोषित किया है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है (US State Department, 2023), जो ऐसे हस्तांतरण को और जटिल बनाता है। वैश्विक स्तर पर, Wassenaar Arrangement (1996 में स्थापित) में 42 सदस्य देश पारंपरिक हथियारों और द्वैध-उपयोग तकनीकों पर नियंत्रण रखते हैं ताकि अस्थिरता फैलाने वाली तकनीक के संचय को रोका जा सके। भारत का अपना Defence Production Act, 1950 भी रक्षा निर्यात को नियंत्रित करता है, जो तकनीक साझा करने में सतर्कता दिखाता है।

  • EU Common Position 2008/944/CFSP: संघर्ष क्षेत्र और मानवाधिकार उल्लंघन करने वाले देशों को हथियार निर्यात पर रोक।
  • Wassenaar Arrangement: पारंपरिक हथियार और द्वैध-उपयोग तकनीकों के लिए बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था।
  • US Arms Export Control Act (AECA): रक्षा निर्यात पर कड़ी निगरानी, खासकर पाकिस्तान के लिए।
  • भारत का Defence Production Act, 1950: रक्षा तकनीक के निर्यात-आयात को नियंत्रित करता है।

रक्षा तकनीक साझा करने के आर्थिक और रणनीतिक पहलू

2023 में इटली के रक्षा निर्यात का मूल्य €13 अरब था, जो उसकी औद्योगिक अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है (SIPRI 2024)। पाकिस्तान के रक्षा आयात में 2018-2023 के बीच 12% वार्षिक वृद्धि हुई है, जो $2.5 अरब तक पहुंच गया है, जो इस्लामाबाद की सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण की इच्छा को दर्शाता है (SIPRI)। पाकिस्तान के साथ उन्नत रक्षा तकनीक साझा करने से दक्षिण एशिया के रणनीतिक संतुलन में खलल पड़ सकता है, खासकर भारत के संदर्भ में, जिसने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ₹5.25 लाख करोड़ (~$65 बिलियन) का रक्षा बजट आवंटित किया है (Union Budget 2023-24)। ऐसे हस्तांतरण भारत की सुरक्षा रणनीति को कमजोर कर सकते हैं और इटली के भारत के साथ रणनीतिक व्यापार संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।

  • इटली के रक्षा निर्यात: €13 अरब (2023) – वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खिलाड़ी।
  • पाकिस्तान के रक्षा आयात: $2.5 अरब (2023), 5 वर्षों में 12% CAGR।
  • भारत का रक्षा बजट: ₹5.25 लाख करोड़ (~$65 बिलियन) 2023-24 के लिए।
  • दक्षिण एशियाई रणनीतिक संतुलन में संभावित अस्थिरता।

रक्षा निर्यात नियंत्रण में संस्थागत भूमिकाएं

इटली में, रक्षा मंत्रालय (MoD) निर्यात लाइसेंसिंग और तकनीक हस्तांतरण की मंजूरी देता है, जो EU नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है। European Union External Action Service (EEAS) सदस्य देशों में EU Common Position लागू करता है। भारत में Directorate General of Foreign Trade (DGFT) रक्षा निर्यात-आयात को Defence Production Act के तहत नियंत्रित करता है। Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) हथियार हस्तांतरण पर विश्वसनीय आंकड़े प्रदान करता है, जबकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) अस्थिरता फैलाने वाले हथियारों की निगरानी करता है और प्रतिबंध लागू करता है।

  • इटली MoD: रक्षा निर्यात के लिए लाइसेंस जारी करता है।
  • EEAS: EU हथियार निर्यात नीति लागू करता है।
  • भारत DGFT: राष्ट्रीय कानून के तहत रक्षा व्यापार नियंत्रित करता है।
  • SIPRI: वैश्विक हथियार हस्तांतरण का डेटा स्रोत।
  • UNSC: हथियार प्रतिबंध लगाता है और अस्थिरता पर नजर रखता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: इटली और अमेरिका के पाकिस्तान के प्रति रक्षा निर्यात नियंत्रण

पैरामीटर इटली (EU सदस्य) संयुक्त राज्य अमेरिका
नियामक ढांचा EU Council Common Position 2008/944/CFSP Arms Export Control Act (AECA) और ITAR
पाकिस्तान पर निर्यात प्रतिबंध संघर्ष और आतंकवाद चिंताओं के कारण प्रतिबंधित 1990 से कड़ी सीमाएं, उन्नत तकनीक पर लगभग पूरी रोक
प्रवर्तन तंत्र रक्षा मंत्रालय और EEAS State Department और Department of Defense
क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव कम सख्त प्रवर्तन और EU सदस्य राज्यों की छूट के कारण संभावित जोखिम उन्नत तकनीक हस्तांतरण को प्रभावी रूप से रोकता है, रणनीतिक संतुलन बनाए रखता है

महत्वपूर्ण नीति अंतराल: उभरती द्वैध-उपयोग तकनीकें

वर्तमान बहुपक्षीय ढांचे, जैसे कि Wassenaar Arrangement, उभरती द्वैध-उपयोग रक्षा तकनीकों जैसे साइबर क्षमताएं, AI-सक्षम सिस्टम, और अनमैंड प्लेटफॉर्म के लिए प्रभावी प्रवर्तन तंत्र नहीं रखते। इटली और अन्य देशों के लिए तीसरे पक्ष के सहयोग या नागरिक उपयोग के माध्यम से अप्रत्यक्ष तकनीक हस्तांतरण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे निगरानी और नियंत्रण जटिल हो जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय गैर-प्रसार प्रयासों और दक्षिण एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिरता को कमजोर करता है।

  • उभरती द्वैध-उपयोग रक्षा तकनीकों के लिए एकीकृत वैश्विक ढांचे की कमी।
  • तीसरे पक्ष के सहयोग से अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर निगरानी चुनौतीपूर्ण।
  • नागरिक तकनीक चैनलों के जरिए निर्यात नियंत्रणों की संभावित धांधली।

महत्व और आगे का रास्ता

इटली द्वारा पाकिस्तान के साथ रक्षा तकनीक साझा करने की संभावना दक्षिण एशियाई सुरक्षा संतुलन को अस्थिर कर सकती है और स्थापित निर्यात नियंत्रण नियमों का उल्लंघन है। EU Common Position के अनुपालन को सख्ती से लागू करना और भारत तथा अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ समन्वय बढ़ाना जरूरी है। उभरती द्वैध-उपयोग तकनीकों के लिए एक बाध्यकारी, प्रवर्तन योग्य वैश्विक ढांचा विकसित करना आवश्यक होगा ताकि महत्वपूर्ण खामियों को बंद किया जा सके। कूटनीतिक बातचीत में पारदर्शिता और जोखिम मूल्यांकन को प्राथमिकता देना चाहिए ताकि अनजाने में तकनीक के प्रसार को रोका जा सके।

  • जोखिम भरे हस्तांतरण रोकने के लिए इटली द्वारा EU Common Position का सख्त पालन।
  • EU, भारत और अमेरिका के बीच निर्यात नियंत्रण पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।
  • उभरती द्वैध-उपयोग रक्षा तकनीकों के लिए बाध्यकारी वैश्विक मानदंड विकसित करना।
  • रक्षा तकनीक सहयोगों में नियमित जोखिम मूल्यांकन और पारदर्शिता।

EU Council Common Position 2008/944/CFSP के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह उन देशों को हथियार निर्यात पर रोक लगाता है जो आंतरिक या अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में शामिल हैं।
  2. यह सभी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी है।
  3. यह सदस्य देशों को किसी भी देश को हथियार निर्यात करने की अनुमति देता है यदि उन्हें UN Security Council की छूट मिल जाए।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि Common Position संघर्ष क्षेत्रों को हथियार निर्यात पर रोक लगाता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह EU सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी है। कथन 3 गलत है; UN Security Council की छूट EU सदस्य देशों के निर्यात नियंत्रण दायित्वों को नहीं बदलती।

Wassenaar Arrangement के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह हथियार निर्यात को नियंत्रित करने वाला कानूनी बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है।
  2. यह पारंपरिक हथियारों और द्वैध-उपयोग तकनीकों दोनों को अपने नियंत्रण सूची में शामिल करता है।
  3. भारत Wassenaar Arrangement का सदस्य है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि Wassenaar Arrangement एक स्वैच्छिक निर्यात नियंत्रण व्यवस्था है, कानूनी बाध्यकारी संधि नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि यह पारंपरिक हथियारों और द्वैध-उपयोग तकनीकों को नियंत्रित करता है। कथन 3 गलत है; भारत Wassenaar Arrangement का सदस्य नहीं है।

मुख्य प्रश्न

इटली द्वारा पाकिस्तान के साथ रक्षा तकनीक साझा करने से उत्पन्न रणनीतिक और नियामक चुनौतियों पर चर्चा करें। उभरती द्वैध-उपयोग तकनीकों के लिए अंतरराष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं को कैसे मजबूत किया जा सकता है?

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में रक्षा निर्माण इकाइयां हैं और यह भारत के रणनीतिक औद्योगिक आधार का हिस्सा है, इसलिए निर्यात नियंत्रण नीतियां स्थानीय आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • मुख्य बिंदु: भारत के निर्यात-आयात नियंत्रण को क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़कर उत्तर तैयार करें, झारखंड की रक्षा उत्पादन और तकनीक सुरक्षा में भूमिका पर जोर दें।
EU Council Common Position 2008/944/CFSP क्या है?

EU Council Common Position 2008/944/CFSP एक बाध्यकारी नीति ढांचा है जो EU सदस्य देशों के हथियार निर्यात को नियंत्रित करता है। यह उन देशों को हथियार बिक्री पर रोक लगाता है जो संघर्ष, मानवाधिकार उल्लंघन या आतंकवाद में शामिल हों, और EU के भीतर निर्यात नियंत्रण को समन्वित करता है।

पाकिस्तान के रक्षा आयात वृद्धि से भारत को क्यों चिंता है?

पाकिस्तान के रक्षा आयात 2018-2023 के दौरान 12% वार्षिक वृद्धि के साथ $2.5 अरब तक पहुंच गए हैं, जिससे उसकी सैन्य क्षमताएं मजबूत हुई हैं और दक्षिण एशियाई रणनीतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है, खासकर भारत के संदर्भ में।

Wassenaar Arrangement रक्षा निर्यात में क्या भूमिका निभाता है?

Wassenaar Arrangement एक स्वैच्छिक बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था है, जिसमें 42 देश पारंपरिक हथियारों और द्वैध-उपयोग तकनीकों को नियंत्रित करते हैं ताकि अस्थिरता फैलाने वाले हथियारों के संचय और प्रसार को रोका जा सके।

अमेरिका पाकिस्तान के लिए रक्षा निर्यात कैसे नियंत्रित करता है?

अमेरिका Arms Export Control Act (AECA) और International Traffic in Arms Regulations (ITAR) के तहत कड़े नियंत्रण लागू करता है, और 1990 से उन्नत रक्षा तकनीक के पाकिस्तान को हस्तांतरण पर लगभग पूरी रोक लगाई है ताकि क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन बना रहे।

उभरती रक्षा तकनीकों के नियंत्रण में मुख्य नीति अंतराल क्या है?

उभरती द्वैध-उपयोग रक्षा तकनीकों के लिए कोई एकीकृत, बाध्यकारी वैश्विक ढांचा नहीं है, जिससे नागरिक उपयोग या तीसरे पक्ष के सहयोग के माध्यम से अप्रत्यक्ष तकनीक हस्तांतरण की संभावना बनी रहती है।