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JPSC Notes · Exam Notes

झारखंड राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना: नीति ढांचा, पारिस्थितिक डेटा और क्रियान्वयन चुनौतियाँ

1 min read General Studies

झारखंड राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (JSAPCC) का परिचय

झारखंड राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (JSAPCC) 2012 में तैयार की गई थी, जो भारत सरकार द्वारा 2008 में शुरू की गई राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) के अनुरूप राज्य स्तर की पहल है। झारखंड की यह योजना स्थानीय पारिस्थितिक आंकड़ों, जैव विविधता संरक्षण की प्राथमिकताओं और अपने विशिष्ट वन-खनिज भौगोलिक ढांचे के अनुरूप जलवायु सहनशीलता रणनीतियों को समाहित करती है। इस योजना का समन्वय झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) और झारखंड वन विभाग सहित अन्य संस्थान करते हैं। JSAPCC कृषि, वानिकी और ऊर्जा क्षेत्रों में जलवायु संबंधी कमजोरियों को दूर करने के साथ-साथ संवैधानिक और विधिक दायित्वों का पालन भी सुनिश्चित करती है।

JPSC परीक्षा से प्रासंगिकता

  • पर्यावरण और पारिस्थितिकी पेपर: झारखंड-विशिष्ट जलवायु परिवर्तन नीतियाँ और जैव विविधता संरक्षण
  • भूगोल पेपर: झारखंड के वन आवरण और कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
  • राजनीति पेपर: राज्य पर्यावरण शासन को निर्देशित करने वाले संवैधानिक प्रावधान और कानूनी ढांचा

JSAPCC के लिए कानूनी और संवैधानिक आधार

JSAPCC अनुच्छेद 48A के तहत संचालित होता है, जो राज्यों को पर्यावरण संरक्षण और सुधार का दायित्व देता है। यह योजना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (जिसमें केंद्र सरकार को कार्रवाई का अधिकार है), वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और जैव विविधता अधिनियम, 2002 (धारा 18-20) के अनुरूप है, जो जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जल (प्रदूषण निवारण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण) अधिनियम, 1981 के तहत प्रदूषण नियंत्रण लागू करता है। यह बहुस्तरीय कानूनी ढांचा JSAPCC की गतिविधियों को केंद्र और राज्य दोनों पर्यावरण नियमों के अनुरूप बनाता है।

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्देशात्मक सिद्धांत।
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986: केंद्रीय पर्यवेक्षण और आपातकालीन शक्तियाँ।
  • वन संरक्षण अधिनियम, 1980: वन भूमि के उपयोग नियंत्रण।
  • जैव विविधता अधिनियम, 2002: स्वदेशी जैव विविधता और समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा।
  • जल और वायु अधिनियम: प्रदूषण की निगरानी और नियंत्रण।

झारखंड का पारिस्थितिक और जैव विविधता प्रोफाइल

भारत के इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 (ISFR) के अनुसार झारखंड का वन आवरण उसकी कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 29.5% है। राज्य में लगभग 1,500 वनस्पति प्रजातियाँ और 300 पशु प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 25 प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं (झारखंड जैव विविधता बोर्ड रिपोर्ट 2023)। पिछले 30 वर्षों में क्षेत्र का औसत वार्षिक तापमान 0.8°C बढ़ा है (IMD 2022), जिससे वर्षा के असामान्य पैटर्न और सूखे की आवृत्ति बढ़ी है। वार्षिक वर्षा 1100 मिमी से 1400 मिमी के बीच बदलती रहती है, जो कृषि उत्पादन और वन स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।

  • वन आवरण: 29.5% (ISFR 2023)
  • संकटग्रस्त प्रजातियाँ: 25 (झारखंड जैव विविधता बोर्ड 2023)
  • तापमान वृद्धि: पिछले 30 वर्षों में +0.8°C (IMD 2022)
  • वार्षिक वर्षा परिवर्तनशीलता: 1100-1400 मिमी (झारखंड मौसम विभाग 2023)

JSAPCC के आर्थिक पहलू

राज्य ने 2023-24 के बजट में JSAPCC के तहत जलवायु सहनशीलता और वृक्षारोपण के लिए लगभग 150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। वन क्षेत्र झारखंड के GDP में लगभग 2.5% योगदान देता है (झारखंड आर्थिक सर्वे 2023), जबकि वर्षा के अनियमित होने के कारण कृषि क्षेत्र को प्रति वर्ष लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान होता है (झारखंड कृषि विभाग रिपोर्ट 2022)। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के तहत 2025 तक सौर ऊर्जा क्षमता में 50 मेगावाट की वृद्धि का लक्ष्य है, जिससे लगभग 5,000 स्थानीय रोजगार सृजित हो सकते हैं। हालांकि, राज्य की कोयला खनन क्षेत्र, जो राज्य राजस्व में 7% का योगदान देता है, पर्यावरणीय नियमों और नियंत्रण के दबाव में है, जिससे सतत विकास की चुनौतियाँ बढ़ रही हैं।

  • बजट आवंटन: 150 करोड़ रुपये (2023-24)
  • वन क्षेत्र GDP में हिस्सा: 2.5%
  • जलवायु कारण कृषि नुकसान: 500 करोड़ रुपये वार्षिक
  • सौर ऊर्जा लक्ष्य: 2025 तक +50 मेगावाट
  • कोयला खनन राजस्व हिस्सा: 7%

JSAPCC के क्रियान्वयन में मुख्य संस्थान

JSAPCC के कार्यान्वयन में कई राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियाँ शामिल हैं। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) प्रदूषण की निगरानी और पर्यावरण कानूनों के लागू करने में सक्रिय है। झारखंड वन विभाग वृक्षारोपण और वन संरक्षण कार्यक्रम संचालित करता है। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा झारखंड राज्य नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (JSREDA) द्वारा दिया जाता है। जैव विविधता संरक्षण की देखरेख झारखंड राज्य जैव विविधता बोर्ड करता है, जबकि झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (JSDMA) जलवायु सहनशीलता को आपदा तैयारी में जोड़ता है। नीति समन्वय का केंद्रीय स्तर पर कार्य पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) करता है।

  • JSPCB: प्रदूषण नियंत्रण और प्रवर्तन
  • झारखंड वन विभाग: वन और वृक्षारोपण प्रबंधन
  • JSREDA: नवीकरणीय ऊर्जा का प्रचार
  • झारखंड राज्य जैव विविधता बोर्ड: जैव विविधता संरक्षण
  • JSDMA: आपदा और जलवायु सहनशीलता समन्वय
  • MoEFCC: केंद्रीय नीति समन्वय

तुलनात्मक अध्ययन: झारखंड और केरल की जलवायु परिवर्तन कार्य योजनाएँ

पहलूझारखंड JSAPCCकेरल KSAPCC
पारिस्थितिक फोकसवन और खनिज संसाधन संरक्षणब्लू कार्बन पारिस्थितिक तंत्र (मैंग्रोव)
जैव विविधता रणनीतिवृक्षारोपण और सामुदायिक वन प्रबंधनसामुदायिक आधारित मैंग्रोव पुनर्स्थापन
जलवायु सहनशीलता परिणाम2030 तक वन आवरण में 10% वृद्धि का लक्ष्य5 वर्षों में 12% तटीय जैव विविधता वृद्धि
जीविका समावेशननवीकरणीय ऊर्जा रोजगार सृजन (5,000 नौकरियाँ)पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के माध्यम से जीविका विविधीकरण
क्रियान्वयन चुनौतीसंस्थागत क्षमता और वित्तीय विकेंद्रीकरणमजबूत समुदाय भागीदारी और विकेंद्रीकृत शासन

JSAPCC के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ और मुख्य कमियाँ

JSAPCC को संस्थागत क्षमता और संसाधन आवंटन में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ता है। योजना में स्थानीय आदिवासी ज्ञान प्रणालियों का समुचित समावेश नहीं है, जिससे जमीनी स्तर पर अनुकूलन और जैव विविधता संरक्षण सीमित हो जाता है। पंचायती राज संस्थानों को वित्तीय संसाधन पर्याप्त रूप से नहीं दिए गए हैं, जिससे समुदाय-आधारित जलवायु कार्रवाई प्रभावित होती है। ये कमियाँ झारखंड की पारंपरिक पारिस्थितिक समझ और विकेंद्रीकृत शासन संरचनाओं के लाभ उठाने में बाधा हैं।

  • आदिवासी पारिस्थितिक ज्ञान का सीमित समावेश
  • स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधन का अपर्याप्त विकेंद्रीकरण
  • निगरानी और प्रवर्तन एजेंसियों में क्षमता की कमी
  • खनन और पर्यावरणीय लक्ष्यों के बीच नियामक टकराव

झारखंड की जलवायु नीति का महत्व और आगे का रास्ता

JSAPCC का NAPCC के साथ समन्वय एक मजबूत नीति आधार प्रदान करता है, लेकिन झारखंड को संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाना और पंचायती राज को वित्तीय संसाधन विकेंद्रीकृत करना आवश्यक है। आदिवासी ज्ञान को जैव विविधता संरक्षण में शामिल करने से अनुकूलन रणनीतियाँ बेहतर होंगी। एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करना और नवीकरणीय ऊर्जा तथा वन आधारित अर्थव्यवस्था के माध्यम से स्थायी जीविका बढ़ाना सहनशीलता बढ़ाएगा। कोयला खनन के पर्यावरणीय प्रभाव को कड़ा प्रवर्तन और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देकर संतुलित करना राज्य के सतत विकास के लिए जरूरी है।

  • JSPCB और वन विभाग के लिए क्षमता निर्माण बढ़ाना
  • पंचायती राज संस्थानों को निधि और निर्णय अधिकार विकेंद्रीकृत करना
  • आदिवासी पारिस्थितिक ज्ञान को संरक्षण कार्यों में औपचारिक रूप से शामिल करना
  • स्थानीय रोजगार पर केंद्रित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार
  • नीति सुधार के माध्यम से कोयला खनन और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन

झारखंड राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (JSAPCC) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. JSAPCC राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) से पहले तैयार की गई थी।
  2. योजना का लक्ष्य 2030 तक वन आवरण में 10% वृद्धि करना है।
  3. झारखंड का कोयला खनन क्षेत्र राज्य राजस्व में 5% से कम योगदान देता है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 2
  • (b) केवल 1 और 3
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) केवल 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 गलत है क्योंकि JSAPCC NAPCC के बाद (NAPCC 2008 में, JSAPCC 2012 में) तैयार की गई। कथन 2 सही है, JSAPCC का लक्ष्य 2030 तक वन आवरण में 10% वृद्धि है। कथन 3 गलत है, कोयला खनन राज्य राजस्व में लगभग 7% योगदान देता है, 5% से कम नहीं।

झारखंड की जैव विविधता और जलवायु आंकड़ों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. झारखंड का वन आवरण उसकी भौगोलिक क्षेत्रफल का 25% से कम है।
  2. राज्य में पिछले तीन दशकों में औसत तापमान 0.8°C बढ़ा है।
  3. झारखंड में वार्षिक वर्षा 1100 मिमी से 1400 मिमी के बीच बदलती रहती है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि झारखंड का वन आवरण 29.5% है। कथन 2 और 3 सही हैं, जो IMD 2022 और झारखंड मौसम विभाग 2023 के आंकड़ों पर आधारित हैं।

मुख्य प्रश्न

झारखंड राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (JSAPCC) की मुख्य विशेषताओं पर चर्चा करें और इसके क्रियान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण करें। झारखंड में जलवायु कमजोरियों और जैव विविधता संरक्षण से निपटने के लिए JSAPCC की प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएँ।

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पर्यावरण और पारिस्थितिकी (पेपर 2), भूगोल (पेपर 1)
  • झारखंड दृष्टिकोण: JSAPCC के तहत राज्य-विशिष्ट जलवायु डेटा, जैव विविधता सांख्यिकी और नीति ढांचा
  • मुख्य बिंदु: झारखंड के अनूठे वन-खनिज पारिस्थितिकी तंत्र, संस्थागत चुनौतियाँ, और आदिवासी ज्ञान का जलवायु अनुकूलन में समावेश
झारखंड में पर्यावरण संरक्षण का संवैधानिक प्रावधान कौन-सा है?

भारत के संविधान का अनुच्छेद 48A राज्यों को पर्यावरण संरक्षण और सुधार तथा वन और वन्यजीवों की सुरक्षा का निर्देश देता है, जो झारखंड पर भी लागू होता है।

झारखंड में पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के लिए कौन-कौन से अधिनियम लागू हैं?

झारखंड में पर्यावरण संरक्षण के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986; वन संरक्षण अधिनियम, 1980; जैव विविधता अधिनियम, 2002; तथा जल और वायु (प्रदूषण निवारण) अधिनियम लागू हैं।

झारखंड का वन आवरण प्रतिशत नवीनतम ISFR के अनुसार कितना है?

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 के अनुसार, झारखंड का वन आवरण कुल भौगोलिक क्षेत्र का 29.5% है।

पिछले तीन दशकों में झारखंड का औसत तापमान कितना बढ़ा है?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) 2022 के अनुसार, झारखंड का औसत वार्षिक तापमान पिछले 30 वर्षों में 0.8°C बढ़ा है।

झारखंड में जलवायु परिवर्तन से प्रभावित प्रमुख आर्थिक क्षेत्र कौन से हैं?

असामान्य वर्षा के कारण कृषि क्षेत्र को वार्षिक लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान होता है, जबकि वन क्षेत्र राज्य GDP में 2.5% योगदान देता है। कोयला खनन क्षेत्र, जो राज्य राजस्व में 7% का हिस्सा है, पर्यावरणीय नियमों से प्रभावित होता है।

Sources and further reading

Tags:JPSC Notes