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BRICS अध्यक्षीय सार में रूस-यूक्रेन युद्ध पर सहमति नहीं: भारत की कूटनीति पर प्रभाव

BRICS शिखर सम्मेलन 2024: परिप्रेक्ष्य और अध्यक्ष का बयान

2024 का BRICS शिखर सम्मेलन, जिसकी अध्यक्षता भारत ने की, में पांच सदस्य देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—ने वैश्विक महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की, जिनमें चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष का विषय भी शामिल था। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी अध्यक्षीय सार में युद्ध को लेकर “गहरी चिंता” जताई गई, लेकिन कोई एकीकृत निंदा या शब्दावली पर सहमति नहीं बनी। यह मतभेद BRICS के भीतर विभिन्न भू-राजनीतिक हितों को दर्शाता है और ऐसे समूह का प्रबंधन करने में भारत की चुनौतियों को उजागर करता है जहां सदस्य देशों की प्राथमिकताएं भिन्न हैं।

  • BRICS विश्व की 42% आबादी और 25% वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है (विश्व बैंक, 2023)।
  • वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत का BRICS देशों के साथ व्यापार USD 150 बिलियन रहा (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय)।
  • 2022 के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत-रूस व्यापार में 20% की वृद्धि हुई (MEA वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • चीन और दक्षिण अफ्रीका ने रूस की स्पष्ट निंदा से बचा किया, जो उनके भू-राजनीतिक हितों को दर्शाता है (Indian Express, 2024)।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर BRICS में भू-राजनीतिक मतभेद

BRICS में रूस-यूक्रेन युद्ध पर सहमति न बनने के पीछे सदस्य देशों की अलग-अलग रणनीतिक प्राथमिकताएं हैं। रूस, जो सीधे इस संघर्ष का पक्षकार है, अपनी स्थिति की रक्षा करता है। चीन और दक्षिण अफ्रीका की रूस की स्पष्ट निंदा से बचने की नीति उनके व्यापक भू-राजनीतिक रणनीतियों से मेल खाती है—चीन की रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी और दक्षिण अफ्रीका की गैर-संरेखित विदेश नीति। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने संवाद की बात कही है, लेकिन रूस के खिलाफ कड़ी भाषा से परहेज किया। भारत की स्थिति, जो रूस के साथ रणनीतिक रिश्तों और वैश्विक जिम्मेदार शक्ति के रूप में अपनी छवि के बीच संतुलन बनाती है, अध्यक्षीय सार में सावधानीपूर्वक अभिव्यक्ति के रूप में दिखती है।

  • रूस का BRICS सदस्य होना समूह की सामूहिक कार्रवाई को जटिल बनाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन की वीटो शक्ति और रूस के साथ आर्थिक संबंध उसकी स्थिति को प्रभावित करते हैं।
  • दक्षिण अफ्रीका की ऐतिहासिक गैर-संरेखित नीति और आर्थिक हित उसके कूटनीतिक रुख को आकार देते हैं।
  • भारत की कूटनीतिक तटस्थता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 के अनुरूप है, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देता है।

BRICS की संस्थागत संरचना और कानूनी स्थिति

BRICS एक अनौपचारिक बहुपक्षीय समूह है, जिसके पास संधि आधारित कानूनी ढांचा या बाध्यकारी निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। इससे भू-राजनीतिक संकटों पर एकीकृत रुख अपनाने की उसकी क्षमता सीमित होती है। अध्यक्ष के रूप में भारत की कूटनीतिक कार्रवाई संवैधानिक आदेशों—विशेषकर अनुच्छेद 51, जो अंतरराष्ट्रीय शांति को प्रोत्साहित करता है—और विदेशी योगदान (नियमन) अधिनियम, 2010 के तहत MEA के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होती है, जो अंतरराष्ट्रीय संवाद में कानूनी पालन सुनिश्चित करते हैं।

  • BRICS सहमति पर चलता है लेकिन औपचारिक विवाद समाधान तंत्र नहीं रखता।
  • निर्णय बाध्यकारी नहीं होते, जो समूह की सहयोगात्मक प्रकृति को दर्शाता है।
  • भारत का अध्यक्षीय सार एक कूटनीतिक दस्तावेज है, कानूनी रूप से लागू होने वाला प्रस्ताव नहीं।
  • MEA के दिशा-निर्देश भारत की कूटनीतिक गतिविधियों को घरेलू कानूनी ढांचे के अनुरूप बनाते हैं।

युद्ध के BRICS सदस्यों पर आर्थिक प्रभाव

रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया, खासकर ऊर्जा और कच्चे माल में, जिससे BRICS की अर्थव्यवस्थाओं पर असमान प्रभाव पड़ा है। रूस को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी 2022 के बाद भारत के साथ व्यापार में 20% की वृद्धि हुई है। चीन, जो एक प्रमुख वैश्विक निर्माता है, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं से अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुआ है। ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका को वस्तु मूल्य अस्थिरता और मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ रहा है। BRICS के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने 2023 में 15% ऋण वृद्धि की है, जो राजनीतिक तनावों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने का संकेत है।

सूचकांक BRICS (कुल) भारत रूस चीन
जनसंख्या (%) 42% 18% 2% 18%
वैश्विक GDP (%) 25% 7.5% 1.5% 18%
BRICS के साथ FY 2022-23 में व्यापार USD 150 बिलियन लगभग USD 30 बिलियन लगभग USD 100 बिलियन
2022 के बाद भारत के साथ व्यापार वृद्धि रूस के साथ 20% वृद्धि भारत के साथ 20% वृद्धि स्थिर
NDB ऋण वृद्धि (2023) 15%

रूस-यूक्रेन युद्ध पर G7 और BRICS की तुलना

G7 देशों ने रूस के आक्रमण की एकजुट निंदा की है और समन्वित प्रतिबंध लगाए हैं, जिनके कारण 2023 में रूस की GDP वृद्धि में लगभग 2.5% की गिरावट आई है (IMF, 2023)। यह BRICS के विभाजित दृष्टिकोण से भिन्न है, जो दर्शाता है कि राजनीतिक सहमति आर्थिक उपायों की प्रभावशीलता बढ़ाती है। G7 के औपचारिक संस्थागत तंत्र और साझा लोकतांत्रिक मूल्य समन्वित कार्रवाई को संभव बनाते हैं, जो BRICS की अनौपचारिक संरचना में नहीं हैं।

पहलू BRICS G7
युद्ध पर राजनीतिक सहमति कोई एकीकृत निंदा नहीं रूस की एकीकृत निंदा
प्रतिबंध कोई सामूहिक प्रतिबंध नहीं व्यापक समन्वित प्रतिबंध
रूस की GDP पर प्रभाव (2023) सीमित प्रत्यक्ष प्रभाव लगभग 2.5% का संकुचन
संस्थागत ढांचा अनौपचारिक समूह, बाध्यकारी निर्णय नहीं औपचारिक संस्थान, संधि आधारित सहयोग

BRICS की विश्वसनीयता पर चुनौतियां और भारत की कूटनीतिक संतुलन कला

BRICS के भीतर औपचारिक विवाद समाधान तंत्र न होने के कारण भू-राजनीतिक संकटों पर एकजुट रुख प्रस्तुत करने में उसकी क्षमता सीमित है, जिससे समूह की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। भारत, अध्यक्ष के रूप में, इस जटिल स्थिति में रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी और अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखना चाहता है। अध्यक्षीय सार में प्रयुक्त सावधान भाषा इस कूटनीतिक संतुलन को दर्शाती है, जो समूह की एकता बनाए रखने के साथ-साथ प्रमुख सदस्यों को नाराज किए बिना भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी सुरक्षित रखती है।

  • BRICS की अनौपचारिक प्रकृति विवाद समाधान क्षमताओं को सीमित करती है।
  • भारत की कूटनीतिक तटस्थता सदस्य देशों के विभिन्न हितों से चुनौतीपूर्ण होती है।
  • समूह की एकता बनाए रखने के लिए स्पष्ट निंदा से बचना जरूरी है।
  • अध्यक्ष के रूप में भारत की भूमिका उसकी वैश्विक कूटनीतिक छवि को मजबूत करती है, बावजूद चुनौतियों के।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – BRICS संरचना, भारत की विदेश नीति, बहुपक्षीय कूटनीति
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – BRICS आर्थिक सहयोग, भू-राजनीतिक संघर्षों का व्यापार पर प्रभाव
  • निबंध: वैश्विक संघर्षों के बीच बहुपक्षीय मंचों में भारत की कूटनीतिक संतुलन कला

आगे का रास्ता: BRICS की भूमिका और भारत की कूटनीतिक रणनीति को मजबूत करना

  • भू-राजनीतिक संकटों के प्रबंधन के लिए BRICS में विवाद समाधान तंत्र को संस्थागत करना।
  • अध्यक्षता का लाभ उठाकर सदस्यों के बीच संवाद के ढांचे को बढ़ावा देना।
  • राजनीतिक मतभेदों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए NDB के माध्यम से प्रयास बढ़ाना।
  • कूटनीतिक तटस्थता बनाए रखते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 के अनुरूप शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करना।

BRICS और रूस-यूक्रेन युद्ध के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. BRICS एक संधि आधारित अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसके बाध्यकारी निर्णय होते हैं।
  2. 2022 के बाद भारत-रूस व्यापार में प्रतिबंधों के बावजूद 20% वृद्धि हुई।
  3. 2024 के BRICS शिखर सम्मेलन में चीन और दक्षिण अफ्रीका ने रूस के आक्रमण की स्पष्ट निंदा की।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि BRICS अनौपचारिक समूह है और इसके निर्णय बाध्यकारी नहीं होते। कथन 2 सही है क्योंकि 2022 के बाद भारत-रूस व्यापार में 20% वृद्धि हुई है। कथन 3 गलत है क्योंकि चीन और दक्षिण अफ्रीका ने रूस की स्पष्ट निंदा नहीं की।

BRICS और G7 के संबंध में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. BRICS के पास सदस्यों के बीच विवाद प्रबंधन के लिए औपचारिक विवाद समाधान तंत्र है।
  2. G7 देशों ने समन्वित प्रतिबंध लगाए, जिससे 2023 में रूस की GDP वृद्धि में 2.5% की कमी आई।
  3. BRICS देशों ने रूस के यूक्रेन आक्रमण की सामूहिक निंदा की।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 2
  • (b) केवल 1 और 2
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 गलत है क्योंकि BRICS में औपचारिक विवाद समाधान तंत्र नहीं है। कथन 2 सही है IMF के अनुसार। कथन 3 गलत है क्योंकि BRICS ने रूस की सामूहिक निंदा नहीं की।

मुख्य प्रश्न

BRICS में रूस-यूक्रेन युद्ध पर सहमति न बनने के कारण भारत की कूटनीतिक रणनीति पर इसके प्रभावों की समीक्षा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और विदेश नीति
  • झारखंड का दृष्टिकोण: BRICS सदस्यों के भू-राजनीतिक संघर्षों से उत्पन्न वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं से झारखंड के खनिज निर्यात और उद्योग अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होते हैं।
  • मुख्य बिंदु: बहुपक्षीय मंचों में भारत की संतुलित कूटनीति और इसके प्रभाव को झारखंड जैसे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार और निवेश प्रवाह के माध्यम से उजागर करें।
BRICS की कानूनी स्थिति क्या है?

BRICS एक अनौपचारिक बहुपक्षीय समूह है जिसके पास कोई संधि या बाध्यकारी कानूनी ढांचा नहीं है। यह सदस्यों के बीच सहमति और स्वैच्छिक सहयोग पर आधारित है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 का BRICS में भारत की भूमिका से क्या संबंध है?

अनुच्छेद 51 भारत को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश देता है, जो BRICS अध्यक्षता में भारत की कूटनीतिक भूमिका को मार्गदर्शित करता है।

BRICS शिखर सम्मेलन में चीन और दक्षिण अफ्रीका ने रूस की निंदा क्यों नहीं की?

चीन की रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी और दक्षिण अफ्रीका की गैर-संरेखित विदेश नीति एवं आर्थिक हितों ने उन्हें रूस की कार्रवाई की स्पष्ट निंदा से बचने के लिए प्रेरित किया।

रूस-यूक्रेन युद्ध का BRICS देशों पर क्या आर्थिक प्रभाव पड़ा है?

युद्ध ने ऊर्जा और वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया है, जिससे मुद्रास्फीति और व्यापार अस्थिरता आई है। भारत-रूस व्यापार में वृद्धि हुई जबकि अन्य सदस्यों को अलग-अलग आर्थिक प्रभाव झेलने पड़े।

G7 का रूस-यूक्रेन युद्ध पर BRICS से कैसे अलग प्रतिक्रिया है?

G7 देशों ने रूस की एकजुट निंदा की और समन्वित प्रतिबंध लगाए, जिससे रूस की GDP वृद्धि में 2.5% की कमी आई, जो BRICS के विभाजित दृष्टिकोण से भिन्न है।