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Economy · Exam Notes

भारत में प्रवासन प्रबंधन: सम्पूर्ण यात्रा दृष्टिकोण की आवश्यकता

भारत में प्रवासन प्रबंधन आंतरिक और विदेशी प्रवासन के बीच बिखरा हुआ है, जिसमें प्रस्थान से पुनः एकीकरण तक एक समग्र दृष्टिकोण की कमी है। 2023-24 में 450 मिलियन आंतरिक प्रवासी और 111 अरब डॉलर की रेमिटेंस के साथ, भारत के आर्थिक और सामाजिक हित गहरे जुड़े हैं। फिलीपींस के मॉडल की तरह सम्पूर्ण यात्रा आधारित शासन अपनाना प्रवासियों के कल्याण और आर्थिक लाभ को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।
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GS Paper III

Economy, environment, science, security and applied policy

In brief

भारत में प्रवासन प्रबंधन आंतरिक और विदेशी प्रवासन के बीच बिखरा हुआ है, जिसमें प्रस्थान से पुनः एकीकरण तक एक समग्र दृष्टिकोण की कमी है। 2023-24 में 450 मिलियन आंतरिक प्रवासी और 111 अरब डॉलर की रेमिटेंस के साथ, भारत के आर्थिक और सामाजिक हित गहरे जुड़े हैं। फिलीपींस के मॉडल की तरह सम्पूर्ण यात्रा आधारित शासन अपनाना प्रवासियों के कल्याण और आर्थिक लाभ को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।

परिचय: भारत में प्रवासन का विस्तार और महत्व

भारत में लगभग 450 मिलियन आंतरिक प्रवासी हैं (Census 2011) और विदेशों में कार्यरत लाखों भारतीय Emigration Act, 1983 (2019 में संशोधित) के तहत नियंत्रित हैं। 2023-24 में विदेशों से भारत को मिली रेमिटेंस USD 111 बिलियन तक पहुंच गई, जिससे भारत विश्व का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्तकर्ता बन गया (World Bank, 2024)। इन प्रवाहों में Gulf Cooperation Council (GCC) देशों का योगदान अकेले 37.9% है (RBI Report, 2024)। इतने बड़े पैमाने के बावजूद, प्रवासन प्रबंधन पूर्व-प्रस्थान, मार्ग, गंतव्य और वापसी के चरणों में विभाजित और प्रतिक्रियात्मक है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन — प्रवासन नीति, संवैधानिक प्रावधान, श्रम कानून
  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था — रेमिटेंस, श्रम बाजार की गतिशीलता
  • निबंध: प्रवासन प्रबंधन और आर्थिक विकास

प्रवासन पर संवैधानिक और कानूनी ढांचा

Article 19(1)(d) भारतीय संविधान प्रवासियों को देश के भीतर स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार देता है, जो आंतरिक प्रवासन के अधिकारों की नींव है। Inter-State Migrant Workmen (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 1979 आंतरिक प्रवासियों के रोजगार और सेवा की शर्तों को नियंत्रित करता है, हालांकि लागू करने में कमियां हैं। विदेशी प्रवासन Emigration Act, 1983 के तहत आता है, जिसे 2019 में प्रवासन मंजूरी और कल्याण प्रावधानों को मजबूत करने के लिए संशोधित किया गया। Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 प्रवासी कल्याण से जुड़े NGO के विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करता है। Supreme Court ने National Human Rights Commission v. State of Arunachal Pradesh (1996) में प्रवासियों के कल्याण के लिए राज्य की जिम्मेदारी को रेखांकित किया।

  • Article 19(1)(d): भारत में स्वतंत्र आवागमन का अधिकार
  • Inter-State Migrant Workmen Act, 1979: आंतरिक प्रवासियों के रोजगार की शर्तें
  • Emigration Act, 1983 (2019 संशोधन): विदेशी प्रवासन नियंत्रण और कल्याण
  • Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010: प्रवासी कल्याण NGO के विदेशी फंडिंग नियंत्रण
  • Supreme Court के फैसले प्रवासियों की सुरक्षा के लिए राज्य की जिम्मेदारी तय करते हैं

प्रवासन के आर्थिक पहलू

प्रवासन भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान देता है, खासकर निर्माण (35% आंतरिक प्रवासी रोजगार) और विनिर्माण क्षेत्रों में (NSSO 2017-18)। प्रवासी श्रम शहरी अनौपचारिक क्षेत्र के GDP में लगभग 30% योगदान देता है (Economic Survey 2023-24)। विदेशों से आने वाली रेमिटेंस घरेलू आय और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करती है, जिसमें 2023-24 में USD 111 बिलियन की राशि शामिल है (World Bank, 2024)। GCC का 37.9% हिस्सा भू-राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। श्रम मंत्रालय ने 2023-24 में प्रवासी कल्याण योजनाओं के लिए INR 500 करोड़ आवंटित किए, जबकि National Skill Development Corporation (NSDC) 2030 तक 40 मिलियन प्रवासियों को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखता है।

  • 450 मिलियन आंतरिक प्रवासी (Census 2011)
  • 35% निर्माण क्षेत्र में रोजगार (NSSO 2017-18)
  • 30% शहरी अनौपचारिक GDP में प्रवासी श्रम का योगदान (Economic Survey 2023-24)
  • USD 111 बिलियन रेमिटेंस 2023-24 में (World Bank, 2024)
  • INR 500 करोड़ प्रवासी कल्याण के लिए 2023-24 (संघीय बजट)
  • NSDC का लक्ष्य: 2030 तक 40 मिलियन प्रवासियों का कौशल विकास (NSDC रिपोर्ट 2023)

संस्थागत व्यवस्था और उसकी सीमाएं

प्रवासन प्रबंधन कई संस्थाओं में बंटा हुआ है: Ministry of External Affairs (MEA) विदेशों में नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण देखती है; Ministry of Labour and Employment (MoLE) आंतरिक प्रवासी श्रमिकों का नियमन करती है; Bureau of Emigration प्रवासन मंजूरी का काम संभालता है; NSDC कौशल विकास पर केंद्रित है; और राज्य श्रम विभाग कल्याण योजनाएं लागू करते हैं। International Organization for Migration (IOM) नीति और क्षमता निर्माण में सहयोग करता है। हालांकि, इन संस्थाओं के बीच समन्वय सीमित है, जिससे प्रवासन चक्र के सभी चरणों को समग्र रूप से संभालना मुश्किल हो रहा है।

  • MEA: विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा और निकासी
  • MoLE: आंतरिक प्रवासी श्रमिकों का नियमन
  • Bureau of Emigration: प्रवासन मंजूरी
  • NSDC: प्रवासियों के लिए कौशल विकास
  • राज्य श्रम विभाग: कल्याण योजनाओं का क्रियान्वयन
  • IOM: प्रवासन प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम फिलीपींस प्रवासन प्रबंधन

फिलीपींस Whole-of-Government दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें Overseas Workers Welfare Administration (OWWA) और Philippine Overseas Employment Administration (POEA) शामिल हैं। यह प्रणाली प्रस्थान से पूर्व प्रशिक्षण, विदेशों में सुरक्षा, और पुनः एकीकरण कार्यक्रमों को एकीकृत करती है, जिससे प्रवासियों को निरंतर सहायता मिलती है। परिणामस्वरूप, पिछले दशक में फिलीपींस की रेमिटेंस वृद्धि दर भारत से 15% अधिक रही है (World Bank, 2024)। भारत का बिखरा हुआ शासन इस समग्र मॉडल से अलग है, जिससे प्रवासियों की सुरक्षा और आर्थिक लाभ में कमी आती है।

पहलूभारतफिलीपींस
कानूनी ढांचाआंतरिक और विदेशी प्रवासन के लिए अलग-अलग कानून; लागू करने में बिखरावएकीकृत एजेंसियां (OWWA, POEA) पूरे प्रवासन चक्र का प्रबंधन
संस्थागत समन्वयकई मंत्रालय और राज्य विभाग सीमित समन्वय के साथकेंद्रित एजेंसियां प्रस्थान, विदेश और वापसी चरणों का समन्वय करती हैं
रेमिटेंस वृद्धि (2014-24)मध्यम वृद्धि; 2023-24 में USD 111 बिलियनभारत से 15% अधिक वृद्धि; मजबूत पुनः एकीकरण समर्थन
प्रवासी कल्याणप्रतिक्रियात्मक संकट प्रबंधन; कल्याण योजनाएं अपर्याप्तसक्रिय कल्याण, निरंतर सहायता, पुनः एकीकरण कार्यक्रम

भारत के प्रवासन प्रबंधन में प्रमुख कमियां

भारत में प्रवासन के सभी चरणों—पूर्व-प्रस्थान प्रशिक्षण, मार्ग में सुरक्षा, गंतव्य सहायता, और पुनः एकीकरण—के लिए एक निर्बाध, समेकित ढांचा नहीं है। इसका परिणाम प्रतिक्रियात्मक संकट प्रबंधन में होता है, जैसे संघर्ष के दौरान बड़े पैमाने पर निकासी, बजाय सक्रिय प्रवासी कल्याण के। कौशल विकास प्रयास प्रवासन नीतियों से जुड़े नहीं हैं, जिससे आर्थिक लाभ सीमित रह जाता है। आंतरिक प्रवासन में श्रम कानूनों का कमजोर प्रवर्तन और सामाजिक सुरक्षा की कमी है। विदेशी प्रवासियों के लिए पूर्व-प्रस्थान प्रशिक्षण और पुनः एकीकरण सहायता अपर्याप्त है।

  • प्रवासन के विभिन्न चरणों में बिखरा हुआ शासन
  • प्रतिक्रियात्मक नीतिगत जवाबदेही, न कि सक्रिय
  • आंतरिक प्रवासी श्रमिक सुरक्षा का कमजोर प्रवर्तन
  • कौशल विकास और प्रवासन नीति का अपर्याप्त समन्वय
  • वापसी प्रवासियों के लिए समग्र पुनः एकीकरण कार्यक्रमों की कमी

आगे का रास्ता: सम्पूर्ण यात्रा दृष्टिकोण लागू करना

भारत को एक समेकित प्रवासन प्रबंधन मॉडल अपनाना होगा जो पूरे प्रवासन चक्र को कवर करे। इसमें अनिवार्य पूर्व-प्रस्थान प्रशिक्षण और कौशल प्रमाणन, मार्ग और गंतव्य पर मजबूत सुरक्षा तंत्र, और लौटे प्रवासियों के कौशल एवं पूंजी का उपयोग करने वाले पुनः एकीकरण कार्यक्रम शामिल हों। MEA, MoLE, NSDC और राज्य श्रम विभागों के बीच समन्वय को एक केंद्रीय समन्वय संस्था के माध्यम से मजबूत करना चाहिए। बजट आवंटन बढ़ाकर और प्रवासियों की डिजिटल ट्रैकिंग कर कल्याण सेवाओं में सुधार किया जा सकता है। फिलीपींस मॉडल से सीख लेकर भारत को संकट आधारित हस्तक्षेप के बजाय निरंतर प्रवासी समर्थन को संस्थागत करना चाहिए।

  • प्रवासन प्रबंधन के लिए केंद्रीय समन्वय एजेंसी स्थापित करना
  • अनिवार्य पूर्व-प्रस्थान प्रशिक्षण और कौशल प्रमाणन
  • मार्ग और गंतव्य सुरक्षा तंत्र मजबूत करना
  • लौटे प्रवासियों के लिए स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने वाले पुनः एकीकरण कार्यक्रम विकसित करना
  • मंत्रालयों और केंद्र-राज्य समन्वय को बढ़ावा देना
  • प्रवासी कल्याण के लिए वित्तीय संसाधन बढ़ाना और तकनीक का उपयोग करना

भारत के प्रवासन प्रबंधन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Emigration Act, 1983, भारत के आंतरिक प्रवासी श्रमिकों को नियंत्रित करता है।
  2. संविधान का Article 19(1)(d) भारत में स्वतंत्र आवागमन का अधिकार देता है।
  3. Inter-State Migrant Workmen Act, 1979, आंतरिक प्रवासियों के रोजगार की शर्तों को नियंत्रित करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि Emigration Act, 1983 विदेशी प्रवासन को नियंत्रित करता है, आंतरिक प्रवासन को नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं। Article 19(1)(d) भारत में स्वतंत्र आवागमन का अधिकार देता है और Inter-State Migrant Workmen Act, 1979 आंतरिक प्रवासियों के रोजगार की शर्तों को नियंत्रित करता है।

भारत को मिली रेमिटेंस के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. 2023-24 में भारत विश्व का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्तकर्ता है।
  2. Gulf Cooperation Council देशों का भारत की रेमिटेंस में एक-तिहाई से अधिक योगदान है।
  3. National Skill Development Corporation (NSDC) सीधे विदेशों में प्रवासियों को रेमिटेंस देती है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 और 2 सही हैं क्योंकि 2023-24 में भारत को USD 111 बिलियन रेमिटेंस मिली, जो विश्व में सबसे अधिक है, और GCC देशों का योगदान 37.9% है। कथन 3 गलत है क्योंकि NSDC कौशल विकास पर केंद्रित है और रेमिटेंस वितरण नहीं करती।

मुख्य प्रश्न

भारत के प्रवासन प्रबंधन में प्रमुख कमियों पर चर्चा करें और प्रवासियों के कल्याण व आर्थिक लाभ के लिए सम्पूर्ण यात्रा दृष्टिकोण की आवश्यकता का मूल्यांकन करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (शासन) और पेपर 3 (अर्थव्यवस्था और सामाजिक मुद्दे)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में अन्य राज्यों के निर्माण और खनन क्षेत्रों में उच्च प्रवासन दर है, जिससे प्रवासन प्रबंधन और कल्याण योजनाओं की आवश्यकता बढ़ जाती है।
  • मेन प्वाइंट: झारखंड के प्रवासी श्रमिकों की जनसांख्यिकी, अंतरराज्यीय प्रवासन में चुनौतियां, और कौशल विकास पहल के प्रभाव को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
भारत में आंतरिक प्रवासन की रक्षा कौन से संवैधानिक प्रावधान के तहत होती है?

Article 19(1)(d) भारतीय संविधान सभी नागरिकों को भारत के भीतर स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार देता है, जो आंतरिक प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

भारत से विदेशी प्रवासन को कौन सा कानून नियंत्रित करता है?

Emigration Act, 1983 (2019 संशोधन सहित) विदेशी प्रवासन, प्रवासन मंजूरी और प्रवासियों के कल्याण को नियंत्रित करता है।

भारत में आंतरिक प्रवासन का पैमाना क्या है?

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में लगभग 450 मिलियन लोग आंतरिक प्रवासी हैं, जो श्रम शक्ति का बड़ा हिस्सा हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए रेमिटेंस कितनी महत्वपूर्ण है?

2023-24 में भारत को USD 111 बिलियन की रेमिटेंस मिली, जो विश्व में सबसे अधिक है, और यह घरेलू आय, राज्य अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करती है।

भारत के प्रवासन प्रबंधन में कौन सी संस्थागत चुनौतियां हैं?

कई मंत्रालय और राज्य विभाग अलग-अलग काम करते हैं और समन्वय की कमी के कारण नीतियां बिखरी हुई हैं, जिससे संकट के समय प्रतिक्रियात्मक प्रबंधन होता है, बजाय निरंतर प्रवासी कल्याण के।

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