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Indian Economy Notes · Exam Notes

भारत में महिला श्रम भागीदारी बढ़ने के बावजूद नेतृत्व में भारी कमी

भारत में महिला श्रम भागीदारी 2022 में 33.9% से बढ़कर 2025 में 40% हो गई है, फिर भी वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर महिलाओं का हिस्सा मात्र 14% है। संवैधानिक सुरक्षा और श्रम कानूनों के बावजूद संरचनात्मक, सामाजिक-सांस्कृतिक और नीतिगत कमियां महिलाओं के नेतृत्व में बढ़ोतरी में बाधक हैं। वियतनाम के साथ तुलना से पता चलता है कि भारत को नेतृत्व के अंतर को कम करने के लिए सख्त कार्यान्वयन और सकारात्मक कार्रवाई की जरूरत है।
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Exam Notes
GS Paper III

Economy, environment, science, security and applied policy

In brief

भारत में महिला श्रम भागीदारी 2022 में 33.9% से बढ़कर 2025 में 40% हो गई है, फिर भी वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर महिलाओं का हिस्सा मात्र 14% है। संवैधानिक सुरक्षा और श्रम कानूनों के बावजूद संरचनात्मक, सामाजिक-सांस्कृतिक और नीतिगत कमियां महिलाओं के नेतृत्व में बढ़ोतरी में बाधक हैं। वियतनाम के साथ तुलना से पता चलता है कि भारत को नेतृत्व के अंतर को कम करने के लिए सख्त कार्यान्वयन और सकारात्मक कार्रवाई की जरूरत है।

परिप्रेक्ष्य: महिला श्रम भागीदारी और नेतृत्व की कमी

भारत में महिला श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 2022 में 33.9% से बढ़कर 2025 में लगभग 40% हो गई है, जैसा कि Periodic Labour Force Survey (PLFS) 2025 में दर्शाया गया है। इस बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय कॉर्पोरेट्स में महिलाओं का वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर हिस्सा केवल 14% है (McKinsey Women Matter Report, 2024)। यह नेतृत्व में भारी अंतर भारत की आर्थिक संभावनाओं के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि विश्व बैंक का अनुमान है कि विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए 2047 तक लगभग 8% वार्षिक GDP वृद्धि बनाए रखने के लिए महिलाओं की श्रम भागीदारी और नेतृत्व में शामिल होना अनिवार्य है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS1: समाज – लिंग असमानताएं, महिला सशक्तिकरण
  • GS3: अर्थव्यवस्था – श्रम बाजार, समावेशी विकास, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी
  • निबंध: लैंगिक समानता और आर्थिक विकास; नेतृत्व में महिलाएं

महिलाओं की श्रम भागीदारी के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15(3) महिलाओं के पक्ष में सकारात्मक भेदभाव की अनुमति देता है ताकि समानता को बढ़ावा दिया जा सके। Equal Remuneration Act, 1976 (Section 4) समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करता है, जिससे वेतन में असमानता कम हो। Maternity Benefit (Amendment) Act, 2017 ने मातृत्व अवकाश को 26 सप्ताह तक बढ़ाया, जिससे काम और जीवन में संतुलन बेहतर हुआ। Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 (POSH Act) सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करता है, जिसकी नींव सुप्रीम कोर्ट के विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997) फैसले से पड़ी। हालांकि, इन कानूनों के लागू करने में कमियां और नेतृत्व पदों पर लिंग विविधता के लिए कोई अनिवार्य नियम न होने के कारण महिलाओं के नेतृत्व में वृद्धि सीमित है।

महिला श्रम भागीदारी के आर्थिक पहलू

  • भारत की महिला LFPR 40% (2025) है, जो विश्व औसत 49% (World Bank, 2024) से कम है और ब्राजील (53%) व वियतनाम (69%) (ILO, 2024) से काफी पीछे है।
  • महिलाएं भारत की GDP में लगभग 18-20% योगदान देती हैं (Economic Survey, 2024), जो आर्थिक मॉडल के अनुसार संभावित 30% से कम है।
  • अध्ययन बताते हैं कि महिलाओं की रोजगार दर से परिवार की समृद्धि, बच्चों के पोषण और शिक्षा में सुधार होता है, जो सामाजिक विकास को बढ़ावा देता है।
  • भारतीय कॉर्पोरेट्स में महिलाओं का वरिष्ठ प्रबंधन में हिस्सा केवल 14% है (McKinsey Women Matter Report, 2024)।
  • महिला सशक्तिकरण के लिए कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं जैसे महिला शक्ति केंद्र के लिए 2023-24 में ₹500 करोड़ का बजट आवंटित किया गया।

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में संस्थागत भूमिका

  • नीति आयोग महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नीतियां बनाता है और उनके कार्यान्वयन की निगरानी करता है, जिसमें जेंडर बजटिंग और श्रम बल समावेशन शामिल हैं।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) प्रमुख योजनाएं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ संचालित करता है, जो लिंग अनुपात सुधारने और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देता है, जिससे भविष्य में श्रम भागीदारी प्रभावित होती है।
  • श्रम ब्यूरो श्रम बाजार के डेटा, विशेषकर लिंग आधारित आंकड़े इकट्ठा करता है, जो नीति निर्धारण के लिए जरूरी हैं।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है, जिससे महिलाओं को क्रेडिट और औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच मिलती है।
  • विश्व बैंक आर्थिक विकास के अनुमान और लिंग समावेशन रिपोर्ट प्रदान करता है, जो नीति निर्माण में सहायक हैं।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम वियतनाम – महिला श्रम भागीदारी और नेतृत्व

सूचकांकभारत (2025)वियतनाम (2024)
महिला श्रम भागीदारी दर40%69%
वरिष्ठ प्रबंधन में महिलाएं14%लगभग 35% (ILO Report, 2024)
मुख्य नीतियांPOSH Act, Equal Remuneration Act, Maternity Benefit Act; नेतृत्व पदों पर कोई अनिवार्य कोटा नहींसर्वव्यापी बाल देखभाल, लिंग-संवेदनशील श्रम कानून, कार्यस्थल समानता लागू, सार्वजनिक क्षेत्र में नेतृत्व कोटा
बाल देखभाल सुविधासीमित और असमान वितरणव्यापक और राज्य समर्थित
महिलाओं का आर्थिक योगदानGDP का 18-20%GDP का 30% से अधिक

भारत में महिलाओं के नेतृत्व में बाधाएं

सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताएं महिलाओं को घरेलू भूमिकाओं तक सीमित करती हैं, जिससे उनके करियर और नेतृत्व की आकांक्षाएं प्रभावित होती हैं। अपर्याप्त बाल देखभाल सुविधाएं और लिंग आधारित अपेक्षाएं महिलाओं के काम और परिवार के बीच संतुलन बनाने में बाधा डालती हैं। निजी क्षेत्र में लिंग विविधता के लिए अनिवार्य कोटा या प्रोत्साहन न होना पुरुष प्रधान निर्णय लेने की संस्कृति को बनाए रखता है। कानूनी सुरक्षा के बावजूद कार्यस्थल उत्पीड़न की शिकायतें कम होती हैं, क्योंकि कलंक और कमजोर कार्यान्वयन महिलाओं को नेतृत्व पदों की ओर बढ़ने से रोकते हैं।

नीतिगत कमियां और लागू करने की चुनौतियां

  • निजी क्षेत्र में बोर्ड या वरिष्ठ प्रबंधन में लिंग विविधता बनाए रखने के लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, जबकि नॉर्वे या फ्रांस जैसे देशों में यह अनिवार्य है।
  • मौजूदा कानून सुरक्षा और समान वेतन पर केंद्रित हैं, लेकिन महिलाओं को नेतृत्व में लाने के लिए सकारात्मक कार्रवाई के उपाय नहीं हैं।
  • मातृत्व लाभ और POSH Act के प्रावधानों का कार्यान्वयन असंगठित क्षेत्रों में खासकर कमजोर है, जहां अधिकांश महिलाएं काम करती हैं।
  • लिंग विविधता सुधार के लिए वित्तीय प्रोत्साहन या दंड की कमी से कॉर्पोरेट्स की रुचि कम होती है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • महिला LFPR को 40% से ऊपर ले जाना भारत के जनसांख्यिकीय लाभ को खुलने और उच्च GDP वृद्धि दर बनाए रखने के लिए जरूरी है।
  • सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में नेतृत्व पदों के लिए अनिवार्य लिंग विविधता कोटा या प्रोत्साहन लागू करने से महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ेगी।
  • सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बाल देखभाल सुविधाओं का विस्तार काम और परिवार के बीच टकराव को कम करेगा, जो महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
  • POSH Act और Equal Remuneration Act जैसे कानूनों के लागू करने की व्यवस्था मजबूत करने से कार्यस्थल की सुरक्षा और समानता बेहतर होगी।
  • श्रम ब्यूरो और नीति आयोग जैसे संस्थानों द्वारा डेटा संग्रह और निगरानी बढ़ाने से सबूत आधारित नीति निर्माण संभव होगा।

अभ्यास प्रश्न

भारत में महिला श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. भारत की महिला LFPR 2022 में 33.9% से बढ़कर 2025 में 40% हो गई है।
  2. वैश्विक औसत महिला LFPR लगभग 40% है।
  3. वियतनाम की महिला LFPR भारत से अधिक है, लगभग 69%।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 PLFS 2025 के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है; वैश्विक औसत महिला LFPR लगभग 49% है (World Bank, 2024)। कथन 3 सही है; वियतनाम की LFPR लगभग 69% है (ILO, 2024)।

भारत में महिलाओं के कार्यस्थल अधिकारों से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Equal Remuneration Act महिलाओं और पुरुषों के लिए समान कार्य का समान वेतन सुनिश्चित करता है।
  2. POSH Act 2017 में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए बनाया गया था।
  3. संविधान का अनुच्छेद 15(3) महिलाओं के पक्ष में सकारात्मक भेदभाव की अनुमति देता है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है; Equal Remuneration Act 1976 का है। कथन 2 गलत है; POSH Act 2013 में बना था, 2017 में नहीं। कथन 3 संविधान के अनुसार सही है।

मुख्य प्रश्न

भारत में महिला श्रम भागीदारी बढ़ने के बावजूद नेतृत्व में कमी के कारणों का विश्लेषण करें। महिलाओं की नेतृत्व भूमिका में भागीदारी बढ़ाने के लिए नीतिगत उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 1 – समाज और सामाजिक मुद्दे; पेपर 2 – अर्थव्यवस्था और विकास
  • झारखंड का पहलू: झारखंड में महिला LFPR राष्ट्रीय औसत से कम है, ग्रामीण-शहरी अंतर व्यापक है; सांस्कृतिक मान्यताएं और सीमित बाल देखभाल सुविधाएं महिलाओं के रोजगार में बाधक हैं।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड में महिला रोजगार के आंकड़ों पर प्रकाश डालें, महिला शक्ति केंद्र जैसी योजनाओं के प्रभाव को समझाएं और स्थानीय नेतृत्व शामिल करने के लिए सुझाव दें।
भारत में वर्तमान महिला श्रम भागीदारी दर क्या है?

Periodic Labour Force Survey 2025 के अनुसार, भारत की महिला LFPR लगभग 40% है, जो 2022 में 33.9% थी।

महिलाओं के पक्ष में सकारात्मक भेदभाव की अनुमति देने वाला संवैधानिक प्रावधान कौन सा है?

अनुच्छेद 15(3) भारतीय संविधान महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है ताकि समानता बढ़ाई जा सके।

POSH Act की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और शिकायत निवारण सुनिश्चित करता है, जिससे महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाया जाता है।

भारत की महिला श्रम भागीदारी वियतनाम के मुकाबले कैसी है?

भारत की महिला LFPR लगभग 40% है, जबकि वियतनाम में यह 69% के करीब है, जो व्यापक लिंग-संवेदनशील नीतियों और बेहतर बाल देखभाल सुविधाओं के कारण है।

महिलाओं के नेतृत्व में बढ़ोतरी का भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्या महत्व है?

महिलाओं की नेतृत्व भूमिका में वृद्धि से उत्पादकता, नवाचार और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा, जो भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए आवश्यक लगभग 8% वार्षिक GDP वृद्धि में मदद करेगा।

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