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Governance · Exam Notes

ईरानी संसद का परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से वापसी पर विचार: प्रभाव और विश्लेषण

ईरान की संसद परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से वापसी पर विचार कर रही है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन होगी और वैश्विक परमाणु अप्रसार प्रयासों को चुनौती देगी। 1970 से प्रभावी इस संधि के तहत ईरान एक गैर-परमाणु हथियार राज्य के रूप में IAEA की निगरानी में है। वापसी से नए प्रतिबंध, आर्थिक गिरावट और क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा है, जैसा कि उत्तर कोरिया के 2003 के कदम के बाद हुआ था।
1 min read GS Paper II
Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

ईरान की संसद परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से वापसी पर विचार कर रही है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन होगी और वैश्विक परमाणु अप्रसार प्रयासों को चुनौती देगी। 1970 से प्रभावी इस संधि के तहत ईरान एक गैर-परमाणु हथियार राज्य के रूप में IAEA की निगरानी में है। वापसी से नए प्रतिबंध, आर्थिक गिरावट और क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा है, जैसा कि उत्तर कोरिया के 2003 के कदम के बाद हुआ था।

परिप्रेक्ष्य

2024 में, ईरान की संसद (मजलिस) एक ऐसे कानून पर विचार कर रही है, जो ईरान को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने का रास्ता दे सकता है। यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति और 2015 के परमाणु समझौते, संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) की कमजोर होती स्थिति के बीच आया है। NPT से वापसी अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रतिबद्धताओं का बड़ा उल्लंघन होगा और वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को चुनौती देगा।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – परमाणु अप्रसार संधि, JCPOA, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रतिबंध
  • GS पेपर 3: सुरक्षा मुद्दे – परमाणु प्रसार, प्रतिबंधों का प्रभाव
  • निबंध: बहुपक्षीयता और वैश्विक परमाणु शासन में चुनौतियाँ

ईरान के परमाणु प्रतिबद्धताओं का कानूनी ढांचा

परमाणु अप्रसार संधि (NPT) 1968 में हस्ताक्षर के लिए खुली और 1970 में लागू हुई, जो परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए मुख्य अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था स्थापित करती है। ईरान ने NPT को एक गैर-परमाणु हथियार राज्य (NNWS) के रूप में स्वीकार किया, जिसमें उसने परमाणु हथियार विकसित न करने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी के तहत INFCIRC/214 के नियमों को मानने का वचन दिया। संधि का Article X तीन महीने की पूर्व सूचना के साथ वापसी की अनुमति देता है, बशर्ते कि राज्य अपनी सर्वोच्च हितों को खतरा बताते हुए असाधारण परिस्थितियों का हवाला दे।

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) 2015 में ईरान, P5+1 देशों (चीन, फ्रांस, रूस, यूके, अमेरिका, जर्मनी) और यूरोपीय संघ के बीच हुआ एक राजनीतिक समझौता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 2231 ने मान्यता दी है। यह संधि नहीं है, लेकिन ईरान को यूरेनियम संवर्धन सीमित करने और IAEA निरीक्षण बढ़ाने के लिए बाध्य करती है। NPT से वापसी इन प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन होगी और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व कूटनीतिक परिणामों को जन्म देगी।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों का आर्थिक प्रभाव

ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रतिबंधों ने उसकी अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विश्व बैंक के अनुसार, 2019 में संयुक्त राष्ट्र और एकतरफा प्रतिबंधों के कारण ईरान की GDP लगभग 6% सिकुड़ गई। JCPOA के तहत 2016 में प्रतिबंधों की आंशिक छूट से ईरान के तेल निर्यात में प्रतिदिन 1 मिलियन बैरल से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे सरकारी राजस्व और आर्थिक संकेतकों में सुधार हुआ।

NPT से वापसी के बाद प्रतिबंधों के फिर से लागू होने या कड़े होने का खतरा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार ईरान के तेल निर्यात में 30-40% की कमी आ सकती है। परमाणु कार्यक्रम की लागत भी $10 अरब से अधिक हो चुकी है (IAEA रिपोर्ट), जो सामाजिक और आर्थिक विकास की प्राथमिकताओं से संसाधनों को divert कर रही है।

प्रमुख संस्थान

  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA): NPT के तहत परमाणु निगरानी और अनुपालन की जिम्मेदारी।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC): परमाणु प्रसार से जुड़े प्रतिबंधों का प्रवर्तन।
  • ईरानी संसद (मजलिस): NPT से वापसी पर विचार कर रही विधायी संस्था।
  • JCPOA संयुक्त आयोग: ईरान के समझौते पालन की निगरानी करने वाली बहुपक्षीय संस्था।

तुलनात्मक विश्लेषण: ईरान और उत्तर कोरिया

उत्तर कोरिया का 2003 में NPT से वापसी का उदाहरण ईरान के लिए चेतावनी है। वापसी के बाद उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियार विकास तेज किया और कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना किया, जिससे अगले दशक में उसकी GDP में 20% से अधिक की गिरावट आई (UNDP)। ईरान के विपरीत, उत्तर कोरिया ने परमाणु परीक्षण भी किए, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ी।

मुद्दाईरानउत्तर कोरिया
NPT स्थितिहस्ताक्षरकर्ता, वापसी पर विचार कर रहा2003 में वापसी कर चुका
परमाणु परीक्षणकोई परीक्षण नहींवापसी के बाद कई परीक्षण
आर्थिक प्रभाव2019 में प्रतिबंधों से 6% GDP सिकुड़ाववापसी के बाद दशक में 20% से अधिक सिकुड़ाव
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियासंयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध, कूटनीतिक प्रयास जारीकड़े प्रतिबंध और कूटनीतिक अलगाव

NPT ढांचे में नीति की कमी

NPT में वापसी को रोकने या प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्यकारी उपाय नहीं हैं। यह मुख्य रूप से राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव पर निर्भर है, जिससे संधि की रोकथाम क्षमता कमजोर होती है। इस कमी का फायदा उठाकर देश जैसे ईरान Article X के तहत वापसी का अधिकार बिना तत्काल कानूनी परिणाम के प्रयोग कर सकते हैं, जिससे वैश्विक अप्रसार व्यवस्था कमजोर हो सकती है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • ईरान की संभावित वापसी बहुपक्षीय परमाणु समझौतों की नाजुकता को दर्शाती है, खासकर भू-राजनीतिक तनाव के बीच।
  • NPT को मजबूत करने के लिए अनुपालन और वापसी रोकने वाले बाध्यकारी उपाय शामिल करना जरूरी है।
  • कूटनीतिक संवाद को फिर से जीवित करना और JCPOA या उसके विकल्प पर पुनः वार्ता आवश्यक है ताकि परमाणु वृद्धि रोकी जा सके।
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रतिबंधों के साथ-साथ पालन के लिए प्रोत्साहन भी देना होगा, ताकि ईरान को परमाणु हथियार विकास की ओर न धकेला जाए।
  • भारत के लिए रणनीतिक हित है कि वह NPT ढांचे का समर्थन करते हुए ईरान, पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों का संतुलित प्रबंधन करे।

परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. NPT हस्ताक्षर के समय राज्यों को परमाणु हथियार राज्य और गैर-परमाणु हथियार राज्य में विभाजित करता है।
  2. NPT का Article X किसी भी हस्ताक्षरकर्ता को बिना पूर्व सूचना के वापसी की अनुमति देता है।
  3. IAEA NPT के तहत अनुपालन की निगरानी करता है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि NPT हस्ताक्षर के समय परमाणु हथियार राज्यों को मान्यता देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि Article X तीन महीने की पूर्व सूचना और कारण बताने की शर्त रखता है। कथन 3 सही है क्योंकि IAEA NPT अनुपालन की निगरानी करता है।

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. JCPOA अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक बाध्यकारी संधि है।
  2. JCPOA ईरान के यूरेनियम संवर्धन स्तरों को सीमित करता है।
  3. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 2231 JCPOA को मान्यता देता है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि JCPOA एक राजनीतिक समझौता है, संधि नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि यह यूरेनियम संवर्धन सीमित करता है। कथन 3 सही है क्योंकि UNSC संकल्प 2231 JCPOA को मान्यता देता है।

मुख्य प्रश्न

ईरान की परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से संभावित वापसी के वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभावों पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध, GS पेपर 3 – सुरक्षा मुद्दे
  • झारखंड परिप्रेक्ष्य: झारखंड में यूरेनियम खनन और परमाणु अनुसंधान केंद्र हैं, इसलिए वैश्विक परमाणु शासन राज्य की सुरक्षा और विकास से जुड़ा है।
  • मुख्य बिंदु: उत्तरों में अंतरराष्ट्रीय परमाणु संधियों को भारत के रणनीतिक हितों और स्थानीय परमाणु उद्योग के प्रभाव से जोड़कर प्रस्तुत करें।
NPT के Article X का महत्व क्या है?

Article X हस्ताक्षरकर्ताओं को तीन महीने की पूर्व सूचना देकर और असाधारण परिस्थितियों का हवाला देते हुए NPT से वापसी की अनुमति देता है। यह प्रावधान कानूनी रूप से वापसी को संभव बनाता है लेकिन इसके लिए उचित कारण और सूचना आवश्यक है।

JCPOA का NPT से क्या संबंध है?

JCPOA एक राजनीतिक समझौता है जो ईरान की NPT प्रतिबद्धताओं को पूरक करता है, जैसे यूरेनियम संवर्धन सीमित करना और IAEA निरीक्षण बढ़ाना, जिसे UNSC संकल्प 2231 ने मान्यता दी है।

प्रतिबंधों का ईरान की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है?

ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रतिबंधों के कारण 2019 में उसकी GDP में 6% की गिरावट आई और तेल निर्यात कम हुआ। JCPOA के तहत प्रतिबंधों की आंशिक छूट से तेल निर्यात में अस्थायी वृद्धि हुई।

कौन-कौन से देश NPT पर हस्ताक्षर नहीं करते?

प्रमुख गैर-हस्ताक्षरकर्ता भारत, इजरायल, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया हैं, जिनकी परमाणु नीतियाँ और रणनीतिक प्राथमिकताएँ अलग हैं।

NPT के तहत IAEA की भूमिका क्या है?

IAEA गैर-परमाणु हथियार राज्यों के परमाणु कार्यक्रमों की निगरानी करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परमाणु सामग्री हथियार विकास में न जाए।

Sources and further reading

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