Announcements
UPSC Foundation 2026 Prime Batch - Admissions Open JPSC 14th CCE Complete Course 2025 - Enroll Now Mains Practice Questions Programme - Limited Seats Daily Current Affairs - Free Access UPSC Prelims Test Series 2026 - 5000+ MCQs
+91 91025 57680
learnpro Civil Services Get app
LearnPro Menu
Home Current Affairs Download Notes All Articles
UPSC
UPSC NOTES
STATE PSC
OPTIONAL SUBJECTS
CURRENT AFFAIRS
DAILY EDITORIAL
COURSES
UPSC PYQ Solutions Mains Practice Questions WhatsApp Counselling Call +91 91025 57680 Online Courses

Governance · Exam Notes

भारत-अज़रबैजान कूटनीतिक पुनःसंपर्क: क्षेत्रीय जटिलताओं के बीच रणनीतिक पुनर्संतुलन

1 min read GS Paper II

2023 में भारत-अज़रबैजान ने कूटनीतिक संवाद फिर से शुरू किया

2023 में भारत और अज़रबैजान ने बाकू में अपनी छठी विदेश कार्यालय परामर्श बैठक आयोजित की, जो 2022 के बाद पहली औपचारिक कूटनीतिक बातचीत थी। इस पुनःसंपर्क की पृष्ठभूमि में अज़रबैजान के पाकिस्तान के समर्थन के कारण उत्पन्न तनाव था, जो भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद उभरा। यह स्थिति ‘थ्री ब्रदर्स’ गठबंधन — तुर्की, अज़रबैजान और पाकिस्तान — के भू-राजनीतिक प्रभाव को दर्शाती है। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई, जो पिछली असहमति को दूर कर सहयोग बढ़ाने की रणनीतिक दिशा को दर्शाती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: भारत की विदेश नीति, द्विपक्षीय संबंध, संघर्ष समाधान
  • GS पेपर 3: ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग
  • निबंध: संघर्ष क्षेत्रों में भारत की कूटनीतिक संतुलन नीति

भू-राजनीतिक संदर्भ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत ने दिसंबर 1991 में अज़रबैजान की स्वतंत्रता को मान्यता दी और फरवरी 1992 में कूटनीतिक संबंध स्थापित किए। हालांकि, क्षेत्रीय गठबंधनों ने द्विपक्षीय रिश्तों को जटिल बनाया है। अज़रबैजान का पाकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी, खासकर नागोर्नो-कराबाख संघर्ष में समर्थन, भारत के 2017 से आर्मेनिया के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग के विपरीत है। अज़रबैजान ने भारत पर आर्मेनिया को सैन्य सहायता देने का आरोप लगाया, जिससे कूटनीतिक तनाव बढ़ा।

  • ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव: अज़रबैजान और तुर्की ने पाकिस्तान के भारत विरोधी रुख का समर्थन किया, जो गठबंधन की एकजुटता दर्शाता है।
  • भारत-आर्मेनिया रक्षा सहयोग: 2018 से संयुक्त सैन्य अभ्यास और तकनीकी हस्तांतरण (रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट)।
  • अज़रबैजान की कूटनीतिक दूरी: भारत के आर्मेनिया समर्थन की धारणा के कारण संबंधों में ठहराव।

हाल की कूटनीतिक वार्ताएं: दायरा और महत्व

बाकू में हुई छठी विदेश कार्यालय परामर्श बैठक में व्यापार, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे कई क्षेत्रों पर चर्चा हुई। खासतौर पर, सीमा पार आतंकवाद पर अज़रबैजान की बातचीत में रुचि ने पहले की अनिच्छा को बदलते हुए भारत की सुरक्षा चिंताओं के अनुरूप व्यावहारिक बदलाव दिखाया।

  • व्यापार: 2022 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर था (भारत के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े)।
  • ऊर्जा सहयोग: 2023 में अज़रबैजान ने भारत को कच्चा तेल निर्यात फिर से शुरू किया, लगभग 0.5 मिलियन बैरल वार्षिक (Indian Oil Corporation के डेटा) जो भारत की ऊर्जा विविधता में सहायक है।
  • फार्मास्यूटिकल्स: भारत के अज़रबैजान निर्यात में अगले पांच वर्षों में 15% की वार्षिक वृद्धि का अनुमान (Pharmaceutical Export Promotion Council of India)।
  • आतंकवाद विरोधी सहयोग: वार्ता में शामिल होना अज़रबैजान की नीति में बदलाव दर्शाता है (MEA का आधिकारिक बयान, 2023)।

भारत-अज़रबैजान संबंधों में संस्थागत भूमिका

द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक पहलुओं को निम्न प्रमुख संस्थान आकार देते हैं:

  • MEA (भारत): कूटनीतिक वार्ताओं और विदेश नीति के निर्माण की देखरेख।
  • MOFA (अज़रबैजान): देश के विदेश संबंधों और कूटनीतिक संपर्कों का प्रबंधन।
  • IOCL: कच्चे तेल के आयात में सहायक, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण।
  • DRDO: आर्मेनिया के साथ रक्षा सहयोग के कारण भारत-अज़रबैजान संबंधों पर प्रभाव।
  • NIA: सीमा पार आतंकवाद से जुड़े सुरक्षा सहयोग के समन्वय में भूमिका।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत-अज़रबैजान बनाम भारत-आर्मेनिया संबंध

पहलूभारत-अज़रबैजान संबंधभारत-आर्मेनिया संबंध
कूटनीतिक स्थिति1992 में स्थापित; 2022 के बाद भू-राजनीतिक कारणों से तनावपूर्ण2017 के बाद मजबूत, औपचारिक रक्षा सहयोग के साथ
रक्षा सहयोगसीमित; कोई औपचारिक समझौता नहीं; पाकिस्तान के साथ अज़रबैजान के संबंधों के कारण सतर्क2018 से संयुक्त सैन्य अभ्यास और तकनीकी हस्तांतरण
ऊर्जा संबंधमहत्वपूर्ण; अज़रबैजान भारत को कच्चा तेल निर्यात करता है (0.5 मिलियन बैरल वार्षिक)कम ऊर्जा सहयोग
भू-राजनीतिक गठबंधनपाकिस्तान और तुर्की के साथ गठबंधन; ‘थ्री ब्रदर्स’ समूह का हिस्साभारत के करीब; अज़रबैजान के साथ संघर्ष साझा करता है
आतंकवाद विरोधी सहयोगहाल ही में शुरू; पहले अनिच्छाप्रमुख फोकस नहीं

भारत की कूटनीतिक रणनीति में प्रमुख कमी

भारत का अज़रबैजान के साथ संबंध अधिकतर प्रतिक्रियात्मक रहे हैं, जिसने क्षेत्रीय गठबंधनों जैसे ‘थ्री ब्रदर्स’ के प्रभाव का सही पूर्वानुमान नहीं लगाया। इससे ऑपरेशन सिंदूर के बाद कूटनीतिक तनाव उभरा। दक्षिण काकेशस में संतुलित संबंध बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय गठबंधनों और संघर्ष संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर सक्रिय रणनीति अपनाना जरूरी है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • अज़रबैजान के साथ बातचीत फिर से शुरू करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक जटिलताओं के बीच व्यावहारिक संतुलन की दिशा में कदम है।
  • आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाकर आपसी विश्वास और सुरक्षा सहयोग को मजबूत किया जा सकता है।
  • फार्मास्यूटिकल्स और तकनीकी निर्यात को बढ़ावा देकर ऊर्जा के अलावा आर्थिक संबंधों का विस्तार संभव है।
  • भारत को दक्षिण काकेशस नीति में क्षेत्रीय गठबंधनों को शामिल कर कूटनीतिक असफलताओं से बचना होगा।

भारत-अज़रबैजान संबंधों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. भारत का अज़रबैजान के साथ 2017 से औपचारिक रक्षा सहयोग समझौता है।
  2. अज़रबैजान ने 2023 में भारत को कच्चा तेल निर्यात फिर से शुरू किया।
  3. भारत ने 1991 से अज़रबैजान की स्वतंत्रता को मान्यता दी है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि भारत का अज़रबैजान के साथ कोई औपचारिक रक्षा सहयोग समझौता नहीं है; ऐसे समझौते आर्मेनिया के साथ हैं। कथन 2 और 3 सही हैं, जो Indian Oil Corporation के आंकड़ों और ऐतिहासिक मान्यता पर आधारित हैं।

‘थ्री ब्रदर्स’ गठबंधन के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. यह तुर्की, अज़रबैजान और पाकिस्तान का समूह है।
  2. यह नागोर्नो-कराबाख संघर्ष में भारत के पक्ष का समर्थन करता है।
  3. इसने ऑपरेशन सिंदूर के बाद अज़रबैजान की कूटनीतिक स्थिति को प्रभावित किया।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 2 गलत है क्योंकि यह गठबंधन पाकिस्तान और अज़रबैजान के पक्ष में है, भारत के पक्ष में नहीं। कथन 1 और 3 सही हैं।

मेन प्रश्न

क्षेत्रीय भू-राजनीतिक गठबंधनों और भारत की दक्षिण काकेशस रणनीति के संदर्भ में हालिया भारत-अज़रबैजान कूटनीतिक पुनःसंपर्क का विश्लेषण करें। इसके भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर प्रभाव पर चर्चा करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और विदेश नीति
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की उभरती फार्मास्यूटिकल उद्योग अज़रबैजान को निर्यात के अवसरों से लाभान्वित हो सकती है।
  • मेन प्वाइंटर: उत्तर में भारत के संघर्ष क्षेत्रों में रणनीतिक संतुलन और आर्थिक कूटनीति को राज्य स्तर की औद्योगिक वृद्धि से जोड़ें।
2022 में भारत और अज़रबैजान के बीच कूटनीतिक तनाव का कारण क्या था?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह तनाव उभरा, जब अज़रबैजान, तुर्की और पाकिस्तान के ‘थ्री ब्रदर्स’ गठबंधन के तहत, पाकिस्तान के भारत विरोधी रुख का समर्थन करने लगा, जिससे द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हुए।

छठी विदेश कार्यालय परामर्श बैठक का क्या महत्व है?

2023 में बाकू में आयोजित यह बैठक 2022 के बाद पहली बातचीत थी, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, आतंकवाद विरोधी सहयोग पर चर्चा हुई और अज़रबैजान की सुरक्षा सहयोग में रुचि का संकेत मिला।

भारत का आर्मेनिया के साथ रक्षा सहयोग अज़रबैजान के साथ संबंधों को कैसे प्रभावित करता है?

2018 से संयुक्त सैन्य अभ्यास और तकनीकी हस्तांतरण के कारण अज़रबैजान भारत को अपने प्रतिद्वंद्वी का समर्थन करने वाला मानने लगा, जिससे द्विपक्षीय संबंध जटिल हुए।

ऊर्जा सहयोग भारत-अज़रबैजान संबंधों में क्या भूमिका निभाता है?

अज़रबैजान ने 2023 में भारत को कच्चा तेल निर्यात फिर से शुरू किया है, जो लगभग 0.5 मिलियन बैरल वार्षिक है, और यह भारत की ऊर्जा विविधता और आर्थिक संबंधों को मजबूत करता है।

भारत-अज़रबैजान कूटनीतिक संबंध किस अंतरराष्ट्रीय ढांचे के तहत संचालित होते हैं?

ये संबंध 1961 के वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस, 2016 के भारत के विदेशी सेवा नियम और 1923 के आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत संचालित होते हैं।

Sources and further reading

Tags:Governance