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Environment and Ecology Notes · Exam Notes

भारत में सर्कुलर इकोनॉमी: कचरे को दौलत में बदलकर सतत विकास की ओर

भारत की सर्कुलर इकोनॉमी का लक्ष्य है विशाल मात्रा में उत्पन्न होने वाले कचरे को आर्थिक संसाधन में बदलना, जिसके लिए संसाधन-कुशल और कचरा कम करने वाले उत्पादन एवं खपत मॉडल अपनाए जा रहे हैं। पर्यावरणीय कानूनों और संस्थानों के समर्थन से यह क्षेत्र 2025 तक 624 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन नीति क्रियान्वयन में बिखराव और अनौपचारिक क्षेत्र के औपचारिकरण जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।
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EnvironmentEnvironment and Ecology NotesUPSC Notes
Exam Notes
GS Paper III

Economy, environment, science, security and applied policy

In brief

भारत की सर्कुलर इकोनॉमी का लक्ष्य है विशाल मात्रा में उत्पन्न होने वाले कचरे को आर्थिक संसाधन में बदलना, जिसके लिए संसाधन-कुशल और कचरा कम करने वाले उत्पादन एवं खपत मॉडल अपनाए जा रहे हैं। पर्यावरणीय कानूनों और संस्थानों के समर्थन से यह क्षेत्र 2025 तक 624 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन नीति क्रियान्वयन में बिखराव और अनौपचारिक क्षेत्र के औपचारिकरण जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।

भारत में सर्कुलर इकोनॉमी का परिचय

सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल का मकसद है उत्पाद के पूरे जीवनचक्र में कचरे को कम करना और संसाधनों का पुनः उपयोग बढ़ाना, चाहे वह कच्चे माल की निकासी हो या अंत में निपटान। भारत में सालाना लगभग 150 मिलियन टन शहरी ठोस कचरा उत्पन्न होता है, लेकिन केवल 30-35% कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान होता है (CPCB, 2023)। संसाधनों की कमी, पर्यावरणीय क्षरण और आर्थिक अक्षमताओं से निपटने के लिए सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को अपनाना बेहद जरूरी है। नीति आयोग के अनुसार, भारत की सर्कुलर इकोनॉमी बाजार 2025 तक USD 624 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो देश के GDP में लगभग 5% का योगदान देगा।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी – कचरा प्रबंधन, आर्थिक विकास, संसाधन दक्षता
  • GS पेपर 2: शासन व्यवस्था – पर्यावरण कानून और संवैधानिक प्रावधान
  • निबंध: सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक प्रगति

सर्कुलर इकोनॉमी के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत में सर्कुलर इकोनॉमी को कई महत्वपूर्ण कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों द्वारा मजबूती मिली है। Environment (Protection) Act, 1986 सरकार को कचरा प्रबंधन के लिए नियम बनाने और लागू करने का अधिकार देता है। इसमें Solid Waste Management Rules, 2016 शामिल हैं, जो कचरे के स्रोत पर अलगाव और वैज्ञानिक निपटान को अनिवार्य करते हैं। Plastic Waste Management Rules, 2016 (2021 में संशोधित) प्लास्टिक के पुनर्चक्रण और उत्पादक की जिम्मेदारी को बढ़ावा देते हैं। E-Waste (Management) Rules, 2016 इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण को नियंत्रित करते हैं। पर्यावरणीय विवादों के निपटारे के लिए National Green Tribunal Act, 2010 एक विशेष न्यायिक व्यवस्था प्रदान करता है। संविधान के Article 48A में राज्य को पर्यावरण संरक्षण और सुधार का निर्देश दिया गया है, जो सर्कुलर इकोनॉमी नीतियों का संवैधानिक आधार है।

  • Environment (Protection) Act, 1986: पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक कानून जिसमें कचरा प्रबंधन भी शामिल है।
  • Solid Waste Management Rules, 2016: कचरे के स्रोत पर अलगाव और वैज्ञानिक निपटान अनिवार्य।
  • Plastic Waste Management Rules, 2016 (संशोधित 2021): प्लास्टिक पुनर्चक्रण और उत्पादक की जिम्मेदारी को बढ़ावा।
  • E-Waste (Management) Rules, 2016: इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निपटान और पुनर्चक्रण का नियंत्रण।
  • National Green Tribunal Act, 2010: पर्यावरणीय विवादों का त्वरित निपटारा।
  • Article 48A: पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्देशात्मक सिद्धांत।

भारत में सर्कुलर इकोनॉमी के आर्थिक पहलू

सर्कुलर इकोनॉमी भारत के लिए बड़े आर्थिक अवसर लेकर आती है। World Economic Forum (2023) के अनुसार, सर्कुलर मॉडल अपनाने से 2030 तक भारत की कच्चे माल की मांग में 20-30% तक कमी आ सकती है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और संसाधन सुरक्षा बढ़ेगी। अनौपचारिक पुनर्चक्रण क्षेत्र, जो लगभग 90% प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण के लिए जिम्मेदार है (TERI, 2023), एक अहम लेकिन कम पहचाना गया हिस्सा है। भारत की संसाधन उत्पादकता विश्व औसत से 1.5 गुना कम है (UNEP, 2023), जिससे दक्षता बढ़ाने की बड़ी गुंजाइश है। केंद्रीय बजट 2023-24 में संसाधन दक्षता और सर्कुलर इकोनॉमी के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।

  • सर्कुलर इकोनॉमी बाजार का अनुमानित आकार: USD 624 बिलियन 2025 तक (नीति आयोग, 2022)।
  • सालाना शहरी ठोस कचरा उत्पादन: 150 मिलियन टन, जिसमें 30-35% का वैज्ञानिक निपटान (CPCB, 2023)।
  • अनौपचारिक क्षेत्र की भूमिका: प्लास्टिक कचरे के 90% पुनर्चक्रण के लिए जिम्मेदार (TERI, 2023)।
  • संसाधन उत्पादकता की कमी: भारत विश्व औसत से 1.5 गुना कम दक्ष (UNEP, 2023)।
  • सरकारी वित्त पोषण: 500 करोड़ रुपये सर्कुलर इकोनॉमी पहलों के लिए (केंद्रीय बजट 2023-24)।

भारत में सर्कुलर इकोनॉमी को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख संस्थान

भारत में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए कई संस्थान सक्रिय हैं। Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEFCC) नीतियां बनाता है और क्रियान्वयन देखता है। Central Pollution Control Board (CPCB) कचरा प्रबंधन नियमों को लागू करता है और प्रदूषण की निगरानी करता है। नीति आयोग रणनीतिक योजना बनाता है और राष्ट्रीय स्तर पर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देता है। TERI रिसर्च करता है और संसाधन दक्षता की वकालत करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UNEP भारत को सर्कुलर इकोनॉमी के लिए मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता देता है।

  • MoEFCC: नीति निर्माण और क्रियान्वयन।
  • CPCB: नियमों का प्रवर्तन और प्रदूषण निगरानी।
  • नीति आयोग: रणनीतिक योजना और प्रचार।
  • TERI: अनुसंधान और वकालत।
  • UNEP: वैश्विक मार्गदर्शन और सहयोग।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत और यूरोपीय संघ की सर्कुलर इकोनॉमी नीतियां

पहलूभारतयूरोपीय संघ (EU)
कानूनी ढांचाEnvironment Protection Act के अंतर्गत कई नियम; प्रवर्तन बिखरा हुआव्यापक Circular Economy Action Plan (2020) जिसमें कानूनी बाध्यकारी लक्ष्य
पुनर्चक्रण लक्ष्य30-35% शहरी कचरे का वैज्ञानिक निपटान2025 तक 55%, 2035 तक 65% पुनर्चक्रण लक्ष्य
अनौपचारिक क्षेत्रप्लास्टिक पुनर्चक्रण में लगभग 90% भूमिका लेकिन अनौपचारिक और बिना नियंत्रणऔपचारिक पुनर्चक्रण क्षेत्र और मजबूत नियामक नियंत्रण
आर्थिक प्रभाव2025 तक USD 624 बिलियन बाजार; औपचारिक रोजगार के आंकड़े सीमितसर्कुलर इकोनॉमी क्षेत्र में 7 लाख से अधिक रोजगार; 12% लैंडफिल कचरे में कमी
नीति क्रियान्वयनकेंद्र और राज्यों के बीच बिखरा हुआ; कचरा पृथक्करण में अवसंरचना की कमीऔद्योगिक और पर्यावरणीय नीतियों का समन्वित कार्यान्वयन

भारत में सर्कुलर इकोनॉमी अपनाने में बाधाएं

सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को बड़े पैमाने पर अपनाने में भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नीति क्रियान्वयन केंद्र और राज्यों के बीच बिखरा हुआ है। अनौपचारिक पुनर्चक्रण क्षेत्र, जो प्रभावी है, उसे औपचारिक मान्यता और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिली है, जिससे निवेश और दक्षता सीमित है। स्रोत पर कचरा पृथक्करण की अवसंरचना अपर्याप्त है, जिससे पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा प्रभावित होती है। जनता में कचरा पृथक्करण और पुनः उपयोग को लेकर जागरूकता और व्यवहार में बदलाव कम है। ये कमियां भारत को वैश्विक मानकों के साथ मेल खाने से रोकती हैं।

  • केंद्र और राज्यों के बीच नीति प्रवर्तन में बिखराव।
  • अनौपचारिक पुनर्चक्रणकर्ताओं का औपचारिककरण और सामाजिक सुरक्षा की कमी।
  • स्रोत पर कचरा पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान के लिए अवसंरचना की कमी।
  • जनता में कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता और भागीदारी कम।
  • औद्योगिक और शहरी योजना में सर्कुलर इकोनॉमी का सीमित समावेशन।

महत्व और आगे का रास्ता

भारत के लिए सर्कुलर इकोनॉमी अपनाना जरूरी है ताकि सीमित संसाधनों का सतत प्रबंधन हो सके, पर्यावरण प्रदूषण कम हो और आर्थिक मूल्य सृजित हो। अनौपचारिक क्षेत्र का औपचारिककरण दक्षता और श्रमिकों के हितों में सुधार कर सकता है। स्रोत पर कचरा पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान के लिए अवसंरचना मजबूत करनी होगी। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नीति समन्वय बेहतर होना चाहिए और निगरानी तंत्र सशक्त बनाए जाने चाहिए। औद्योगिक नीति और शहरी विकास में सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को शामिल करने से नए व्यवसाय मॉडल और हरित रोजगारों के द्वार खुलेंगे।

  • अनौपचारिक पुनर्चक्रण क्षेत्र का औपचारिककरण और प्रोत्साहन।
  • कचरा पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान के लिए अवसंरचना में निवेश।
  • केंद्र और राज्यों के बीच नीति समन्वय को बढ़ावा।
  • कचरा पृथक्करण और पुनः उपयोग के लिए जन जागरूकता अभियान।
  • औद्योगिक और शहरी विकास रणनीतियों में सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों का समावेश।

प्रश्न अभ्यास

सर्कुलर इकोनॉमी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. सर्कुलर इकोनॉमी केवल कचरे की पुनर्चक्रण पर केंद्रित है।
  2. Plastic Waste Management Rules, 2016 में उत्पादक की विस्तारित जिम्मेदारी शामिल है।
  3. भारत का अनौपचारिक क्षेत्र प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण में मुख्य भूमिका निभाता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि सर्कुलर इकोनॉमी केवल पुनर्चक्रण तक सीमित नहीं है, इसमें कचरे को कम करना, पुनः उपयोग और पुनः डिजाइन भी शामिल है। कथन 2 सही है क्योंकि Plastic Waste Management Rules, 2016 में उत्पादक की विस्तारित जिम्मेदारी शामिल है। कथन 3 भी सही है क्योंकि भारत में अनौपचारिक क्षेत्र लगभग 90% प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण के लिए जिम्मेदार है (TERI, 2023)।

भारत के कचरा प्रबंधन कानूनों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. E-Waste (Management) Rules, 2016 इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण को नियंत्रित करते हैं।
  2. National Green Tribunal Act, 2010 मुख्यतः पर्यावरणीय प्रदूषण से जुड़े आपराधिक मामलों को संबोधित करता है।
  3. Solid Waste Management Rules, 2016 स्रोत पर कचरा पृथक्करण अनिवार्य करते हैं।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि E-Waste Rules इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण को नियंत्रित करते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि National Green Tribunal Act, 2010 पर्यावरणीय विवादों के लिए विशेष न्यायालय प्रदान करता है, न कि मुख्यतः आपराधिक मामलों के लिए। कथन 3 सही है क्योंकि Solid Waste Management Rules, 2016 में स्रोत पर कचरा पृथक्करण अनिवार्य किया गया है।

मेन प्रश्न

भारत में सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल अपनाने की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करें। नीति और संस्थागत सुधारों के माध्यम से भारत की सर्कुलरिटी की दिशा में प्रगति कैसे संभव है? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC की प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी; पेपर 2 – शासन और सार्वजनिक नीति
  • झारखंड परिप्रेक्ष्य: रांची और जमशेदपुर जैसे शहरी केंद्रों से काफी शहरी ठोस कचरा उत्पन्न होता है; अनौपचारिक पुनर्चक्रण प्रचलित है लेकिन औपचारिक समर्थन की कमी है।
  • मेन पॉइंट: झारखंड की कचरा प्रबंधन चुनौतियां, अनौपचारिक क्षेत्र की भूमिका, और केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ राज्य स्तर पर नीति समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डालें।
लाइनियर और सर्कुलर इकोनॉमी मॉडलों में मूलभूत अंतर क्या है?

लाइनियर इकोनॉमी में ‘लेना-बनाना-फेंकना’ की प्रक्रिया होती है, जिससे संसाधनों की कमी और अधिक कचरा उत्पन्न होता है। सर्कुलर इकोनॉमी में कचरे को कम कर, सामग्री का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण किया जाता है, जिससे उत्पादों का जीवनकाल बढ़ता है और संसाधनों का संरक्षण होता है।

भारत में कौन सा कानून स्रोत पर कचरा पृथक्करण को अनिवार्य करता है?

Solid Waste Management Rules, 2016, जो Environment (Protection) Act, 1986 के तहत आते हैं, स्रोत पर जैविक, गैर-जैविक और घरेलू खतरनाक कचरे के पृथक्करण को अनिवार्य करते हैं।

भारत में प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण में अनौपचारिक क्षेत्र की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?

भारत में लगभग 90% प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा किया जाता है, जिसमें संग्रहण, पृथक्करण और पुनर्चक्रण शामिल हैं, हालांकि इन्हें औपचारिक मान्यता और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिली है (TERI, 2023)।

सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांत अपनाने से भारत को क्या आर्थिक लाभ हो सकते हैं?

सर्कुलर इकोनॉमी अपनाने से 2030 तक कच्चे माल की मांग में 20-30% कमी, संसाधन उत्पादकता में सुधार और 2025 तक USD 624 बिलियन के बाजार आकार की प्राप्ति संभव है, जो भारत के GDP में लगभग 5% योगदान देगा (नीति आयोग, 2022; WEF, 2023)।

कौन सा संवैधानिक प्रावधान राज्य को पर्यावरण की रक्षा का निर्देश देता है?

संविधान का Article 48A राज्य नीति के निर्देशात्मक सिद्धांत के रूप में पर्यावरण संरक्षण, वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा का निर्देश देता है।

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