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Governance · Exam Notes

गृह मंत्रालय ने राज्यों को जुलाई 2024 तक फोरेंसिक साइंस की लंबित रिपोर्ट्स निपटाने का निर्देश दिया

गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फोरेंसिक साइंस की लंबित रिपोर्ट्स जुलाई 2024 तक खत्म करने का आदेश दिया है। इसमें बुनियादी ढांचे के सुधार, खाली पदों की पूर्ति और मान्यता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। यह कदम फोरेंसिक लैब्स में 30% से अधिक लंबित काम को खत्म कर आपराधिक न्याय प्रणाली की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में है।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फोरेंसिक साइंस की लंबित रिपोर्ट्स जुलाई 2024 तक खत्म करने का आदेश दिया है। इसमें बुनियादी ढांचे के सुधार, खाली पदों की पूर्ति और मान्यता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। यह कदम फोरेंसिक लैब्स में 30% से अधिक लंबित काम को खत्म कर आपराधिक न्याय प्रणाली की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में है।

परिप्रेक्ष्य और निर्देश का सारांश

2024 की शुरुआत में, गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को तीन महीने के भीतर फोरेंसिक साइंस की लंबित रिपोर्ट्स साफ करने का निर्देश दिया। इस आदेश के तहत राज्य सरकारों को फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरीज (FSLs) में खाली पदों को भरना, बुनियादी ढांचा सुधारना और जुलाई 2024 तक फोरेंसिक रिपोर्ट समय पर प्रदान करना अनिवार्य किया गया है। डायरेक्टरेट ऑफ फोरेंसिक साइंस सर्विसेज (DFSS) के साथ समन्वय पर भी जोर दिया गया है ताकि प्रगति की निगरानी हो सके और पूरे देश में प्रक्रिया मानकीकृत हो।

यह पहल फोरेंसिक साक्ष्य विश्लेषण की लंबित रिपोर्ट्स की समस्या को दूर करने के लिए है, जो आपराधिक न्याय प्रणाली की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता में बाधा डालती हैं। इस निर्देश में उन्नत उपकरणों की तैनाती, समर्पित फोरेंसिक साक्ष्य संग्रह टीमों का गठन और पुलिस कर्मियों के लिए फोरेंसिक प्रोटोकॉल पर प्रशिक्षण भी अनिवार्य किया गया है।

UPSC से संबंधित

  • GS पेपर 2: राजनीति और शासन – आपराधिक न्याय प्रणाली सुधार, फोरेंसिक साइंस की भूमिका
  • GS पेपर 3: विज्ञान और तकनीक – कानून प्रवर्तन में फोरेंसिक तकनीक और नवाचार
  • निबंध: शासन और न्याय वितरण में विज्ञान और तकनीक की भूमिका

फोरेंसिक साइंस के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

फोरेंसिक साइंस की व्यवस्था एक ठोस कानूनी ढांचे के तहत संचालित होती है। क्रिमिनल प्रोसीजर कोड, 1973 (CrPC) की धारा 53 और 54 आरोपी और पीड़ितों की चिकित्सा जांच और साक्ष्य संग्रह को अनिवार्य बनाती हैं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 अदालतों में फोरेंसिक साक्ष्यों की स्वीकार्यता और मूल्यांकन को नियंत्रित करता है। इसके अलावा, लंबित DNA टेक्नोलॉजी (उपयोग और आवेदन) विनियमन विधेयक, 2019 फोरेंसिक DNA डेटा के संग्रह, भंडारण और उपयोग को नियंत्रित करने का प्रयास करता है, जिससे निजता और जांच की जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे।

गृह मंत्रालय के निर्देशों की संवैधानिक वैधता अनुच्छेद 246 से आती है, जो आपराधिक कानून और प्रक्रिया को समवर्ती सूची में रखता है, और अनुच्छेद 355 से, जो केंद्र को राज्यों की आंतरिक सुरक्षा के लिए संरक्षण देने का अधिकार देता है। इससे फोरेंसिक मानकों की समरूपता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक नियंत्रण की जरूरत सिद्ध होती है।

फोरेंसिक साइंस आधुनिकीकरण के आर्थिक पहलू

संघीय बजट 2023-24 में फोरेंसिक साइंस के बुनियादी ढांचे के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं (स्रोत: वित्त मंत्रालय बजट दस्तावेज 2023-24)। लंबित रिपोर्ट्स की सफाई और FSLs के आधुनिकीकरण से मामलों की लंबितता में 15-20% की कमी आ सकती है, जिससे न्यायिक और पुलिस संसाधनों की बचत करोड़ों में होगी।

भारत में फोरेंसिक सेवा बाजार 2027 तक 12% वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने की संभावना है (स्रोत: ResearchAndMarkets 2023), जो बढ़ती अपराध दर, तकनीकी अपनाने और सरकारी पहलों से प्रेरित है। इसलिए फोरेंसिक बुनियादी ढांचे में निवेश के सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों आर्थिक लाभ हैं।

संस्थागत संरचना और प्रमुख हितधारक

  • डायरेक्टरेट ऑफ फोरेंसिक साइंस सर्विसेज (DFSS): फोरेंसिक लैब्स के लिए केंद्रीय समन्वयक संस्था, मानक निर्धारित करती है और प्रदर्शन की निगरानी करती है।
  • राज्य फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरीज (FSLs): राज्य और जिला स्तर पर फोरेंसिक जांच का मुख्य केंद्र।
  • गृह मंत्रालय (MHA): नीति निर्धारण, प्रशासनिक निगरानी और धन आवंटन।
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NITs): नवाचार, तकनीकी विकास और क्षमता निर्माण में सहयोग।
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB): अपराध और फोरेंसिक लंबित रिपोर्ट्स का डेटा संग्रह और विश्लेषण, नीति निर्धारण के लिए।

वर्तमान चुनौतियां और आंकड़े

2023 तक, राज्य FSLs में फोरेंसिक साक्ष्य विश्लेषण में 30% से अधिक लंबित रिपोर्ट्स हैं (स्रोत: MHA आंतरिक रिपोर्ट 2023)। फोरेंसिक लैब्स में 25-30% तक खाली पद हैं, जो देरी का कारण बनते हैं। मोबाइल फोरेंसिक वैन, जो स्थल पर साक्ष्य संग्रह के लिए जरूरी हैं, केवल 40% से कम जिलों में तैनात हैं (स्रोत: MHA, 2024)।

मानकीकृत मान्यता और गुणवत्ता नियंत्रण की कमी से फोरेंसिक रिपोर्ट की विश्वसनीयता में असंगति होती है, जो न्यायिक विश्वास को कम करती है और मामलों के निपटारे में देरी करती है। MHA ने सभी FSLs के लिए ISO/IEC 17025 मान्यता अनिवार्य कर दी है ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके (स्रोत: भारतीय मानक ब्यूरो दिशानिर्देश, 2023)।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम यूनाइटेड किंगडम के फोरेंसिक सिस्टम

मापदंडभारतयूनाइटेड किंगडम
नियामक प्राधिकरणडायरेक्टरेट ऑफ फोरेंसिक साइंस सर्विसेज (DFSS)फोरेंसिक साइंस रेगुलेटर (UK होम ऑफिस)
लंबित रिपोर्ट्स में कमी2023 तक 30% से अधिक लंबित2017-2022 के बीच 50% तक कमी
मान्यता मानक2023 से ISO/IEC 17025 अनिवार्य2017 से सख्त मान्यता अनिवार्य
वित्त पोषण मॉडललगभग 200 करोड़ रुपये बजट आवंटन (2023-24)केंद्रित फंडिंग और समर्पित बजट
नवाचार और प्रशिक्षणIITs/NITs के साथ सहयोग प्रोत्साहितनियमित प्रशिक्षण और नवाचार कार्यक्रम अनिवार्य

महत्व और आगे का रास्ता

  • फोरेंसिक लंबित रिपोर्ट्स खत्म होने से आपराधिक जांच तेज होंगी और न्यायिक लंबित मामले कम होंगे, जिससे दोषसिद्धि दर बेहतर होगी।
  • खाली पदों की पूर्ति और बुनियादी ढांचे के सुधार को प्राथमिकता देनी होगी ताकि लंबित रिपोर्ट्स की सफाई निरंतर बनी रहे।
  • ISO/IEC 17025 के तहत अनिवार्य मान्यता फोरेंसिक रिपोर्ट की विश्वसनीयता और न्यायिक स्वीकार्यता बढ़ाएगी।
  • मोबाइल फोरेंसिक वैन का विस्तार और समर्पित साक्ष्य संग्रह टीमों का गठन स्थल पर साक्ष्यों की सुरक्षा बेहतर बनाएगा।
  • फोरेंसिक प्रोटोकॉल पर पुलिस प्रशिक्षण जरूरी है ताकि साक्ष्यों की दूषितता रोकी जा सके और मामलों के परिणाम बेहतर हों।
  • प्रमुख तकनीकी संस्थानों के साथ नवाचार साझेदारी को संस्थागत रूप से मजबूत करना चाहिए ताकि तकनीक में निरंतर सुधार हो सके।

प्रैक्टिस प्रश्न

भारत में फोरेंसिक साइंस की लंबित रिपोर्ट्स निपटान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. गृह मंत्रालय ने जुलाई 2024 तक फोरेंसिक लैब्स की लंबित रिपोर्ट्स खत्म करने का निर्देश दिया है।
  2. लंबित DNA टेक्नोलॉजी रेगुलेशन बिल, 2019 वर्तमान में फोरेंसिक DNA डेटा के उपयोग को नियंत्रित करता है।
  3. 2023 के दिशानिर्देशों के अनुसार सभी फोरेंसिक लैब्स के लिए ISO/IEC 17025 मान्यता अनिवार्य है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि MHA ने जुलाई 2024 तक लंबित रिपोर्ट्स खत्म करने का निर्देश दिया है। कथन 2 गलत है क्योंकि DNA टेक्नोलॉजी रेगुलेशन बिल, 2019 अभी लंबित है और लागू नहीं हुआ है। कथन 3 सही है क्योंकि ISO/IEC 17025 मान्यता 2023 से अनिवार्य हो चुकी है।

आपराधिक न्याय में फोरेंसिक साइंस के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. फोरेंसिक साक्ष्य केवल भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 द्वारा नियंत्रित होते हैं।
  2. CrPC की धारा 53 और 54 चिकित्सा जांच और साक्ष्य संग्रह को अनिवार्य बनाती हैं।
  3. गृह मंत्रालय को अनुच्छेद 355 के तहत फोरेंसिक लैब्स पर विशेष संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि फोरेंसिक साक्ष्य कई कानूनों से नियंत्रित होते हैं, जिनमें CrPC और लंबित DNA बिल भी शामिल हैं, केवल साक्ष्य अधिनियम नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि CrPC की धारा 53 और 54 चिकित्सा जांच और साक्ष्य संग्रह को अनिवार्य बनाती हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि MHA का अधिकार अनुच्छेद 246 के तहत समवर्ती है और अनुच्छेद 355 के तहत सुरक्षा प्रदान करने वाला है, विशेष नहीं।

मेन प्रश्न

भारत के फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरीज को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और गृह मंत्रालय के हालिया निर्देशों का फोरेंसिक लंबित रिपोर्ट्स के निपटान पर क्या प्रभाव होगा? इन उपायों का आपराधिक न्याय प्रणाली पर क्या असर पड़ेगा? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से संबंधित

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (राजनीति और शासन), पेपर 3 (विज्ञान और तकनीक)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के राज्य फोरेंसिक लैब्स में भी राष्ट्रीय स्तर के समान लंबित रिपोर्ट्स और खाली पदों की समस्या है। MHA के निर्देशों का स्थानीय आपराधिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर असर होगा।
  • मेन पॉइंटर: राज्य स्तर की चुनौतियों, केंद्र एजेंसियों के साथ समन्वय, और झारखंड में कानून-व्यवस्था पर प्रभाव पर आधारित उत्तर तैयार करें।
डायरेक्टरेट ऑफ फोरेंसिक साइंस सर्विसेज (DFSS) की भूमिका क्या है?

DFSS भारत भर की फोरेंसिक साइंस लैब्स का केंद्रीय समन्वयक है, जो मानक निर्धारित करता है, प्रदर्शन की निगरानी करता है और गुणवत्ता तथा मान्यता के नियमों का पालन सुनिश्चित करता है।

फोरेंसिक लैब्स के लिए ISO/IEC 17025 मान्यता क्यों जरूरी है?

ISO/IEC 17025 मान्यता यह सुनिश्चित करती है कि फोरेंसिक लैब्स अंतरराष्ट्रीय स्तर के परीक्षण और कैलिब्रेशन मानकों को पूरा करें, जिससे फोरेंसिक साक्ष्य की विश्वसनीयता और अदालत में स्वीकार्यता बढ़ती है।

फोरेंसिक जांच में CrPC की धारा 53 और 54 का क्या महत्व है?

धारा 53 और 54 आरोपी और पीड़ित की चिकित्सा जांच और साक्ष्य संग्रह को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाती हैं, जो जांच के लिए जरूरी फोरेंसिक नमूनों के संग्रह का आधार है।

फोरेंसिक लैब्स में लंबित रिपोर्ट्स का आपराधिक न्याय प्रणाली पर क्या प्रभाव पड़ता है?

लंबित रिपोर्ट्स से फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार होने में देरी होती है, जिससे जांच लंबित रहती है, न्यायिक मामलों की संख्या बढ़ती है और साक्ष्यों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है, जो दोषसिद्धि दर को कम करती है।

भारत में फोरेंसिक साइंस सुधार के लिए कौन-कौन से नवाचार प्रोत्साहित किए जा रहे हैं?

MHA IITs, NITs और विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें तकनीकी विकास, हैकाथॉन आयोजित करना और भौतिक, जैविक, रासायनिक और डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण के लिए उन्नत उपकरण अपनाना शामिल है।

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