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मालदीव को भारत की ₹30 अरब वित्तीय मदद: रणनीतिक और आर्थिक पहलू

अप्रैल 2024 में भारत सरकार ने मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा देने के लिए ₹30 अरब (लगभग 360 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की निकासी को मंजूरी दी। यह कदम विदेश मंत्रालय (MEA) के माध्यम से लागू किया गया और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA) के तहत विनियमित है। इसका मकसद मालदीव की गिरती हुई विदेशी मुद्रा भंडार के बीच आर्थिक स्थिरता को बढ़ाना है। यह सहायता 2020 में हुए 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर के मुद्रा स्वैप समझौते पर आधारित है और भारत की वित्तीय कूटनीति के तहत द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति को दर्शाती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: भारत और उसके पड़ोसी – द्विपक्षीय संबंध, SAARC, हिंद महासागर भू-राजनीति
  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – विदेशी मुद्रा प्रबंधन, बाहरी व्यावसायिक उधारी
  • निबंध: हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक वित्तीय कूटनीति

निकासी को नियंत्रित करने वाला कानूनी और संस्थागत ढांचा

₹30 अरब की यह निकासी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA) की धारा 6 के अनुरूप है, जो बाहरी व्यावसायिक उधार और विदेशी मुद्रा लेनदेन को नियंत्रित करता है। MEA, जिसे विदेश मंत्रालय (कारोबार आवंटन) नियम, 1961 के तहत अधिकार प्राप्त हैं, द्विपक्षीय वित्तीय सहायता जैसे मुद्रा स्वैप और क्रेडिट लाइन का प्रबंधन करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बाहरी व्यावसायिक उधार (ECB) के ढांचे और बाहरी सहायता के दिशा-निर्देशों की निगरानी करता है, जिससे भारत की विदेशी मुद्रा नीतियों का पालन सुनिश्चित होता है।

  • FEMA धारा 6: भारतीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों द्वारा विदेशी मुद्रा में उधार और ऋण को नियंत्रित करती है।
  • MEA नियम, 1961: MEA को विदेशी सहायता वार्ता और वितरण का अधिकार देते हैं।
  • RBI ECB ढांचा: बाहरी व्यावसायिक उधार के नियम और सीमा निर्धारित करता है।

आर्थिक संदर्भ और वित्तीय सहायता का कारण

मालदीव का GDP 2023 में 5.7 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो 6.5% की वृद्धि दर से बढ़ा (विश्व बैंक, 2024)। इसके बावजूद, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 2023 में 15% की गिरावट आई (IMF रिपोर्ट, 2024), जिससे तरलता संबंधी चुनौतियां पैदा हुईं। भारत की ₹30 अरब की निकासी 2020 के 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर के मुद्रा स्वैप समझौते को पूरा करती है, जिसका उद्देश्य मालदीव की बाहरी तरलता को स्थिर करना और व्यापार को सहारा देना है, जो 2023 में भारत के साथ 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा (वाणिज्य मंत्रालय, भारत)। यह वित्तीय सहायता SAARC और Indian Ocean Rim Association (IORA) के तहत क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और स्थिरता को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

  • 2023 में मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार में 15% की गिरावट से भुगतान संतुलन पर दबाव पड़ा।
  • भारत-मालदीव व्यापार का आकार सीमित लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जो 2023 में 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
  • पिछले दशक में भारत की मालदीव को कुल विदेशी सहायता 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुकी है।

रणनीतिक मायने: चीन के प्रभाव को संतुलित करना

भारत की वित्तीय मदद चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के ऋणों से अलग है, जो 2015 से 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुके हैं। चीन की यह रणनीति बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण पर केंद्रित है, जिससे कर्ज स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जबकि मालदीव का कर्ज-से-GDP अनुपात 60% है, जो श्रीलंका के 120% से काफी कम है (विश्व बैंक, 2024)। भारत का जोर मुद्रा स्वैप और क्रेडिट लाइन के माध्यम से तरलता सहायता पर है, जिससे मालदीव के कर्ज बोझ में वृद्धि नहीं होती, आर्थिक संप्रभुता बनी रहती है और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सॉफ्ट पावर बढ़ती है।

पहलू भारत की रणनीति चीन की रणनीति
मदद का प्रकार मुद्रा स्वैप, तरलता सहायता बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के ऋण
कर्ज प्रभाव कर्ज बोझ में न्यूनतम वृद्धि उच्च कर्ज संचय
रणनीतिक उद्देश्य आर्थिक स्थिरता, द्विपक्षीय संबंध बुनियादी ढांचा विकास, रणनीतिक पकड़
कर्ज-से-GDP अनुपात (मालदीव) लगभग 60% लागू नहीं (चीन के ऋण शामिल)
क्षेत्रीय धारणा सॉफ्ट पावर, क्षेत्रीय एकीकरण कर्ज जाल कूटनीति की चिंता

लेन-देन में शामिल प्रमुख संस्थाएं

  • विदेश मंत्रालय (MEA): वित्तीय सहायता और मुद्रा स्वैप की वार्ता और वितरण करता है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): विदेशी मुद्रा लेनदेन और बाहरी व्यावसायिक उधार को नियंत्रित करता है।
  • वित्त मंत्रालय (MoF): विदेशी सहायता के लिए बजट आवंटित करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF): मालदीव की मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता की निगरानी करता है और संबंधित आंकड़े प्रकाशित करता है।
  • विश्व बैंक: GDP और आर्थिक विकास के आंकड़े प्रदान करता है।
  • मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण (MMA): मालदीव के विदेशी भंडार और मौद्रिक नीति का प्रबंधन करता है।

भारत की वित्तीय कूटनीति में महत्वपूर्ण कमजोरियां

भारत की तरलता सहायता और मुद्रा स्वैप पर केंद्रित रणनीति अल्पकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए कारगर है, लेकिन मालदीव में दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण और क्षमता निर्माण के लिए व्यापक योजना की कमी है। यह कमी चीन को बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट के माध्यम से अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका देती है, जो भारत की हिंद महासागर में रणनीतिक पहुंच को सीमित कर सकती है। भारत को किफायती बुनियादी ढांचा ऋण और तकनीकी सहायता को अपनी वित्तीय उपकरण सूची में शामिल कर अपनी स्थिति मजबूत करनी चाहिए।

महत्व और आगे का रास्ता

  • भारत की ₹30 अरब की निकासी एक समझदार वित्तीय कूटनीति का उदाहरण है, जो मालदीव को कर्ज के जोखिम बढ़ाए बिना आर्थिक स्थिरता देती है।
  • मालदीव की आर्थिक संप्रभुता बनाए रखना चीन की कर्ज जाल कूटनीति के खिलाफ एक मजबूत कदम है।
  • भारत को अपने वित्तीय उपकरणों में बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण और क्षमता निर्माण को शामिल करना चाहिए।
  • SAARC और IORA के तहत बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करके क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना चाहिए।
  • मालदीव के मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतकों पर निरंतर निगरानी आवश्यक है, ताकि समय पर सहायता प्रदान की जा सके।

मालदीव को भारत की ₹30 अरब वित्तीय सहायता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह सहायता बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत किफायती बुनियादी ढांचा ऋण के रूप में दी गई है।
  2. निकासी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 के तहत नियंत्रित है।
  3. भारत की वित्तीय मदद मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर करने का लक्ष्य रखती है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि ₹30 अरब की सहायता BRI के तहत किफायती ऋण नहीं बल्कि भारत द्वारा मुद्रा स्वैप/निकासी है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि निकासी FEMA के तहत है और इसका उद्देश्य मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर करना है।

मालदीव को भारत और चीन की वित्तीय सहायता के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. भारत की सहायता मुख्यतः मालदीव के कर्ज बोझ को बढ़ाती है।
  2. चीन के BRI ऋणों ने मालदीव में कर्ज स्थिरता संबंधी चिंताएं बढ़ाई हैं।
  3. भारत की रणनीति बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण की बजाय तरलता सहायता पर केंद्रित है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 2 और 3
  • (b) केवल 1 और 2
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 गलत है क्योंकि भारत की वित्तीय सहायता मुद्रा स्वैप के माध्यम से कर्ज में महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं करती। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि चीन के BRI ऋणों ने कर्ज संबंधी चिंताएं बढ़ाई हैं और भारत तरलता सहायता पर जोर देता है।

मुख्य प्रश्न

भारत की मालदीव को ₹30 अरब की वित्तीय सहायता किस प्रकार हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक वित्तीय कूटनीति को दर्शाती है? इस सहायता के आर्थिक कारणों का विश्लेषण करें और इसे मालदीव में चीन की रणनीति से तुलना करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और आर्थिक विकास
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज निर्यात और व्यापार लॉजिस्टिक्स को भारत-मालदीव संबंधों से प्रभावित क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा से लाभ हो सकता है।
  • मुख्य बिंदु: उत्तरों में भारत की क्षेत्रीय कूटनीति और आर्थिक स्थिरता के उपायों को राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार हितों से जोड़कर प्रस्तुत करें।
मालदीव के लिए भारत की ₹30 अरब निकासी को कौन से कानूनी प्रावधान नियंत्रित करते हैं?

यह निकासी मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA) की धारा 6 के तहत नियंत्रित है, जो बाहरी व्यावसायिक उधार और विदेशी मुद्रा लेनदेन को विनियमित करता है। MEA विदेश मंत्रालय (कारोबार आवंटन) नियम, 1961 के तहत द्विपक्षीय वित्तीय सहायता का प्रबंधन करता है।

भारत की वित्तीय सहायता मालदीव को चीन की सहायता से कैसे अलग है?

भारत मुद्रा स्वैप और क्रेडिट लाइन के माध्यम से तरलता सहायता देता है, जिससे कर्ज का बोझ कम रहता है। वहीं चीन BRI के तहत बड़े बुनियादी ढांचे के ऋण देता है, जिससे मालदीव में कर्ज स्थिरता की चिंताएं बढ़ती हैं।

मालदीव के लिए ₹30 अरब की सहायता का आर्थिक महत्व क्या है?

यह सहायता मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर करने का उद्देश्य रखती है, जो 2023 में 15% गिरा था, ताकि आयात और आर्थिक स्थिरता के लिए तरलता बनी रहे।

भारत की कौन-कौन सी संस्थाएं इस वित्तीय सहायता को नियंत्रित और लागू करती हैं?

विदेश मंत्रालय (MEA) सहायता की वार्ता और वितरण करता है, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी मुद्रा लेनदेन को नियंत्रित करता है, और वित्त मंत्रालय (MoF) बजट आवंटन करता है।

भारत इस वित्तीय सहायता के माध्यम से कौन सा रणनीतिक उद्देश्य पूरा करता है?

भारत द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने, क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता बढ़ाने और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने का लक्ष्य रखता है।