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अप्रैल 2024 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि घटकर 4.1% पर आई: संरचनात्मक चुनौतियाँ और नीतिगत सुझाव

भारत के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की वृद्धि अप्रैल 2024 में तेज़ी से घटकर 4.1% रह गई, जो पिछले पांच महीनों में सबसे निचला स्तर है। यह जानकारी मंत्रालय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन (MOSPI) द्वारा जारी आंकड़ों से सामने आई है। मार्च 2024 में यह वृद्धि 7.6% थी, जबकि विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि 3.5%, खनन क्षेत्र की 2.8%, और बिजली उत्पादन 6.2% रही। इस मंदी से यह संकेत मिलता है कि औद्योगिक क्षेत्र में गहरे संरचनात्मक समस्याएं हैं, जो देश की GDP में लगभग 17.5% का योगदान देता है और लगभग 27% श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24; आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2022-23)।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – औद्योगिक विकास के रुझान, IIP के घटक, विनिर्माण क्षेत्र की चुनौतियाँ
  • GS पेपर 2: राजनीति – उद्योग से संबंधित संवैधानिक प्रावधान (Article 246(3)), श्रम कानून (Industrial Disputes Act, 1947)
  • निबंध: औद्योगिक मंदी का आर्थिक विकास और रोजगार पर प्रभाव

औद्योगिक उत्पादन पर संवैधानिक और कानूनी ढांचा

संविधान के Article 246(3) के तहत संसद को केंद्र सूची में शामिल उद्योगों पर विधायी अधिकार प्राप्त है, जिसके तहत Industrial Disputes Act, 1947 और Factories Act, 1948 जैसे कानून बनाए गए हैं। Industrial Disputes Act श्रम संबंधों, हड़तालों और छंटनी को नियंत्रित करता है, जो सीधे औद्योगिक उत्पादकता को प्रभावित करता है। Factories Act कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाजी परिस्थितियों का प्रबंधन करता है, जो संचालन की दक्षता के लिए जरूरी है। साथ ही, Electricity Act, 2003 (Section 54) नियामकों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का अधिकार देता है, जो औद्योगिक उत्पादन के लिए अहम है। Goods and Services Tax Act, 2017 अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत करता है, जिससे विनिर्माण क्षेत्र की इनपुट लागत और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता प्रभावित होती है।

क्षेत्रीय प्रदर्शन और आर्थिक संकेतक

अप्रैल 2024 में क्षेत्रीय विकास में明显 कमी आई: विनिर्माण 3.5%, खनन 2.8%, और बिजली उत्पादन 6.2% की वृद्धि दर्ज की गई। पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन, जो निवेश की मांग का सूचक है, केवल 1.9% बढ़ा, जो औद्योगिक विस्तार की धीमी योजना को दर्शाता है। विनिर्मित वस्तुओं का निर्यात Q4 2023-24 में 2.3% तक धीमा हो गया, जबकि पिछले तिमाही में यह 8.5% था (DGCI&S डेटा), जो बाहरी मांग और प्रतिस्पर्धात्मकता में गिरावट को दर्शाता है। औद्योगिक क्षेत्र का GDP में योगदान 17.5% पर स्थिर है, जो आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में इसकी अहम भूमिका को दर्शाता है।

औद्योगिक उत्पादन निगरानी और नीति निर्धारण में संस्थागत भूमिका

  • MOSPI: IIP डेटा संकलित और प्रकाशित करता है, जो औद्योगिक विकास के ताजा संकेत देता है।
  • DPIIT: औद्योगिक नीतियाँ बनाता है, विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है, और व्यापार में आसानी सुनिश्चित करता है।
  • RBI: मौद्रिक नीति के माध्यम से औद्योगिक क्रेडिट उपलब्धता को प्रभावित करता है, जिससे पूंजी निवेश प्रभावित होता है।
  • CII: उद्योग संगठन के रूप में औद्योगिक चुनौतियों और नीतिगत प्रभाव पर प्रतिक्रिया देता है।
  • DGCI&S: निर्यात-आयात आंकड़ों को ट्रैक करता है, जो औद्योगिक प्रदर्शन के आकलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारत बनाम चीन: औद्योगिक विकास की तुलना

पहलू भारत (अप्रैल 2024) चीन (अप्रैल 2024)
औद्योगिक उत्पादन वृद्धि 4.1% 5.5%
विनिर्माण वृद्धि 3.5% 6.2%
नीतिगत समर्थन क्रमिक सुधार; GST लागू; सीमित वित्तीय प्रोत्साहन सक्रिय वित्तीय प्रोत्साहन; ‘Made in China 2025’ के तहत निर्यात प्रोत्साहन
अवसंरचना निवेश मध्यम; बिजली आपूर्ति में समस्याएं बनी हुईं मजबूत; सुव्यवस्थित लॉजिस्टिक्स और बिजली अवसंरचना
श्रम नियम Industrial Disputes Act, 1947 के तहत कठोर औद्योगिक लचीलेपन के लिए अधिक लचीले श्रम कानून

औद्योगिक विकास में बाधाएं

भारत में औद्योगिक विकास की मंदी का मुख्य कारण अवसंरचनात्मक अड़चनें हैं, जैसे कि बिजली की अनियमित आपूर्ति, जो Electricity Act, 2003 के बावजूद बनी हुई है। Industrial Disputes Act, 1947 के तहत श्रम कठोरता लचीले कार्यबल प्रबंधन में बाधा डालती है, जिससे उत्पादकता प्रभावित होती है। पूंजीगत वस्तुओं का धीमा उत्पादन निवेश की कम रुचि दर्शाता है, जिसे क्रेडिट की कमी और वैश्विक अनिश्चितताएं और बढ़ाती हैं। निर्यात वृद्धि की मंदी प्रतिस्पर्धात्मकता में गिरावट और वैश्विक व्यापार तनावों को दर्शाती है। ये सभी कारण मिलकर विनिर्माण विस्तार और खनन उत्पादन को धीमा कर रहे हैं।

नीतिगत सुझाव और आगे का रास्ता

  • श्रम कानूनों में सुधार करें ताकि श्रमिक सुरक्षा और औद्योगिक लचीलापन दोनों संतुलित हो सकें, और विवाद समाधान की प्रक्रिया तेज़ हो।
  • अवसंरचना निवेश बढ़ाएं, खासकर विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स में, Electricity Act की Section 54 का प्रभावी उपयोग करते हुए।
  • पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए लक्षित क्रेडिट समर्थन और प्रोत्साहन प्रदान करें, जिससे निवेश की मांग बढ़े।
  • निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को तकनीकी उन्नयन, गुणवत्ता मानकों और व्यापार सुगमता के माध्यम से मजबूत करें।
  • DPIIT की नीतिगत रूपरेखा का उपयोग करते हुए ‘Make in India’ को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ें, और चीन की सक्रिय वित्तीय और निर्यात नीतियों से सीख लें।

भारत के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. IIP औद्योगिक उत्पादों की एक टोकरी के उत्पादन की मासिक मात्रा में बदलाव को मापता है।
  2. IIP की वृद्धि दर औद्योगिक क्षेत्र की GDP वृद्धि दर के समान होती है।
  3. IIP टोकरी में विनिर्माण क्षेत्र का सबसे अधिक भार होता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि IIP मासिक उत्पादन मात्रा में बदलाव को ट्रैक करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि IIP वृद्धि दर GDP वृद्धि दर के बराबर नहीं होती; GDP में सेवा और अन्य क्षेत्र भी शामिल होते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि IIP टोकरी में विनिर्माण क्षेत्र का सबसे बड़ा भार होता है।

Industrial Disputes Act, 1947 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह औद्योगिक विवादों की जांच और समाधान को नियंत्रित करता है।
  2. यह नियोक्ताओं को बिना सरकार की अनुमति के एकतरफा छंटनी करने की अनुमति देता है।
  3. यह 10 या अधिक श्रमिकों वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि यह अधिनियम विवाद समाधान को नियंत्रित करता है। कथन 2 गलत है; छंटनी के लिए सरकार की अनुमति आवश्यक है। कथन 3 सही है क्योंकि यह अधिनियम 10 या अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होता है।

मुख्य प्रश्न

अप्रैल 2024 में भारत के औद्योगिक उत्पादन वृद्धि के 4.1% तक धीमा होने के कारणों का विश्लेषण करें। संरचनात्मक चुनौतियों पर चर्चा करें और विनिर्माण तथा खनन क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने के लिए नीतिगत उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड का खनन क्षेत्र राज्य GDP में महत्वपूर्ण योगदान देता है; खनन उत्पादन में मंदी स्थानीय रोजगार और राजस्व को प्रभावित करती है।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड की खनन और विनिर्माण पर निर्भरता, अवसंरचनात्मक कमियां, और श्रम संबंधी मुद्दे जो औद्योगिक विकास को प्रभावित करते हैं।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) क्या है?

IIP विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों में औद्योगिक उत्पादों की एक टोकरी के मासिक उत्पादन मात्रा में बदलाव को मापता है। यह भारत में औद्योगिक गतिविधि का एक अल्पकालिक संकेतक है, जिसे MOSPI संकलित करता है।

Industrial Disputes Act, 1947 औद्योगिक उत्पादकता को कैसे प्रभावित करता है?

यह अधिनियम विवाद समाधान और श्रम संबंधों को नियंत्रित करता है, जिसमें बड़ी इकाइयों में छंटनी और पुनः नियुक्ति के लिए सरकार की अनुमति आवश्यक होती है, जिससे कार्यबल में बदलाव की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और औद्योगिक लचीलापन कम होता है।

पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन औद्योगिक विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

पूंजीगत वस्तुएं अन्य वस्तुओं के उत्पादन में उपयोग होती हैं, इसलिए इनका उत्पादन निवेश की मांग को दर्शाता है। यदि इसका विकास धीमा है, तो इसका मतलब औद्योगिक विस्तार और भविष्य के उत्पादन में बाधा है।

Electricity Act, 2003 का औद्योगिक उत्पादन पर क्या प्रभाव है?

Section 54 नियामकों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का अधिकार देता है, जो बिना रुकावट के औद्योगिक संचालन के लिए आवश्यक है। बिजली कटौती या उतार-चढ़ाव से उत्पादकता कम होती है और लागत बढ़ती है।

भारत चीन के औद्योगिक विकास मॉडल से क्या सीख सकता है?

चीन की सक्रिय वित्तीय प्रोत्साहन, निर्यात प्रोत्साहन, लचीले श्रम कानून, और मजबूत अवसंरचना निवेश ने उच्च औद्योगिक विकास बनाए रखा है। इससे भारत को अपनी नीतिगत समर्थन और नियामक सुधारों को मजबूत करने की जरूरत है ताकि प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके।