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भारत की PLI योजना का दोपहिया बाजार और नवाचार पर प्रभाव

परिचय: PLI योजना और दोपहिया क्षेत्र

2021 में उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के तहत शुरू की गई ऑटोमोटिव क्षेत्र की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का मकसद घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत 2021-26 के लिए 26,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें दोपहिया (2W) निर्माताओं के लिए सालाना कम से कम 3 लाख यूनिट का उत्पादन अनिवार्य किया गया है। भारत का दोपहिया बाजार, जो वित्तीय वर्ष 2023 में लगभग 21 मिलियन यूनिट का है (SIAM 2023), विश्व में सबसे बड़ा है और 2027 तक 7% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। हालांकि, इस योजना की संरचना बड़े निर्माताओं को लाभ पहुंचाती है और नवाचार-आधारित स्टार्टअप तथा छोटे उद्यमों को पीछे छोड़ती है, जिससे बाजार में असंतुलन और नवाचार की कमी की आशंका बनी हुई है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – औद्योगिक नीति, सरकारी योजनाएं, नवाचार और स्टार्टअप
  • GS पेपर 2: शासन – औद्योगिक विकास में सरकार की भूमिका, प्रतिस्पर्धा नीति
  • निबंध: भारत में औद्योगिक विकास और नवाचार का संतुलन

PLI योजना का कानूनी और संस्थागत ढांचा

PLI योजना DPIIT के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करती है, जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है। यह योजना भारत सरकार के जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR), 2017 के अनुरूप है। PLI के लिए कोई विशेष अधिनियम नहीं है, लेकिन यह Industries (Development and Regulation) Act, 1951 की धारा 3 के तहत औद्योगिक संवर्धन के लिए सरकार को अधिकार देती है। साथ ही, Competition Act, 2002 की धारा 4 इस योजना से उत्पन्न संभावित बाजार विकृति और प्रतिस्पर्धा विरोधी प्रभावों की जांच के लिए महत्वपूर्ण है। Competition Commission of India (CCI) ऐसे विकृतियों पर नजर रखता है ताकि बाजार में निष्पक्षता बनी रहे। वित्त मंत्रालय बजट की मंजूरी और वित्तीय निगरानी करता है, जबकि SIAM क्षेत्रीय आंकड़े और विश्लेषण प्रदान करता है। NITI आयोग नवाचार नीति के समन्वय में सलाह देता है।

आर्थिक प्रभाव: पैमाने का पक्षपात और बाजार विकृति

PLI योजना की पात्रता के लिए सालाना 3 लाख यूनिट का उत्पादन अनिवार्य होने से अधिकतर स्टार्टअप और छोटे निर्माता बाहर रह जाते हैं, जो कुल दोपहिया उत्पादन में 5% से भी कम योगदान देते हैं (The Hindu, 2024)। यह उच्च उत्पादन सीमा स्थापित खिलाड़ियों जैसे Hero MotoCorp, Bajaj Auto, और TVS Motors को लाभ पहुंचाती है, जो बाजार पर हावी हैं। खासकर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) दोपहिया क्षेत्र में नवाचार करने वाली कंपनियां PLI लाभ से वंचित रह जाती हैं, जबकि यह क्षेत्र 2023 में 60% की सालाना वृद्धि दर्ज कर रहा है (NITI आयोग EV रिपोर्ट 2024)। इस तरह की संरचनात्मक पक्षपात से बाजार में स्थापित कंपनियों का प्रभुत्व और मजबूत होगा और नवाचार की संभावनाएं कम हो जाएंगी।

  • ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए PLI बजट: INR 26,000 करोड़ (संघीय बजट 2021-22)
  • भारत का दोपहिया बाजार आकार: लगभग 21 मिलियन यूनिट (FY 2023, SIAM)
  • दोपहिया बाजार की वार्षिक वृद्धि दर: 7% तक 2027 (SIAM 2023)
  • EV दोपहिया क्षेत्र की वृद्धि: 2023 में 60% सालाना (NITI आयोग 2024)
  • स्टार्टअप का योगदान: कुल उत्पादन का <5% (The Hindu 2024)
  • PLI पात्रता मानदंड: न्यूनतम 3 लाख यूनिट वार्षिक उत्पादन (DPIIT 2021)

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम दक्षिण कोरिया की नवाचार प्रोत्साहन नीति

दक्षिण कोरिया की ‘ऑटोमोटिव इंडस्ट्री इनोवेशन स्ट्रेटेजी’ (2019) भारत की योजना से भिन्न है। इसमें छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) और स्टार्टअप के लिए विशेष प्रावधान और प्रोत्साहन शामिल हैं, जो EV तकनीक में नवाचार को बढ़ावा देते हैं। 2019 से 2023 के बीच दक्षिण कोरिया में EV से जुड़े नवाचार पेटेंट में 25% की वृद्धि हुई है (Korean Intellectual Property Office डेटा), जो समावेशी प्रोत्साहन संरचनाओं की सफलता को दर्शाता है। भारत की PLI योजना पैमाने पर जोर देती है, जिससे बाजार में केंद्रीकरण और नवाचार में कमी का खतरा रहता है।

पहलू भारत की PLI योजना दक्षिण कोरिया की ऑटोमोटिव नवाचार नीति
बजट INR 26,000 करोड़ (2021-26) सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया; नवाचार के लिए लक्षित धनराशि
पात्रता मानदंड सालाना न्यूनतम 3 लाख यूनिट उत्पादन SMEs और स्टार्टअप के लिए विशेष प्रावधान
ध्यान केंद्रित पैमाना और उत्पादन मात्रा नवाचार और तकनीकी विकास
नवाचार पर प्रभाव नवाचार आधारित कंपनियां हाशिए पर; <5% उत्पादन 2019-23 में EV नवाचार पेटेंट में 25% वृद्धि
बाजार प्रभाव बाजार केंद्रीकरण का खतरा; स्थापित कंपनियों को लाभ समावेशी विकास; विविध नवाचार पारिस्थितिकी

भारत की PLI योजना में प्रमुख कमियां

PLI योजना का डिजाइन नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की जरूरतों को नजरअंदाज करता है क्योंकि यह उच्च उत्पादन सीमा लगाकर स्टार्टअप और छोटे निर्माताओं के लिए प्रवेश बाधाएं बनाता है। इससे प्रतिस्पर्धा कम होती है और शुरुआती चरण के नवाचार को हतोत्साहित किया जाता है, खासकर विकासशील EV दोपहिया क्षेत्र में। नवाचार-आधारित कंपनियों के लिए अलग प्रोत्साहन न होना सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों के विपरीत है। योजना का पैमाने पर जोर बाजार में प्रभुत्व को मजबूत कर सकता है, जो प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत जांच का विषय बन सकता है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • पात्रता मानदंड में उत्पादन मात्रा के साथ नवाचार के मापदंड भी शामिल करें ताकि स्टार्टअप PLI लाभ उठा सकें।
  • EV दोपहिया स्टार्टअप और तकनीकी नवप्रवर्तकों के लिए विशेष प्रोत्साहन चैनल शुरू करें, जिससे भारत के जलवायु और मोबिलिटी लक्ष्यों से मेल खाए।
  • NITI आयोग की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर PLI में नवाचार-सहायक ढांचे तैयार करें, जिससे क्षेत्रीय गतिशीलता बनी रहे।
  • CCI की भूमिका मजबूत करें ताकि PLI से उत्पन्न बाजार केंद्रीकरण और प्रतिस्पर्धा विरोधी प्रथाओं पर नजर रखी जा सके।
  • पैमाने की आवश्यकताओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करें, जिससे उभरती कंपनियां समय के साथ उच्च मानदंडों तक पहुंच सकें।

प्रश्न अभ्यास

दोपहिया क्षेत्र की PLI योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. PLI योजना के तहत प्रोत्साहन पाने के लिए न्यूनतम सालाना 3 लाख यूनिट उत्पादन अनिवार्य है।
  2. नवाचार-आधारित स्टार्टअप भारत में कुल दोपहिया उत्पादन का 20% से अधिक योगदान देते हैं।
  3. यह योजना Industries (Development and Regulation) Act, 1951 के अंतर्गत विधायित है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

DPIIT 2021 नोटिफिकेशन के अनुसार कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है; स्टार्टअप का योगदान 5% से कम है (The Hindu 2024)। कथन 3 गलत है; PLI योजना Industries Act के तहत विधायित नहीं है, पर इसके प्रावधानों के अनुरूप है।

सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के संदर्भ में Competition Act, 2002 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. धारा 4 बाजार में प्रभुत्व के दुरुपयोग पर रोक लगाती है।
  2. सरकारी योजनाएं जैसे PLI, Competition Act के तहत जांच से मुक्त हैं।
  3. Competition Commission of India (CCI) प्रोत्साहन योजनाओं से उत्पन्न बाजार विकृतियों की जांच कर सकता है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (c)

धारा 4 प्रभुत्व के दुरुपयोग को रोकती है, यह सही है। कथन 2 गलत है; सरकारी योजनाएं Competition Act की जांच से मुक्त नहीं हैं। कथन 3 सही है; CCI ऐसे बाजार विकृतियों की जांच कर सकता है।

मुख्य प्रश्न

भारत के दोपहिया उद्योग पर प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के प्रभाव का विशेष रूप से नवाचार और बाजार प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के उभरते ऑटोमोटिव घटक निर्माण इकाइयों पर पैमाने आधारित प्रोत्साहन का प्रभाव पड़ सकता है, जिससे स्थानीय स्टार्टअप प्रभावित हो सकते हैं।
  • मुख्य बिंदु: चर्चा करें कि कैसे PLI की पैमाने की प्राथमिकता झारखंड के छोटे निर्माताओं और नवाचार क्षमता को सीमित कर सकती है।
दोपहिया निर्माताओं के लिए PLI लाभ पाने की न्यूनतम उत्पादन सीमा क्या है?

DPIIT की 2021 की अधिसूचना के अनुसार, दोपहिया निर्माताओं के लिए PLI लाभ पाने के लिए सालाना न्यूनतम 3 लाख यूनिट का उत्पादन अनिवार्य है।

PLI योजना को कौन सा सरकारी विभाग लागू और निगरानी करता है?

PLI योजना को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत लागू और नियंत्रित किया जाता है।

क्या PLI योजना के लिए कोई विशेष विधायी अधिनियम है?

PLI योजना के लिए कोई विशेष अधिनियम नहीं है। इसे सरकार की अधिसूचनाओं के तहत लागू किया जाता है जो General Financial Rules (GFR), 2017 के अनुरूप हैं, और Industries (Development and Regulation) Act, 1951 औद्योगिक संवर्धन के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।

PLI योजना का नवाचार-आधारित स्टार्टअप्स पर क्या प्रभाव पड़ता है?

PLI योजना की उच्च उत्पादन सीमा अधिकांश नवाचार-आधारित स्टार्टअप्स को बाहर रखती है, जो कुल उत्पादन में 5% से कम योगदान देते हैं, जिससे उन्हें प्रोत्साहन नहीं मिल पाता और नवाचार में ठहराव आ सकता है।

PLI योजना के संदर्भ में Competition Commission of India (CCI) की क्या भूमिका है?

CCI सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं से उत्पन्न संभावित प्रतिस्पर्धा विरोधी प्रथाओं और बाजार विकृतियों की निगरानी और जांच करता है ताकि बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।